TREM V: भारत के ट्रैक्टर बाजार में इस समय एक बड़े बदलाव की चर्चा जोरों पर है। सरकार कृषि ट्रैक्टरों के लिए TREM V यानी ट्रैक्टर रेगुलेशन फॉर एमिशन मेजरमेंट के नए और कड़े उत्सर्जन मानक लागू करने जा रही है। इस कदम का मकसद पर्यावरण प्रदूषण को कम करना और ट्रैक्टरों से निकलने वाले हानिकारक धुएं को नियंत्रित करना है। लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी चिंता भी सामने आई है कि इन नए नियमों के लागू होने के बाद ट्रैक्टरों की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं जिसका सीधा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ेगा। आइए जानते हैं कि TREM V क्या है, यह कब से लागू होगा और इसका किसानों पर क्या असर पड़ेगा।
TREM V: क्या हैं TREM उत्सर्जन मानक?
TREM उत्सर्जन मानक भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्रदूषण नियंत्रण मानक हैं जो कृषि ट्रैक्टरों और कृषि मशीनरी से निकलने वाले हानिकारक धुएं को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं। ये मानक अन्य वाहनों के लिए लागू भारत स्टेज यानी BS मानकों की तरह ही हैं लेकिन विशेष रूप से कृषि उपकरणों के लिए डिजाइन किए गए हैं। इन मानकों में NOx यानी नाइट्रोजन ऑक्साइड, पार्टिकुलेट मैटर, हाइड्रोकार्बन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे प्रदूषकों की सीमा तय की जाती है।
भारत में ट्रैक्टर उत्सर्जन मानकों का इतिहास देखें तो 1999 में पहले मानक लागू हुए। इसके बाद 2003 में TREM II, 2005 में TREM III, 2010-11 में TREM IIIA और 2023 में 50 HP से अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टरों के लिए TREM IV लागू किया गया।
TREM V: अभी क्या हैं मौजूदा नियम?
वर्तमान में भारत में ट्रैक्टरों पर दो मुख्य उत्सर्जन मानक लागू हैं। 50 हॉर्सपावर से कम क्षमता वाले ट्रैक्टर TREM IIIA मानक का पालन करते हैं जबकि 50 हॉर्सपावर से अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर TREM IV मानक के अंतर्गत आते हैं। अब सरकार सभी श्रेणियों के ट्रैक्टरों को TREM V के कड़े मानकों के दायरे में लाना चाहती है।
TREM V: TREM V कब से होगा लागू?
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है जो हर किसान और ट्रैक्टर खरीदार पूछ रहा है। इसका सीधा जवाब यह है कि अभी तक कोई अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है। चर्चाएं जरूर चल रही हैं। उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार सरकार छोटे ट्रैक्टरों के लिए इसे लागू करने में देरी कर सकती है क्योंकि अधिकांश छोटे और सीमांत किसान 50 HP से कम क्षमता वाले ट्रैक्टर खरीदते हैं। अचानक कीमत बढ़ने से ग्रामीण मांग पर बुरा असर पड़ सकता है।
यदि मौजूदा प्रस्ताव आगे बढ़ते हैं तो संभावित समयसीमा इस प्रकार हो सकती है। 25 से 50 HP के ट्रैक्टरों के लिए उद्योग जगत ने 2028 तक की मांग रखी है या फिर एक मध्यवर्ती उत्सर्जन चरण की मांग है। 50 से 75 HP के ट्रैक्टरों के लिए अक्टूबर 2026 या उसके बाद की संभावना है। 75 HP से अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टरों के लिए अप्रैल या अक्टूबर 2026 से लागू होने की संभावना है।
TREM V: ट्रैक्टर कितने महंगे होंगे?
यह सवाल किसानों को सबसे अधिक परेशान करता है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार TREM V पूरी तरह लागू होने पर ट्रैक्टरों की कीमतें 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। इसे एक उदाहरण से समझें। आज एक 45 HP ट्रैक्टर की कीमत लगभग 7.80 लाख रुपये है। TREM V लागू होने के बाद इसी ट्रैक्टर की कीमत 8.97 लाख से 9.36 लाख रुपये तक हो सकती है। यह छोटे किसानों के लिए एक बड़ा झटका होगा जो पहले से ही तंग बजट में काम कर रहे हैं।
TREM V: ट्रैक्टर महंगे क्यों होंगे?
कई किसान सोचते हैं कि यह बस कागजी नियम बदलाव है लेकिन हकीकत इससे अलग है। TREM V के तहत ट्रैक्टर के इंजन में वास्तविक और महंगे बदलाव करने होंगे। इंजन तकनीक को अपग्रेड करना होगा जिसमें कॉमन रेल डायरेक्ट इंजेक्शन यानी CRDI और एग्जॉस्ट गैस रिसर्कुलेशन यानी EGR जैसी प्रणालियां शामिल हैं। इसके अलावा डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर यानी DPF और सेलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन यानी SCR जैसे महंगे उपकरण अनिवार्य हो सकते हैं। ये उपकरण न केवल महंगे हैं बल्कि रखरखाव की लागत भी बढ़ाते हैं।
एक और बड़ी समस्या सर्विस और मरम्मत की है। पुराने ट्रैक्टर मुख्यतः मैकेनिकल थे जिन्हें गांव का स्थानीय मैकेनिक भी आसानी से ठीक कर सकता था। नई उत्सर्जन प्रणालियां इलेक्ट्रॉनिक और जटिल होंगी जिन्हें ठीक करने के लिए प्रशिक्षित तकनीशियन और विशेष वर्कशॉप की जरूरत होगी जो गांवों में हमेशा उपलब्ध नहीं होतीं।
TREM V: उद्योग जगत और किसान क्या कह रहे हैं?
इस मुद्दे पर उद्योग जगत और किसान लगभग एक ही आवाज में बोल रहे हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा, एस्कॉर्ट्स कुबोटा और TAFE जैसी प्रमुख कंपनियों का मानना है कि बहुत जल्दी कड़े नियम लागू करने से ग्रामीण मांग धीमी हो सकती है। ट्रैक्टर एंड मेकेनाइजेशन एसोसिएशन यानी TMA ने सरकार को अपनी सिफारिशें पहले ही दे दी हैं। किसान संगठन समयुक्त किसान मोर्चा यानी SKM-NP ने सरकार से 70 HP से कम के ट्रैक्टरों को फिलहाल कड़े नियमों से बाहर रखने की मांग की है। किसान नेताओं का कहना है कि ट्रैक्टर महंगे होने से कर्ज का बोझ बढ़ेगा।
TREM V: क्या अभी ट्रैक्टर खरीदना चाहिए?
CRISIL रेटिंग्स के अनुसार नए उत्सर्जन मानक लागू होने से पहले ट्रैक्टर की बिक्री आमतौर पर बढ़ जाती है क्योंकि खरीदार कीमत बढ़ने से पहले खरीदारी करने की कोशिश करते हैं। यदि आप पहले से ट्रैक्टर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो 2026 की शुरुआत में खरीदारी करना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि सरकार की अंतिम अधिसूचना अभी नहीं आई है इसलिए निर्णय लेने से पहले ताजा अपडेट जरूर देखें।
TREM V: भारत का ट्रैक्टर बाजार और आगे की राह
भारत इस समय दुनिया का सबसे बड़ा ट्रैक्टर बाजार है जिसकी कुल कीमत लगभग 9.4 अरब डॉलर आंकी गई है। वित्त वर्ष 2025 में 9.39 लाख से अधिक ट्रैक्टर बिके और वित्त वर्ष 2026 में यह संख्या 9.75 लाख तक पहुंच सकती है। लेकिन अगर TREM V से कीमतें तेजी से बढ़ीं तो यह विकास धीमा पड़ सकता है।
TREM V उत्सर्जन मानक: एक संक्षिप्त सारांश
| विवरण | संभावित प्रभाव / तिथि |
| संभावित मूल्य वृद्धि | 15% से 20% (₹1 लाख से ₹2 लाख तक) |
| लागू होने की संभावित तिथि | अक्टूबर 2026 (75 HP+) / 2028 (छोटे ट्रैक्टरों के लिए प्रस्तावित) |
| प्रमुख तकनीक | CRDI, EGR, DPF और SCR सिस्टम |
| प्रभावित वर्ग | छोटे और सीमांत किसान |
| उद्योग की मांग | चरणबद्ध तरीके से लागू करना और सब्सिडी की सुविधा |
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