Green Manure: लगातार गेहूं-धान की खेती और रासायनिक खादों के भारी इस्तेमाल से हमारी मिट्टी तेजी से अपनी उपजाऊ शक्ति खो रही है। नतीजतन खेती की लागत बढ़ रही है, पैदावार घट रही है और किसानों का मुनाफा कम हो रहा है। लेकिन इस समस्या का सबसे सस्ता, प्राकृतिक और प्रभावी समाधान है ढैंचा यानी हरी खाद (Green Manure) की खेती। ढैंचा खेत में उगाकर और उसे समय पर मिट्टी में जोतकर किसान महंगी यूरिया और डीएपी की जगह मुफ्त नाइट्रोजन पा सकते हैं। यह मिट्टी को ह्यूमस से भरपूर बनाता है, उसकी सेहत सुधारता है और आने वाली फसलों में बेहतर उत्पादन देता है।
Green Manure: मिट्टी क्यों हो रही है बीमार?
आज के दौर में ज्यादातर किसान साल में 3-4 फसलें लेने की कोशिश करते हैं। लेकिन मिट्टी को सिर्फ केमिकल खाद ही देते हैं। पुराने समय में किसान दाल (Green Manure) वाली फसलें जरूर लगाते थे, जो मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाती थीं। अब उस परंपरा को लगभग छोड़ दिया गया है।
नतीजा यह है कि मिट्टी की संरचना बिगड़ रही है, सूक्ष्म जीवों की संख्या घट रही है और उपजाऊ क्षमता कम हो रही है। महंगी खादों (Green Manure) पर खर्च बढ़ने से किसानों की जेब पर बोझ पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना मिट्टी की सेहत सुधारे लंबे समय तक अच्छी पैदावार लेना मुश्किल है। इसी समस्या का आसान और सस्ता इलाज है ढैंचा की हरी खाद।
Green Manure: ढैंचा क्यों है हरी खाद का बेस्ट विकल्प?
ढैंचा (Sesbania) एक तेज बढ़ने वाली पौधा है जो हरी खाद (Green Manure) के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसकी खासियतें इस प्रकार हैं:
- बहुत कम पानी में भी अच्छी तरह उग जाता है।
- खराब, क्षारीय या कम उपजाऊ जमीन में भी आसानी से बढ़ता है।
- मिट्टी में गहराई तक जड़ें डालता है, जिससे जमीन हवादार और ढीली हो जाती है।
- प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन स्थिर करता है और मिट्टी को जरूरी पोषक तत्व देता है।
- फूल आने से पहले मिट्टी में मिलाने पर ह्यूमस (जैविक पदार्थ) बढ़ाता है।
ढैंचा की जड़ों में नाइट्रोजन फिक्सिंग बैक्टीरिया होते हैं जो हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में जमा करते हैं। एक फसल से एक एकड़ में 35 से 40 किलो नाइट्रोजन मुफ्त में मिल सकती है, जो बाजार में हजारों रुपये की यूरिया के बराबर (Green Manure) है।
Green Manure: ढैंचा कैसे उगाएं? स्टेप-बाय-स्टेप तरीका
ढैंचा लगाने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जुलाई तक है। खासकर धान या खरीफ फसल से पहले इसे उगाना फायदेमंद होता है।
Green Manure: जरूरी मात्रा और तैयारी
- एक एकड़ खेत के लिए 20-25 किलो ढैंचा के बीज काफी होते हैं।
- बुवाई से पहले खेत की हल्की जुताई कर लें। जमीन में थोड़ी नमी होनी चाहिए।
- बीज को एक रात पहले साफ पानी में भिगोकर रखें, इससे अंकुरण तेज होता है।
- बीज को छिड़काव विधि से बोएं। बुवाई के समय थोड़ा फास्फोरस युक्त खाद (जैसे सिंगल सुपर फॉस्फेट) डाल सकते हैं। ढैंचा को यूरिया की जरूरत नहीं पड़ती।
Green Manure: बढ़त और जोताई
- ढैंचा बहुत तेज बढ़ता है। बुवाई के 45-50 दिनों में यह 3 फीट तक ऊंचा हो जाता है।
- जब पौधों में फूल आने शुरू हों, तभी इसे जोत देना चाहिए। इससे पहले जोतने से पोषक तत्व कम मिलते हैं और बाद में जोतने से बीज बन जाते हैं जो अगली फसल में खरपतवार का काम कर सकते हैं।
- हैरो या कल्टीवेटर से खड़ी फसल को काटकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें।
- जोताई के बाद खेत में पानी भर दें। पानी से पौधे तेजी से सड़ते हैं और मिट्टी में घुल जाते हैं।
पूरे प्रोसेस में बीज, जुताई और अन्य खर्च मिलाकर एक एकड़ पर मुश्किल से 1500 रुपये का खर्च आता है। जबकि इससे मिलने वाली खाद बाजार (Green Manure) में कई हजार रुपये की पड़ती है।
Green Manure: ढैंचा से मिलने वाले फायदे
- मिट्टी की सेहत में सुधार: ह्यूमस बढ़ने से मिट्टी उपजाऊ और ढीली हो जाती है। पानी सोखने की क्षमता बढ़ती है।
- नाइट्रोजन की मुफ्त सप्लाई: 35-40 किलो नाइट्रोजन प्रति एकड़ मुफ्त में मिलती है।
- खाद का खर्चा बचत: यूरिया और गोबर खाद पर निर्भरता कम होती है।
- बेहतर पैदावार: ढैंचा जोतने के बाद लगाई गई फसल (खासकर धान) का रंग गहरा हरा होता है, बीमारियां कम लगती हैं और उत्पादन 10-20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
- पर्यावरण अनुकूल: केमिकल खादों के इस्तेमाल में कमी से मिट्टी, पानी और हवा प्रदूषण कम होता है।
- लंबे समय का फायदा: मिट्टी की सेहत सुधरने से आने वाली कई फसलों को फायदा पहुंचता है।
Green Manure: गर्मी और खराब मौसम में भी उपयोगी
भीषण गर्मी में मिट्टी की नमी तेजी से उड़ जाती है और सूक्ष्म जीव मरने लगते हैं। ढैंचा (Green Manure) मिट्टी को ठंडक प्रदान करता है और सूक्ष्म जीवों को बढ़ावा देता है। खराब जमीन में भी यह अच्छी तरह उगता है, इसलिए छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह वरदान साबित हो सकता है।
Green Manure: किसान भाइयों के लिए सलाह
- ढैंचा को मुख्य फसल से पहले रोटेशन के रूप में जरूर अपनाएं।
- अगर पूरा खेत नहीं लगाना चाहते तो कम से कम 25-30 प्रतिशत क्षेत्र में जरूर उगाएं।
- पहली बार आजमाने वाले किसान छोटे क्षेत्र से शुरू करें और परिणाम देखें।
- स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से ढैंचा के बीज और सही तरीके की जानकारी लें।
ढैंचा अपनाकर किसान रासायनिक खादों के महंगे चक्कर से बाहर निकल सकते हैं। कम खर्च में ज्यादा पैदावार और स्वस्थ मिट्टी – यही ढैंचा की खेती (Green Manure) का सबसे बड़ा फायदा है। आज के समय में जब खेती की लागत बढ़ रही है, ढैंचा जैसी प्राकृतिक विधियां किसानों की आय बढ़ाने और मिट्टी बचाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
जो किसान भाई ढैंचा की खेती (Green Manure) कर चुके हैं, वे अपने अनुभव कमेंट में जरूर शेयर करें। नई पीढ़ी के किसानों को भी इस प्राकृतिक तरीके को अपनाना चाहिए ताकि हमारी जमीन आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ बनी रहे।
नोट: यह लेख कृषि विशेषज्ञों की सलाह और सामान्य कृषि ज्ञान पर आधारित है। स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार ढैंचा की खेती (Green Manure) करने से पहले कृषि विभाग या विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
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