US Tarriff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अमेरिका में आयातित होने वाले सामानों पर 10 प्रतिशत का अस्थायी आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। यह शुल्क 24 फरवरी से 150 दिवसों तक प्रभावी रहेगा। इस निर्णय से भारत को विशेष राहत प्राप्त हुई है, क्योंकि पूर्व में भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा रहा था, जो अब घटकर 10 प्रतिशत रह गया है। ट्रंप ने इस घोषणा को “मूलभूत अंतर्राष्ट्रीय भुगतान समस्याओं को संबोधित करने के लिए अस्थायी आयात अधिभार” संज्ञा दी है।
यह घोषणा ऐसे समय पर आई है जब हाल ही में अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप द्वारा पूर्व में लगाए गए व्यापक टैरिफ को 6-3 के बहुमत से गैरकानूनी घोषित किया था। न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स द्वारा प्रस्तुत निर्णय में कहा गया कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण किया है। तथापि, ट्रंप ने न्यायालय के इस निर्णय पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की तथा अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा कर दी।
US Tarriff: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कार्यकारी शाखा को व्यापार नीति निर्धारण में असीमित शक्ति प्राप्त नहीं है तथा संसद की भूमिका सर्वोपरि रहती है। यह निर्णय अमेरिकी संविधान में शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को पुनः स्थापित करता है।
6-3 के बहुमत से लिया गया यह निर्णय दर्शाता है कि न्यायालय में भी विभाजन विद्यमान था। अल्पमत में रहे न्यायाधीशों ने तर्क दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिस्थितियों में राष्ट्रपति को शीघ्र निर्णय लेने की आवश्यकता होती है। परंतु बहुमत ने यह स्पष्ट किया कि व्यापार शुल्क लगाना मूलतः विधायी शक्ति है।
US Tarriff: वर्तमान टैरिफ संरचना, भारत पर वास्तविक प्रभाव
अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के पश्चात ट्रंप प्रशासन का पूर्व में लगाया गया 18 प्रतिशत टैरिफ कानूनी आधार खो चुका है, जिसके कारण अब भारत पर सीधे वही दर लागू नहीं मानी जाएगी। वर्तमान व्यवस्था में भारत के लिए आधार MFN (Most Favored Nation) टैरिफ लगभग 3.5 प्रतिशत रहता है, जबकि इसके ऊपर ट्रंप द्वारा घोषित 10 प्रतिशत का अस्थायी वैश्विक आयात शुल्क जोड़ दिया गया है।
इस प्रकार भारत से अमेरिका जाने वाले सामानों पर कुल प्रभावी टैरिफ लगभग 13.5 प्रतिशत बनता है। अर्थात न तो 18 प्रतिशत तथा न ही केवल 10 प्रतिशत, अपितु व्यावहारिक रूप से भारतीय निर्यातकों को अमेरिका में औसतन 13.5 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। यह पूर्व की 21.5 प्रतिशत (3.5 + 18) की तुलना में 8 प्रतिशत की कमी है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करेगी।
US Tarriff: भारत पर अमेरिकी टैरिफ संरचना सारणी
| घटक | पूर्व दर | वर्तमान दर | परिवर्तन |
| आधार MFN टैरिफ | 3.5% | 3.5% | कोई परिवर्तन नहीं |
| ट्रंप का विशेष टैरिफ | 18% (खारिज) | 10% (अस्थायी) | -8% |
| कुल प्रभावी दर | 21.5% | 13.5% | -8% |
| अवधि | निरंतर | 150 दिवस (24 फरवरी से) | अस्थायी |
| कृषि उत्पाद छूट | नहीं | हां (चयनित) | नई छूट |
US Tarriff: कृषि उत्पादों को विशेष राहत
अमेरिका की नवीन नीति का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू कृषि उत्पादों को प्रदान की गई विशेष छूट है। व्हाइट हाउस की तथ्य पत्रक के अनुसार, अमेरिका ने बीफ, टमाटर तथा संतरे जैसी आवश्यक कृषि वस्तुओं को 10 प्रतिशत आयात शुल्क से बाहर रखा है। वास्तव में, अमेरिका में इन उत्पादों की मांग अधिक है, जबकि उसका घरेलू उत्पादन इन आवश्यकताओं को पूर्ण नहीं कर पाता।
ऐसी परिस्थिति में आयात पर अतिरिक्त बोझ डालने से महंगाई तथा आपूर्ति संकट उत्पन्न हो सकता है। उर्वरक तथा कुछ प्राकृतिक संसाधनों को भी टैरिफ छूट वाली सूची में सम्मिलित किया गया है, ताकि कृषि एवं खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव न पड़े। यह निर्णय अमेरिका की घरेलू आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
US Tarriff: कृषि उत्पाद छूट सूची
| उत्पाद श्रेणी | छूट स्थिति | भारतीय निर्यातकों के लिए प्रासंगिकता |
| बीफ | पूर्ण छूट | निम्न (भारत बीफ निर्यात नहीं करता) |
| टमाटर | पूर्ण छूट | मध्यम (प्रसंस्कृत टमाटर उत्पाद) |
| संतरे/खट्टे फल | पूर्ण छूट | मध्यम (प्रसंस्कृत फल उत्पाद) |
| उर्वरक | पूर्ण छूट | उच्च (भारत प्रमुख निर्यातक) |
| अन्य कृषि उत्पाद | 13.5% टैरिफ | विविध (उत्पाद आधारित) |
US Tarriff: भारत-अमेरिका व्यापार समझौता बरकरार
ट्रंप के कथन के अनुसार, भारत-अमेरिका समझौते के अंतर्गत भारत ने रूस से तेल आयात घटाने तथा अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद क्रय करने पर सहमति व्यक्त की थी। बदले में अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ को पहले 18 प्रतिशत तक कम किया था। अब नए 10 प्रतिशत शुल्क के साथ भारतीय पक्ष को और राहत प्राप्त हुई है।
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि भारत के साथ समझौता पूर्ववत रहेगा, केवल इसकी संरचना संशोधित की गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर प्रशंसा करते हुए दोनों देशों के संबंधों को सुदृढ़ बताया। यह द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में स्थिरता का संकेत है तथा दोनों देशों के मध्य आर्थिक सहयोग को बल प्रदान करता है।
US Tarriff: भारतीय निर्यातकों पर संभावित प्रभाव
यह नीति परिवर्तन भारतीय निर्यातकों के लिए सकारात्मक है। 8 प्रतिशत टैरिफ कमी से मूल्य प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा। कृषि उत्पादों, उर्वरकों तथा प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यातकों को विशेष लाभ होगा। तथापि, 150 दिवसों की अस्थायी अवधि के पश्चात नीति में पुनः परिवर्तन की संभावना बनी रहती है, अतः निर्यातकों को दीर्घकालिक रणनीति बनानी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को क्यों खारिज किया?
उत्तर: न्यायालय ने 6-3 के बहुमत से इसे गैरकानूनी घोषित किया क्योंकि राष्ट्रपति ने अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण किया था। निर्णय में स्पष्ट किया गया कि व्यापार शुल्क लगाना मूलतः विधायी (संसदीय) शक्ति है।
प्रश्न 2: भारत पर वर्तमान में कुल कितना अमेरिकी टैरिफ लागू है?
उत्तर: कुल प्रभावी टैरिफ लगभग 13.5 प्रतिशत है (3.5% आधार MFN + 10% नया अस्थायी शुल्क)। यह पिछली दर (21.5%) से 8% कम है।
प्रश्न 3: किन कृषि उत्पादों को अमेरिकी टैरिफ से छूट मिली है?
उत्तर: बीफ, टमाटर, संतरे और उर्वरकों को 10 प्रतिशत आयात शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान की गई है।
प्रश्न 4: क्या भारत-अमेरिका व्यापार समझौता प्रभावित हुआ है?
उत्तर: नहीं, समझौता पूर्ववत है। संरचना में संशोधन हुआ है लेकिन द्विपक्षीय व्यापार और रणनीतिक सहयोग सामान्य रूप से जारी रहेंगे।
प्रश्न 5: 150 दिवस की अस्थायी अवधि के पश्चात क्या होगा?
उत्तर: यह शुल्क जुलाई 2026 तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद इसे समाप्त किया जा सकता है, विस्तारित किया जा सकता है या नई नीति लाई जा सकती है।
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