Posted in

West Bengal: पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बड़ा फैसला, सरकार सीधे किसानों से खरीदेगी 12 लाख टन आलू, 9.50 रुपये प्रति किलो मिलेगा दाम, 110-120 लाख टन बंपर उत्पादन की संभावना, छोटे किसानों को राहत

West Bengal
West Bengal

West Bengal: पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने गुरुवार 27 फरवरी 2026 को किसानों से सीधे 9.50 रुपये प्रति किलो की दर पर आलू खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला है क्योंकि अच्छी सर्दी की वजह से इस बार बंपर फसल होने की संभावना है। बंगाल में आलू की खेती बड़े पैमाने पर होती है और किसानों की आजीविका का यह प्रमुख स्रोत भी है। आलू किसानों को राहत देने के लिए बंगाल सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है। राज्य कुल 12 लाख टन आलू सीधे किसानों से 9.50 रुपये प्रति किलो पर खरीदेगा। हर किसान सरकार को 35 क्विंटल आलू बेच सकेगा। राज्य सरकार यह पक्का करना चाहती है कि छोटे और सीमांत किसानों को अधिक उत्पादन की वजह से मजबूरी में कम दामों पर आलू बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े। राज्य के पंचायत मंत्री और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कृषि से जुड़े मामलों के सलाहकार प्रदीप मजूमदार ने गुरुवार को नबन्ना में कैबिनेट मीटिंग के बाद यह जानकारी दी। यह फैसला विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आलू उत्पादक जिलों का चुनावी प्रभाव बहुत बड़ा है। कृषि विभाग के सूत्रों ने बताया कि उम्मीद है कि इस बार राज्य में 110 से 120 लाख टन आलू का उत्पादन हो सकता है। मार्च की शुरुआत से कटाई शुरू हो जाएगी। आमतौर पर जब भी आलू का कुल उत्पादन 90 लाख टन के पार जाता है तो कीमत बहुत गिर जाती है। इस बार आलू का भाव 5 रुपये प्रति किलो तक गिरने की आशंका थी जबकि किसान एक किलो उगाने में लगभग 6.50 रुपये खर्च करते हैं। ऐसे में किसानों को भारी नुकसान होता। लेकिन सरकार के इस फैसले से उन्हें राहत मिलेगी।

West Bengal: आलू किसानों की चुनावी अहमियत

अधिकारियों ने कहा कि इस फैसले से पता चलता है कि मुख्यमंत्री विधानसभा चुनाव से पहले आलू किसानों की आय के साथ कोई जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं। पहले बंपर आलू की फसल की वजह से अक्सर लाखों सीमांत किसानों को मजबूरी में कम दामों पर आलू बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता था। एक अधिकारी ने कहा कि हुगली, पूर्वी बर्दवान, बीरभूम और पश्चिमी मिदनापुर में आलू किसान चुनावी सफलता की चाबी हैं। बंगाल में कोई भी सत्ताधारी पार्टी लाखों नाखुश आलू किसानों के साथ चुनाव नहीं लड़ना चाहेगी। ये चार जिले पश्चिम बंगाल के प्रमुख आलू उत्पादक जिले हैं। यहां लाखों किसान आलू की खेती करते हैं। इन जिलों में सैकड़ों विधानसभा सीटें हैं। पिछली लेफ्ट फ्रंट सरकार ने भी चुनाव से पहले किसानों से आलू खरीदे थे। तृणमूल कांग्रेस की सरकार भी इससे अलग नहीं है। प्रशासन में कई लोगों का मानना था कि तृणमूल ने चुनाव से पहले लगभग 14 लाख टन आलू खरीदकर 2021 के विधानसभा चुनाव में हुगली और पूर्वी बर्दवान में क्लीन स्वीप किया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में इन दोनों जिलों के बड़े हिस्सों से तृणमूल का सफाया हो गया था। 2021 विधानसभा चुनाव में यह तृणमूल के लिए एक बड़ा बदलाव था। 2019 में इन इलाकों में भाजपा ने कम से कम दो लोकसभा सीटें जीती थीं। माना जाता है कि सही समय पर आलू खरीदने के फैसले ने पांच साल पहले सत्ताधारी पार्टी को बढ़त दिलाई थी।

West Bengal: छठी बार किसानों से सीधी खरीद

मंत्री मजूमदार ने कहा कि यह छठी बार होगा जब राज्य सरकार सीधे किसानों से आलू खरीदेगी। मंत्री ने कहा कि जब भी किसान मुश्किल में थे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दखल दिया और फसल के लिए सपोर्ट प्राइस का ऐलान किया। यह कहना सही नहीं है कि यह फैसला सिर्फ इसलिए लिया गया है क्योंकि चुनाव पास आ रहे हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी राज्य में ऐसे फैसलों का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। बंगाल सरकार ने पहले भी कई बार आलू खरीदा है। लेकिन चुनाव से कुछ महीने पहले यह फैसला लेना राजनीतिक रूप से सूझबूझ भरा कदम है। किसान वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा हैं। उनकी समस्याओं का समाधान करने से सरकार को राजनीतिक लाभ मिलता है।

West Bengal: बंपर उत्पादन से कीमतों में गिरावट की आशंका

कृषि विभाग के सूत्रों ने बताया कि उम्मीद है कि इस बार राज्य में 110 से 120 लाख टन आलू का उत्पादन हो सकता है। मार्च की शुरुआत से कटाई शुरू हो जाएगी। यह बहुत बड़ा उत्पादन है। सामान्य वर्षों में पश्चिम बंगाल में 80 से 90 लाख टन आलू का उत्पादन होता है। इस बार 30 से 40 लाख टन अधिक उत्पादन हो सकता है। एक सूत्र ने कहा कि आमतौर पर जब भी आलू का कुल उत्पादन 90 लाख टन के पार जाता है तो कीमत बहुत गिर जाती है। यह अनुमान लगाया गया था कि इस बार आलू का भाव 5 रुपये प्रति किलो तक गिर सकता है जबकि किसान एक किलो उगाने में लगभग 6.50 रुपये खर्च करते हैं। इसका मतलब है कि किसानों को प्रति किलो 1.50 रुपये का नुकसान होता। लाखों टन के हिसाब से यह नुकसान बहुत बड़ा होता। इसी को देखते हुए सरकार ने 9.50 रुपये प्रति किलो का भाव तय किया है। इससे किसानों को प्रति किलो 3 रुपये का लाभ होगा।

West Bengal: छोटे किसानों की मजबूरी

एक अधिकारी ने बताया कि अधिकांश किसानों के लिए आलू को कोल्ड स्टोरेज में रखना और दाम बढ़ने का इंतजार करना मुश्किल होता है। अधिकारी ने कहा कि आलू एक कैश क्रॉप है। छोटे किसान स्थानीय साहूकारों से लोन लेकर आलू की खेती में पैसा लगाते हैं। क्योंकि उन्हें लोन चुकाना होता है इसलिए वे अपना स्टॉक रोक नहीं सकते। बोरो सीजन यानी गर्मी की धान की खेती में जो भी पैसा चाहिए उसे वे फिर से निवेश करते हैं। इसीलिए जब आलू का बंपर उत्पादन होता है तो सरकार का दखल जरूरी होता है। छोटे और सीमांत किसानों के पास कोल्ड स्टोरेज की सुविधा नहीं होती। कोल्ड स्टोरेज का किराया भी अधिक होता है। बड़े किसान और व्यापारी आलू को कोल्ड स्टोरेज में रख सकते हैं और जब कीमत बढ़ती है तब बेचते हैं। लेकिन छोटे किसान को तुरंत बेचना पड़ता है।

West Bengal: अन्य राज्यों में भी बंपर उत्पादन

मजूमदार ने कहा कि इस फैसले से बंगाल के किसानों को मदद मिलेगी क्योंकि जिन राज्यों में शुरुआती किस्म की फसल हो चुकी है वहां आलू की कीमत पहले से ही कम है। पूरी सर्दियों में अच्छे मौसम की वजह से पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे दूसरे आलू उगाने वाले राज्यों में बंपर उत्पादन हुआ है। जब पूरे देश में आलू का उत्पादन अधिक होता है तो कीमतें गिर जाती हैं।

Read More Here

Tractor Implement Selection: ट्रैक्टर खरीदना ही काफी नहीं, सही कृषि यंत्र का चुनाव भी जरूरी, जानें क्या है पूरा गणित

Electric Tractor: भारतीय खेती में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर की एंट्री, 2026 में होगा बड़ा बदलाव, डीजल की जगह बिजली से चलेंगे ट्रैक्टर

Kisan Credit Card: किसानों के लिए बड़ी राहत, RBI ने किसान क्रेडिट कार्ड की अवधि बढ़ाने का दिया प्रस्ताव, जानें क्या होंगे फायदे

Crop Price: एमएसपी बन रही छलावा, कागजों में बढ़ रहे दाम, किसानों की जेब हो रही खाली

SBI Report: भारतीय कृषि निर्यात को बड़ा बूस्ट, अमेरिकी बाजार में 75% उत्पादों पर शून्य शुल्क, SBI रिपोर्ट में खुलासा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »