CRISIL Report: जिस खाद से किसान की फसल लहलहाती है, उसे बनाने का कच्चा माल ही अब युद्ध की आग में झुलस रहा है।
मध्य पूर्व में इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब सीधे भारत के कृषि क्षेत्र पर पड़ने लगा है। खाद उद्योग के लिए जरूरी कच्चे माल जैसे लिक्विफाइड नेचुरल गैस और अमोनिया की आपूर्ति बाधित हो गई है। CRISIL रेटिंग्स ने अपनी ताजा रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यदि यह संकट तीन महीने और जारी रहा तो देश में खाद का उत्पादन बड़े पैमाने पर प्रभावित होगा और खरीफ सीजन में किसानों को खाद की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।
मध्य पूर्व में जारी सशस्त्र संघर्ष ने भारत की खाद आपूर्ति श्रृंखला को गहरा झटका दिया है। CRISIL रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश में यूरिया और कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर का सालाना उत्पादन 10 से 15 फीसदी तक घट सकता है। अमोनिया की कीमतें पहले ही 24 फीसदी बढ़ चुकी हैं और सरकार का सब्सिडी बिल 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये तक बढ़ने की आशंका है। खरीफ सीजन से ठीक पहले यह संकट किसानों और सरकार दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
भारत की खाद पर मध्य पूर्व की निर्भरता कितनी गहरी है?
भारत अपनी खाद जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। देश में करीब 20 फीसदी यूरिया और एक तिहाई कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर जिसमें डाई-अमोनियम फॉस्फेट यानी डीएपी और एनपीके शामिल हैं, बाहर से मंगाए जाते हैं।
वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में भारत के कुल खाद आयात का लगभग 40 फीसदी हिस्सा मध्य पूर्व से आया। इसके अलावा देश में यूरिया बनाने के लिए जरूरी लगभग 60 से 65 फीसदी एलएनजी और 75 से 80 फीसदी अमोनिया भी इसी क्षेत्र से आती है। यानी मध्य पूर्व में कोई भी उथलपुथल भारत के खाद उत्पादन को सीधे प्रभावित करती है।
CRISIL Report: CRISIL ने क्या कहा और कितना होगा नुकसान?
CRISIL रेटिंग्स के डायरेक्टर आनंद कुलकर्णी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मध्य पूर्व के मुद्दों से खरीफ सीजन के एक अहम समय पर खाद आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट आ सकती है। उनके अनुसार एलएनजी और अमोनिया की आपूर्ति में लगभग तीन महीने तक जारी रहने वाली रुकावट से घरेलू यूरिया और कॉम्प्लेक्स खाद का उत्पादन 10 से 15 फीसदी तक कम हो सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कच्चे माल और आयातित फर्टिलाइजर की कीमतों में वृद्धि से सरकार का सब्सिडी बिल 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है जो पहले से ही भारी दबाव में चल रहे सरकारी खजाने के लिए बड़ी चुनौती होगी।
CRISIL Report: अमोनिया की कीमतें पहले ही 24 फीसदी बढ़ीं
संकट का असर कीमतों पर पहले ही दिखने लगा है। युद्ध शुरू होने के बाद से अमोनिया की कीमतें लगभग 24 फीसदी बढ़ चुकी हैं। अन्य कच्चे खाद पदार्थों की कीमतें भी तेजी से ऊपर जा रही हैं।
खाद उद्योग के जानकारों का कहना है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो खाद बनाने वाली कंपनियों का मुनाफा तेजी से घटेगा और बिना सरकारी सहायता के वे उत्पादन बनाए रखने में असमर्थ होंगी। कंपनियों को दूसरे स्रोतों से कच्चा माल खरीदने पर मजबूर होना पड़ेगा जो और महंगा पड़ेगा।
CRISIL Report: भारत में खाद की खपत और उत्पादन की तस्वीर
देश की कुल खाद खपत में यूरिया का हिस्सा सबसे बड़ा है और यह करीब 45 फीसदी है। कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर यानी डीएपी और एनपीके का हिस्सा एक तिहाई है। शेष खपत सिंगल सुपर फॉस्फेट और म्यूरिएट ऑफ पोटाश से पूरी होती है।
यूरिया के उत्पादन में प्राकृतिक गैस का खर्च कुल कच्चे माल की लागत का करीब 80 फीसदी होता है। यही कारण है कि गैस की कीमत या आपूर्ति में कोई भी बाधा तुरंत यूरिया उत्पादन को प्रभावित करती है।
CRISIL Report: सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
संकट की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने कुछ तत्काल उपाय किए हैं। यूरिया उत्पादकों को 70 फीसदी गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया गया है। इसके अलावा देश में खाद का करीब तीन महीने का बफर स्टॉक भी मौजूद है जो तत्काल किल्लत को टाल सकता है।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खाद कंपनियों और मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति का जायजा लिया है। वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाने और घरेलू उत्पादन क्षमता को अधिकतम उपयोग में लाने पर जोर दिया जा रहा है।
CRISIL Report: किसानों पर क्या होगा असर?
यदि खाद की आपूर्ति प्रभावित होती है तो किसानों को सबसे पहले मार पड़ेगी। खरीफ सीजन जून से शुरू होता है जब धान, मक्का, सोयाबीन और कपास जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई होती है। इस दौरान यूरिया और डीएपी की मांग सर्वाधिक होती है।
खाद विशेषज्ञों के अनुसार यदि कीमतें बढ़ीं और उपलब्धता कम हुई तो छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे जो वैसे ही महंगाई से जूझ रहे हैं।
CRISIL Report: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
CRISIL की रिपोर्ट में खाद उत्पादन में कितनी गिरावट का अनुमान है?
CRISIL रेटिंग्स के अनुसार मध्य पूर्व संकट के कारण भारत में यूरिया और कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर का सालाना उत्पादन 10 से 15 फीसदी तक घट सकता है।
भारत मध्य पूर्व से कितना खाद आयात करता है?
वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में कुल खाद आयात का लगभग 40 फीसदी मध्य पूर्व से आया। इसके अलावा 60 से 65 फीसदी एलएनजी और 75 से 80 फीसदी अमोनिया भी इसी क्षेत्र से आती है।
क्या सरकार ने किसानों की सुरक्षा के लिए कोई कदम उठाया है?
हां, सरकार ने यूरिया उत्पादकों को 70 फीसदी गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने का आदेश दिया है और तीन महीने का बफर स्टॉक मौजूद है। वैकल्पिक स्रोतों से आयात की तैयारी भी चल रही है।
खरीफ सीजन में किसानों को खाद मिलेगी या नहीं?
फिलहाल बफर स्टॉक और वैकल्पिक आयात से तत्काल किल्लत टाली जा सकती है, लेकिन यदि मध्य पूर्व संकट लंबा खिंचा तो खरीफ सीजन में खाद की उपलब्धता और कीमत दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
किसान अभी क्या करें?
किसान अपनी जरूरत के अनुसार खाद पहले से खरीद कर रख सकते हैं और जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा दे सकते हैं। अपने क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर वैकल्पिक पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी लें।
CRISIL Report: निष्कर्ष
मध्य पूर्व का संकट अब केवल वहां की भू-राजनीतिक समस्या नहीं रह गया, यह भारत के किसान के खेत और थाली तक पहुंच चुका है। खाद उत्पादन में संभावित गिरावट, कीमतों में वृद्धि और सरकार का बढ़ता सब्सिडी बोझ तीनों मिलकर कृषि क्षेत्र के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर रहे हैं। जरूरत है कि सरकार न केवल अल्पकालिक उपाय करे बल्कि घरेलू गैस उत्पादन और खाद कच्चे माल में आत्मनिर्भरता की दिशा में दीर्घकालिक रणनीति भी तैयार करे। किसान की समृद्धि ही देश की समृद्धि है।
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