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Onion Export: भारतीय प्याज निर्यात में भारी गिरावट, बांग्लादेश और सऊदी अरब ने मुंह फेरा, पाकिस्तान की सस्ती प्याज बनी बड़ी चुनौती, किसानों की बढ़ी चिंता

Onion Export

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Onion Export: भारत के प्याज निर्यात पर इस साल दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ बांग्लादेश और सऊदी अरब जैसे परंपरागत और भरोसेमंद खरीदार देशों ने भारतीय प्याज से किनारा कर लिया है तो दूसरी तरफ कमजोर मुद्रा की बदौलत पाकिस्तान की सस्ती प्याज ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत के सामने कड़ी प्रतिस्पर्धा खड़ी कर दी है। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से दिसंबर के दौरान भारत का प्याज निर्यात मूल्य के लिहाज से करीब 22 प्रतिशत घटकर 298.69 मिलियन डॉलर पर आ गया जो पिछले साल इसी अवधि में 380.08 मिलियन डॉलर था। यह गिरावट महाराष्ट्र के प्याज किसानों सहित पूरे देश के उन लाखों किसानों के लिए चिंता का सबब बन गई है जो प्याज की खेती पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल अस्थायी मांग में कमी नहीं है बल्कि वैश्विक प्याज बाजार (Onion Export) में एक गहरा संरचनात्मक बदलाव आ रहा है जिसका असर आने वाले वर्षों तक बना रह सकता है।

Onion Export: बांग्लादेश ने क्यों की भारतीय प्याज से दूरी?

बांग्लादेश दशकों से भारत का सबसे बड़ा और सबसे भरोसेमंद प्याज खरीदार (Onion Export) रहा है। पड़ोसी देश होने के कारण परिवहन लागत कम थी और भारतीय प्याज की गुणवत्ता भी बांग्लादेश के बाजार में पसंद की जाती थी। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। हॉर्टिकल्चर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजित शाह ने बताया कि बांग्लादेश ने पिछले कुछ वर्षों में अपने यहां प्याज की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया है। सरकारी प्रोत्साहन और बेहतर कृषि तकनीक की बदौलत बांग्लादेश अब अपनी घरेलू जरूरत का अधिकांश हिस्सा खुद पूरा करने में सक्षम हो गया है। यही वजह है कि जो देश कभी हर साल लाखों टन भारतीय प्याज खरीदता था आज वह भारत से लगभग खरीद ही नहीं कर रहा।

Onion Export: सऊदी अरब ने भी बदले अपने आपूर्तिकर्ता

सऊदी अरब भी भारत के प्रमुख प्याज खरीदारों (Onion Export) में रहा है लेकिन अब वह यमन और सूडान जैसे देशों से प्याज मंगाने लगा है। इसकी मुख्य वजह कीमत है। यमन और सूडान में प्याज की उत्पादन लागत कम है और वहां से सऊदी अरब को आयात भी सस्ता पड़ता है। खाड़ी देशों के बाजार में भारत की जो पकड़ थी वह अब धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है। अजित शाह ने स्पष्ट कहा कि गुणवत्ता के मामले में भारतीय प्याज अब भी दूसरे देशों से बेहतर है लेकिन आज के दौर में अधिकांश आयातक देश गुणवत्ता से ज्यादा कीमत को प्राथमिकता दे रहे हैं।

Onion Export: पाकिस्तानी प्याज से बढ़ी कड़ी प्रतिस्पर्धा

भारत के प्याज निर्यात के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती पाकिस्तान की तरफ से आ रही है। पाकिस्तानी रुपये के मूल्य में भारी गिरावट के कारण पाकिस्तान की प्याज अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहद सस्ती हो गई है। जब किसी देश की मुद्रा कमजोर होती है तो उसके निर्यात उत्पाद स्वाभाविक रूप से विदेशी मुद्रा में सस्ते हो जाते हैं। इसी का फायदा उठाकर पाकिस्तान उन बाजारों में घुस गया है जहां पहले भारत का वर्चस्व था। कई खरीदार देश अब भारतीय प्याज (Onion Export) की जगह पाकिस्तानी प्याज को प्राथमिकता दे रहे हैं क्योंकि वह कीमत में काफी कम पड़ती है।

Onion Export: पुराने निर्यात प्रतिबंधों ने बढ़ाई मुश्किल

भारत के प्याज निर्यात की मौजूदा दुर्दशा की एक बड़ी वजह पुराने निर्यात प्रतिबंधों का दूरगामी असर भी है। घरेलू बाजार में प्याज की कमी और बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार ने दिसंबर 2023 से मार्च 2024 तक प्याज के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। हालांकि मार्च 2025 तक सभी पाबंदियां हटा ली गईं लेकिन तब तक खेल बदल चुका था। जब भारत ने निर्यात बंद किया था तब पारंपरिक खरीदार देशों ने मजबूरी में पाकिस्तान, सूडान और यमन से प्याज खरीदना शुरू किया। अब इन देशों ने उन वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं के साथ लंबे समय के कारोबारी रिश्ते बना लिए हैं। पहले जहां ये देश दो से तीन महीने ही बाजार में रहते थे अब छह से नौ महीने तक टिके रहते हैं।

Onion Export: आंकड़े बताते हैं गंभीर स्थिति

सरकारी आंकड़े इस संकट की गंभीरता को स्पष्ट रूप से बयान करते हैं। डीजीसीआईएस यानी महानिदेशालय वाणिज्यिक सूचना और सांख्यिकी के आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से दिसंबर के दौरान भारत का प्याज निर्यात मूल्य के लिहाज से 22 प्रतिशत घटकर 298.69 मिलियन डॉलर पर आ गया जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 380.08 मिलियन डॉलर था। दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान निर्यात की मात्रा यानी कितने टन प्याज भेजा गया वह 37 प्रतिशत बढ़कर 11.33 लाख टन पहुंच गया। यानी भारत ने पहले से अधिक प्याज भेजा लेकिन उससे मिला पैसा कम हो गया। इसका सीधा अर्थ है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्याज की कीमत गिर गई है और भारत को कम दाम पर अधिक माल बेचना पड़ा।

Onion Export: घरेलू बाजार में भी सुस्त हैं भाव

निर्यात बाजार की मुश्किलों का असर घरेलू मंडियों पर भी पड़ रहा है। देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्य महाराष्ट्र की मंडियों में हाल के हफ्तों में कीमतों में नरमी देखी गई है। प्याज के भाव 775 से 1,500 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में बने हुए हैं जो किसानों की लागत से बहुत कम है। देशभर में औसत थोक कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। इससे किसानों को उनकी मेहनत का उचित मुआवजा नहीं मिल पा रहा।

Onion Export: रबी सीजन में क्या होगी स्थिति

निर्यातकों का कहना है कि इस बार रबी प्याज की पैदावार पिछले वर्ष से बेहतर रहने का अनुमान है। अच्छी फसल का मतलब है बाजार में आपूर्ति और बढ़ेगी। ऐसे में अगर निर्यात की मांग नहीं बढ़ी तो घरेलू बाजार में अधिक आवक से कीमतें और नीचे जा सकती हैं जो किसानों के लिए और मुसीबत खड़ी करेगा। फिलहाल भारतीय प्याज का निर्यात मुख्य रूप से श्रीलंका और कुछ पश्चिम एशियाई देशों में हो रहा है लेकिन यह उस कमी को पूरा करने में सक्षम नहीं है जो बांग्लादेश और सऊदी अरब के बाजार से जाने से हुई है।

भारत के प्याज उद्योग को इस संकट से उबरने के लिए नए बाजारों की तलाश करनी होगी, निर्यात नीति में स्थिरता लानी होगी और प्रतिस्पर्धी कीमत पर माल उपलब्ध कराने की क्षमता विकसित करनी होगी। बार-बार निर्यात पर रोक और नीतिगत अनिश्चितता से विदेशी खरीदारों का भरोसा टूटता है जिसे दोबारा जीतना आसान नहीं होगा।

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