Sugar Price: ब्राजील की बढ़ती चीनी सप्लाई से वैश्विक बाजार में आई बड़ी गिरावट, भारत में उत्पादन 9.4 प्रतिशत बढ़ने से घरेलू बाजार स्थिर बना

Sugar Price

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Sugar Price: वैश्विक चीनी बाजार में इस समय भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। ब्राजील में रिकॉर्ड उत्पादन के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतें तेजी से गिरी हैं। आईसीआरए लिमिटेड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच कच्ची चीनी की कीमत 445 डॉलर से घटकर 313 डॉलर प्रति मीट्रिक टन रह गई। हालाँकि भारत में घरेलू उत्पादन में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि और इथेनॉल मिश्रण में प्रगति के कारण यहाँ की मिलों की स्थिति फिलहाल संतुलित बनी हुई है।

Sugar Price: वैश्विक चीनी बाजार में कीमतें क्यों लुढ़कीं?

दुनिया भर के चीनी बाजार में इस वक्त ब्राजील की भूमिका सबसे अहम है। ब्राजील में इस सीजन चीनी का उत्पादन अपेक्षा से कहीं ज्यादा रहा, जिसके कारण वैश्विक बाजार में सप्लाई बाढ़ की तरह आ गई।

आईसीआरए लिमिटेड की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2025 में कच्ची चीनी की कीमत लगभग 445 डॉलर प्रति मीट्रिक टन थी। एक साल बाद, फरवरी 2026 में यही Sugar Price घटकर मात्र 313 डॉलर प्रति मीट्रिक टन रह गई। यानी एक वर्ष में करीब 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

सफेद Sugar Price में भी इसी तरह की कमी आई है। 532 डॉलर से घटकर यह 408 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पर आ गई। फरवरी 2026 में सफेद और कच्ची चीनी के बीच प्रीमियम 95 डॉलर प्रति मीट्रिक टन दर्ज किया गया।

Sugar Price: 2025-26 में दुनिया भर में कितनी होगी चीनी की पैदावार?

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 में वैश्विक चीनी उत्पादन 189.3 लाख मीट्रिक टन तक पहुँचने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है।

वहीं दुनिया भर में चीनी की खपत 178.1 लाख मीट्रिक टन रहने की संभावना है। इसका अर्थ है कि उत्पादन और खपत के बीच करीब 11.2 लाख मीट्रिक टन का अंतर बना रहेगा, जो वैश्विक भंडार को और बढ़ाएगा और कीमतों पर दबाव जारी रखेगा।

आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक जब तक ब्राजील का उत्पादन इसी तरह ऊँचा बना रहेगा, तब तक वैश्विक बाजार में कीमतों का दबाव बरकरार रहेगा।

Sugar Price: भारत में चीनी उत्पादन की क्या है स्थिति?

वैश्विक गिरावट के बावजूद भारत के लिए खबर राहत देने वाली है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार वर्ष 2026 में देश का कुल चीनी उत्पादन 32.41 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है।

यह आँकड़ा पिछले वर्ष के 29.6 लाख मीट्रिक टन की तुलना में लगभग 9.4 प्रतिशत अधिक है। गन्ने की बेहतर उपलब्धता और अनुकूल मौसम इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

Sugar Price: इथेनॉल उत्पादन में चीनी का बढ़ता उपयोग किसानों के लिए क्यों जरूरी है?

रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष लगभग 31 लाख मीट्रिक टन चीनी इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल की जाएगी। इसके बाद देश में शुद्ध चीनी उत्पादन करीब 29.3 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है।

घरेलू खपत लगभग 28.3 लाख मीट्रिक टन और निर्यात 0.7 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। इससे अंतिम स्टॉक करीब 5.6 लाख मीट्रिक टन बचने की उम्मीद है, जो लगभग दो महीने की खपत के बराबर है।

इथेनॉल मिश्रण के मोर्चे पर भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2026 की पहली तिमाही में लगभग 19.98 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण हासिल किया गया, जिसमें 239 करोड़ लीटर इथेनॉल का उपयोग हुआ। यह आँकड़ा भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

Sugar Price: चीनी मिलों की कमाई और गन्ना किसानों को क्या मिला?

आईसीआरए का अनुमान है कि वर्ष 2026 में एकीकृत चीनी मिलों का ऑपरेटिंग मार्जिन 10 से 10.5 प्रतिशत के बीच रहेगा। पिछले वर्ष यह 9.6 प्रतिशत था। यानी मिलों की वित्तीय सेहत में मामूली लेकिन सकारात्मक सुधार आने की उम्मीद है।

गन्ना किसानों के लिए भी अच्छी खबर है। सरकार ने वर्ष 2026 के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य यानी FRP 15 रुपये बढ़ाकर 355 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। उत्तर प्रदेश में जल्दी पकने वाली किस्मों के लिए राज्य सलाहकार मूल्य यानी SAP 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्मों के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।

गन्ने की बेहतर उपलब्धता, घरेलू बाजार में स्थिर कीमतें और डिस्टिलरी सेगमेंट के अच्छे प्रदर्शन के कारण मिलों को फायदा हो रहा है।

Sugar Price: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: वैश्विक चीनी कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण क्या है? उत्तर: ब्राजील में इस सीजन चीनी का उत्पादन बड़े पैमाने पर हुआ, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई बढ़ गई और Sugar Price तेजी से गिरीं।

प्रश्न 2: भारत में चीनी की घरेलू कीमतें क्या प्रभावित होंगी? उत्तर: फिलहाल भारत में चीनी की मांग और आपूर्ति संतुलित है। घरेलू उत्पादन में वृद्धि और पर्याप्त स्टॉक के कारण यहाँ कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

प्रश्न 3: गन्ना किसानों को इस बार FRP से क्या फायदा होगा? उत्तर: सरकार ने FRP 355 रुपये प्रति क्विंटल तय की है, जो पिछले वर्ष से 15 रुपये अधिक है। इससे किसानों को उनकी लागत पर बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद है।

प्रश्न 4: इथेनॉल के लिए चीनी का उपयोग क्यों बढ़ाया जा रहा है? उत्तर: इथेनॉल मिश्रण से देश की तेल आयात निर्भरता कम होती है, किसानों को अतिरिक्त आय का जरिया मिलता है और चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत होती है।

प्रश्न 5: चीनी मिलों का ऑपरेटिंग मार्जिन इस वर्ष कितना रहने का अनुमान है? उत्तर: आईसीआरए के अनुसार वर्ष 2026 में एकीकृत चीनी मिलों का ऑपरेटिंग मार्जिन 10 से 10.5 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है।

Sugar Price: निष्कर्ष

वैश्विक चीनी बाजार में ब्राजील की आपूर्ति बाढ़ ने कीमतों को तेजी से नीचे खींचा है। लेकिन भारत की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है। घरेलू उत्पादन में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि, सरकार की सक्रिय मूल्य नीति और इथेनॉल मिश्रण में प्रगति ने भारतीय चीनी उद्योग को वैश्विक उथल-पुथल से काफी हद तक बचाए रखा है। गन्ना किसानों और चीनी मिलों, दोनों के लिए यह वर्ष पिछले साल से बेहतर साबित होने की उम्मीद है।

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