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Crop Advisory: बढ़ती गर्मी में फसलें बचाने के लिए ICAR पूसा की जरूरी सलाह, गेहूं में रतुआ का खतरा, मूंग-उड़द की बुवाई का सही समय आया

Crop Advisory
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Crop Advisory: फरवरी के अंत से ही देश के कई राज्यों में तापमान तेजी से बढ़ने लगा है और मार्च में यह सिलसिला और जोर पकड़ने की आशंका है। बढ़ती गर्मी को देखते हुए ICAR पूसा से जुड़े कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। इसमें खड़ी फसलों की सिंचाई (Crop Advisory) से लेकर गेहूं में रतुआ रोग की निगरानी, सब्जियों में कीट प्रबंधन और मूंग-उड़द की बुवाई की तैयारी (Crop Advisory) तक हर जरूरी पहलू पर सलाह दी गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय थोड़ी सी सावधानी किसानों की फसल को बड़े नुकसान से बचा सकती है।

Crop Advisory: सिंचाई करते वक्त रखें यह सावधानी

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खड़ी फसलों और सब्जियों में जरूरत के हिसाब से हल्की सिंचाई (Crop Advisory) करने की सलाह दी है। लेकिन एक जरूरी बात यह है कि सिंचाई हमेशा तब करें जब हवा शांत हो। तेज हवा में पानी देने से पौधों के गिरने और जड़ें उखड़ने का खतरा बढ़ जाता है। आने वाले दिनों में तापमान में और वृद्धि होने की संभावना है इसलिए फसल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

Crop Advisory: मूंग और उड़द की बुवाई का सही समय

मार्च का महीना मूंग और उड़द की बुवाई की तैयारी के लिए बिल्कुल उपयुक्त है। वैज्ञानिकों ने किसानों को प्रमाणित स्रोतों से ही उन्नत बीज खरीदने की सलाह दी है। मूंग के लिए पूसा विशाल, पूसा बैसाखी, पीडीएम-11 और एसएमएल-32 किस्में उपयुक्त बताई गई हैं। उड़द के लिए पंत उड़द-19, पंत उड़द-30, पंत उड़द-35 और पीडीयू-1 किस्मों की सिफारिश की गई है। बुवाई से पहले बीजों को फसल विशेष राइजोबियम और फास्फोरस सोलूबलाइजिंग बैक्टीरिया से उपचारित करना न भूलें। इससे अंकुरण बेहतर होगा और उत्पादन भी अच्छा मिलेगा।

Crop Advisory: भिंडी और अन्य सब्जियों की बुवाई के लिए सही किस्में

अगेती भिंडी की बुवाई के लिए ए-4, परबनी क्रांति और अर्का अनामिका किस्में सबसे उपयुक्त मानी गई हैं। बुवाई से पहले खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें और प्रति एकड़ 10 से 15 किलोग्राम बीज दर का उपयोग करें। इस समय का तापमान फ्रेंच बीन और गर्मी की मूली की सीधी बुवाई के लिए भी अनुकूल है। टमाटर, मिर्च और कद्दूवर्गीय सब्जियों के तैयार पौधों की रोपाई भी इसी सप्ताह की जा सकती है।

Crop Advisory: गेहूं में रतुआ रोग पर रखें कड़ी नजर

इस समय गेहूं की फसल में रतुआ रोग का खतरा बना हुआ है। काला, भूरा और पीला रतुआ तीनों ही अलग-अलग तापमान पर सक्रिय होते हैं। पीला रतुआ 10 से 20 डिग्री सेल्सियस पर फैलता है जबकि 25 डिग्री से ऊपर इसकी गति धीमी पड़ जाती है। भूरा रतुआ 15 से 25 डिग्री और नमी वाले मौसम में पनपता है। काला रतुआ 20 डिग्री से अधिक तापमान और अपेक्षाकृत शुष्क स्थितियों में फैलता है। अगर खेत में काला, भूरा या पीला रतुआ दिखाई दे तो तुरंत प्रोपिकोनेजोल 25 ईसी का एक मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।

Crop Advisory: सब्जियों और सरसों में चेपा कीट का प्रकोप

सब्जियों और सरसों की फसल में इस समय चेपा कीट की निगरानी जरूरी है। नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 0.25 से 0.5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से तुड़ाई के बाद छिड़काव करें और ध्यान रखें कि छिड़काव के बाद कम से कम एक सप्ताह तक तुड़ाई न करें। प्याज की फसल में थ्रिप्स का प्रकोप दिखे तो कानफीडोर 0.5 मिली प्रति 3 लीटर पानी में चिपकने वाले पदार्थ के साथ मिलाकर छिड़काव करें।

Crop Advisory: टमाटर और बैंगन को कीटों से बचाएं

टमाटर में फल छेदक कीट से बचाव के लिए खेत में पक्षी बसेरा लगाएं और जो फल नष्ट हो गए हों उन्हें जमीन में दबा दें। इसके अलावा 4 से 5 फेरोमोन प्रपंच प्रति एकड़ लगाने की सलाह दी गई है। बैंगन में प्ररोह और फल छेदक कीट दिखे तो ग्रसित हिस्सों को काटकर नष्ट करें। अधिक प्रकोप होने पर स्पिनोसेड 48 ईसी का एक मिली प्रति 4 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। गेंदे की फसल में पुष्प सड़न रोग के लक्षण दिखाई दें तो कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी का एक ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस मौसम में सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है। समय पर की गई निगरानी और सही उपाय किसानों को बड़े नुकसान से बचा सकते हैं।

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