यूपी की 7,500 गोशालाएं बनेंगी ‘Food Security Hub’, मिशन फॉडर से हर गोशाला जुड़ेंगे 50-100 किसान, मोरिंगा-नेपियर घास से 12-15 साल तक मिलेगा हरा चारा

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Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गोवंश संरक्षण और पशुपालन क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए प्रदेश की 7,500 गोशालाओं को ‘कैटल फूड सिक्योरिटी हब’ के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। ‘मिशन फॉडर’ नाम से शुरू हो रही इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत गोशालाओं को केवल गोवंश संरक्षण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें हरे चारे के उत्पादन का सशक्त केंद्र बनाया जाएगा। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि इस योजना से गोवंश संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आमदनी बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। प्रत्येक गोशाला को 50 से 100 किसानों के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे चारा उत्पादन, विपणन और उचित मूल्य की व्यवस्थित श्रृंखला तैयार होगी।

मिशन फॉडर: गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि ‘मिशन फॉडर’ के नाम से शुरू हो रहे इस प्रदेशव्यापी अभियान का मुख्य उद्देश्य गोशालाओं को आत्मनिर्भर इकाइयों के रूप में विकसित करना है। यह योजना गोवंश संरक्षण के साथ-साथ किसान कल्याण और ग्रामीण विकास की त्रिस्तरीय रणनीति पर आधारित है।

मिशन फॉडर के मुख्य उद्देश्य:

  • गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना

  • पर्याप्त और पौष्टिक हरा चारा की उपलब्धता सुनिश्चित करना

  • किसानों को चारा उत्पादन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना

  • गोवंश के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन में सुधार

  • चारा खरीद पर निर्भरता कम करना

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना

हर गोशाला से जुड़ेंगे 50-100 किसान

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रत्येक गोशाला को 50 से 100 किसानों के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। यह किसान-गोशाला साझेदारी मॉडल एक व्यवस्थित चारा आपूर्ति श्रृंखला तैयार करेगा।

किसान-गोशाला नेटवर्क मॉडल:

  • किसान अपनी जमीन पर चारा फसलें उगाएंगे

  • गोशालाएं उचित मूल्य पर हरा चारा खरीदेंगी

  • किसानों को निश्चित बाजार और उचित दाम की गारंटी

  • गोशालाओं को सतत और गुणवत्तापूर्ण चारा की आपूर्ति

  • मध्यस्थों की भूमिका समाप्त होगी

  • किसानों की आय में वृद्धि

यह मॉडल किसानों को एक स्थायी और लाभकारी आजीविका का साधन प्रदान करेगा और गोशालाओं को चारे की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।

Uttar Pradesh: मोरिंगा और नेपियर घास – दीर्घकालिक समाधान

मिशन फॉडर के तहत गोशालाओं की उपलब्ध भूमि का अधिकतम उपयोग करते हुए मुख्य रूप से मोरिंगा (सहजन) और नेपियर घास का बड़े पैमाने पर रोपण कराया जाएगा।

मोरिंगा (सहजन) की विशेषताएं:

  • 12-15 वर्षों तक लगातार हरा चारा उपलब्ध कराने में सक्षम

  • उच्च प्रोटीन और खनिज तत्वों से भरपूर

  • गोशालाओं में प्राकृतिक छाया प्रदान करेगा

  • जैविक फेंसिंग का काम करेगा

  • एक बार रोपण से दीर्घकालिक लाभ

  • कम रखरखाव की आवश्यकता

नेपियर घास की विशेषताएं:

  • 7-8 वर्षों तक लगातार उत्पादन क्षमता

  • उच्च उत्पादन क्षमता

  • नियमित कटिंग से सतत चारा स्रोत

  • तेजी से बढ़ने वाली घास

  • विभिन्न जलवायु में अनुकूल

  • पशुओं द्वारा पसंदीदा चारा

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि ये दोनों फसलें एक बार रोपण के बाद कई वर्षों तक उत्पादन देती हैं, जिससे लागत कम होती है और उत्पादकता बढ़ती है।

50 प्रकार के पशु चारे की विविधता

उत्तर प्रदेश की जलवायु परिस्थितियां विभिन्न प्रकार के पशु चारे की खेती के लिए अनुकूल हैं। मिशन फॉडर में केवल मोरिंगा और नेपियर घास तक सीमित नहीं रहा जाएगा।

योजना में शामिल अन्य चारा फसलें:

बहुवर्षीय चारे:

  • गन्ना घास

  • सुबबूल

  • ढैंचा

  • नेपियर घास की विभिन्न किस्में

मौसमी चारे:

  • लोबिया

  • मक्का

  • ज्वार

  • बाजरा

  • बरसीम (सर्दी का प्रमुख चारा)

  • जई

  • रिजका

लगभग 50 प्रकार के पशु चारे जिनमें एकदलीय और बहुदलीय दोनों प्रकार शामिल हैं, इस मिशन की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे। यह विविधता पूरे साल चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी।

Uttar Pradesh: प्रत्येक गोवंश को पर्याप्त हरा चारा

योजना के अनुसार गोशालाओं में संरक्षित प्रत्येक गोवंश को पर्याप्त मात्रा में हरा चारा प्रतिदिन उपलब्ध कराया जाएगा।

हरे चारे के लाभ:

  • सूखे चारे की तुलना में अधिक पौष्टिक

  • पाचन में आसान

  • गोवंश के स्वास्थ्य में सुधार

  • दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि

  • प्राकृतिक विटामिन और खनिजों का स्रोत

  • पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि

चारा उत्पादन में आत्मनिर्भरता से बाहरी स्रोतों पर निर्भरता घटेगी और गोशालाओं की संचालन लागत में महत्वपूर्ण कमी आएगी।

बहुआयामी लाभ – पर्यावरण से रोजगार तक

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि इस समग्र कार्ययोजना के केंद्र में गोवंश संरक्षण, पोषण सुरक्षा, प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण-शहरी सहभागिता को रखा गया है।

पर्यावरणीय लाभ:

  • स्थानीय स्तर पर हरित आवरण में वृद्धि

  • भूमि की उर्वरता में सुधार

  • मृदा संरक्षण

  • कार्बन सिंक में वृद्धि

आर्थिक लाभ:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर

  • किसानों की आय में वृद्धि

  • गोशालाओं की आर्थिक स्थिरता

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

सामाजिक लाभ:

  • गोवंश संरक्षण की परंपरा को बल

  • ग्रामीण समुदाय का सशक्तिकरण

  • सहकारिता की भावना का विकास

Uttar Pradesh: चरणबद्ध कार्यान्वयन की योजना

प्रदेश सरकार के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) गो सेवा आयोग इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा।

यह महत्वाकांक्षी पहल आत्मनिर्भर गोशाला, प्राकृतिक खेती और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उस विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में निर्णायक कदम है, जिसकी नींव योगी सरकार ने रखी है। यह योजना न केवल गोवंश संरक्षण को मजबूत करेगी बल्कि हजारों किसानों की आजीविका का स्थायी साधन भी बनेगी।

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