Israel-US Iran War: किसान को केला 5-9 रुपये किलो, बाजार में 80-85 रुपये, सोलापुर के किसान को 4 लाख का घाटा, 1300 कंटेनर फंसे, रमजान में भी नहीं मिली राहत, व्यापारी खा रहे पूरा मुनाफा

Israel-US Iran War

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Israel-US Iran War: ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध की सबसे बड़ी मार भारत के किसानों और आम जनता पर पड़ रही है। रमजान का महीना जो हर साल किसानों के लिए कमाई का मौसम होता है इस बार उनके लिए आर्थिक तबाही लेकर आया है। महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के केला किसान दिग्गविजय मोरे 6 एकड़ में 10 लाख रुपये लगाकर 25 लाख रुपये कमाने की उम्मीद में थे लेकिन अब उन्हें केवल 6 लाख रुपये मिल रहे हैं यानी 4 लाख का सीधा नुकसान। किसान को केला 5 से 9 रुपये किलो मिल रहा है जबकि बाजार में यही केला 80 से 85 रुपये में बिक रहा है। बीच में बैठे व्यापारी पूरा मुनाफा हड़प रहे हैं।

Israel-US Iran War का किसानों पर असर – मुख्य तथ्य

विवरणजानकारी
प्रभावित जिलासोलापुर, महाराष्ट्र
किसान का नामदिग्गविजय मोरे
खेती का रकबा6 एकड़
लागत₹10 लाख
अपेक्षित कमाई₹25 लाख
वास्तविक कमाई₹6 लाख
कुल नुकसान₹4 लाख
किसान को केले का भाव₹5 से ₹9 प्रति किलो
पहले मिलता था₹20 से ₹25 प्रति किलो
बाजार में भाव₹80 से ₹85 प्रति किलो
फंसे कंटेनर1,300 केले के कंटेनर

Israel-US Iran War: पहले और अब में फर्क – केले का भाव कहां से कहां आया?

Israel-US Iran War से पहले और बाद में किसानों को मिलने वाले भाव में भारी अंतर आ गया है।

समयकिसान को भावबाजार भावव्यापारी का मुनाफा
युद्ध से पहले₹20 से ₹25/किलो₹40 से ₹50/किलोसामान्य
अभी (युद्ध के बाद)₹5 से ₹9/किलो₹80 से ₹85/किलोअत्यधिक
गिरावट60 से 75% नीचे60 से 70% ऊपरकई गुना बढ़ा

यह तस्वीर बताती है कि जहां किसान का भाव 75 प्रतिशत तक गिर गया वहीं बाजार भाव 70 प्रतिशत तक बढ़ गया। यानी एक किसान के नुकसान पर व्यापारी दोगुना मुनाफा कमा रहा है।

Israel-US Iran War: किसान दिग्गविजय मोरे की दर्दभरी कहानी

सोलापुर के किसान दिग्गविजय मोरे ने 6 एकड़ जमीन पर केले की खेती की थी। उन्होंने 10 लाख रुपये लगाए और उम्मीद थी कि 25 लाख रुपये का मुनाफा होगा।

लेकिन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय संकट ने सब बिगाड़ दिया। अब उन्हें प्रति किलो केवल 5 से 9 रुपये ही मिल रहे हैं जो पहले 20 से 25 रुपये था। इससे उनकी कुल कमाई केवल 6 लाख रुपये तक सिमट गई। लागत निकालने के बाद उन्हें 4 लाख रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है।

Israel-US Iran War: 1,300 कंटेनर फंसे – फसल बर्बाद होने की कगार पर

सोलापुर के किसानों का लगभग 1,300 केले का कंटेनर फंसा हुआ है। केला एक जल्दी खराब होने वाला फल है। जितना अधिक समय लगेगा उतना ही अधिक नुकसान होगा।

ये कंटेनर मुख्यतः खाड़ी देशों में निर्यात होने वाले थे। ईरान युद्ध के कारण समुद्री रास्ते अवरुद्ध होने से शिपिंग लागत बढ़ गई और खाड़ी बाजार लगभग बंद हो गए। इससे किसानों का माल न तो बाहर जा पा रहा है और न ही घरेलू बाजार में सही दाम मिल रहे हैं।

Israel-US Iran War: ऑनलाइन और खुदरा बाजार में केले का भाव

बाजार प्रकारमात्राकीमत
खुदरा बाजार1 किलो₹80 से ₹85
ऑनलाइन बाजार6 केले₹70 से ₹80
ऑनलाइन बाजार12 केले₹140 से ₹160
किसान को मिलता है1 किलो₹5 से ₹9

यह असमानता साफ दिखाती है कि बाजार में पारदर्शिता का कोई नामोनिशान नहीं है। एक ही माल किसान के हाथ से व्यापारी के हाथ पहुंचते-पहुंचते 10 से 15 गुना महंगा हो जाता है।

Israel-US Iran War: रमजान में भी नहीं मिली राहत – दोहरी मार

रमजान का महीना हर साल किसानों के लिए कमाई का अवसर लेकर आता है। इस महीने फल और सब्जियों की मांग काफी बढ़ जाती है। लेकिन इस साल का रमजान किसानों के लिए उल्टा साबित हुआ।

एक तरफ निर्यात ठप हो गया और दूसरी तरफ घरेलू बाजार में भी सही दाम नहीं मिले। जिस महीने में मुनाफा होना था उसी महीने में किसान घाटे में चले गए।

Israel-US Iran War: व्यापारी ले रहे पूरा मुनाफा – शोषण की परत दर परत

यह मामला सबसे ज्यादा चिंताजनक है। किसान कम दाम पर माल दे रहा है और उपभोक्ता ऊंचे दाम पर खरीद रहा है। बीच में बैठे व्यापारी और बिचौलिए पूरी कमाई खुद रख लेते हैं।

किसान को 5 से 9 रुपये मिलता है और बाजार में 80 से 85 रुपये में बिकता है। यानी लगभग 10 से 15 गुना का अंतर है। यह न केवल आर्थिक रूप से गलत है बल्कि नैतिक और सामाजिक रूप से भी अस्वीकार्य है।

Israel-US Iran War: किसानों के सामने सरकार से मांग

किसानों और कृषि संगठनों की सरकार से मांग है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के समय किसानों को राहत पैकेज दिया जाए। बिचौलियों पर नकेल कसी जाए और किसान से उपभोक्ता तक सीधा संपर्क बनाया जाए।

ई-नाम यानी राष्ट्रीय कृषि बाजार पोर्टल को और प्रभावी बनाया जाए। फंसे हुए कंटेनरों के लिए वैकल्पिक बाजार की व्यवस्था हो। नष्ट होने वाली फसल के लिए मुआवजे की नीति बने।

कृषि अर्थशास्त्री और किसान मामलों के जानकार डॉ. अशोक गुलाटी का कहना है कि यह एक दीर्घकालिक समस्या है जो युद्ध जैसे संकट में और उजागर हो जाती है। किसान और उपभोक्ता दोनों शोषण के शिकार हैं। जब तक आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता नहीं आएगी और बिचौलियों की भूमिका कम नहीं होगी तब तक यह स्थिति बनी रहेगी।

FAQ – Israel-US Iran War और किसान संकट से जुड़े सवाल

सवाल: Israel-US Iran War से भारतीय किसानों पर क्या असर पड़ा? जवाब: Israel-US Iran War के कारण खाड़ी देशों को निर्यात ठप हो गया। सोलापुर के केला किसानों को पहले जहां 20 से 25 रुपये प्रति किलो मिलता था वहां अब केवल 5 से 9 रुपये मिल रहे हैं। 1,300 से अधिक कंटेनर फंसे हुए हैं।

सवाल: किसान को कितना नुकसान हो रहा है? जवाब: किसान दिग्गविजय मोरे ने 6 एकड़ में 10 लाख रुपये लगाए थे और 25 लाख की उम्मीद थी। अब केवल 6 लाख मिल रहे हैं यानी 4 लाख का सीधा नुकसान।

सवाल: बाजार में केले का क्या भाव है? जवाब: खुदरा बाजार में केला 80 से 85 रुपये प्रति किलो बिक रहा है जबकि किसान को केवल 5 से 9 रुपये मिल रहे हैं। यह 10 से 15 गुना का अंतर है।

सवाल: इस संकट से निपटने के लिए क्या किया जाना चाहिए? जवाब: सरकार को किसानों के लिए राहत पैकेज देना चाहिए, बिचौलियों पर नकेल कसनी चाहिए, ई-नाम को प्रभावी बनाना चाहिए और फंसे कंटेनरों के लिए वैकल्पिक बाजार की व्यवस्था करनी चाहिए।

Israel-US Iran War: निष्कर्ष

Israel-US Iran War की आग में सबसे ज्यादा जल रहा है भारत का किसान। सोलापुर के केला किसान इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। किसान को 5 से 9 रुपये और बाजार में 80 से 85 रुपये का यह फर्क दर्शाता है कि हमारी कृषि आपूर्ति श्रृंखला में बिचौलियों का कितना बड़ा वर्चस्व है। रमजान जैसे त्योहारी सीजन में भी किसानों को घाटा हो रहा है और उपभोक्ता महंगाई से परेशान है। सरकार और उपभोक्ता संरक्षण एजेंसियों को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि किसान और उपभोक्ता दोनों को न्याय मिल सके।

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