Sahiwal Cow: भारतीय पशु विज्ञान के इतिहास में एक सुनहरा और क्रांतिकारी अध्याय जुड़ गया है। उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित ICAR-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान यानी IVRI के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीकी सफलता हासिल की है जो भारत के करोड़ों पशुपालकों और किसानों की जिंदगी बदल सकती है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने आधुनिक असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी यानी ART के तहत OPU-IVF-ET तकनीक का उपयोग करके साहिवाल गाय के पांच स्वस्थ और उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाले बछड़ों को जन्म दिलाने में ऐतिहासिक सफलता पाई है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी भी भारी हार्मोनल इंजेक्शन की जरूरत नहीं पड़ती। यह उपलब्धि न केवल साहिवाल और थारपारकर जैसी देसी नस्लों को संरक्षित और उन्नत करेगी बल्कि भारत के डेयरी सेक्टर में एक नई क्रांति की शुरुआत करेगी।
Sahiwal Cow: क्या है OPU-IVF-ET तकनीक और यह क्यों है खास?
OPU-IVF-ET तीन प्रमुख प्रक्रियाओं का संयोजन है जो मिलकर एक उन्नत प्रजनन तकनीक बनाती हैं। OPU का अर्थ है Ovum Pick Up यानी अल्ट्रासाउंड की मदद से गाय के अंडाशय से अंडाणु यानी ओसाइट निकालना। IVF का अर्थ है In-Vitro Fertilization यानी लैब में इन अंडाणुओं को उच्च गुणवत्ता वाले सांड के वीर्य से निषेचित करना। ET का अर्थ है Embryo Transfer यानी तैयार भ्रूण को एक सामान्य गाय के गर्भाशय में स्थानांतरित करना।
परंपरागत तरीकों में गायों को हार्मोन इंजेक्शन देकर उनके अंडाशय को अत्यधिक उत्तेजित किया जाता था जिससे गाय के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता था। लेकिन IVRI की नई तकनीक में बिना किसी हार्मोनल स्टिमुलेशन के अंडाणु प्राप्त किए जाते हैं। यह गाय के लिए पूरी तरह सुरक्षित और प्राकृतिक तरीका है।
Sahiwal Cow: 2022-23 में शुरू हुआ यह ऐतिहासिक मिशन
इस अभूतपूर्व अनुसंधान की शुरुआत वर्ष 2022-23 में हुई थी। IVRI के माहिर वैज्ञानिकों ने तब बेहतरीन दुधारू नस्लों के जेनेटिक पोटेंशियल को बढ़ाने का लक्ष्य तय किया। तीन साल की अथक मेहनत, लगातार शोध और परीक्षण के बाद आखिरकार सफलता मिली।
28 फरवरी 2026 से शुरू होकर महज पांच दिनों के भीतर IVRI में पांच तंदुरुस्त साहिवाल बछड़ों ने जन्म लिया। यह पल भारतीय पशु विज्ञान के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि था। इन बछड़ों की जेनेटिक गुणवत्ता असाधारण रूप से उच्च है।
Sahiwal Cow: बंपर दूध देने वाली गाय के अंडाणु से तैयार हुए बछड़े
इन पांच बछड़ों को तैयार करने के लिए वैज्ञानिकों ने ऐसी साहिवाल गाय के अंडाणु यानी ओसाइट लिए जो प्रतिदिन 12 लीटर से अधिक दूध देती है। यह एक साहिवाल गाय के लिए असाधारण दूध उत्पादन क्षमता है।
निषेचन के लिए जिस सांड का वीर्य उपयोग किया गया उसकी मातृ वंशावली का दूध उत्पादन 3,320 किलोग्राम प्रति बियांत रहा है। यानी इन दोनों श्रेष्ठ जेनेटिक स्रोतों के संयोजन से जो बछड़े पैदा हुए हैं वे भविष्य में उत्कृष्ट दुधारू गाय साबित होंगी। इनसे पैदा होने वाली अगली पीढ़ी की गायें और भी अधिक दूध देने में सक्षम होंगी।
Sahiwal Cow: डॉ. बृजेश कुमार की टीम की अभूतपूर्व उपलब्धि
इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे डॉ. बृजेश कुमार के नेतृत्व और डॉ. एस. के. सिंह के मार्गदर्शन में काम करने वाली वैज्ञानिकों की टीम की दिन-रात की मेहनत है। इन वैज्ञानिकों ने साबित किया कि भारत में भी विश्वस्तरीय पशु प्रजनन तकनीक विकसित की जा सकती है।
आंकड़ों के मुताबिक थारपारकर गाय से प्रति सत्र औसतन 14.5 ओसाइट, साहिवाल गाय से 13.14 और मुर्रा भैंस से औसतन 5.5 ओसाइट प्राप्त किए गए। सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि लैब में भ्रूण निर्माण की दर 47 प्रतिशत से भी अधिक रही। यह दर दुनिया की टॉप प्रयोगशालाओं के बराबर है जो भारत की वैज्ञानिक क्षमता का प्रमाण है।
Sahiwal Cow: साहिवाल, थारपारकर और मुर्रा भैंस को मिलेगा नया जीवन
यह तकनीक केवल साहिवाल गाय तक सीमित नहीं है। IVRI के वैज्ञानिक इसी तकनीक का उपयोग थारपारकर और मुर्रा भैंस जैसी अन्य देसी और उन्नत नस्लों को मजबूत बनाने के लिए भी कर रहे हैं।
साहिवाल गाय भारत और पाकिस्तान की सबसे उत्तम देसी दुधारू नस्ल मानी जाती है। यह उष्णकटिबंधीय जलवायु में अत्यंत अनुकूल होती है और इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अधिक होती है। थारपारकर राजस्थान और गुजरात की एक अत्यंत कठोर और दुधारू नस्ल है जो कम पानी और चारे में भी अच्छा दूध उत्पादन करती है। मुर्रा भैंस दूध उत्पादन के मामले में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ नस्लों में शामिल है।
Sahiwal Cow: घर-घर पहुंचेगी साहिवाल की शुद्ध नस्ल
ICAR-IVRI का अगला बड़ा लक्ष्य इस उन्नत तकनीक को प्रयोगशाला से निकालकर सीधे किसानों के खेतों और डेयरियों तक पहुंचाना है। संस्थान OPU-IVF-ET तकनीक का दायरा व्यापक बनाना चाहता है ताकि देश के हर कोने में उच्च गुणवत्ता वाले मवेशी उपलब्ध हों।
इसके साथ ही IVRI युवाओं और पशु चिकित्सा पेशेवरों के लिए हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चला रहा है। इससे पशुपालन क्षेत्र में नए स्टार्टअप और स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे। जब देश के युवा इस आधुनिक तकनीक में दक्ष होंगे तो वे पशुपालन क्षेत्र के नए उद्यमी बनकर न केवल खुद की बल्कि हजारों किसानों की आमदनी बढ़ाने में योगदान दे सकेंगे।
Sahiwal Cow: किसानों की आय दोगुनी करने में मिलेगी मदद
यह तकनीक प्रधानमंत्री के किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जब किसानों को उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाली साहिवाल और थारपारकर जैसी देसी नस्लें आसानी से मिलेंगी तो उनका दूध उत्पादन बढ़ेगा। इससे उनकी आमदनी में सीधे वृद्धि होगी।
ICAR अधिकारियों ने इसे सतत कृषि यानी Sustainable Agriculture की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया है। यह सफलता भारत के पशुधन की सुरक्षा, संवर्धन और मेहनती किसानों की खुशहाली के लिए उम्मीद की एक नई किरण है।
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