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Carbon Credits Farming से किसान को मिलेगी एक्स्ट्रा कमाई 2026

Carbon Credits Farming se Indian kisan per acre 5000 se 15000 rupaye extra kama raha hai 2026

Carbon Credits Farming से किसान को मिलेगी एक्स्ट्रा कमाई 2026


Carbon Credits Farming: खेत से फसल के साथ अब कार्बन से भी होगी कमाई

Carbon Credits Farming एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसान अपनी मिट्टी में कार्बन जमा करके certified credits बनाता है, और उन्हें बड़े उद्योगों को बेचकर प्रति एकड़ 5,000 से 15,000 रुपये तक अतिरिक्त कमाई करता है — सीधे बैंक अकाउंट में। यह कोई सपना नहीं, बल्कि आज भारत के पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में लाखों किसान इससे फायदा उठा रहे हैं।

केंद्र सरकार ने Union Budget 2026-27 में 20,000 करोड़ रुपये का Carbon Capture, Utilisation and Storage (CCUS) कार्यक्रम लॉन्च किया है। इसका सीधा फायदा उन किसानों को मिलेगा जो टिकाऊ और पुनर्योजी खेती अपनाते हैं।


Carbon Credits Farming क्या होती है?

जब आप अपने खेत में पेड़ लगाते हैं, कम रासायनिक खाद इस्तेमाल करते हैं, या मिट्टी की सेहत सुधारने वाले तरीके अपनाते हैं — तो आपकी मिट्टी ज़्यादा कार्बन सोखती है और हवा में CO2 की मात्रा कम होती है। इस CO2 की कमी को मापा जाता है और एक “क्रेडिट” के रूप में certify किया जाता है।

एक Carbon Credit का मतलब होता है — एक टन CO2 का वातावरण से हटना। बड़ी-बड़ी कंपनियाँ — कारखाने, एयरलाइंस, इंडस्ट्रियल प्लांट्स — जो अपना कार्बन खुद कम नहीं कर सकतीं, वे इन क्रेडिट्स को किसानों से खरीदती हैं। और किसान को मिलते हैं — सीधे पैसे।


सरकार ने Carbon Credits Farming के लिए क्या किया है?

भारत सरकार के Ministry of Power ने मार्च 2025 में 8 crediting methodologies को मंजूरी दी, जिनमें खेती, वनीकरण, और स्वच्छ ऊर्जा शामिल हैं। इसी के साथ Carbon Credit Trading Scheme (CCTS) शुरू हुई, जिसे Bureau of Energy Efficiency (BEE) मैनेज करती है।

सरकार ने Green Credit Programme (GCP) भी चालू किया है जो पेड़ लगाने और पर्यावरण सुधार के कामों के लिए किसानों को क्रेडिट देता है। जनवरी 2024 में एक framework लॉन्च हुआ जो किसानों को sustainable farming के ज़रिए Carbon Credits Farming से जोड़ता है। CCTS की official compliance trading अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाली है।

इसके अलावा Union Budget 2026-27 में Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana के लिए 12,200 करोड़ रुपये और Agriculture Infrastructure Fund के तहत 84,202 करोड़ रुपये के loans sanctioned किए गए हैं जो किसानों की overall financial strength बढ़ाते हैं।


Carbon Credits Farming में किसान को कितनी कमाई होगी?

यह सबसे ज़रूरी सवाल है। आइए देखते हैं असली आँकड़े:

Agroforestry (पेड़-खेती): प्रति एकड़ प्रति साल 10,000 रुपये तक

Soil Carbon (मिट्टी कार्बन): प्रति एकड़ प्रति साल 2,000 से 5,000 रुपये

Punjab-Haryana Grow Indigo Aadi Project: किसान को बेचे गए क्रेडिट का 75% हिस्सा मिलता है — यानी Carbon Credit की मौजूदा कीमत 3,000-4,000 रुपये प्रति टन पर किसान को 2,000 से 3,000 रुपये प्रति एकड़ सालाना।

Maharashtra F4F Programme: फसल और कार्बन मिलाकर प्रति एकड़ 25,000 से 65,000 रुपये सालाना — जबकि पहले सिर्फ 8,000 से 10,000 रुपये मिलते थे।

Jharkhand BHGY Scheme: 1 एकड़ पर 20 साल में 60,000 रुपये का अतिरिक्त कार्बन वित्


Carbon Credits Farming के लिए कौन-कौन से तरीके अपनाने होंगे?

IIT Roorkee और उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि विभाग ने मिलकर जो कार्यक्रम शुरू किया है, उसमें किसानों को यह तरीके अपनाने होते हैं।

न्यूनतम जुताई (Minimum Tillage): मिट्टी को बार-बार पलटने से कार्बन निकलता है — जुताई कम करने से मिट्टी में कार्बन रहता है।

Cover Cropping: मुख्य फसल के बाद ज़मीन खाली न छोड़ें, हरी खाद वाली फसलें लगाएं।

Residue Management: फसल अवशेष जलाने की बजाय मिट्टी में मिलाएं — इससे मिट्टी की सेहत और कार्बन दोनों बढ़ते हैं।

Agroforestry: खेत की मेड़ों पर और खेत के बीच पेड़ लगाएं।

जैव उर्वरक (Bio-fertilizers): रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद का इस्तेमाल करें।

इन सभी गतिविधियों को Digital MRV (Monitoring, Reporting and Verification) सिस्टम से मापा और verify किया जाता है।


Carbon Credits Farming में रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

किसान सीधे अकेले Carbon Credits Farming में नहीं जुड़ सकते। इसके लिए तीन रास्ते हैं:

FPO या Cooperative के ज़रिए: अपने क्षेत्र के Farmer Producer Organisation (FPO) या सहकारी समिति से जुड़ें जो कार्बन प्रोजेक्ट चला रही हो।

Aggregator Company के ज़रिए: Grow Indigo, Rupiya App जैसी कंपनियाँ किसानों के छोटे-छोटे खेतों को एक साथ जोड़कर Carbon Credits Farming प्रोजेक्ट बनाती हैं।

राज्य सरकार के कार्यक्रम के ज़रिए: झारखंड में BHGY योजना के तहत 30,000 से ज़्यादा किसान पहले से जुड़े हैं। UP में IIT Roorkee का कार्यक्रम सहारनपुर से शुरू हो चुका है।


भारत के किन राज्यों में Carbon Credits Farming चल रही है?

पंजाब और हरियाणा: Grow Indigo का Aadi Project (VCS 2590) — 30,000 एकड़ covered, 50,000 Carbon Credits जारी — भारत में छोटे किसानों की पहली बड़े पैमाने पर soil carbon credit issuance।

महाराष्ट्र: F4F Programme — Gadchiroli और अन्य ज़िलों में किसानों को 25,000 से 65,000 रुपये प्रति एकड़ सालाना।

झारखंड: BHGY योजना — 18 जिलों में 30,000 से ज़्यादा लाभार्थी, 1 एकड़ पर 20 साल में 60,000 रुपये।

उत्तर प्रदेश: IIT Roorkee और कृषि विभाग का कार्यक्रम — सहारनपुर से शुरुआत, DMRV सिस्टम से monitoring।

गुजरात, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, राजस्थान: Rupiya App और अन्य aggregators के माध्यम से किसान जुड़ रहे हैं।


Carbon Credits Farming के फायदे और चुनौतियाँ

फायदे:
फसल की कमाई के ऊपर अलग से 5,000 से 15,000 रुपये प्रति एकड़ सालाना। मिट्टी की सेहत सुधरती है जिससे अगले साल की फसल भी बेहतर होती है। रासायनिक खाद का खर्च कम होता है जिससे लागत घटती है। सरकारी योजनाओं से जुड़ने का मौका मिलता है और पहचान बनती है।

चुनौतियाँ:
नई विधि सीखने में शुरुआत में थोड़ा समय और मेहनत लगती है। Verification प्रक्रिया में 6 से 12 महीने लग सकते हैं। छोटे किसानों को अकेले नहीं, FPO या group के ज़रिए जुड़ना होगा।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल 1: Carbon Credits Farming के लिए कितनी ज़मीन होनी चाहिए?
कम से कम 1 एकड़ ज़मीन होनी चाहिए। छोटे किसान FPO के ज़रिए मिलकर आवेदन कर सकते हैं।

सवाल 2: क्या Carbon Credits Farming में कोई रजिस्ट्रेशन फीस लगती है?
ज़्यादातर सरकारी और FPO कार्यक्रमों में कोई फीस नहीं लगती। Maharashtra के F4F Programme में किसान को सिर्फ 10% लागत देनी होती है, बाकी सब कार्यक्रम से मिलता है।

सवाल 3: पैसे कब और कैसे मिलते हैं?
Carbon Credits verify होने के बाद — आमतौर पर 6 से 12 महीने में — पैसे सीधे किसान के बैंक अकाउंट में DBT के ज़रिए भेजे जाते हैं।

सवाल 4: क्या यह सिर्फ बड़े किसानों के लिए है?
नहीं। Grow Indigo जैसी कंपनियाँ छोटे किसानों के खेतों को group करके Carbon Credits Farming प्रोजेक्ट बनाती हैं। Jharkhand की BHGY योजना भी छोटे और आदिवासी किसानों के लिए है।

सवाल 5: Carbon Credit की कीमत 2026 में कितनी है?
2026 में भारत में Carbon Credit की कीमत 1,350 से 2,400 रुपये प्रति टन के बीच है। Maharashtra में यह सबसे ज़्यादा — औसत 2,400 रुपये प्रति टन है।

सवाल 6: CCTS क्या है और यह किसानों से कैसे जुड़ा है?
Carbon Credit Trading Scheme (CCTS) भारत सरकार की आधिकारिक Carbon Market है, जिसे Ministry of Power, MoEFCC और Bureau of Energy Efficiency (BEE) मिलकर चलाते हैं। इसकी official compliance trading अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाली है। खेती और वनीकरण जैसे non-industrial sectors के लिए Voluntary Offset Mechanism पहले से active है।


निष्कर्ष

Carbon Credits Farming अब सिर्फ एक अवधारणा नहीं, बल्कि एक हकीकत है। पंजाब-हरियाणा से लेकर महाराष्ट्र और झारखंड तक — लाखों किसान इससे अतिरिक्त आमदनी कमा रहे हैं। सरकार ने 20,000 करोड़ रुपये का बजट रखा है, CCTS framework तैयार है, और official trading platform अक्टूबर 2026 तक शुरू होने वाला है।

अगर आप भी अपने खेत को Carbon Credits Farming में बदलना चाहते हैं, तो अभी अपने नज़दीकी FPO से संपर्क करें या राज्य सरकार के कृषि विभाग में जानकारी लें। यह मौका बार-बार नहीं आता — जो पहले जुड़ेगा, फायदा उसी को पहले मिलेगा।

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