Fertiliser Price Hike: पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध की आग अब भारत के खेत-खलिहानों तक पहुंच रही है। कच्चे तेल और एलएनजी यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज उछाल ने यूरिया और DAP जैसी जरूरी खादों के दाम भी बढ़ा दिए हैं। देश में बुवाई का मौसम जल्द शुरू होने वाला है और ऐसे में खाद की बढ़ती कीमतें किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत (Fertiliser Price Hike) 1,000 डॉलर प्रति टन के पार भी जा सकती है।
Fertiliser Price Hike: क्यों महंगी हो रही है खाद?
यूरिया बनाने में प्राकृतिक गैस सबसे जरूरी कच्चा माल है और DAP बनाने में फॉस्फेट के साथ-साथ ऊर्जा की बड़ी जरूरत होती है। जब ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हुआ और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं तो ऊर्जा की लागत बढ़ने से उर्वरक उत्पादन महंगा हो गया। इसके अलावा पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव के कारण कई देशों में उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गई।
इसका असर तत्काल दिखा। मिस्र ने कुछ समय पहले यूरिया 492 डॉलर प्रति टन में खरीदा था लेकिन पश्चिम एशिया में सैन्य कार्रवाई शुरू होते ही यह दाम बढ़कर 530 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया। DAP की बात करें तो इसकी कीमत 750 डॉलर से बढ़कर 1,000 डॉलर प्रति टन के करीब पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
Fertiliser Price Hike: भारत की आयात निर्भरता – सबसे बड़ी कमजोरी
भारत उर्वरकों (Fertiliser Price Hike) के मामले में काफी हद तक आयात पर निर्भर है। फॉस्फेट और पोटाश जैसे उर्वरकों के लिए देश 90 फीसदी से अधिक आयात पर निर्भर है। दुनिया का करीब 70 फीसदी फॉस्फेट भंडार मोरक्को के पास है जबकि पोटाश के प्रमुख उत्पादक देश कनाडा और बेलारूस हैं।
भारतीय उर्वरक संघ के आंकड़े इस निर्भरता की गंभीरता बताते हैं। अप्रैल से दिसंबर 2025-26 के दौरान भारत में यूरिया की बिक्री 3.8 फीसदी बढ़कर 31.16 मिलियन टन हो गई। लेकिन इसी दौरान घरेलू उत्पादन 3 फीसदी घटकर 22.44 मिलियन टन रह गया। इस कमी को पूरा करने के लिए आयात 85 फीसदी बढ़कर 8 मिलियन टन तक पहुंच गया। यानी घरेलू उत्पादन घट रहा है और आयात लगातार बढ़ रहा है।
Fertiliser Price Hike: होर्मुज बंद तो एलएनजी संकट – उर्वरक पर दोहरी मार
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब पता चलता है कि भारत को लगभग 55 फीसदी एलएनजी होर्मुज जलडमरूमध्य से मिलती है। इसके अलावा कतर अकेले भारत को करीब 40 फीसदी एलएनजी आपूर्ति करता है। जब होर्मुज बंद रहता है तो एलएनजी आपूर्ति प्रभावित होती है, गैस महंगी होती है और उससे बनने वाला यूरिया भी महंगा (Fertiliser Price Hike) हो जाता है। वैश्विक शिपिंग कंपनी मर्स्क ने भी उस क्षेत्र में अपने कुछ परिचालन रोक दिए हैं जिससे माल ढुलाई की लागत और समय दोनों बढ़ने की आशंका है।
Fertiliser Price Hike: सरकार पर बढ़ेगा सब्सिडी का बोझ
यूरिया का आयात सरकार के नियंत्रण में होता है और किसानों को रियायती दर (Fertiliser Price Hike) पर उपलब्ध कराने के लिए सरकार भारी सब्सिडी देती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने पर यह सब्सिडी का बोझ और बढ़ेगा। फॉस्फेट और पोटाश उर्वरकों के लिए चालू वित्त वर्ष में सब्सिडी बजट पहले 49,000 करोड़ रुपये निर्धारित था जिसे बाद में बढ़ाकर 60,000 करोड़ किया गया और फिर घटाकर 54,000 करोड़ रुपये कर दिया गया। यूरिया सब्सिडी में भी कटौती हुई है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में और बढ़ोतरी सरकार के वित्तीय प्रबंधन को चुनौती देगी।
Fertiliser Price Hike: किसानों पर क्या पड़ेगा असर?
अगर खाद की कीमतें (Fertiliser Price Hike) लगातार बढ़ती रहीं तो खेती की लागत सीधे बढ़ेगी। बुवाई के समय जब किसान सबसे ज्यादा उर्वरक खरीदते हैं तो ऊंची कीमतें उनकी जेब पर सबसे ज्यादा असर डालती हैं। पहले से कर्ज और मौसम की मार झेल रहे किसानों के लिए यह अतिरिक्त बोझ उनकी आमदनी को और कम कर सकता है।
सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश जारी है। लेकिन जब तक पश्चिम एशिया में हालात नहीं सुधरते तब तक खाद बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी और किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है।
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