Pulses Import Policy: सरकार ने अरहर, उड़द और पीली मटर की आयात नीति को 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया है। अरहर और उड़द का आयात ड्यूटी फ्री रहेगा, जबकि पीली मटर पर 30 प्रतिशत शुल्क जारी (Pulses Import Policy) रहेगा। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में दालों की सप्लाई (Pulses Import Policy) बढ़ाकर महंगाई को नियंत्रित करना है।
हालांकि किसान संगठनों और विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ते आयात से घरेलू किसानों की आय (Pulses Import Policy) प्रभावित हो सकती है और MSP पर खरीद मुश्किल हो सकती है। आइए इस नीति के हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।
Pulses Import Policy: सरकार का फैसला और उसकी पृष्ठभूमि
सरकार ने अरहर (तूर/पिजन पी), उड़द (ब्लैक ग्राम) और पीली मटर की आयात नीति (Pulses Import Policy) को एक साल और बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दिया है। मौजूदा नीति 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रही थी।
Pulses Import Policy नए फैसले के अनुसार:
- अरहर और उड़द का आयात पूरी तरह ड्यूटी फ्री रहेगा।
- पीली मटर पर 30 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी (10% बेसिक + 20% AIDC) लगती रहेगी।
इस फैसले का मकसद घरेलू बाजार में दालों की उपलब्धता बढ़ाना और खुदरा कीमतों (Pulses Import Policy) को स्थिर रखना है। पिछले कुछ वर्षों में दालों का आयात तेजी से बढ़ा है क्योंकि घरेलू उत्पादन अभी भी मांग के मुकाबले कम है।
Pulses Import Policy: आयात के रुझान और आंकड़े
वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-जनवरी) के पहले दस महीनों में दालों के आयात (Pulses Import Policy) में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
- अरहर का आयात 15 प्रतिशत बढ़कर 13 लाख टन पहुंच गया।
- उड़द का आयात 35 प्रतिशत बढ़कर 9 लाख टन हो गया।
पिछले पांच वर्षों (2020-2025) में आयातित दालों पर निर्भरता 9 प्रतिशत से बढ़कर 23.1 प्रतिशत हो गई है। यह आंकड़ा किसानों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि बढ़ता आयात घरेलू बाजार में कीमतों को दबाता (Pulses Import Policy) है और MSP से नीचे बिक्री का खतरा बढ़ाता है।
Pulses Import Policy: किसानों पर क्या असर पड़ेगा?
किसान संगठनों का कहना है कि जीरो इंपोर्ट ड्यूटी (Pulses Import Policy) से सस्ता विदेशी माल बाजार में आएगा, जिससे घरेलू दालों की कीमतें MSP से नीचे गिर सकती हैं। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित दाम नहीं मिल पाएगा और लागत भी निकालना मुश्किल हो जाएगा।
हालांकि सरकार ने आश्वासन दिया है कि घरेलू किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए अरहर, उड़द और मसूर की 100 प्रतिशत खरीद MSP पर की जाएगी। कृषि मंत्रालय ने 2028-29 तक यह व्यवस्था जारी रखने की मंजूरी दे दी है।
Pulses Import Policy: पीली मटर पर 30% ड्यूटी क्यों लगाई गई?
सरकार ने पीली मटर पर 30 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी (Pulses Import Policy) बनाए रखने का फैसला लिया है। इसका मकसद सस्ते आयात को सीमित करके घरेलू किसानों को बेहतर कीमत दिलाना है।
पीली मटर पर 1 नवंबर 2025 से लागू 30% ड्यूटी (10% बेसिक + 20% AIDC) जारी रहेगी। इससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को MSP के करीब दाम मिलने की उम्मीद है।
Pulses Import Policy: दालों की बाजार कीमत पर असर
सस्ते आयात से स्थानीय दालों की बाजार कीमत (Pulses Import Policy) कम हो जाती है। इससे किसानों के लिए MSP पर बिक्री मुश्किल हो जाती है। कई बार किसान लागत भी नहीं निकाल पाते।
सरकार अक्सर सस्ती खाने की चीजों और घरेलू किसानों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है। जीरो ड्यूटी और ऊंचे टैरिफ के बीच फेरबदल इसी संतुलन का हिस्सा है।
Pulses Import Policy: किसानों के लिए सकारात्मक पहलू
सरकार ने दालों की शत-प्रतिशत खरीद MSP (Pulses Import Policy) पर करने का ऐलान किया है। इससे किसानों को कुछ राहत मिल सकती है। अगर सरकार वास्तव में MSP पर खरीद सुनिश्चित करती है तो आयात बढ़ने का नुकसान कम हो सकता है।
किसान संगठनों का सुझाव है कि सरकार को आयात (Pulses Import Policy) पर कुछ सीमा लगानी चाहिए ताकि घरेलू उत्पादन प्रभावित न हो।
Pulses Import Policy: विशेषज्ञों की राय
कृषि अर्थशास्त्री डॉ. राजेश कुमार ने कहा, “जीरो ड्यूटी से अल्पावधि में उपभोक्ताओं को फायदा होता है, लेकिन लंबे समय में किसानों की आय प्रभावित होती है। सरकार को MSP खरीद (Pulses Import Policy) को प्रभावी बनाना चाहिए।”
एक अन्य विशेषज्ञ ने बताया कि पीली मटर पर 30% ड्यूटी बनाए रखना सही कदम है क्योंकि इससे घरेलू उत्पादन को संरक्षण मिलेगा।
Pulses Import Policy: किसानों के लिए सलाह
- अपनी फसल की बिक्री MSP पर सुनिश्चित करने के लिए सरकारी खरीद केंद्रों से संपर्क करें।
- आयात नीति के बदलाव पर नजर रखें और स्थानीय मंडी भाव चेक करते रहें।
- विविधीकरण करें – सिर्फ एक फसल पर निर्भर न रहें।
- सरकारी योजनाओं (जैसे PM-AASHA) का पूरा फायदा उठाएं।
Pulses Import Policy: निष्कर्ष
सरकार का अरहर-उड़द को ड्यूटी फ्री रखने और पीली मटर पर 30% टैक्स जारी रखने का फैसला (Pulses Import Policy) महंगाई नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है। हालांकि इससे किसानों की आय पर असर पड़ने की आशंका है।
सरकार ने MSP पर 100% खरीद का आश्वासन दिया है। अगर यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो किसानों को नुकसान कम होगा।
किसानों को सलाह है कि वे अपनी फसल की बिक्री पर नजर रखें और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं। आने वाले समय में दाल उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार को और ठोस कदम उठाने होंगे।
Pulses Import Policy: आयात नीति का सारांश (31 मार्च 2027 तक)
| दाल का नाम | इंपोर्ट ड्यूटी | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| अरहर (तूर) | ड्यूटी फ्री | सप्लाई बढ़ाना, महंगाई नियंत्रण |
| उड़द (मैटपे) | ड्यूटी फ्री | सप्लाई बढ़ाना, महंगाई नियंत्रण |
| पीली मटर | 30% (10% + 20% AIDC) | घरेलू उत्पादन को संरक्षण |
यह नीति घरेलू किसानों और उपभोक्ताओं के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है। अंतिम प्रभाव आने वाले महीनों में बाजार और MSP खरीद पर निर्भर करेगा।
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