Oilmeal Export: चीन ने की भारतीय तेल खली की बंपर खरीद, 20 गुना बढ़कर 7.79 लाख टन निर्यात, सरसों खली ₹225/टन पर सस्ती, लेकिन कनाडा से टैरिफ हटने से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा, ईरान युद्ध से शिपिंग पर भी असर

Oilmeal Export

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Oilmeal Export: चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के खली यानी ऑयलमील निर्यात में एक बड़ी सफलता मिली है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन के अनुसार अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच भारत ने चीन को 7.79 लाख टन खली निर्यात की जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले 20 गुना से भी ज्यादा है। इस जबरदस्त वृद्धि के पीछे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धी कीमतें और चीन का कनाडा पर टैरिफ लगाना मुख्य कारण रहे। हालांकि अब चीन ने 1 मार्च 2026 से कनाडाई खली पर टैरिफ अस्थायी रूप से हटा दिया है जिससे भारतीय निर्यातकों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।

Oilmeal Export: भारत-चीन खली निर्यात – मुख्य आंकड़े

विवरणआंकड़े
कुल निर्यात (अप्रैल 2025 से फरवरी 2026)7.79 लाख टन
पिछले वर्ष का निर्यातलगभग 38,000 टन
वृद्धि20 गुना से अधिक
सरसों खली निर्यात7.71 लाख टन
कैस्टर मील निर्यातलगभग 7,500 टन
डेटा स्रोतसॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA)

Oilmeal Export: सरसों खली ने दिलाई सबसे बड़ी बढ़त

इस निर्यात वृद्धि में सबसे अहम भूमिका सरसों खली की रही है। कुल निर्यात में लगभग पूरा हिस्सा इसी का रहा जबकि कैस्टर सीड मील की हिस्सेदारी बेहद सीमित रही।

खली का प्रकारनिर्यात (2025-26)निर्यात (2024-25)वृद्धि
सरसों खली7.71 लाख टनबेहद कम20 गुना से अधिक
कैस्टर मील7,500 टन
कुल7.79 लाख टन38,000 टन20 गुना+

Oilmeal Export: भारतीय खली सस्ती क्यों – कीमतों का अंतर

भारतीय सरसों खली की प्रतिस्पर्धी कीमत ही इस सफलता का सबसे बड़ा कारण है।

देशसरसों खली की कीमतअंतर
भारत$225/टन
यूरोप$297/टन$72 कम
कनाडा (टैरिफ के बाद)महंगी

प्रति टन $72 की बचत चीन जैसे बड़े खरीदार के लिए बेहद आकर्षक थी। लाखों टन की खरीद पर यह अंतर करोड़ों डॉलर की बचत में बदल जाता है।

Oilmeal Export: टैरिफ का खेल – कैसे मिला भारत को फायदा?

घटनातारीखप्रभाव
चीन ने कनाडा पर 100% टैरिफ लगायामार्च 2025कनाडाई खली महंगी हुई
भारत को वैकल्पिक स्रोत के रूप में चुना2025-26निर्यात 20 गुना बढ़ा
चीन ने कनाडा से टैरिफ हटाया1 मार्च 2026भारत के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ी
टैरिफ छूट की अवधि2026 के अंत तकभारतीय निर्यात पर दबाव

मार्च 2025 में चीन ने कनाडा की सरसों खली और तेल पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया था जिसके बाद वहां से आयात महंगा हो गया। इस फैसले से चीन को वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता की जरूरत पड़ी और भारत इस सुनहरे मौके का सबसे बड़ा लाभार्थी बना।

Oilmeal Export: कुल निर्यात में गिरावट – चिंता की बात

एक तरफ चीन को निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है वहीं कुल खली निर्यात के आंकड़े चिंताजनक हैं।

अवधिकुल निर्यातबदलाव
फरवरी 20253.30 लाख टन
फरवरी 20262.57 लाख टन22% गिरावट
अप्रैल 2024 से फरवरी 202539.16 लाख टन
अप्रैल 2025 से फरवरी 202634.93 लाख टन11% गिरावट

यह आंकड़ा बताता है कि चीन को हुई बंपर बिक्री के बावजूद अन्य बाजारों में निर्यात कमजोर पड़ा है। यह भारतीय निर्यातकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

Oilmeal Export: ईरान युद्ध का शिपिंग पर असर

ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध का असर भारतीय खली निर्यात पर भी पड़ रहा है।

प्रभावविवरण
रेड सी में अस्थिरतामध्य पूर्व और यूरोप को शिपमेंट प्रभावित
होर्मुज संकटवैकल्पिक समुद्री मार्ग अपनाने की जरूरत
केप ऑफ गुड होप रास्ता10 से 15 दिन ज्यादा लगते हैं
शिपिंग लागतकाफी बढ़ गई है
यूरोप और मध्य पूर्वनिर्यात प्रभावित

Oilmeal Export: निर्यातकों के सामने दोहरी चुनौती

चुनौतीविवरण
कनाडा की वापसीचीन ने टैरिफ हटाया, प्रतिस्पर्धा बढ़ी
शिपिंग लागतईरान युद्ध से 30% बढ़ी
यूरोप बाजाररेड सी संकट से प्रभावित
कीमत दबावअन्य देशों से प्रतिस्पर्धा
कुल निर्यात11% घटा

कृषि व्यापार विशेषज्ञ का कहना है कि भारतीय खली निर्यात की यह सफलता अस्थायी कारकों पर निर्भर थी। कनाडा पर टैरिफ हटने के बाद चीन का बाजार बनाए रखने के लिए भारत को अपनी कीमतों और गुणवत्ता दोनों पर ध्यान देना होगा। साथ ही नए बाजारों की तलाश भी जरूरी है क्योंकि कुल निर्यात में गिरावट चिंताजनक है।

Oilmeal Export: भारत के पास अभी भी है मौका

अवसरविवरण
कीमत प्रतिस्पर्धायूरोप से अभी भी $72/टन सस्ता
सरसों उत्पादनराजस्थान में बंपर फसल
नए बाजारदक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका
गुणवत्ता सुधारप्रसंस्करण क्षमता बढ़ाना
कूटनीतिक संबंधनए व्यापार समझौते

Oilmeal Export: किसानों पर क्या होगा असर?

खली निर्यात का सीधा संबंध सरसों और अन्य तिलहन फसलों के किसानों से है।

पहलूप्रभाव
निर्यात बढ़ने परकिसानों को बेहतर दाम
निर्यात घटने परमंडी में कीमतें गिरती हैं
चीन का बाजार बनाए रखनासरसों की मांग बनी रहेगी
प्रतिस्पर्धा बढ़ने परकीमतों पर दबाव

FAQ – भारत-चीन खली निर्यात से जुड़े सवाल? (Oilmeal Export)

सवाल: भारत ने चीन को कितनी खली निर्यात की? जवाब: अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच भारत ने चीन को 7.79 लाख टन खली निर्यात की जो पिछले वर्ष से 20 गुना से अधिक है।

सवाल: भारतीय खली की कीमत यूरोप से कितनी कम है? जवाब: भारतीय सरसों खली $225 प्रति टन है जबकि यूरोपीय खली $297 प्रति टन है। यानी भारत $72 प्रति टन सस्ता है।

सवाल: चीन ने कनाडा पर टैरिफ क्यों लगाया था? जवाब: मार्च 2025 में चीन-कनाडा व्यापार विवाद के चलते चीन ने कनाडाई सरसों खली पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया था जिससे भारत को फायदा मिला।

सवाल: अब भारत के निर्यात पर क्या खतरा है? जवाब: चीन ने 1 मार्च 2026 से कनाडाई खली पर टैरिफ अस्थायी रूप से हटा दिया है जो 2026 के अंत तक रहेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।

Oilmeal Export: निष्कर्ष

चीन को भारतीय खली निर्यात में 20 गुना की वृद्धि एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। प्रतिस्पर्धी कीमतें और कनाडा पर टैरिफ ने भारत को यह सुनहरा अवसर दिया। हालांकि कनाडाई टैरिफ हटने, ईरान युद्ध से शिपिंग लागत बढ़ने और कुल निर्यात में 11 प्रतिशत की गिरावट ने आने वाली चुनौतियों का संकेत दे दिया है। भारतीय निर्यातकों और नीति निर्माताओं को अभी से नए बाजार तलाशने और गुणवत्ता सुधार पर ध्यान देने की जरूरत है।

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