Sugarcane Payment: गन्ना किसानों के लिए बुरी खबर है। संसद की उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण समिति की रिपोर्ट में सामने आया है कि पिछले एक साल में गन्ना किसानों का बकाया भुगतान (Sugarcane Payment) 32 गुना बढ़कर ₹16,087 करोड़ से ज्यादा हो गया है। जहां 2023-24 में यह मात्र ₹34 करोड़ था, वहीं 16 फरवरी 2026 तक यह आंकड़ा आसमान छू गया है।
कर्नाटक सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है जहां बकाया ₹4,956 करोड़ (Sugarcane Payment) पहुंच गया है। महाराष्ट्र में ₹4,252 करोड़ और उत्तर प्रदेश में ₹3,287 करोड़ बकाया है। मिल मालिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की गिरती कीमतों, भारी स्टॉक और नकदी संकट को वजह बता रहे हैं, जबकि किसान संगठन सरकार पर सख्ती न करने का आरोप लगा रहे हैं।
यह स्थिति ऐसे समय आई है जब नई गन्ना पेराई सीजन (Sugarcane Payment) शुरू होने वाला है और किसान पुरानी फसल का पैसा वसूलने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। संसदीय समिति की रिपोर्ट ने पूरे गन्ना क्षेत्र में हलचल मचा दी है। आइए विस्तार से जानते हैं कि बकाया क्यों बढ़ा, किन राज्यों पर सबसे ज्यादा असर (Sugarcane Payment) पड़ा है, मिल मालिकों का तर्क क्या है और सरकार क्या कदम उठा रही है।
Sugarcane Payment: 32 गुना उछला गन्ना बकाया
वरिष्ठ सांसद कनिमोझी की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा कि गन्ना किसानों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। 2024-25 सीजन में बकाया ₹497 करोड़ था जो अब 2025-26 में ₹16,087 करोड़ (Sugarcane Payment) से ज्यादा हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल बकाया का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा अभी भी मिलों के पास है।
समिति ने चेतावनी दी कि अगर समय पर भुगतान (Sugarcane Payment) नहीं हुआ तो किसान गन्ने की खेती छोड़ सकते हैं, जिसका असर चीनी उत्पादन और रोजगार पर पड़ेगा। रिपोर्ट में 10 प्रमुख राज्यों का विस्तृत आंकड़ा दिया गया है।
Sugarcane Payment: कर्नाटक सबसे बुरी स्थिति में
कर्नाटक में पिछले दो सालों में लगभग शून्य बकाया था, लेकिन अचानक यह ₹4,956 करोड़ (Sugarcane Payment) हो गया है। राज्य के बेलगाम, विजयपुरा और मांड्या जैसे जिलों के किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। महाराष्ट्र, जो देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है, में ₹4,252 करोड़ बकाया है।
उत्तर प्रदेश में पिछले साल की तुलना में 10 गुना बढ़ोतरी (Sugarcane Payment) हुई है और बकाया ₹3,287 करोड़ पहुंच गया। गुजरात में ₹1,402 करोड़, पंजाब में ₹535 करोड़, हरियाणा में ₹373 करोड़ और मध्य प्रदेश में ₹366 करोड़ बकाया है। उत्तराखंड, बिहार, तमिलनाडु और तेलंगाना में भी सैकड़ों करोड़ रुपये किसानों के अटके पड़े हैं।
Sugarcane Payment: चीनी की गिरती कीमतें और स्टॉक संकट
चीनी मिल संघों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतें (Sugarcane Payment) काफी घटी हैं। ब्राजील और थाईलैंड जैसे देशों से सस्ती चीनी आने से भारतीय चीनी का निर्यात मुश्किल हो गया है। मिलों के पास लाखों टन चीनी का स्टॉक पड़ा है जिसे बेचने में दिक्कत हो रही है।
नकदी की कमी के चलते वे किसानों को भुगतान (Sugarcane Payment) नहीं कर पा रहे। कुछ मिलों ने कहा कि कोविड के बाद बढ़ी क्षमता और लगातार अच्छी पैदावार के कारण स्टॉक बढ़ गया है।
Sugarcane Payment: बढ़ती लागत और बीमारी का डर
गन्ना किसान पहले से ही बढ़ती खेती लागत, पानी की कमी और फसल में लगने वाली बीमारियों से जूझ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मेरठ और सहारनपुर के किसान बताते हैं कि एक एकड़ गन्ने पर खर्च अब ₹1.20 लाख से ज्यादा हो गया है। अगर बकाया (Sugarcane Payment) समय पर नहीं मिला तो अगली फसल की बुवाई कैसे होगी?
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, “मिलें घाटा (Sugarcane Payment) बता रही हैं लेकिन किसान तो हर साल अपना खून-पसीना दे रहा है। सरकार को मिलों पर सख्ती करनी चाहिए।” कई किसान परिवारों ने बैंक कर्ज चुकाने के लिए जमीन बेचने की नौबत आने की बात कही है।
Sugarcane Payment: इथेनॉल ब्लेंडिंग और MSP बढ़ोतरी
केंद्र सरकार ने समस्या को कम करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। चीनी का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹29 से बढ़ाकर ₹31 प्रति किलो (Sugarcane Payment) कर दिया गया है। साथ ही, मिलों को अतिरिक्त चीनी को इथेनॉल बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
2025-26 में इथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य 20 प्रतिशत रखा गया है। इससे मिलों को अतिरिक्त आय होगी और बकाया चुकाने में मदद मिलेगी। कुछ राज्यों में सरकारें अपनी तरफ से बकाया भुगतान के लिए सब्सिडी भी दे रही हैं।
Sugarcane Payment: लाखों परिवार प्रभावित
गन्ना क्षेत्र देश के 5 करोड़ से ज्यादा किसानों और मजदूरों की आजीविका से जुड़ा है। बकाया बढ़ने (Sugarcane Payment) से ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। स्कूल फीस, शादी-ब्याह और दवा-दारू के खर्च में दिक्कत हो रही है।
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में किसान आत्महत्या की घटनाएं बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। उत्तर प्रदेश में गन्ना किसान संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
Sugarcane Payment: क्या है स्थायी समाधान?
कृषि अर्थशास्त्री डॉ. पी.के. जोशी का कहना है, “मिलों को चीनी के स्टॉक को इथेनॉल और अन्य उत्पादों में डायवर्ट करना चाहिए। साथ ही, गन्ने की खेती को विविधीकरण की ओर ले जाना चाहिए।”
पूर्व कृषि सचिव ने सुझाव दिया कि भुगतान (Sugarcane Payment) को डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर अनिवार्य किया जाए और मिलों की निगरानी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया जाए।
Sugarcane Payment: पंजाब-हरियाणा में भी संकट
पंजाब और हरियाणा में हालांकि गन्ना उत्पादन कम है लेकिन बकाया (Sugarcane Payment) अनुपात में ज्यादा है। किसान कहते हैं कि मिलें सरकारी प्रोत्साहन ले रही हैं लेकिन भुगतान नहीं कर रही।
Sugarcane Payment: गन्ना बोर्ड या चारा?
किसान अब फैसला कर रहे हैं कि अगले सीजन में गन्ना बोएं या मक्का, सोयाबीन जैसी फसलें। अगर बकाया (Sugarcane Payment) नहीं मिला तो गन्ना क्षेत्र घट सकता है, जिसका चीनी उद्योग पर लंबा असर पड़ेगा।
Sugarcane Payment: सरकार से किसानों की मांगें
- बकाया राशि 30 अप्रैल तक चुकता करो
- मिलों पर भारी जुर्माना लगाओ
- इथेनॉल नीति को तेजी से लागू करो
- गन्ने का MSP और बढ़ाओ
Sugarcane Payment: किसान की मेहनत का सम्मान जरूरी
गन्ना किसानों का बकाया (Sugarcane Payment) 32 गुना बढ़ना गंभीर चेतावनी है। सरकार, मिल मालिक और किसान संगठनों को मिलकर रास्ता निकालना होगा। अगर समय रहते समाधान नहीं निकला तो देश की चीनी सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित होंगी।
किसानों की आय दोगुनी करने का सपना तभी साकार होगा जब उनकी मेहनत का सही और समय पर भुगतान हो। संसदीय रिपोर्ट अब संसद और सरकार दोनों के लिए एक्शन लेने का मौका है।
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