Chana Price: रबी कृषि मौसम में चने की नवीन फसल की आवक तीव्र होते ही बाजार में मूल्य दबाव स्पष्टतः परिलक्षित होने लगा है। मांग में दुर्बलता तथा सरकारी क्रय व्यवस्था के प्रारंभ न होने के कारण चने के मूल्यों में निरंतर नरमी का रुझान देखा जा रहा है। कर्नाटक, महाराष्ट्र एवं गुजरात जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में चना वर्तमान में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से निम्न स्तर पर व्यापारित हो रहा है। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष कृषि रकबे में विस्तार तथा अनुकूल मौसम परिस्थितियों के कारण उत्पादन में सुधार की प्रबल संभावना है, जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव मूल्यों पर पड़ रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का मत है कि जब तक सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर व्यापक क्रय प्रारंभ नहीं किया जाता, तब तक चने के मूल्यों को कोई सुदृढ़ आधार प्राप्त नहीं होगा। यह स्थिति चना उत्पादक किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है, विशेषकर उन कृषकों के लिए जिन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य की अपेक्षा से कृषि निवेश किया था।
Chana Price: पंद्रह दिवसों में 10-15 प्रतिशत की मूल्य गिरावट
बिजनेसलाइन द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के सचिव सतीश उपाध्याय ने विवरण दिया कि विगत 15 दिवसों में चने के मूल्यों में लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट अंकित की गई है। उन्होंने उल्लेख किया कि मंडियों में आवक में वृद्धि हो रही है, जबकि दाल मिलों की क्रय गतिविधि मंद बनी हुई है। यह विरोधाभासी स्थिति मूल्य पतन का प्रमुख कारक है।
वर्तमान में मंडियों में चना लगभग 54-55 रुपये प्रति किलोग्राम के मूल्य स्तर पर विक्रय हो रहा है। आगामी दिवसों में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान से विपुल मात्रा में फसल आगमन की संभावना व्यक्त की जा रही है, जिससे मूल्यों पर अतिरिक्त दबाव निर्मित हो सकता है। यह पूर्वानुमान कृषक समुदाय के लिए अधिक चिंताजनक है।
Chana Price: घरेलू उत्पादन के समक्ष चुनौती
चना दाल की मांग में दुर्बलता का एक प्रमुख कारण सस्ते एवं उत्कृष्ट गुणवत्तापूर्ण आयातित चने की उपलब्धता बताई जा रही है। बंदरगाहों पर उपलब्ध आयातित चना घरेलू चने की तुलना में न केवल मूल्य में सस्ता है, अपितु दाल निष्कर्षण दर तथा रंग-आकार में भी श्रेष्ठ माना जा रहा है। यह परिस्थिति घरेलू उत्पादन की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को कमजोर करती है।
व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, तंजानिया एवं ऑस्ट्रेलिया से आयातित चना 5,300 से 5,425 रुपये प्रति क्विंटल के मूल्य सीमा में उपलब्ध है। यह मूल्य घरेलू उत्पादन की तुलना में अत्यंत प्रतिस्पर्धी है। इसी कारण मिलर्स मंडियों से क्रय करने में संकोच प्रदर्शित कर रहे हैं। वे आयातित चने को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो घरेलू कृषकों की आय को प्रभावित कर रहा है।
Chana Price: सरकारी क्रय व्यवस्था से ही संभावित राहत
कृषि मंत्रालय के सांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार, फरवरी माह के प्रारंभ से चने के औसत थोक मूल्यों में स्पष्ट गिरावट परिलक्षित हुई है। सरकार ने रबी विपणन मौसम 2026-27 के लिए चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,875 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। यह मूल्य वर्तमान बाजार मूल्य से उल्लेखनीय रूप से उच्च है।
तथापि, कर्नाटक राज्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सीमित मात्रा में क्रय को स्वीकृति प्रदान की गई है। परंतु व्यापारिक समुदाय का मत है कि जब तक वृहद स्तर पर सरकारी क्रय प्रारंभ नहीं होती, तब तक बाजार में मूल्य वृद्धि की संभावना न्यून है। सरकारी हस्तक्षेप की अनुपस्थिति में कृषकों को वर्तमान निम्न मूल्यों पर ही अपनी उपज विक्रय करने को विवश होना पड़ रहा है।
Chana Price: कृषि रकबा विस्तार से उत्पादन वृद्धि के संकेत
चालू वर्ष में चने की बुवाई का रकबा विगत वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है। मौसम की अनुकूल परिस्थितियों के कारण फसल की स्थिति भी उत्तम बताई जा रही है। यही कारण है कि बाजार में यह धारणा सुदृढ़ हो रही है कि इस बार चने का कुल उत्पादन विगत वर्ष की तुलना में अधिक रह सकता है। यह तथ्य एक ओर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से सकारात्मक है, परंतु वर्तमान बाजार परिदृश्य में यह मूल्य पतन का अतिरिक्त कारक बन रहा है।
वर्तमान में बाजार में चने की आवक भारी मात्रा में है, जबकि मांग दुर्बल एवं आयात सुदृढ़ स्थिति में है। यह त्रिकोणीय परिस्थिति मूल्यों पर दीर्घकालिक दबाव बनाए रख सकती है। कृषकों के हित में शीघ्र नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
Chana Price: कृषक समुदाय की चिंताएं एवं अपेक्षाएं
चना उत्पादक कृषक समुदाय वर्तमान मूल्य स्थिति से अत्यंत चिंतित है। अनेक कृषकों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा को आधार मानकर कृषि निवेश किया था। परंतु वर्तमान में बाजार मूल्य एमएसपी से काफी नीचे होने के कारण उन्हें आर्थिक हानि का सामना करना पड़ रहा है। कृषक संगठनों की मांग है कि सरकार को शीघ्रातिशीघ्र न्यूनतम समर्थन मूल्य पर व्यापक क्रय व्यवस्था प्रारंभ करनी चाहिए।
इसके अतिरिक्त, आयात नीति में भी संशोधन की आवश्यकता व्यक्त की जा रही है। जब घरेलू उत्पादन पर्याप्त है तथा कृषकों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा, तब आयात को प्रोत्साहित करना घरेलू कृषि क्षेत्र के हितों के विरुद्ध प्रतीत होता है। नीति निर्माताओं को घरेलू कृषक हितों की रक्षा हेतु संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: वर्तमान में मंडियों में चने का मूल्य कितना है तथा यह एमएसपी से कितना कम है?
उत्तर: वर्तमान में मंडियों में चना लगभग 54-55 रुपये प्रति किलोग्राम अथवा 5,400-5,500 रुपये प्रति क्विंटल के मूल्य पर विक्रय हो रहा है। सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,875 रुपये प्रति क्विंटल है। इस प्रकार चने का बाजार मूल्य एमएसपी से लगभग 375-475 रुपये प्रति क्विंटल कम है।
प्रश्न 2: विगत पंद्रह दिनों में चने के मूल्यों में कितनी गिरावट आई है?
उत्तर: इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के सचिव सतीश उपाध्याय के अनुसार, विगत 15 दिवसों में चने के मूल्यों में लगभग 10 से 15 प्रतिशत की गिरावट अंकित की गई है। यह गिरावट मंडियों में बढ़ती आवक तथा दाल मिलों की मंद क्रय गतिविधि के कारण हुई है।
प्रश्न 3: आयातित चने का घरेलू बाजार पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
उत्तर: तंजानिया एवं ऑस्ट्रेलिया से आयातित चना 5,300-5,425 रुपये प्रति क्विंटल के मूल्य पर उपलब्ध है, जो घरेलू उत्पादन से सस्ता है। इसके अतिरिक्त आयातित चने में दाल निष्कर्षण दर तथा गुणवत्ता भी बेहतर है। इस कारण मिलर्स घरेलू चने की बजाय आयातित चने को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे घरेलू मांग कमजोर पड़ रही है।
प्रश्न 4: सरकारी क्रय व्यवस्था की वर्तमान स्थिति क्या है?
उत्तर: वर्तमान में केवल कर्नाटक राज्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सीमित मात्रा में चने की क्रय को स्वीकृति प्रदान की गई है। अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों में अभी तक व्यापक सरकारी क्रय प्रारंभ नहीं हुई है। व्यापारिक समुदाय का मत है कि वृहद स्तर पर सरकारी क्रय के अभाव में मूल्यों में सुधार की संभावना न्यून है।
प्रश्न 5: इस वर्ष चने के उत्पादन की क्या संभावना है?
उत्तर: इस वर्ष चने की बुवाई का रकबा विगत वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है तथा मौसम की परिस्थितियां अनुकूल रही हैं। फसल की स्थिति भी उत्तम बताई जा रही है। इन कारणों से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार चने का कुल उत्पादन विगत वर्ष की तुलना में अधिक रह सकता है। यद्यपि यह खाद्य सुरक्षा के लिए सकारात्मक है, परंतु वर्तमान में यह मूल्य पतन का कारक बन रहा है।
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