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TREM Stage V: अक्टूबर 2026 से लागू होंगे नए उत्सर्जन मानक, 10 से 20 प्रतिशत तक महंगे हो सकते हैं ट्रैक्टर, अभी खरीदें या बाद में, जानें पूरी सच्चाई

TREM Stage V
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TREM Stage V: देश के किसानों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने ट्रैक्टरों के लिए नए उत्सर्जन मानक यानी TREM Stage V लागू करने का प्रस्ताव रखा है जो अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो सकते हैं। इन नए मानकों का मकसद ट्रैक्टरों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण को कम करना है जो पर्यावरण के लिहाज से एक बड़ा कदम है। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है जो सीधे किसानों की जेब से जुड़ा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि नए उत्सर्जन मानकों के लागू होने के बाद ट्रैक्टरों की कीमत 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। ऐसे में हर किसान के मन में यह सवाल उठ रहा है कि ट्रैक्टर खरीदने का सही समय अभी है या अक्टूबर 2026 के बाद। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।

TREM Stage V क्या है और क्यों जरूरी है?

TREM का पूरा नाम है Tractor and Road Vehicle Emission Measurement यानी ट्रैक्टर और सड़क वाहन उत्सर्जन मापन। यह ट्रैक्टरों और कृषि उपकरणों के इंजन से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए मानक हैं। भारत में अभी तक TREM Stage IV मानक लागू हैं। अब सरकार Stage V लागू करने की तैयारी कर रही है जो यूरोपीय Stage V मानकों के समतुल्य है। इन नए मानकों के तहत ट्रैक्टर के इंजन से निकलने वाले पार्टिकुलेट मैटर यानी PM, नाइट्रोजन ऑक्साइड यानी NOx, हाइड्रोकार्बन और कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा को मौजूदा स्तर से काफी कम करना होगा। इसके लिए ट्रैक्टर निर्माताओं को अपने इंजन की तकनीक में बड़े बदलाव करने होंगे।

भारत में कृषि क्षेत्र से होने वाला प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुकी है। लाखों ट्रैक्टर खेतों में और सड़कों पर चलते हैं और इनसे निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण में बड़ा योगदान देता है। खासकर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्यों में ट्रैक्टरों की संख्या बहुत अधिक है। TREM Stage V लागू होने से इन राज्यों में वायु गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।

TREM Stage V: नए मानकों के लिए ट्रैक्टर में क्या बदलाव होगा?

TREM Stage V के तहत ट्रैक्टर निर्माताओं को अपने इंजन में कई तकनीकी बदलाव करने होंगे। सबसे बड़ा बदलाव होगा Diesel Particulate Filter यानी DPF लगाना जो इंजन से निकलने वाले महीन कणों को रोकता है। इसके अलावा Selective Catalytic Reduction यानी SCR तकनीक भी अपनानी होगी जो नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करती है। इन तकनीकों के साथ ट्रैक्टर में Exhaust Gas Recirculation यानी EGR सिस्टम भी लगाना पड़ सकता है। ये सभी तकनीकें यूरोप और अमेरिका में पहले से इस्तेमाल हो रही हैं लेकिन भारत में इनका उपयोग अभी सीमित है। इन अतिरिक्त उपकरणों और उन्नत इंजन तकनीक की वजह से ट्रैक्टर का उत्पादन खर्च बढ़ेगा जिसका बोझ अंततः किसानों पर पड़ेगा।

TREM Stage V: कितनी बढ़ेगी ट्रैक्टर की कीमत?

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार TREM Stage V लागू होने के बाद ट्रैक्टरों की कीमत में 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। अगर इसे रुपयों में देखें तो जो ट्रैक्टर आज 6 लाख रुपये का है वह Stage V के बाद 6 लाख 60 हजार से 7 लाख 20 हजार रुपये तक का हो सकता है। जो ट्रैक्टर 8 लाख रुपये का है वह 8 लाख 80 हजार से 9 लाख 60 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। और जो 10 लाख रुपये का है वह 11 से 12 लाख रुपये तक हो सकता है। यह बढ़ोतरी छोटे और सीमांत किसानों के लिए बहुत बड़ी रकम है। यही कारण है कि इस मुद्दे पर किसान वर्ग में चिंता बढ़ रही है।

TREM Stage V: अभी खरीदें या बाद में, जानें क्या है सही फैसला?

यह सबसे अहम सवाल है जो इस समय लाखों किसानों के मन में है। इसका जवाब हर किसान की परिस्थिति पर निर्भर करता है लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं जो इस फैसले को लेने में मदद कर सकती हैं।

अगर आप अभी ट्रैक्टर खरीदते हैं यानी अक्टूबर 2026 से पहले तो आपको Stage IV मानक वाला ट्रैक्टर मिलेगा जो मौजूदा कीमत पर उपलब्ध है। आप 10 से 20 प्रतिशत की कीमत बढ़ोतरी से बच जाएंगे। पुराने मानक का ट्रैक्टर भी खेती के लिए पूरी तरह सक्षम है और कई वर्षों तक काम करेगा। Stage IV के ट्रैक्टरों की सर्विस और स्पेयर पार्ट्स की व्यवस्था पहले से देशभर में उपलब्ध है।

दूसरी तरफ अगर आप अक्टूबर 2026 के बाद खरीदते हैं तो आपको Stage V वाला ट्रैक्टर मिलेगा जो अधिक पर्यावरण हितैषी होगा। नई तकनीक से इंजन की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है और ईंधन की बचत हो सकती है। लेकिन कीमत ज्यादा होगी और नई तकनीक के स्पेयर पार्ट्स और सर्विस शुरुआत में महंगे और कम उपलब्ध हो सकते हैं।

विशेषज्ञों की राय में अगर आपको अभी ट्रैक्टर की जरूरत है और आपके पास बजट है तो अक्टूबर 2026 से पहले खरीदना फायदेमंद रहेगा। लेकिन अगर आपकी जरूरत 2027 या उसके बाद की है तो Stage V ट्रैक्टर खरीदना बेहतर होगा क्योंकि तब तक नई तकनीक की कीमतें स्थिर हो जाएंगी और सर्विस नेटवर्क भी मजबूत होगा।

TREM Stage V: ट्रैक्टर उद्योग पर क्या पड़ेगा असर?

TREM Stage V के लागू होने से भारतीय ट्रैक्टर उद्योग पर भी बड़ा असर पड़ने वाला है। Mahindra, TAFE, Sonalika, Escorts Kubota, John Deere और New Holland जैसी प्रमुख कंपनियों को अपनी पूरी उत्पादन प्रक्रिया बदलनी होगी। इंजन के डिजाइन से लेकर असेंबली लाइन तक सब कुछ नए सिरे से तैयार करना होगा। इसमें कंपनियों को भारी निवेश करना होगा जो अंततः ट्रैक्टर की कीमत में जुड़ेगा। छोटी और मझोली ट्रैक्टर कंपनियों के लिए यह बदलाव और भी चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि उनके पास बड़े अनुसंधान और विकास बजट नहीं होते।

उद्योग जगत ने सरकार से अनुरोध किया है कि TREM Stage V लागू करने की समयसीमा को थोड़ा और आगे बढ़ाया जाए ताकि कंपनियों को तैयारी का पर्याप्त समय मिले। साथ ही किसानों के लिए सब्सिडी या वित्तीय सहायता का प्रावधान भी करने की मांग की गई है।

TREM Stage V: सरकार से किसानों को क्या उम्मीद करनी चाहिए?

TREM Stage V लागू होने से ट्रैक्टर महंगे होंगे यह सच है लेकिन किसानों को निराश नहीं होना चाहिए। सरकार इस बदलाव को सुगम बनाने के लिए कई कदम उठा सकती है। PM-Kisan और अन्य कृषि योजनाओं के तहत ट्रैक्टर खरीद पर सब्सिडी बढ़ाई जा सकती है। कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत नए मानक वाले ट्रैक्टरों की खरीद पर अतिरिक्त सहायता मिल सकती है। बैंकों से कृषि ऋण की ब्याज दरें कम करने की संभावना भी है। किसान उत्पादक संगठनों यानी FPO के जरिए सामूहिक खरीद पर विशेष छूट मिल सकती है।

TREM Stage V पर्यावरण के लिए जरूरी है और देर-सवेर यह लागू होगा ही। किसानों को चाहिए कि वे अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से सोच-समझकर फैसला करें। अगर ट्रैक्टर की तत्काल जरूरत है तो अक्टूबर 2026 से पहले खरीदना समझदारी होगी और अगर इंतजार कर सकते हैं तो नई तकनीक के स्थिर होने का इंतजार करना बेहतर रहेगा।

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