Sugarcane Farming Tips: उत्तर प्रदेश और देश के अन्य गन्ना उत्पादक राज्यों के किसानों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और उपयोगी जानकारी सामने आई है। फरवरी-मार्च का वसंतकाल गन्ने की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय होता है लेकिन बाढ़ और जलभराव वाले इलाकों में गन्ने की खेती किसानों के लिए हमेशा एक बड़ी चुनौती बनी रहती है। बरसात के मौसम में खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से गन्ने की फसल के लिए एक गंभीर संकट पैदा हो जाता है। मिट्टी के छिद्रों में हवा की जगह पानी भर जाने से ऑक्सीजन का संचार रुक जाता है और गन्ने की विकास गति पूरी तरह थम जाती है। फलस्वरूप पौधा पीला पड़कर सूखने लगता है। जलभराव से गन्ने में ‘पोक्का बोइंग’ और ‘लाल सड़न’ जैसी खतरनाक बीमारियों का हमला भी तेज हो जाता है जिससे पूरी की पूरी खड़ी फसल बर्बाद हो सकती है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सही तकनीक और उन्नत किस्मों को अपनाकर इस समस्या से न केवल निजात पाई जा सकती है बल्कि बंपर पैदावार भी ली जा सकती है।
Sugarcane Farming Tips: ट्रेंच विधि है सबसे कारगर समाधान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जलभराव की समस्या का सबसे प्रभावी और वैज्ञानिक समाधान ट्रेंच विधि से बुवाई करना है। परंपरागत समतल बुवाई के बजाय 4 से 5 फीट की दूरी पर गहरी नालियां बनाकर बुवाई करनी चाहिए। इस विधि में मेड़ ऊंची रखी जाती है और गन्ने को 10 इंच गहरी नाली में बोया जाता है। इस तकनीक का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि भारी बारिश के दौरान मेड़ें सूखी रहती हैं और अतिरिक्त पानी नालियों के रास्ते आसानी से बाहर निकाला जा सकता है। इस तरह फसल की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहती है और गन्ना सड़ने से बचा रहता है।
Sugarcane Farming Tips: दो आंख वाले टुकड़ों से होगा बेहतर जमाव
विशेषज्ञों की एक और महत्वपूर्ण सलाह यह है कि जलभराव वाले क्षेत्रों में 5 से 7 आंख वाले लंबे टुकड़ों के बजाय दो आंखों वाले उपचारित टुकड़ों का ही प्रयोग करना चाहिए। इसका कारण यह है कि छोटे टुकड़ों के सड़ने की संभावना बहुत कम होती है और इनका जमाव भी अधिक बेहतर होता है। बुवाई से पहले इन टुकड़ों को उचित रासायनिक घोल में उपचारित करना भी जरूरी है ताकि बीज जनित बीमारियों से बचाव हो सके।
Sugarcane Farming Tips: इन उन्नत किस्मों का करें चयन
जलभराव वाले क्षेत्रों में सही किस्म का चुनाव आधी लड़ाई जीतने के बराबर है। विशेषज्ञों के अनुसार CoS 13231, CoP 9301, Co 98014 और CoLk 94184 जैसी किस्में जलभराव वाले क्षेत्रों में सफलतापूर्वक उगाई जा चुकी हैं और इनके परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं। ये किस्में अधिक पानी और नमी को सहन करने की क्षमता रखती हैं। किसानों को सलाह दी जाती है कि बुवाई से पहले अपने नजदीकी गन्ना विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करके अपने क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु के अनुसार सबसे उपयुक्त किस्म का चयन करें।
Sugarcane Farming Tips: मिट्टी के स्वास्थ्य पर दें विशेष ध्यान
बुवाई से पहले मिट्टी की सेहत पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है। विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रति एकड़ 10 से 15 टन सड़ी हुई गोबर की खाद या प्रेसमड का प्रयोग मिट्टी की संरचना को सुधारता है और उसकी जल धारण क्षमता को संतुलित करता है। पोषक तत्वों के उचित प्रबंधन के लिए 5 बैग एसएसपी, 5 बैग मृदा कल्प और 10 किलो जिंक सल्फेट का संतुलित इस्तेमाल करना चाहिए। इससे पौधों को पर्याप्त मजबूती मिलती है और वे प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अच्छी वृद्धि करते हैं।
Sugarcane Farming Tips: सहफसली खेती से बढ़ाएं आमदनी
गन्ने की दो कतारों के बीच की खाली जगह का सदुपयोग करके किसान अपनी आमदनी और बढ़ा सकते हैं। 4 फीट की दूरी पर बोए गए गन्ने के साथ मूंग या उड़द जैसी दलहनी फसलें उगाना बेहद फायदेमंद होता है। ये दलहनी फसलें न केवल अतिरिक्त आय देती हैं बल्कि वायुमंडल से नाइट्रोजन खींचकर मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती हैं। इससे खेतों में खरपतवार भी कम उगते हैं और गन्ने की शुरुआती वृद्धि भी बेहतर होती है। यह सहफसली तकनीक जलभराव के जोखिम के बीच किसानों को एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच प्रदान करती है।
Sugarcane Farming Tips: 20-25 प्रतिशत अधिक पैदावार का लक्ष्य संभव
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसान इन वैज्ञानिक सुझावों को अपनाते हुए वसंतकालीन गन्ने की खेती करते हैं तो उपज में 20 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा सकती है। सही जल निकास और संतुलित खाद के प्रयोग से गन्ना न केवल लंबा और मोटा होगा बल्कि उसमें चीनी रिकवरी भी बेहतर होगी। इससे चीनी मिलों को अच्छी गुणवत्ता का गन्ना मिलेगा और किसानों को समय पर बेहतर भुगतान होगा। पेड़ी रतून प्रबंधन की आधुनिक विधियों को अपनाकर किसान अगली फसल में भी लागत कम करके अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
इस प्रकार सही तकनीक, उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए बाढ़ और जलभराव वाले इलाकों में भी गन्ने की बंपर पैदावार लेना पूरी तरह संभव है। किसान भाइयों से अनुरोध है कि वे अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या गन्ना विशेषज्ञ से संपर्क कर अपने खेत की विशेष परिस्थितियों के अनुसार उचित मार्गदर्शन जरूर लें।
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