Fertiliser Issue: ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक खाद आपूर्ति प्रभावित होने से भारतीय पोटाश लिमिटेड (IPL) को यूरिया के दाम पिछले टेंडर से लगभग दोगुने मिले हैं। सरकारी अधिकृत खाद आयात एजेंसी IPL (Fertiliser Issue) ने 25 लाख टन यूरिया के लिए टेंडर निकाला था, जिसमें सबसे कम ऑफर पश्चिम तट के लिए 935 डॉलर प्रति टन और पूर्व तट के लिए 959 डॉलर प्रति टन पर आए हैं। ज्यादातर बिड 1000 से 1136 डॉलर प्रति टन के आसपास हैं।
दो महीने पहले राष्ट्रीय रसायन और उर्वरक (RCF) के टेंडर में यूरिया के भाव (Fertiliser Issue) मात्र 508-512 डॉलर प्रति टन थे। इस तेज उछाल को पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संभावित बाधा का सीधा असर माना जा रहा है।
Fertiliser Issue: खाद बाजार पर पश्चिम एशिया संघर्ष का गहरा प्रभाव
राबो रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में खाद की उपलब्धता (Fertiliser Issue) काफी तंग हो गई है। कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और उतार-चढ़ाव भी बहुत ज्यादा है। होर्मुज स्ट्रेट पर बाधा से खाद और उसके कच्चे माल की बड़ी मात्रा वैश्विक व्यापार से बाहर हो गई है।
नाइट्रोजन और फॉस्फेट जैसी मुख्य खादों की कीमतें कृषि उत्पादों की कीमतों (Fertiliser Issue) से कहीं तेज बढ़ रही हैं। इससे किसानों की लाभ मार्जिन (Fertiliser Issue) सिकुड़ रही है। राबो रिसर्च के सीनियर एनालिस्ट ब्रूनो फोन्सेका ने चेतावनी दी है कि “हमारा खाद affordability इंडेक्स अब नकारात्मक क्षेत्र में चला गया है और पूरे 2026 में यह दबाव बना रहने की उम्मीद है।”
Fertiliser Issue: भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया (Fertiliser Issue) आयातक है। पश्चिम एशिया से आने वाली खाद की आपूर्ति प्रभावित होने से घरेलू बाजार में दबाव बढ़ रहा है। सरकार ने यूरिया और DAP पर सब्सिडी बढ़ाने का फैसला किया है, लेकिन फिर भी किसानों को महंगाई का असर झेलना पड़ रहा है।
किसान संगठनों का कहना है कि अगर खाद की कीमतें (Fertiliser Issue) और बढ़ीं तो खरीफ सीजन में फसल बोने पर असर पड़ेगा। खासकर धान, मक्का और दलहन जैसी फसलों पर इसका प्रभाव देखा जा सकता है।
Fertiliser Issue: नीचे दी गई तालिका में प्रमुख खादों के हालिया भाव और बदलाव दिखाए गए हैं
| खाद का प्रकार | अप्रैल 2026 औसत भाव (रुपये/टन) | पिछले टेंडर से बदलाव (%) | मुख्य प्रभावित क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| यूरिया | 28,500 – 32,000 | +80% से +90% | भारत, चीन, यूरोप |
| DAP | 52,000 – 55,000 | +20% से +25% | भारत, अमेरिका, ब्राजील |
| NPK (10-26-26) | 48,000 – 51,000 | +15% | भारत, यूरोप |
| MOP (पोटाश) | 38,000 – 40,000 | +12% | भारत, ब्राजील |
Fertiliser Issue: किसानों पर क्या असर पड़ेगा?
खाद की महंगाई और कमी से किसान कम खाद डालने, खरीद टालने या फसल बदलने (Fertiliser Issue) पर मजबूर हो सकते हैं। इसे “डिमांड डिस्ट्रक्शन” कहा जा रहा है। इससे फसल उत्पादन घट सकता है और अंत में खाद्य कीमतें बढ़ सकती हैं।
भारत में भी खाद की कीमतें (Fertiliser Issue) बढ़ रही हैं। यूरिया, DAP और NPK जैसी खादों पर किसानों का खर्च बढ़ रहा है। छोटे और सीमांत किसान इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
Fertiliser Issue: सरकार की तैयारी और कदम
केंद्र सरकार ने खाद आयात के लिए वैकल्पिक देशों से बातचीत तेज कर दी है। साथ ही घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए नई योजनाएं शुरू की जा रही हैं। पीएम किसान सम्मान निधि और अन्य योजनाओं के तहत किसानों को राहत देने की कोशिश की जा रही है।
सरकार ने मोबाइल ऐप लॉन्च करने की योजना बनाई है जिससे किसान अपनी कुल खाद जरूरत पहले से दर्ज कर सकें। बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के बाद ही खाद मिलेगी और ज्यादा खरीद पर अलर्ट भी आएगा।
Fertiliser Issue: वैश्विक विशेषज्ञों की चेतावनी
राबो रिसर्च के अनुसार, खाद की कमी से फसल उत्पादन में 5-10 प्रतिशत (Fertiliser Issue) तक की कमी आ सकती है। इससे वैश्विक खाद्य कीमतें बढ़ेंगी और गरीब देशों में भुखमरी का खतरा बढ़ेगा।
भारतीय कृषि अर्थशास्त्री डॉ. पी. के. जोशी ने कहा कि “सरकार को खाद आयात (Fertiliser Issue) के वैकल्पिक रास्ते तलाशने चाहिए और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर देना चाहिए।”
Fertiliser Issue: किसानों के लिए क्या करें?
- जैविक खाद और नैनो यूरिया का ज्यादा इस्तेमाल करें।
- मिट्टी परीक्षण करवाकर जरूरी खाद ही डालें।
- सरकार की सब्सिडी योजनाओं का पूरा लाभ उठाएं।
- फसल विविधीकरण पर ध्यान दें ताकि एक फसल पर निर्भरता कम हो।
Fertiliser Issue: खाद आयात पर निर्भरता
भारत अपनी जरूरत का करीब 35-40% खाद आयात (Fertiliser Issue) करता है। गल्फ देशों से 40% आयात आता है। यूरिया में 64% आयात पश्चिम एशिया से होता है। संघर्ष से LNG, अमोनिया और सल्फर की सप्लाई प्रभावित हुई है।
स्पॉट मार्केट में LNG की कीमत 19.5-19.6 डॉलर प्रति mmBtu हो गई है, जो पहले 11-12 डॉलर थी। इससे घरेलू उत्पादन (Fertiliser Issue) भी प्रभावित हो रहा है।
Fertiliser Issue: सरकार की सब्सिडी बोझ
खाद सब्सिडी का बोझ FY 2026-27 में 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा (Fertiliser Issue) होने का अनुमान है। यह पिछले अनुमान से 20% ज्यादा है। सरकार अब रेशनल यूज पर जोर दे रही है।
Fertiliser Issue: निष्कर्ष
पश्चिम एशिया संघर्ष ने खाद आयात को महंगा और मुश्किल बना दिया है। IPL टेंडर में यूरिया के भाव दोगुने हो गए हैं। इससे किसानों की लागत बढ़ रही है और फसल उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
सरकार को घरेलू उत्पादन बढ़ाने, जैविक खाद को प्रोत्साहित (Fertiliser Issue) करने और आयात स्रोत विविधीकरण पर तुरंत काम करना चाहिए। किसान भाई मिट्टी परीक्षण और संतुलित खाद उपयोग से इस संकट को कम कर सकते हैं।
खाद संकट से निपटने के लिए किसान, सरकार और उद्योग को मिलकर काम करना होगा। सही नीति और जागरूकता से हम इस चुनौती को अवसर में बदल सकते हैं।
Fertiliser Issue – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- IPL टेंडर में यूरिया के भाव (Fertiliser Issue) क्यों दोगुने हो गए?
पश्चिम एशिया संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट पर बाधा से आपूर्ति प्रभावित हुई है। - भारत में खाद की कीमतें कितनी बढ़ी हैं?
यूरिया में 80-90%, DAP में 20-25% तक बढ़ोतरी देखी गई है। - किसानों की आय पर क्या असर पड़ेगा?
खाद महंगी होने से लागत बढ़ेगी और मुनाफा घट सकता है। - सरकार क्या कदम उठा रही है?
सब्सिडी बढ़ाई जा रही है, वैकल्पिक आयात स्रोत तलाशे जा रहे हैं और रेशनल यूज ऐप लॉन्च करने की योजना है। - क्या जैविक खाद विकल्प है?
हां, जैविक और नैनो खाद का इस्तेमाल बढ़ाने से रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हो सकती है। - खरीफ सीजन पर क्या असर पड़ेगा?
खाद महंगी होने से किसान कम खाद डाल सकते हैं, जिससे उत्पादन घटने का खतरा है। - किसान क्या करें?
मिट्टी परीक्षण करवाएं, संतुलित खाद डालें और सरकारी योजनाओं का लाभ लें। - क्या कीमतें और बढ़ेंगी?
विशेषज्ञों के अनुसार 2026 में दबाव बना रह सकता है। - भारत कितना खाद आयात करता है?
भारत अपनी जरूरत का करीब 35-40% खाद आयात करता है, खासकर यूरिया और DAP। - लंबे समय का समाधान क्या है?
घरेलू उत्पादन बढ़ाना, जैविक खेती को बढ़ावा देना और टिकाऊ खाद नीति अपनाना।
नोट: खाद की कीमतें (Fertiliser Issue) और उपलब्धता समय-समय पर बदल सकती हैं। नवीनतम जानकारी के लिए कृषि विभाग या स्थानीय सहकारी समिति से संपर्क करें।
Read More Here :-
