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दुधारू पशु खरीदने से पहले 7 बातें जरूर जांचें, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

दुधारू पशु खरीदने से पहले 7 बातें जरूर जांचें

पशु खरीदने से पहले नस्ल, उम्र, टीकाकरण और स्वास्थ्य की जांच जरूर करें


📌 3 महत्वपूर्ण बातें एक नजर में

  1. दुधारू पशु खरीदते समय केवल दूध की मात्रा देखकर फैसला न करें, बल्कि स्वास्थ्य, नस्ल, उम्र और पिछले रिकॉर्ड की भी जांच करें।
  2. पशु का थन, पैर, आंख, नाक, शरीर की बनावट और चलने का तरीका देखकर उसकी सेहत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
  3. पशु खरीदने से पहले Animal Health Card, टीकाकरण और बीमारी से जुड़ी जानकारी जरूर लें। जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक से जांच कराना सबसे सुरक्षित तरीका है।

दुधारू पशु खरीदने से पहले सावधानी क्यों जरूरी है?

पशुपालन गांवों में किसानों की अतिरिक्त आमदनी का मजबूत जरिया बन सकता है। लेकिन डेयरी शुरू करने या दूध का कारोबार बढ़ाने के लिए सही दुधारू पशु का चुनाव करना बहुत जरूरी है। कई बार किसान बाजार में पशु का दूध देखकर तुरंत सौदा कर लेते हैं और बाद में पता चलता है कि पशु की उम्र ज्यादा है, दूध उत्पादन पहले से कम हो चुका है या उसे कोई स्वास्थ्य समस्या है।

यही कारण है कि दुधारू पशु खरीदने से पहले 7 बातें जरूर जांचें। थोड़ी सी सावधानी आपको लंबे समय तक होने वाले खर्च और नुकसान से बचा सकती है।

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के अनुसार, दुधारू पशु खरीदते समय उसके दूध उत्पादन, लैक्टेशन की संख्या, वंशावली, बीमारी और स्वास्थ्य की स्थिति, थन के स्वास्थ्य तथा गर्भावस्था की स्थिति जैसी जानकारी को देखना चाहिए।

सीधी बात है भाई, पशु खरीदना कोई छोटा फैसला नहीं है। एक बार पैसा लगा दिया तो चारा, इलाज और देखभाल का खर्च लगातार चलता है। इसलिए खरीदारी के समय ही अच्छी तरह जांच कर लेना समझदारी है।

1. पशु की नस्ल और उम्र जरूर जांचें

सबसे पहली बात पशु की नस्ल और उम्र है।

गाय या भैंस खरीदने से पहले यह पता करें कि वह किस नस्ल की है और उस नस्ल की आपके इलाके की जलवायु में अनुकूलता कैसी है। केवल ज्यादा दूध देने वाली नस्ल देखकर फैसला करना सही नहीं है।

NDDB के अनुसार नस्ल का चुनाव किसान के उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। स्थानीय पशु चिकित्सक या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है।

इसके साथ पशु की उम्र और कितनी बार बच्चा दे चुकी है, यह भी पता करें। उम्र की जानकारी दांत देखकर भी अनुमानित की जा सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय से पहले पशु चिकित्सक की राय लेना बेहतर है।

2. दूध की मात्रा केवल एक बार देखकर भरोसा न करें

कई किसान पशु खरीदते समय विक्रेता द्वारा बताई गई दूध की मात्रा पर भरोसा कर लेते हैं। यही सबसे बड़ी गलती हो सकती है।

मसलन, अगर कोई कह रहा है कि भैंस रोज 12 लीटर दूध देती है, तो सिर्फ उसकी बात पर सौदा न करें। दूध निकालते समय स्वयं मौजूद रहें और संभव हो तो अलग-अलग समय पर उत्पादन की जानकारी लें।

NDDB भी दुधारू पशु खरीदते समय वास्तविक दूध उत्पादन और लैक्टेशन से संबंधित जानकारी की पुष्टि करने की सलाह देता है।

साथ ही यह भी पूछें कि पशु को रोज कितना चारा दिया जाता है। ज्यादा दूध देने वाला पशु अगर बहुत अधिक महंगा आहार मांगता है, तो जरूरी नहीं कि वह आपके लिए सबसे ज्यादा लाभदायक हो।

असल फायदा केवल ज्यादा दूध में नहीं है, बल्कि दूध की बिक्री से मिलने वाली आमदनी और पशु के रखरखाव के खर्च के बीच का अंतर मायने रखता है।

3. थन और दूध की नसों की अच्छी तरह जांच करें

डेयरी पशु में थन का स्वास्थ्य बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए खरीदने से पहले चारों थनों को ध्यान से देखें और छूकर जांचें।

थन में असामान्य कठोरता, सूजन, गर्माहट, चोट या गांठ जैसी समस्या दिखाई दे तो सावधान हो जाएं। दूध निकालते समय भी देखें कि दूध सामान्य है या नहीं।

किसी भी गंभीर समस्या का अंदाजा केवल आंख से लगाना आसान नहीं होता। इसलिए संदेह होने पर पशु चिकित्सक से जांच कराएं।

ध्यान रखें कि स्वस्थ थन का मतलब बेहतर दुग्ध उत्पादन की संभावना है, जबकि थन की बीमारी डेयरी किसान के लिए सीधा आर्थिक नुकसान बन सकती है।

4. आंख, नाक और सांस की जांच करें

पशु स्वस्थ है या नहीं, इसका अंदाजा उसके सामान्य व्यवहार और शरीर के कुछ संकेतों से लगाया जा सकता है।

NDDB की अच्छी डेयरी पशुपालन संबंधी सामग्री में खरीद के समय पशु की आंखें साफ और चमकदार, नाक सामान्य तथा सांस लेने में परेशानी न होने जैसे संकेतों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।

इसलिए पशु खरीदते समय देखें:

अगर पशु बार-बार असामान्य व्यवहार कर रहा है तो केवल इसलिए सौदा न करें कि उसका दूध ज्यादा है।

5. पैर और चलने का तरीका जरूर देखें

दुधारू पशु को लंबे समय तक खड़ा रहना, चलना और चारे-पानी तक पहुंचना पड़ता है। इसलिए पैरों की मजबूती भी बहुत महत्वपूर्ण है।

पशु को कुछ दूरी तक चलाकर देखें। क्या वह सामान्य तरीके से चल रहा है? किसी पैर पर ज्यादा भार तो नहीं डाल रहा? लंगड़ापन या दर्द के संकेत तो नहीं हैं?

NDDB के अनुसार खरीदते समय पशु के पैर मजबूत और पीछे से सीधे होने जैसे शारीरिक संकेतों को देखना चाहिए।

यह छोटी सी जांच बाद में होने वाले इलाज के खर्च से बचा सकती है।

6. टीकाकरण और Animal Health Card जरूर मांगें

यह बिंदु सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। दुधारू पशु खरीदने से पहले 7 बातें जरूर जांचें में टीकाकरण का रिकॉर्ड किसी भी हालत में नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार पशुओं के स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण के लिए टीकाकरण तथा बीमारी की निगरानी महत्वपूर्ण है। विभाग के कार्यक्रमों में पशुओं की पहचान, टीकाकरण और स्वास्थ्य रिकॉर्ड रखने पर भी जोर दिया गया है।

पशु खरीदते समय पूछें:

सरकारी दिशानिर्देशों में Animal Health Card को नए खरीदार को हस्तांतरित करने और नए खरीदे गए पशु के लिए नजदीकी पशु चिकित्सा संस्थान से संपर्क करने का उल्लेख है।

इसलिए कागज देखकर ही नहीं, रिकॉर्ड की जानकारी को पशु से मिलाकर देखें।

7. गर्भावस्था और प्रजनन से जुड़ी जानकारी जरूर लें

अगर आप गर्भवती गाय या भैंस खरीद रहे हैं तो केवल विक्रेता की बात पर भरोसा न करें।

पूछें कि पशु कब गर्भित हुआ, पिछली बार कब बच्चा दिया था और पहले कितने बच्चे दिए हैं। गर्भावस्था की स्थिति की पुष्टि के लिए पशु चिकित्सक की जांच कराना सबसे बेहतर है।

NDDB भी गर्भवती पशु खरीदते समय उसकी गर्भावस्था की स्थिति सत्यापित करने की सलाह देता है।

इससे आपको पशु की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावित दुग्ध उत्पादन अवधि समझने में मदद मिलेगी।

पशु खरीदते समय एक और बड़ी गलती न करें

कई किसान केवल बाजार में खड़े पशु को देखकर खरीद लेते हैं। लेकिन NDDB की अच्छी डेयरी पशुपालन संबंधी जानकारी के अनुसार विश्वसनीय स्रोत से पशु खरीदना बेहतर माना जाता है और ज्ञात बीमारी-मुक्त फार्म से खरीद को प्राथमिकता दी जा सकती है। बाजार या अस्थायी पशु मंडी में बीमारी के संपर्क का जोखिम भी हो सकता है।

इसलिए संभव हो तो पशु के पुराने मालिक, फार्म या पालन की जगह के बारे में जानकारी लें।

हड़बड़ी में सौदा मत करो। विक्रेता चाहे जितना जल्दी करने को बोले, पहले पशु को अच्छी तरह देखो, दूध की जांच करो और स्वास्थ्य रिकॉर्ड मांगो।

पशु खरीदने से पहले पशु चिकित्सक को साथ ले जाना क्यों फायदेमंद है?

अगर आपको पशु की बीमारी, गर्भावस्था, उम्र या शरीर की जांच का पर्याप्त अनुभव नहीं है तो किसी पशु चिकित्सक की मदद लेना समझदारी है।

किसान को यह खर्च अतिरिक्त लग सकता है, लेकिन गलत पशु खरीदने के बाद इलाज, कम दूध उत्पादन और चारे पर होने वाला खर्च इससे कहीं ज्यादा हो सकता है।

भारत सरकार का पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम भी पशु स्वास्थ्य सेवाओं, बीमारी की निगरानी और टीकाकरण को मजबूत करने पर जोर देता है।

दुधारू पशु खरीदने से पहले की आसान चेकलिस्ट

सौदा पक्का करने से पहले इन बातों को एक-एक करके जांचें:

✓ नस्ल और उम्र
✓ दूध उत्पादन का वास्तविक रिकॉर्ड
✓ लैक्टेशन की संख्या
✓ थन और दूध की स्थिति
✓ आंख, नाक और सांस
✓ पैर और चलने का तरीका
✓ टीकाकरण रिकॉर्ड
✓ Animal Health Card
✓ गर्भावस्था की स्थिति
✓ बीमारी का पुराना रिकॉर्ड
✓ पशु की पहचान/कान टैग
✓ पशु चिकित्सक की सलाह

अगर इसमें से किसी महत्वपूर्ण बिंदु पर जानकारी स्पष्ट नहीं है, तो सौदा करने में जल्दबाजी न करें।

पशु खरीदने के बाद क्या सावधानी रखें?

नया पशु घर लाने के बाद उसे तुरंत बाकी पशुओं के साथ मिलाना हमेशा उचित नहीं होता। स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पशु चिकित्सक से सलाह लें।

भारत सरकार के पशु रोग नियंत्रण संबंधी दिशानिर्देशों में पशुओं की पहचान, टीकाकरण और स्वास्थ्य रिकॉर्ड बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

नए पशु का स्वास्थ्य सामान्य है या नहीं, यह देखने के लिए शुरुआती दिनों में उसके खाने, पानी पीने, दूध देने, गोबर, व्यवहार और शरीर की स्थिति पर नजर रखें।

किसी बीमारी का संदेह हो तो खुद से दवा देने के बजाय पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

क्या ज्यादा दूध देने वाला पशु हमेशा ज्यादा मुनाफा देता है?

जरूरी नहीं।

मान लीजिए एक पशु 12 लीटर दूध देता है, लेकिन उसके चारे और देखभाल का खर्च बहुत ज्यादा है। वहीं दूसरा पशु 9 लीटर दूध देता है और कम लागत में स्वस्थ रहता है। ऐसे में दूसरा पशु किसान के लिए ज्यादा लाभदायक हो सकता है।

NDDB के अनुसार आर्थिक पशु वह माना जाता है जो नियमित रूप से बच्चा दे, बीमारी के प्रति बेहतर प्रतिरोध रखे और कम इनपुट लागत में अच्छा दूध उत्पादन दे।

इसलिए खरीदते समय दूध की मात्रा के साथ लागत और पशु की सेहत को भी जरूर देखें।

निष्कर्ष

दुधारू पशु खरीदने से पहले 7 बातें जरूर जांचें, क्योंकि एक सही पशु आपकी डेयरी की कमाई बढ़ा सकता है, जबकि गलत पशु लंबे समय तक खर्च का कारण बन सकता है।

नस्ल, उम्र, दूध उत्पादन, थन, पैर, स्वास्थ्य, टीकाकरण रिकॉर्ड और गर्भावस्था जैसी बातों की जांच करके ही सौदा करें। खासकर Animal Health Card और टीकाकरण रिकॉर्ड को नजरअंदाज न करें।

गांव की भाषा में कहें तो पशु खरीदने में जल्दबाजी करी तो बाद में पछताना पड़ सकता है। इसलिए थोड़ा समय लगाओ, अच्छे से जांच करो और जरूरत पड़े तो पशु चिकित्सक की मदद लो।

यही छोटी-सी सावधानी आपके पशुपालन को ज्यादा सुरक्षित और फायदे का कारोबार बनाने में मदद कर सकती है।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. दुधारू पशु खरीदते समय सबसे पहले क्या देखें?
सबसे पहले पशु का स्वास्थ्य, उम्र, नस्ल और वास्तविक दूध उत्पादन देखें। इसके बाद थन, पैर और टीकाकरण रिकॉर्ड की जांच करें।

2. पशु खरीदते समय Animal Health Card क्यों जरूरी है?
Animal Health Card में पशु की पहचान और स्वास्थ्य/टीकाकरण से जुड़ी जानकारी मिल सकती है। सरकारी दिशानिर्देशों में इसे नए खरीदार को हस्तांतरित करने का उल्लेख है।

3. क्या बाजार से दुधारू पशु खरीदना सही है?
खरीद सकते हैं, लेकिन पशु के स्वास्थ्य और बीमारी के जोखिम की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। NDDB विश्वसनीय स्रोत से पशु खरीदने को प्राथमिकता देने की सलाह देता है।

4. ज्यादा दूध देने वाली गाय या भैंस ही खरीदनी चाहिए?
नहीं। दूध उत्पादन के साथ चारा खर्च, स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता और रखरखाव लागत को भी देखना चाहिए।

5. गर्भवती पशु खरीदते समय क्या जांचना चाहिए?
गर्भावस्था की स्थिति, पिछली बार बच्चा देने की तारीख और प्रजनन इतिहास की जानकारी लें। गर्भावस्था की पुष्टि पशु चिकित्सक से कराना बेहतर है।

6. पशु खरीदने के बाद टीकाकरण जरूरी है?
पशु के टीकाकरण की स्थिति के अनुसार आगे की जरूरत तय करनी चाहिए। भारत सरकार पशुधन रोग नियंत्रण के लिए नियमित टीकाकरण और स्वास्थ्य निगरानी पर जोर देती है।

7. दुधारू पशु खरीदने से पहले डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
हां, खासकर नए या अनुभवहीन पशुपालक के लिए यह बहुत उपयोगी है। पशु चिकित्सक बीमारी, गर्भावस्था और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की जांच में मदद कर सकता है।

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