Superfood for Animal: देश में पशुपालन किसानों की आय का प्रमुख स्रोत है लेकिन हरे चारे की कमी, बढ़ती लागत और जलवायु परिवर्तन के कारण यह व्यवसाय चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। इसी समस्या के समाधान के लिए शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, जगदलपुर ने एक क्रांतिकारी पहल की है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल कटाई के बाद खेतों में बचने वाली पराली को जलाने के बजाय उसे पौष्टिक पशु आहार में बदलने की सरल और प्रभावी तकनीक सिखाई है। यूरिया उपचार विधि से तैयार यह चारा न केवल पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार करता है बल्कि दूध उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि करता है। आइए जानते हैं इस अद्भुत तकनीक के बारे में विस्तार से।
Superfood for Animal: पराली जलाना है हानिकारक, चारा बनाना है लाभकारी
फसल कटाई के बाद किसान अक्सर पराली (Superfood for Animal) को खेतों में ही जला देते हैं। यह प्रथा पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक है। पराली जलाने से वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच जाता है। धुएं से सांस की बीमारियां बढ़ती हैं और दृश्यता कम होने से दुर्घटनाएं होती हैं।
इसके अलावा मिट्टी की उर्वरता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव और पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। मिट्टी की जैविक संरचना बिगड़ जाती है और उसकी उत्पादकता घट जाती है।
दूसरी ओर देश के अधिकांश क्षेत्रों में हरे और पौष्टिक चारे की भारी कमी है। चारागाह सिकुड़ते जा रहे हैं। बरसात पर निर्भर चारा उत्पादन अनिश्चित है। ऐसे में पशुपालकों को महंगी दरों पर चारा खरीदना पड़ता है जिससे पशुपालन की लागत बढ़ जाती है।
यही वह स्थिति है जहां पराली का सही उपयोग एक बेहतरीन समाधान बन सकता है। पराली को पौष्टिक चारे में बदलकर किसान दो फायदे ले सकते हैं – पर्यावरण संरक्षण और पशुपालन में बचत।
व्यावहारिक कार्यशाला में मिला प्रशिक्षण

इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आर.एस. नेताम के मार्गदर्शन में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला की खास बात यह थी कि यह ‘लर्निंग बाय डूइंग’ यानी करके सीखने के सिद्धांत पर आधारित थी।
केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय किसानों और कृषि छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण (Superfood for Animal) दिया गया। उन्हें अपने हाथों से पराली का यूरिया उपचार करके चारा तैयार करने का मौका मिला। इससे उन्हें तकनीक की बारीकियां अच्छे से समझ में आईं।
सहायक प्राध्यापक डॉ. नीता मिश्रा ने इस कार्यशाला में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने प्रत्येक चरण को विस्तार से समझाया और प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि यह तकनीक बिल्कुल सरल है और किसी विशेष उपकरण या महंगी सामग्री की आवश्यकता नहीं होती।
Superfood for Animal: पराली से चारा बनाने की चरणबद्ध विधि
वैज्ञानिकों ने पराली को पौष्टिक चारा (Superfood for Animal) बनाने की संपूर्ण प्रक्रिया को सात आसान चरणों में विभाजित किया है। इन चरणों का पालन करके कोई भी किसान घर पर ही उच्च गुणवत्ता का पशु चारा तैयार कर सकता है।
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पहला चरण – पराली की तैयारी: सबसे पहले एक क्विंटल पराली लें। इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। आदर्श रूप से टुकड़े 2 से 3 इंच लंबे होने चाहिए। इसके लिए चारा काटने की मशीन या हाथ से भी काम किया जा सकता है। छोटे टुकड़े करने से यूरिया का उपचार बेहतर होता है और पशु आसानी से खा सकते हैं।
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दूसरा चरण – यूरिया घोल बनाना: अब 4 किलोग्राम यूरिया लेकर उसे पर्याप्त पानी में घोलें। यह 4 प्रतिशत यूरिया का घोल होगा। पानी की मात्रा इतनी हो कि पूरी पराली अच्छे से भीग जाए लेकिन अतिरिक्त पानी जमा न हो। सामान्यतः 40 से 50 लीटर पानी पर्याप्त होता है।
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तीसरा चरण – समान छिड़काव: तैयार यूरिया घोल को पराली की परतों पर समान रूप से छिड़कें। इसके लिए फव्वारे का उपयोग कर सकते हैं। ध्यान रखें कि प्रत्येक परत पर घोल समान रूप से पहुंचे। असमान छिड़काव से कुछ हिस्से सूखे रह सकते हैं।
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चौथा चरण – अच्छा मिश्रण: छिड़काव के बाद पराली को अच्छी तरह मिलाएं। इससे यूरिया घोल पूरी पराली में समान रूप से फैल जाएगा। मिश्रण जितना बेहतर होगा, उपचार उतना ही प्रभावी होगा।
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पांचवां चरण – वायुरोधी भंडारण: अब इस मिश्रण को किसी वायुरोधी स्थान पर रखें। आप मोटी प्लास्टिक की चादर या तिरपाल से ढककर दबा दें। ऊपर से मिट्टी या भारी वस्तुएं रखकर हवा की आवाजाही पूरी तरह रोक दें। वायुरोधी वातावरण में ही यूरिया उपचार की रासायनिक प्रक्रिया सही से होती है।
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छठा चरण – 21 दिनों की प्रतीक्षा: इस अवस्था में मिश्रण को 21 दिनों तक बिना खोले छोड़ दें। इस अवधि में यूरिया पराली में मौजूद लिग्निन और सेल्युलोज को तोड़कर उसे पचने योग्य बनाता है। प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है और पोषण मूल्य में सुधार होता है।
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सातवां चरण – सुखाना और खिलाना: 21 दिन बाद ढक्कन हटाएं। उपचारित पराली को बाहर निकालकर खुली हवा में कुछ घंटे सुखाएं। इससे अमोनिया की गंध उड़ जाएगी। फिर इसे पशुओं को खिलाया जा सकता है।
Superfood for Animal: यूरिया उपचार से पोषण मूल्य में वृद्धि
वैज्ञानिकों ने बताया कि सामान्य पराली (Superfood for Animal) का पोषण मूल्य बहुत कम होता है। इसमें सिलिका और ऑक्सालेट जैसे तत्व अधिक मात्रा में होते हैं। ये तत्व पशुओं के पाचन तंत्र के लिए हानिकारक हैं। वे कैल्शियम के अवशोषण में बाधा डालते हैं और पोषक तत्वों का सही उपयोग नहीं हो पाता।
लेकिन यूरिया उपचार के बाद स्थिति पूरी तरह बदल जाती है। पराली में प्रोटीन की मात्रा 4 प्रतिशत से बढ़कर 6 से 8 प्रतिशत तक हो जाती है। यह लगभग दोगुनी वृद्धि है।
इसके अलावा चारा (Superfood for Animal) मुलायम और सुपाच्य बन जाता है। कठोर तंतु टूट जाते हैं जिससे पशुओं का पाचन तंत्र आसानी से इसे पचा लेता है। पशु इस चारे को रुचि से खाते हैं और उनका चारा ग्रहण बढ़ जाता है।
दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि
यूरिया उपचारित चारे का सबसे बड़ा फायदा दुग्ध उत्पादन (Superfood for Animal) में होता है। बेहतर पोषण मिलने से पशुओं का स्वास्थ्य सुधरता है। उनकी प्रजनन क्षमता बढ़ती है। दूध देने वाले पशुओं में दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है।
किसानों के अनुभवों से पता चलता है कि इस चारे के नियमित उपयोग से दूध उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। यह एक बहुत बड़ा लाभ है जो सीधे किसान की आय बढ़ाता है।
Superfood for Animal: किफायती और पर्यावरण अनुकूल समाधान
यह तकनीक अत्यंत किफायती है। एक क्विंटल पराली (Superfood for Animal) के उपचार में केवल 4 किलोग्राम यूरिया की आवश्यकता होती है जिसकी लागत 100 से 150 रुपये है। बाजार से पशु चारा खरीदने की तुलना में यह बहुत सस्ता है।
साथ ही यह पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है। पराली जलाने से बचने से वायु प्रदूषण नहीं होता। मिट्टी की उर्वरता बची रहती है। यह टिकाऊ कृषि का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
व्यापक प्रसार की आवश्यकता
महाविद्यालय प्रबंधन ने सभी किसानों से अपील की है कि वे इस तकनीक को अपनाएं। किसी भी तकनीकी मार्गदर्शन के लिए स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारी या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क किया जा सकता है।
यह तकनीक पशुपालन को लाभकारी बनाने (Superfood for Animal) और पर्यावरण संरक्षण का एक सशक्त माध्यम है।
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