Universal Accidental Insurance: किसानों और खेतिहर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने सोमवार को संसद के बजट सत्र के दौरान किसानों को यूनिवर्सल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस देने के लिए प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया। ‘किसान जीवन सुरक्षा एवं दुर्घटना प्रतिपूर्ति विधेयक, 2025’ नामक इस बिल में किसानों और कृषि मजदूरों के लिए अनिवार्य दुर्घटना बीमा योजना लागू करने का प्रस्ताव है। बिल में मृत्यु होने पर 25 लाख रुपये तक के मुआवजे और राष्ट्रीय कृषि जोखिम बीमा प्राधिकरण (NARIA) के गठन का प्रावधान किया गया है। यह पहल भारत के 46 प्रतिशत आबादी को प्रभावित करने वाले कृषि क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है।
कृषि: भारत का सबसे खतरनाक पेशा (Universal Accidental Insurance)
बिल (Universal Accidental Insurance) पेश करते हुए बीजेपी के राज्यसभा सदस्य सतनाम सिंह संधू ने सदन को कृषि क्षेत्र की गंभीर वास्तविकता से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि भारत की लगभग 46 प्रतिशत आबादी के लिए कृषि अभी भी मुख्य पेशा है, फिर भी यह सबसे खतरनाक पेशों में से एक बना हुआ है।
संधू ने चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि हर साल खेती के काम के दौरान 10,000 से 15,000 मौतें होती हैं और हजारों लोग गंभीर चोटों का शिकार होते हैं। ये दुर्घटनाएं विभिन्न कारणों से होती हैं जिनमें हाथ से कटाई, कीटनाशक छिड़काव, भारी मशीनरी का संचालन, जानवरों के साथ काम करना और अत्यधिक गर्मी या बाढ़ जैसे मौसम संबंधी खतरे शामिल हैं।
इन दुर्घटनाओं का प्रभाव केवल जान की हानि तक सीमित नहीं है। संधू ने कहा कि इन घटनाओं से अक्सर पहले से ही कमजोर ग्रामीण परिवार गरीबी, कर्ज और सामाजिक असुरक्षा के दुष्चक्र में फंस जाते हैं। एक किसान की मौत या विकलांगता पूरे परिवार को आर्थिक संकट में धकेल देती है।
मौजूदा योजनाएं अपर्याप्त
सांसद ने मौजूदा सरकारी योजनाओं की सीमाओं को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) जैसी पहलें या तो फसल के नुकसान पर ध्यान केंद्रित करती हैं या न्यूनतम सामान्य दुर्घटना कवरेज प्रदान करती हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना मुख्य रूप से प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान की भरपाई करती है। यह किसान की व्यक्तिगत सुरक्षा से संबंधित नहीं है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना हालांकि दुर्घटना बीमा प्रदान करती है, लेकिन इसमें मात्र 12 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का कवर मिलता है, जो आज के समय में अपर्याप्त है।
संधू ने स्पष्ट किया कि ये योजनाएं खेती से जुड़े व्यावसायिक जोखिमों को पर्याप्त रूप से कवर नहीं करती हैं। खेती के काम के दौरान होने वाली विशिष्ट दुर्घटनाओं और चोटों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है।
सामाजिक सुरक्षा ढांचे में बड़ी कमी (Universal Accidental Insurance)
संधू ने कहा कि खेती से जुड़ी चोटों और मौतों के लिए मुआवजा देने के लिए एक विशेष संस्थागत व्यवस्था की कमी भारत के ग्रामीण सामाजिक सुरक्षा ढांचे में एक बड़ी कमी है।
औद्योगिक क्षेत्र में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) जैसी संस्थाएं श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। लेकिन कृषि क्षेत्र में, जहां सबसे अधिक लोग कार्यरत हैं, ऐसी कोई व्यापक संस्थागत व्यवस्था नहीं है।
यह विरोधाभास इस तथ्य को उजागर करता है कि भारत के सबसे बड़े रोजगार क्षेत्र को सामाजिक सुरक्षा के मामले में उपेक्षित रखा गया है।
राष्ट्रीय कृषि जोखिम बीमा प्राधिकरण का प्रस्ताव
इस कमी को दूर करने के लिए बिल (Universal Accidental Insurance) में राष्ट्रीय कृषि जोखिम बीमा प्राधिकरण (NARIA) बनाने का प्रस्ताव है। यह एक कानूनी और स्वायत्त संस्था होगी जिसे किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए किफायती और अनिवार्य दुर्घटना बीमा योजना को डिजाइन करने, लागू करने और उसकी देखरेख करने का काम सौंपा जाएगा।
NARIA की स्थापना से कृषि क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा का एक मजबूत ढांचा तैयार होगा। यह प्राधिकरण विशेष रूप से कृषि से जुड़े जोखिमों को समझते हुए नीतियां बनाएगा और उन्हें प्रभावी रूप से लागू करेगा।
यह संस्था ESIC की तर्ज पर काम करेगी, लेकिन कृषि क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप होगी।
मुआवजे का विस्तृत प्रावधान (Universal Accidental Insurance)
बिल (Universal Accidental Insurance) में मुआवजे की राशि का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। मृत्यु होने पर प्रभावित किसान या खेतिहर मजदूर के नामित व्यक्ति या परिवार के सदस्य को 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
स्थायी विकलांगता की स्थिति में 10 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाएगा। स्थायी विकलांगता से तात्पर्य ऐसी चोट से है जो व्यक्ति को जीवनभर के लिए शारीरिक रूप से अक्षम बना दे।
आंशिक विकलांगता के मामले में 1 लाख से 2 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा। यह राशि विकलांगता की गंभीरता के आधार पर निर्धारित की जाएगी।
यह मुआवजा मौजूदा योजनाओं की तुलना में काफी अधिक है और प्रभावित परिवार को वास्तविक आर्थिक सहायता प्रदान कर सकेगा।
यूनिवर्सल कवरेज: कोई नहीं छूटेगा
बिल (Universal Accidental Insurance) की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी सार्वभौमिकता है। यह सभी पंजीकृत खेतिहर मजदूरों और किसानों के लिए यूनिवर्सल कवरेज अनिवार्य करता है।
इसका मतलब है कि छोटा किसान हो या बड़ा, स्वयं खेती करने वाला हो या खेतिहर मजदूर – सभी को इस बीमा योजना का लाभ मिलेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी किसान या मजदूर इस सुरक्षा से वंचित न रहे।
सार्वभौमिक कवरेज की यह अवधारणा सामाजिक सुरक्षा के मौलिक सिद्धांत पर आधारित है कि हर व्यक्ति को बुनियादी सुरक्षा का अधिकार है।
प्रीमियम की सब्सिडी: केंद्र और राज्य मिलकर वहन करेंगे (Universal Accidental Insurance)
बीमा योजना को किफायती बनाने के लिए प्रीमियम की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। प्रीमियम का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकारें मिलकर वहन करेंगी।
इस व्यवस्था से किसानों और मजदूरों पर वित्तीय बोझ न्यूनतम रहेगा। वे नाममात्र के प्रीमियम पर व्यापक बीमा कवरेज प्राप्त कर सकेंगे।
केंद्र-राज्य सहयोग का यह मॉडल सहकारी संघवाद की भावना को भी मजबूत करेगा और दोनों स्तरों पर सरकारों की साझा जिम्मेदारी सुनिश्चित करेगा।
अन्य बिल भी पेश किए गए
सतनाम सिंह संधू ने किसान सुरक्षा बिल (Universal Accidental Insurance) के साथ-साथ दो अन्य महत्वपूर्ण बिल भी पेश किए। ‘प्रवासी भारतीय कौशल एवं प्रतिभा प्रेरक विधेयक, 2025’ विदेशों में रह रहे भारतीयों के कौशल और प्रतिभा का उपयोग देश के विकास के लिए करने से संबंधित है।
‘उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय रैंकिंग और प्रत्यायन प्राधिकरण विधेयक, 2025’ शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और संस्थानों की निष्पक्ष रैंकिंग के लिए प्रस्तावित है।
बिल का संभावित प्रभाव (Universal Accidental Insurance)
यदि यह बिल कानून (Universal Accidental Insurance) बनता है, तो यह भारतीय कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। किसानों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। दुर्घटना की स्थिति में परिवार को कर्ज में डूबना नहीं पड़ेगा।
यह योजना युवाओं को कृषि क्षेत्र में आने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है क्योंकि उन्हें सुरक्षा का भरोसा मिलेगा। कृषि को एक सम्मानजनक और सुरक्षित पेशे के रूप में स्थापित करने में यह मदद करेगा।
चुनौतियां और आगे का रास्ता
हालांकि, इस महत्वाकांक्षी योजना (Universal Accidental Insurance) के सामने कई चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती सभी किसानों और मजदूरों का पंजीकरण होगी। भारत में करोड़ों किसान और खेतिहर मजदूर हैं, जिनका रिकॉर्ड रखना और उन्हें योजना में शामिल करना एक विशाल कार्य होगा।
दुर्घटनाओं की पुष्टि और मुआवजे के दावों की त्वरित प्रक्रिया सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा। नौकरशाही जटिलताओं से बचते हुए सरल और पारदर्शी प्रक्रिया बनानी होगी।
केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और वित्तीय व्यवस्था भी एक चुनौती होगी। दोनों स्तरों पर बजट आवंटन और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना होगा।
Universal Accidental Insurance: निष्कर्ष
किसानों के लिए यूनिवर्सल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस (Universal Accidental Insurance) का यह प्रस्ताव भारत की कृषि नीति में एक ऐतिहासिक पहल है। यह देश के अन्नदाताओं की सुरक्षा और सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब देखना होगा कि संसद इस बिल पर क्या निर्णय लेती है और क्या यह कानून का रूप ले पाता है। यदि ऐसा होता है, तो यह करोड़ों किसान परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
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