Electric Tractor: भारतीय कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत हो रही है। डीजल के बढ़ते दामों और पर्यावरण संबंधी चिंताओं के बीच इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर तेजी से किसानों की पसंद बनते जा रहे हैं। वर्ष 2026 इस बदलाव के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि सरकार ने इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के लिए आधिकारिक परीक्षण मानक तय कर दिए हैं और अप्रैल 2026 से डीजल ट्रैक्टरों के लिए कड़े उत्सर्जन नियम लागू होने वाले हैं।
उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2027 तक इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर वार्षिक ट्रैक्टर बिक्री का 5 से 7 प्रतिशत हिस्सा बन सकते हैं, जो हर साल लगभग 60,000 इकाइयों के बराबर होगा। यह आंकड़ा भले ही छोटा लगे, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण शुरुआत है जो आने वाले दशक में कृषि यंत्रीकरण को पूरी तरह बदल सकती है।
Electric Tractor: डीजल के बढ़ते दाम और पर्यावरणीय चुनौतियां
भारत में कृषि क्षेत्र देश के कुल डीजल उपयोग का लगभग 14 से 16 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल करता है, और इसमें ट्रैक्टर सबसे बड़े उपभोक्ता हैं। देश में हर साल 9 लाख से अधिक ट्रैक्टरों की बिक्री होती है और यांत्रिकीकरण लगातार बढ़ रहा है। चूंकि भारत अपने कच्चे तेल का अधिकांश हिस्सा आयात करता है, इसलिए खेती में बढ़ता डीजल उपयोग एक बड़ी ऊर्जा चिंता बन गया है।
कई राज्यों में डीजल की कीमतें 90 से 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास हैं। इससे किसानों की खेती की लागत में भारी इजाफा हो रहा है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि ईंधन खर्च उनके कुल कृषि खर्च का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता है। Electric Tractor इस समस्या का एक व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करते हैं।
Electric Tractor: कीमत का अंतर धीरे-धीरे हो रहा कम
वर्तमान में Electric Tractor समान डीजल मॉडल की तुलना में दो से ढाई गुना महंगे हैं। यह मुख्य रूप से बैटरी की लागत और कम उत्पादन संख्या के कारण है। हालांकि, पिछले एक दशक में लिथियम-आयन बैटरी की कीमतों में विश्वभर में लगभग 85 प्रतिशत की गिरावट आई है। जैसे-जैसे भारत में बैटरी उत्पादन बढ़ेगा, कीमतें और गिर सकती हैं।
दिलचस्प बात यह है कि छह से आठ साल की अवधि में, इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर 30 से 40 प्रतिशत कम कुल स्वामित्व लागत प्रदान कर सकते हैं। केवल ईंधन की बचत हर साल काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन सरल होते हैं, उनमें कम पुर्जे होते हैं और तेल बदलने की आवश्यकता नहीं होती। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अध्ययन बताते हैं कि परिचालन लागत 40 प्रतिशत तक गिर सकती है।
Electric Tractor: तकनीक में आया सुधार, बढ़ी कार्य क्षमता
पहले के Electric Tractor में कम पावर और छोटे काम के घंटे थी। लेकिन 2026 तक, 40 से 60 एचपी रेंज में नए मॉडल पायलट उपयोग में आ रहे हैं। ये ट्रैक्टर एक चार्ज पर 6 से 8 घंटे काम कर सकते हैं, जो अधिकांश छोटे और मध्यम किसानों की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
बैटरी स्वैपिंग और मॉड्यूलर बैटरी पैक का भी परीक्षण किया जा रहा है। ये विकल्प व्यस्त मौसमों के दौरान प्रतीक्षा समय को कम कर सकते हैं। 20 से 30 किलोवाट घंटे की बैटरियां एक बार चार्ज करने पर जुताई, छिड़काव और ढुलाई का काम संभाल सकती हैं। चार्जिंग में लगभग 6 से 8 घंटे लगते हैं, जो रातभर के आराम के समय में फिट हो जाता है।
Electric Tractor: छोटे भारतीय खेतों के लिए उपयुक्त विकल्प
भारत में 140 मिलियन हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य भूमि है, जिसका अधिकांश हिस्सा छोटे भूखंडों में विभाजित है। 25 से 40 एचपी रेंज के Electric Tractor इन परिस्थितियों के लिए अच्छी तरह से अनुकूल हैं। अधिकांश खेत दिन में 4 से 6 घंटे के लिए ट्रैक्टर का उपयोग करते हैं, और इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर इसी काम चक्र के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
छोटे खेतों के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है, क्योंकि इनकी रखरखाव लागत कम है और ये शोर भी कम करते हैं। साथ ही, संचालन के दौरान कोई धुआं नहीं निकलता, जो पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर है।
Electric Tractor: नए व्यावसायिक मॉडल कम कर रहे जोखिम
Electric Tractor की उच्च प्रारंभिक लागत को देखते हुए, लीजिंग और ट्रैक्टर-ऐज-ए-सर्विस मॉडल भी अपनाए जा रहे हैं। महंगा ट्रैक्टर खरीदने के बजाय, किसान प्रति घंटे या प्रति एकड़ के आधार पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर किराए पर ले सकते हैं। यह उच्च निवेश के बोझ को कम करता है और छोटे किसानों को भी नई तकनीक का लाभ उठाने का मौका देता है।
यह मॉडल विशेष रूप से उन किसानों के लिए फायदेमंद है जो मौसमी खेती करते हैं या जिन्हें साल भर ट्रैक्टर की आवश्यकता नहीं होती। कस्टम हायरिंग सेंटर और किसान उत्पादक संगठन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
Electric Tractor: सौर ऊर्जा से चार्जिंग की संभावना
इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर सौर चार्जिंग को संभव बनाते हैं। कुछ क्षेत्रों में, कृषि मशीनें स्थानीय रूप से उत्पन्न बिजली पर चल सकती हैं। यह सब जगह तुरंत संभव नहीं हो सकता, लेकिन विकल्प अब मौजूद है। यह ईंधन आयात को कम करने और कृषि में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने में भी मदद करता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में चार्जिंग अभी भी एक चुनौती है, लेकिन प्रगति हो रही है। सौर चार्जिंग स्टेशन, फीडर पृथक्करण और खेत-स्तरीय नवीकरणीय प्रणालियां धीरे-धीरे स्थिति में सुधार कर रही हैं। सरकार को इस दिशा में और सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
Electric Tractor: भारत का विशाल ट्रैक्टर बाजार, लेकिन ईवी अभी दुर्लभ
भारत विश्व का सबसे बड़ा ट्रैक्टर बाजार है। यहां हर साल लगभग 10 लाख ट्रैक्टर बेचे जाते हैं, और देश वैश्विक ट्रैक्टर उत्पादन का लगभग 45 प्रतिशत उत्पादन करता है। 2025 में घरेलू बिक्री लगभग 10.9 लाख इकाइयों तक पहुंच गई, जो मजबूत वृद्धि दर्शाती है।
हालांकि, इस विशाल बाजार के बावजूद Electric Tractor अभी भी दुर्लभ हैं। 2024 तक पूरे भारत में 100 से कम इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर पंजीकृत हुए थे, जबकि 90 लाख से अधिक डीजल ट्रैक्टर पहले से उपयोग में हैं। यह दर्शाता है कि Electric Tractor अभी भी प्रारंभिक चरण में हैं, लेकिन संभावनाएं अपार हैं।
Electric Tractor: भारत में उपलब्ध प्रमुख इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर
Electric Tractor अब केवल अवधारणाएं नहीं रह गए हैं। कुछ मॉडल पहले से ही उपलब्ध हैं या भारत में परीक्षण के अधीन हैं। मोंट्रा इलेक्ट्रिक E27 देश में पहले वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों में से एक है। यह 27 एचपी की अधिकतम शक्ति और 90 एनएम के बराबर पीक टॉर्क प्रदान करता है। यह 2WD और 4WD दोनों संस्करणों में उपलब्ध है, जो इसे बागों, गीले खेतों और भारी कर्षण कार्य के लिए उपयुक्त बनाता है।
सेलेस्टियल 55 एचपी इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर भारी कृषि कार्यों के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह लंबे काम के घंटों और उच्च शक्ति आवश्यकताओं के लिए बनाया गया है, विशेष रूप से मध्यम और बड़े खेतों पर। HAV 50 S1 इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर भी भारतीय परिस्थितियों के लिए विकास के अधीन है। यह उन किसानों के लिए है जिन्हें कम चलने वाली लागत के साथ दैनिक संचालन के लिए मध्य-श्रेणी की शक्ति वाले ट्रैक्टर की आवश्यकता है।
Electric Tractor: सरकारी नीतियां और भविष्य की दिशा
Electric Tractor की सफलता के लिए सरकारी सहायता महत्वपूर्ण होगी। सब्सिडी, कर छूट और चार्जिंग बुनियादी ढांचे में निवेश आवश्यक है। कुछ राज्य सरकारें पहले ही इलेक्ट्रिक कृषि मशीनरी पर विशेष छूट देने की घोषणा कर चुकी हैं।
अप्रैल 2026 से लागू होने वाले कड़े उत्सर्जन नियम डीजल ट्रैक्टरों की कीमतें बढ़ा सकते हैं, जो इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को अधिक प्रतिस्पर्धी बना देगा। यह बाजार की गतिशीलता को बदल सकता है और निर्माताओं को इलेक्ट्रिक मॉडल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।
Electric Tractor: बदलाव की शुरुआत हो चुकी है
डीजल ट्रैक्टर महत्वपूर्ण बने रहेंगे, विशेष रूप से भारी काम के लिए। लेकिन बाजार की दिशा स्पष्ट है। लागत में गिरावट और तकनीक में सुधार के साथ Electric Tractor अधिक व्यावहारिक होते जा रहे हैं।
बदलाव में समय लगेगा, लेकिन यह पहले ही शुरू हो चुका है। बेहतर अर्थशास्त्र, नए व्यावसायिक मॉडल और सहायक नीतियों के साथ, इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर जल्द ही भारतीय खेतों पर एक आम दृश्य बन सकते हैं। 2026 वह वर्ष हो सकता है जब यह परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: Electric Tractor डीजल ट्रैक्टर से कितने महंगे हैं?
उत्तर: वर्तमान में Electric Tractor समान क्षमता के डीजल मॉडल की तुलना में दो से ढाई गुना महंगे हैं। यह मुख्य रूप से बैटरी की ऊंची कीमत और सीमित उत्पादन के कारण है। हालांकि, लंबी अवधि में देखें तो 6-8 वर्षों में कुल स्वामित्व लागत 30-40% कम हो सकती है, क्योंकि इलेक्ट्रिसिटी डीजल से सस्ती है और रखरखाव खर्च भी कम होता है।
प्रश्न 2: एक बार चार्ज करने पर Electric Tractor कितने घंटे काम कर सकता है?
उत्तर: 2026 के नए मॉडल एक बार चार्ज करने पर 6 से 8 घंटे तक काम कर सकते हैं। 20 से 30 किलोवाट घंटे की बैटरियां जुताई, छिड़काव और ढुलाई जैसे काम एक चार्ज में संभाल सकती हैं। चार्जिंग में 6-8 घंटे लगते हैं, जो रात के समय में पूरा हो जाता है। बैटरी स्वैपिंग सुविधा आने से व्यस्त मौसम में यह और सुविधाजनक हो जाएगा।
प्रश्न 3: Electric Tractor का उपयोग करने से परिचालन लागत में कितनी बचत होती है?
उत्तर: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अध्ययन बताते हैं कि Electric Tractor का उपयोग करने से परिचालन लागत 40% तक कम हो सकती है। जब कई राज्यों में डीजल 90-100 रुपये प्रति लीटर है, तब बिजली का खर्च बहुत कम पड़ता है। इसके अलावा, तेल बदलने की जरूरत नहीं होती और कम पुर्जों के कारण मरम्मत खर्च भी घटता है।
प्रश्न 4: क्या छोटे किसान भी Electric Tractor का उपयोग कर सकते हैं?
उत्तर: हां, बिल्कुल। भारत के छोटे खेतों के लिए 25 से 40 एचपी रेंज के Electric Tractor बहुत उपयुक्त हैं। अधिकांश छोटे किसान दिन में 4-6 घंटे ही ट्रैक्टर का उपयोग करते हैं, जो इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर की बैटरी क्षमता में आसानी से संभव है। इसके अलावा, अब लीजिंग और किराए पर ट्रैक्टर लेने की सुविधा भी है, जिससे छोटे किसान भी बिना बड़े निवेश के इसका लाभ ले सकते हैं।
प्रश्न 5: भारत में वर्तमान में कौन से Electric Tractor उपलब्ध हैं?
उत्तर: भारत में कई Electric Tractor मॉडल उपलब्ध हैं या परीक्षण चरण में हैं। मोंट्रा इलेक्ट्रिक E27 (27 एचपी, 2WD और 4WD में उपलब्ध) पहले वाणिज्यिक मॉडलों में से एक है। सेलेस्टियल 55 एचपी Electric Tractor भारी कार्यों के लिए बनाया गया है। HAV 50 S1 Electric Tractor भी विकास के अधीन है। ये मॉडल दर्शाते हैं कि Electric Tractor अब केवल अवधारणा नहीं बल्कि वास्तविक उपयोग में आ रहे हैं।
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