Milk Production: गर्मी शुरू होते ही पशुपालकों की सबसे बड़ी परेशानी यह होती है कि गाय-भैंस का दूध उत्पादन कम हो जाता है। गर्मियों के दौरान दूध उत्पादन घटने की कई वजह हो सकती हैं, लेकिन एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक एक बड़ी वजह बबेसियोसिस भी है।
Milk Production: बीमारी का खतरा
यह एक ऐसी बीमारी है जो खासतौर पर गाय-भैंस को गर्मी और सर्दियों के मौसम में होती है। गर्मियों में होने की वजह यह है कि जिस पैरासाइट की वजह से ये बीमारी होती है, वो तेज गर्मी में जल्दी पनपते हैं। ये पैरासाइट गाय-भैंस का खून चूसते हैं, जिसके चलते पशु तनाव (स्ट्रेस) में आ जाता है और उसका उत्पादन घट जाता है।
Milk Production: बबेसियोसिस के लक्षण
गाय-भैंसों को बीमारियों (Milk Production) से बचाना है तो उनकी उचित देखभाल बहुत जरूरी है। बबेसियोसिस के चलते पशु खाना-पीना छोड देता है। दूध उत्पादन घट जाता है, पशु को तेज बुखार आता है, खून की कमी हो जाती है, हृदय की धड़कन बढ़ जाती है और पीलिया हो जाता है। पीडि़त पशु लाल या फिर ब्राउन कलर का पेशाब करता है और खूनी दस्त की शिकायत हो जाती है। बीमारी बढ़ने पर वक्त से इलाज नहीं मिले तो 90% केस में पशु की मौत हो जाती है।
Milk Production: बचाव के उपाय
पशुपालक को अपने क्षेत्र में किलनियों-चिचढ़ो के प्रसार (Milk Production) को रोकने के बारे में जागरूकता फैलानी चाहिए। जो भी पशु थोड़ा भी बीमार दिखे तो उनके खून की जांच कराएं। पशुचिकित्सक की सलाह से डाईमिनेजीन, एसीट्यूरेट, ऑक्सीट्टासाइक्लिन एंटीबायोटिक और खून बढ़ाने वाली दवाई देनी चाहिए।
Milk Production: पैरासाइट और प्रजातियां
बबेसियोसिस बीमारी (Milk Production) की वजह पैरासाइट होते हैं जो पशुओं के खून में चिचड़ियों के माध्यम से प्रवेश कर जाते हैं। खून में जाकर वे रेड ब्लड सेल में अपनी संख्या बढ़ाने लगते हैं, जिससे शरीर का हीमोग्लोबिन पेशाब के साथ बाहर निकलने लगता है। इस दौरान पेशाब लाल या गहरे भूरे रंग का हो जाता है। बबेसियोसिस की प्रजातियों में बबेसिया बोविस, बबेसिया मेजर, बबेसिया बाइजेमिया और बबेसिया डाईवरजेन्स शामिल हैं।
Milk Production: इलाज की प्रक्रिया
बबेसियोसिस (Milk Production) संक्रमित पशु के लक्षणों के आधार पर इलाज शुरू कराएं। अपने क्षेत्र में किलनियों-चिचढ़ो के प्रसार को रोकने के बारे में जागरूकता फैलाएं। जो भी पशु थोड़ा भी बीमार दिखे तो उनके खून की जांच कराएं। पशुचिकित्सक की सलाह से डाईमिनेजीन, एसीट्यूरेट, ऑक्सीट्टासाइक्लिन एंटीबायोटिक और खून बढ़ाने वाली दवाई देनी चाहिए।
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