Pulses Import: दालों के आयात और MSP पर सुप्रीम कोर्ट ने 14 मार्च 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। किसान महापंचायत की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को सभी संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर पूरी स्थिति स्पष्ट करने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अगली सुनवाई 8 मई 2026 के लिए तय की है। दालों के आयात से देश के करोड़ों दलहन किसानों को MSP से कम दाम मिल रहे हैं जो इस याचिका का मूल मुद्दा है।
Pulses Import: दालों के आयात और MSP पर सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जो आदेश दिया है वह दलहन किसानों के लिए एक उम्मीद की किरण है।
अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह दलहन किसानों, नीति से जुड़े पक्षों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठक आयोजित करे। सभी पक्षों के विचारों को शामिल करके एक विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए। अदालत ने कहा कि देश में दलहन उत्पादन बढ़ावा देने और घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी नीतिगत कदमों पर विचार किया जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 8 मई 2026 को होगी।
Pulses Import: यह मामला क्या है – पूरी पृष्ठभूमि
| मामले का विवरण | जानकारी |
|---|---|
| याचिका दायर करने वाले | किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट |
| याचिका संख्या | रिट याचिका 911/2025 |
| पीठ | मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची |
| किसानों की वकील | वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण |
| सरकार की ओर से | अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल वेंकटरमन |
| अगली सुनवाई | 8 मई 2026 |
| मुख्य मांग | पीली मटर पर 50% आयात शुल्क |
Pulses Import: पीली मटर आयात से कैसे होता है किसानों को नुकसान?
दालों के आयात और MSP पर यह विवाद तब और गहरा हो गया जब सरकार ने एक समय पीली मटर की दाल के आयात पर शुल्क शून्य कर दिया था।
जब आयात शुल्क शून्य हुआ तो देश में बड़ी मात्रा में सस्ती आयातित दाल आने लगी। इस सस्ती विदेशी दाल के कारण घरेलू बाजार में चना, अरहर और अन्य प्रमुख दलहन फसलों के दाम दबाव में आ गए। नतीजा यह हुआ कि देश के दलहन किसानों को MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम कीमत पर अपनी उपज बेचने को मजबूर होना पड़ा।
किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि सस्ती आयातित दाल के कारण भारतीय दलहन किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और उन्हें सरकार द्वारा घोषित MSP का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
Pulses Import: 2024 के बाद दालों के आयात में रिकॉर्ड उछाल
| वर्ष | दालों का आयात स्तर |
|---|---|
| 2023 से पहले | सामान्य |
| 2024 | रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा |
| 2025-26 | और बढ़ा |
| किसानों पर असर | MSP से कम भाव |
| घरेलू उत्पादन पर असर | दबाव में |
भारत में 2024 के बाद से दलहन का आयात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। इससे देश के दलहन उत्पादक किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। मुख्य रूप से चना, अरहर, मूंग और उड़द के किसान इससे प्रभावित हुए हैं।
Pulses Import: सरकार का मिशन और आयात नीति में विरोधाभास
दालों के आयात और MSP पर इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सरकार की दो नीतियां एक-दूसरे से उलटी दिशा में काम कर रही हैं।
एक तरफ केंद्र सरकार ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए “मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज” नाम का छह वर्षीय कार्यक्रम शुरू किया है। इसके लिए ₹11,400 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस योजना का मकसद MSP आधारित खरीद व्यवस्था को मजबूत करना भी है।
लेकिन दूसरी तरफ दलहन आयात से जुड़ी नीति इस मिशन से मेल नहीं खाती। जब विदेश से सस्ती दाल आती है तो घरेलू दलहन किसान को उचित दाम नहीं मिल पाता और वह अगले साल दलहन की खेती कम कर देता है। इससे आत्मनिर्भरता का लक्ष्य कभी पूरा नहीं होगा।
Pulses Import: कृषि मंत्री ने भी माना था कि पीली मटर पर चाहिए 50% शुल्क
इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि खुद केंद्रीय कृषि मंत्री ने भी इस समस्या को गंभीर मानते हुए खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री को पत्र लिखकर पीली मटर पर आयात शुल्क बढ़ाने का सुझाव दिया था।
कृषि मंत्री ने कहा था कि पीली मटर की लैंडिंग कीमत भारत में प्रमुख दलहनों की MSP मंडी कीमतों से काफी कम है। इसलिए घरेलू किसानों के हितों की रक्षा के लिए पीली मटर पर लगभग 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की जरूरत है।
Pulses Import: प्रमुख दालों का MSP 2025-26
| दलहन | MSP 2025-26 (प्रति क्विंटल) |
|---|---|
| चना | ₹5,440 |
| अरहर (तुअर) | ₹7,550 |
| मूंग | ₹8,682 |
| उड़द | ₹7,400 |
| मसूर | ₹6,700 |
| पीली मटर (आयातित लैंडिंग कीमत) | MSP से काफी कम |
Pulses Import: दलहन किसानों के लिए यह फैसला क्यों है महत्वपूर्ण?
दालों के आयात और MSP पर यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश दलहन किसानों के लिए कई कारणों से महत्वपूर्ण है।
पहली बात यह है कि देश का सर्वोच्च न्यायालय इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है जिससे किसानों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
दूसरी बात यह है कि सरकार को अब सभी पक्षों से बात करके एक ठोस नीति बनानी होगी। यह एक सकारात्मक कदम है।
तीसरी बात यह है कि अगर पीली मटर पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है तो घरेलू दलहन की कीमतें बेहतर होंगी और किसानों को MSP के करीब दाम मिलेगा।
किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश दलहन किसानों के हक की लड़ाई में एक बड़ी जीत है। हमने इसीलिए जनहित याचिका दायर की थी। अब सरकार को किसानों के साथ बैठकर एक ऐसी नीति बनानी होगी जो घरेलू दलहन उत्पादन को बढ़ावा दे और किसानों को MSP का पूरा फायदा मिले।
Pulses Import: दलहन किसानों की मुख्य मांगें
| मांग | विवरण |
|---|---|
| पीली मटर पर 50% आयात शुल्क | घरेलू किसानों की रक्षा |
| MSP पर सरकारी खरीद | सभी दलहनों पर |
| आयात नीति में बदलाव | घरेलू उत्पादन से तालमेल |
| मिशन आत्मनिर्भरता | प्रभावी क्रियान्वयन |
| मंडी में उचित दाम | MSP से कम न हो |
FAQ – दालों के आयात और MSP मामले से जुड़े जरूरी सवाल (Pulses Import)
सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने दालों के मामले में क्या आदेश दिया? जवाब: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह दलहन किसानों और सभी संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर पूरी स्थिति स्पष्ट करे और विस्तृत रिपोर्ट अदालत को दे। अगली सुनवाई 8 मई 2026 को होगी।
सवाल: पीली मटर के आयात से किसानों को कैसे नुकसान होता है? जवाब: जब पीली मटर पर आयात शुल्क शून्य होता है तो सस्ती विदेशी दाल बाजार में आती है। इससे घरेलू चना, अरहर जैसी दालों के दाम गिरते हैं और किसानों को MSP से भी कम कीमत मिलती है।
सवाल: सरकार का आत्मनिर्भरता मिशन क्या है? जवाब: केंद्र सरकार ने “मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज” नाम का छह वर्षीय कार्यक्रम शुरू किया है जिसके लिए ₹11,400 करोड़ का प्रावधान है। इसका मकसद देश में दलहन उत्पादन बढ़ाना और MSP आधारित खरीद व्यवस्था मजबूत करना है।
सवाल: पीली मटर पर कितना आयात शुल्क लगाने की मांग है? जवाब: किसान महापंचायत और खुद केंद्रीय कृषि मंत्री ने भी पीली मटर पर लगभग 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की मांग की है ताकि घरेलू किसानों की रक्षा हो सके।
Pulses Import: निष्कर्ष
दालों के आयात और MSP पर सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश देश के करोड़ों दलहन किसानों के लिए एक बड़ी उम्मीद लेकर आया है। सरकार की आत्मनिर्भर दलहन नीति और आयात नीति के बीच के विरोधाभास को अब देश के सर्वोच्च न्यायालय ने गंभीरता से लिया है। 8 मई 2026 की सुनवाई से पहले सरकार को एक ठोस और किसान हितैषी नीति बनानी होगी। अगर पीली मटर पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है तो घरेलू दलहन किसानों को उनकी मेहनत का उचित दाम मिलेगा और देश दालों में आत्मनिर्भर बनने की राह पर चल सकेगा।
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