Wheat Production: बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने इस बार गेहूं की फसल (Wheat Production) को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। निजी कृषि शोध एजेंसी एग्रीवॉच के सर्वे के अनुसार देशभर में गेहूं उत्पादन में 1 से 1.5 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। उत्तर प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित राज्य है जहां 23 जिलों में नुकसान दर्ज हुआ है। सरकार ने इस वर्ष 120.21 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य रखा था जिस पर अब दबाव बनता दिख रहा है।
जब गेहूं की बाली पकने वाली थी, तब आसमान से ओलों की मार ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
मार्च 2026 का महीना देश के गेहूं किसानों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। 11 से 22 मार्च के बीच उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने जमकर तबाही मचाई। खड़ी फसल गिर गई, दाने सिकुड़ गए और उत्पादन के अनुमान (Wheat Production) लड़खड़ा गए। इस पर रॉलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के निर्देश पर निजी कृषि शोध एजेंसी एग्रीवॉच ने एक विस्तृत सर्वे किया जिसके नतीजे किसानों और नीति निर्माताओं दोनों के लिए चिंता का विषय हैं।
Wheat Production: उत्पादन में कितनी गिरावट का अनुमान
एग्रीवॉच के शुरुआती आकलन के अनुसार इस वर्ष देश में कुल गेहूं उत्पादन में 1 से 1.5 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। सरकार ने पहले 120.21 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया था। इस अनुमान के अनुसार वास्तविक उत्पादन लक्ष्य से 1.2 से 1.8 मिलियन टन कम रह सकता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट यदि मंडी में आवक को प्रभावित करती है तो आने वाले महीनों में गेहूं और आटे की कीमतों पर इसका सीधा असर देखा जा सकता है।
Wheat Production: कौन से राज्य सबसे ज्यादा हुए प्रभावित?
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार पंजाब, बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में 10 से 15 फीसदी तक उत्पादन घटने की आशंका है। इसके अलावा पांच राज्यों के 21 जिलों में 5 से 10 फीसदी फसल प्रभावित हुई है। हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान में नुकसान की तीव्रता अपेक्षाकृत कम रही। पश्चिम बंगाल और गुजरात में असर बेहद सीमित रहा।
Wheat Production: उत्तर प्रदेश सबसे बुरी तरह प्रभावित
राज्यों में उत्तर प्रदेश की स्थिति सबसे चिंताजनक है। यहां 23 जिलों में अलग-अलग स्तर का नुकसान दर्ज किया गया है। बिजनौर जिले में नुकसान का स्तर सबसे अधिक बताया गया है जहां तेज हवाओं और भारी बारिश ने फसल को गिरा दिया।
हापुड़ के किसान बलबीर त्यागी ने बताया कि इस बार बारिश ने तापमान को कुछ हद तक संतुलित भी किया और 2022 जैसी लंबी गर्मी की स्थिति नहीं बनी, इसलिए कुल असर सीमित रह सकता है। हालांकि जिन इलाकों में तेज बारिश और हवाएं चलीं, वहां नुकसान अधिक है।
Wheat Production: पंजाब और बिहार में भी गंभीर हालात
पंजाब में कई जिलों में असर दर्ज किया गया है हालांकि गंभीर नुकसान सीमित क्षेत्रों तक ही रहा। बिहार के 10 जिलों में फसल प्रभावित हुई है जिनमें बेगूसराय और सुपौल में नुकसान सबसे अधिक रहने की संभावना जताई गई है।
हरियाणा में फसल गिरने और अत्यधिक नमी के कारण अधिकांश क्षेत्रों में मध्यम स्तर का नुकसान हुआ है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही।
Wheat Production: दाने की गुणवत्ता पर भी पड़ा असर
नुकसान केवल मात्रा तक सीमित नहीं है, गेहूं के दाने की गुणवत्ता पर भी गहरा असर पड़ा है। किसानों ने बताया कि ओलों की मार और फसल गिरने से दानों की चमक कम हो गई है और कई जगहों पर दाने सिकुड़ गए हैं।
बारिश से पहले तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से भी फसल पर दबाव था। गुणवत्ता में गिरावट का सीधा असर मंडी में मिलने वाले भाव पर पड़ सकता है क्योंकि कम चमक वाले और सिकुड़े हुए दाने आटा मिलों में कम मूल्य पर बिकते हैं।
Wheat Production: 2022 जितना गंभीर नहीं लेकिन सतर्कता जरूरी
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि 2022 में लंबे समय तक चली गर्मी के कारण गेहूं उत्पादन को जो भारी नुकसान हुआ था, इस बार स्थिति उतनी गंभीर नहीं है। 2022 में उत्पादन अनुमान से करीब 3 फीसदी कम रहा था। इस वर्ष बेमौसम बारिश ने तापमान को नियंत्रित रखने में भी कुछ सहायता की जिससे व्यापक तबाही से बचाव हुआ।
फिर भी जहां फसल पकने के चरण में बारिश और ओलावृष्टि हुई, वहां उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
Wheat Production: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इस वर्ष गेहूं उत्पादन का सरकारी लक्ष्य (Wheat Production) क्या था?
सरकार ने वर्ष 2026 के लिए 120.21 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया था जिस पर अब मौसमी प्रभाव के कारण दबाव बन रहा है।
किस एजेंसी ने यह सर्वे किया?
यह सर्वे रॉलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के निर्देश पर निजी कृषि शोध एजेंसी एग्रीवॉच ने कराया।
बारिश और ओलावृष्टि किस अवधि में हुई?
11 से 22 मार्च 2026 के बीच उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाएं दर्ज की गईं।
क्या इससे गेहूं की कीमतें बढ़ेंगी?
उत्पादन में गिरावट और गुणवत्ता प्रभावित होने से मंडियों में आवक कम हो सकती है जिसका असर गेहूं और आटे की कीमतों (Wheat Production) पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार के पास पर्याप्त बफर स्टॉक होने से कीमतों में भारी उछाल की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।
कौन से जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?
उत्तर प्रदेश का बिजनौर, बिहार के बेगूसराय और सुपौल तथा पंजाब के कुछ जिलों में नुकसान का स्तर सर्वाधिक बताया गया है।
Wheat Production: निष्कर्ष
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि भारतीय कृषि अभी भी मौसम की अनिश्चितताओं के सामने कितनी असहाय है। गेहूं उत्पादन में संभावित गिरावट किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है। यह जरूरी है कि सरकार प्रभावित किसानों के लिए त्वरित मुआवजा प्रक्रिया शुरू करे और आगामी रबी सीजन के लिए फसल बीमा योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। किसान की रक्षा करना곧 देश की खाद्य सुरक्षा की रक्षा करना है।
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