Tractor Buying Guide: आधुनिक खेती में ट्रैक्टर किसान का सबसे बड़ा साथी बन गया है। लेकिन यह साथी बहुत महंगा होता है। एक बार गलत ट्रैक्टर खरीद लिया तो फिर सालों तक परेशानी झेलनी पड़ती है। आजकल बाजार में इतनी कंपनियां और इतने मॉडल हैं कि किसान अक्सर भ्रमित हो जाते हैं। कोई सिर्फ कीमत देखकर फैसला कर लेता है, कोई ब्रांड नेम के चक्कर में फंस जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि ट्रैक्टर खरीदना एक गंभीर निर्णय है जो आपकी खेती के भविष्य को तय करता है। अगर आप भी नया ट्रैक्टर लेने की सोच रहे हैं, तो पहले इन महत्वपूर्ण बातों को जरूर समझ लें। यह जानकारी आपको हजारों रुपये बचाने के साथ-साथ सही मशीन चुनने में मदद करेगी।
Tractor Buying Guide: सबसे पहले समझें अपनी जरूरत
ट्रैक्टर खरीदने से पहले सबसे बड़ी गलती यह होती है कि किसान अपनी असल जरूरत नहीं समझ पाते। कोई सोचता है कि बड़ा ट्रैक्टर ज्यादा काम करेगा, कोई सोचता है कि छोटा ट्रैक्टर सस्ता रहेगा। दोनों ही गलत सोच हैं।
पहले यह तय करें कि आपको ट्रैक्टर किस काम के लिए चाहिए। क्या सिर्फ जुताई के लिए? या फिर रोटावेटर, कल्टीवेटर, थ्रेशर जैसी भारी मशीनें भी चलानी हैं? क्या ट्रॉली में भारी माल ढोना है? या फिर सिर्फ हल्के-फुल्के काम करने हैं? आपके खेत का आकार कितना है? यदि 5-10 एकड़ की छोटी जोत है तो भारी-भरकम ट्रैक्टर लेना बेवकूफी होगी। वहीं अगर 25-30 एकड़ या उससे ज्यादा जमीन है तो कमजोर ट्रैक्टर काम नहीं आएगा।
मिट्टी का प्रकार भी मायने रखता है। रेतीली या हल्की मिट्टी में कम ताकत वाला ट्रैक्टर भी काम कर लेता है, लेकिन चिकनी या भारी मिट्टी में ज्यादा शक्तिशाली ट्रैक्टर की जरूरत पड़ती है।
हॉर्सपावर चुनते समय बरतें सावधानी
हॉर्सपावर यानी HP ट्रैक्टर की ताकत को मापने (Tractor Buying Guide) का पैमाना है। लेकिन ज्यादा HP मतलब बेहतर ट्रैक्टर – यह सोचना गलत है।
छोटे और मध्यम किसानों के लिए 20 से 35 HP का ट्रैक्टर पर्याप्त होता है। इससे हल चलाना, बुवाई करना और हल्के कृषि उपकरण चलाना आसान हो जाता है। खर्च भी कम आता है। यदि गहरी जुताई, रोटावेटर जैसे भारी उपकरण या बड़ी ट्रॉली चलानी हो तो 45 से 60 HP या उससे अधिक का ट्रैक्टर लेना उचित रहता है। ये ट्रैक्टर शक्तिशाली होते हैं और कठिन काम भी आसानी से कर देते हैं।
ध्यान रहे कि जरूरत से ज्यादा HP लेने पर डीजल की खपत बढ़ जाती है। मान लीजिए आपको 30 HP काफी था लेकिन आपने 50 HP का ट्रैक्टर ले लिया। अब हर दिन ज्यादा डीजल जलेगा और साल भर में हजारों रुपये का अतिरिक्त खर्च होगा।
वहीं, जरूरत से कम HP लेने पर काम ठीक से नहीं होता। ट्रैक्टर हांफने लगता है, इंजन पर ज्यादा दबाव पड़ता है और जल्दी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
Tractor Buying Guide: कीमत सिर्फ शोरूम प्राइस नहीं है
अक्सर विज्ञापनों में जो कीमत दिखाई जाती है वह एक्स-शोरूम प्राइस होती है। लेकिन असली खर्च इससे काफी ज्यादा होता है। ऑन-रोड कीमत में रजिस्ट्रेशन का खर्च, आरटीओ शुल्क, बीमा प्रीमियम, रोड टैक्स और अन्य सरकारी शुल्क जुड़ते हैं। कई बार यह अतिरिक्त खर्च 50,000 से 1 लाख रुपये तक हो सकता है।
इसके अलावा, शुरुआत में कुछ जरूरी एक्सेसरीज भी खरीदनी पड़ती हैं – जैसे ट्रॉली, हल, या अन्य उपकरण। ये भी अलग से खर्च होते हैं।
सर्विसिंग और रखरखाव का खर्च भी पहले से समझ लेना (Tractor Buying Guide) जरूरी है। कुछ कंपनियों के स्पेयर पार्ट्स बहुत महंगे होते हैं। पहली सर्विस फ्री होती है, लेकिन उसके बाद हर सर्विस में कुछ हजार रुपये खर्च होते हैं। इसलिए जब आप कीमत की तुलना करें तो सिर्फ शोरूम प्राइस नहीं, बल्कि कुल खर्च को देखें।
माइलेज और ईंधन खपत का हिसाब
डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में ट्रैक्टर का माइलेज (Tractor Buying Guide) बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। दो ट्रैक्टर एक जैसे दिख सकते हैं, लेकिन उनकी डीजल खपत में बड़ा फर्क हो सकता है।
कंपनियां अपने ब्रोशर में जो माइलेज बताती हैं, वह आदर्श परिस्थितियों में मिलता है। असली माइलेज अक्सर कम होता है। इसलिए उसी ट्रैक्टर का इस्तेमाल कर रहे अन्य किसानों से पूछना बेहतर रहता है। गणना कर लें कि एक घंटे में कितना डीजल जलेगा और महीने भर में कितना खर्च आएगा। जो ट्रैक्टर कम डीजल में ज्यादा काम करे, वह लंबे समय में हजारों रुपये बचाता है।
खासकर जिन किसानों का ट्रैक्टर रोजाना चलता है या जो ट्रैक्टर किराए पर भी चलाते हैं, उनके लिए तो माइलेज सबसे बड़ा फैक्टर है।
Tractor Buying Guide: फाइनेंस और लोन की पूरी जानकारी लें
आजकल अधिकतर किसान ट्रैक्टर (Tractor Buying Guide) लोन लेकर खरीदते हैं। नकद भुगतान की बजाय किश्तों में चुकाना आसान लगता है। लेकिन यहां भी सावधानी जरूरी है।
ब्याज दर सबसे महत्वपूर्ण है। विभिन्न बैंक और वित्तीय संस्थान अलग-अलग ब्याज दर देते हैं। 1-2 प्रतिशत का फर्क भी कुल मिलाकर हजारों रुपये का अंतर बना देता है। डाउन पेमेंट कितना देना होगा? आमतौर पर 20-30 प्रतिशत डाउन पेमेंट की जरूरत होती है। कुछ योजनाओं में यह कम भी हो सकता है।
लोन की अवधि क्या है? 3 साल, 5 साल या 7 साल? लंबी अवधि में किश्त छोटी होती है लेकिन कुल ब्याज ज्यादा चुकाना पड़ता है। प्रोसेसिंग फीस, छिपे चार्ज, पेनल्टी क्लॉज जैसी बातें भी पूछ लें। कुछ संस्थाएं पहले आकर्षक ऑफर दिखाती हैं लेकिन बाद में अतिरिक्त शुल्क वसूलती हैं।
सरकारी सब्सिडी योजनाओं की भी जानकारी लें। कई राज्यों में छोटे और सीमांत किसानों को ट्रैक्टर खरीदने पर सब्सिडी मिलती है। इससे कुल कीमत कम हो सकती है।
सर्विस और मेंटेनेंस नेटवर्क जरूर देखें
ट्रैक्टर खरीदना (Tractor Buying Guide) तो एक दिन का काम है, लेकिन उसे चलाना सालों का काम है। और इस दौरान सर्विस और रखरखाव की जरूरत पड़ती ही है।
पहले जांच लें कि आपके गांव या आसपास के शहर में उस कंपनी का अधिकृत सर्विस सेंटर है या नहीं। अगर सर्विस सेंटर 50-100 किलोमीटर दूर है तो हर छोटी-मोटी समस्या के लिए परेशानी होगी। स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। कुछ कंपनियों के पुर्जे आसानी से मिल जाते हैं, कुछ के लिए हफ्तों इंतजार करना पड़ता है। खेती के व्यस्त मौसम में ट्रैक्टर खराब हो और पार्ट्स न मिले तो बड़ा नुकसान हो सकता है।
मैकेनिक की उपलब्धता भी देखें। कुछ पुराने और लोकप्रिय ब्रांड के ट्रैक्टरों को स्थानीय मैकेनिक भी ठीक कर देते हैं। नए या कम प्रचलित ब्रांड के लिए सिर्फ कंपनी के तकनीशियन ही काम कर सकते हैं। वारंटी की शर्तें भी ध्यान से पढ़ें। कितने साल या कितने घंटे की वारंटी है? क्या-क्या कवर होता है और क्या नहीं?
Tractor Buying Guide: फीचर्स और तकनीकी विशेषताएं
आधुनिक ट्रैक्टरों (Tractor Buying Guide) में कई सुविधाएं मिलती हैं जो काम को आसान बनाती हैं।
पावर स्टीयरिंग अब जरूरी हो गया है। इससे ट्रैक्टर चलाना आसान होता है और लंबे समय तक काम करने में थकान कम होती है। ऑयल इमर्स्ड ब्रेक बेहतर माने जाते हैं। ये ज्यादा टिकाऊ होते हैं और कम रखरखाव मांगते हैं।
मल्टी-स्पीड PTO (पावर टेक-ऑफ) विभिन्न उपकरणों को चलाने में मदद करता है। अगर आप अलग-अलग कृषि यंत्र इस्तेमाल करते हैं तो यह उपयोगी है। सीट का आराम भी मायने रखता है। घंटों ट्रैक्टर चलाने वालों के लिए आरामदायक सीट जरूरी है। ट्रांसमिशन के प्रकार भी देखें – साधारण, सिंक्रोमेश या पावरशिफ्ट। हर एक के अपने फायदे हैं।
टेस्ट ड्राइव जरूर लें
कोई भी ट्रैक्टर खरीदने (Tractor Buying Guide) से पहले उसे चलाकर जरूर देखें। कैटलॉग में तस्वीरें देखना अलग बात है, असल में चलाना अलग।
गियर कैसे बदलते हैं? क्लच सॉफ्ट है या हार्ड? ब्रेक कैसे काम करते हैं? स्टीयरिंग घूमना कितना आसान है? इंजन की आवाज कैसी है? अगर संभव हो तो खेत में टेस्ट करें, सिर्फ सड़क पर नहीं। खेत की मिट्टी में ट्रैक्टर की असली क्षमता का पता चलता है।
तुलना जरूर करें। कम से कम दो-तीन अलग कंपनियों के ट्रैक्टर चलाकर देखें। इससे आपको बेहतर समझ आएगी कि कौन सा आपकी जरूरत के लिए सही है।
Tractor Buying Guide: निष्कर्ष
ट्रैक्टर खरीदना (Tractor Buying Guide) महज एक मशीन खरीदना नहीं है। यह आपकी खेती के भविष्य में निवेश है। जल्दबाजी में लिया गया गलत फैसला सालों तक परेशान कर सकता है। इसलिए धैर्य रखें, पूरी जानकारी इकट्ठा करें, विभिन्न विकल्पों की तुलना करें और फिर समझदारी से फैसला लें। सही ट्रैक्टर न सिर्फ आपका काम आसान बनाएगा बल्कि लंबे समय में पैसे की भी बचत करेगा।
Read More Here
कम खर्च में अच्छा ट्रैक्टर कैसे खरीदें, बजट, फाइनेंस और सही चुनाव की पूरी गाइड
