Banana Price: मध्य-पूर्व में जारी ईरान-इजरायल युद्ध की मार अब देश के खेत-खलिहानों तक पहुंच गई है। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के केला उत्पादक किसान इस समय भीषण आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। खाड़ी देशों में बढ़े तनाव और अस्थिर हालात के कारण बड़वानी का केला निर्यात लगभग पूरी तरह ठप पड़ गया है। जो केला (Banana Price) कुछ हफ्ते पहले तक 25 रुपये प्रति किलो बिक रहा था वह अब महज 8 से 9 रुपये प्रति किलो पर बिकने को मजबूर है। रमजान के महीने में खाड़ी देशों में मांग बढ़ने की जो उम्मीद किसान लगाए बैठे थे वह भी युद्ध की भेंट चढ़ गई। हजारों किसान अब लागत निकालने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।
Banana Price: बड़वानी का केला – विदेशों तक पहचान
नर्मदा नदी के किनारे बसा बड़वानी जिला केले की खेती के लिए पूरे देश में जाना जाता है। यहां की उपजाऊ काली मिट्टी और नर्मदा का पर्याप्त पानी केले की खेती के लिए प्रकृति का वरदान है। यही वजह है कि यहां उगने वाला केला स्वाद और गुणवत्ता दोनों में बेजोड़ माना जाता है। सामान्य परिस्थितियों में यहां से हर साल बड़ी मात्रा में केला (Banana Price) ईरान, इराक, बहरीन, तुर्की, दुबई और मध्य-पूर्व के अन्य देशों में निर्यात किया जाता रहा है। निर्यात के कारण किसानों को अच्छे दाम मिलते थे और इस जिले ने केला उत्पादन में एक मजबूत पहचान बना ली थी।
Banana Price: 25 रुपये से सीधे 8-9 रुपये – कीमतों में भारी गिरावट
किसानों ने बताया कि कुछ हफ्ते पहले तक केले का बाजार भाव (Banana Price) करीब 25 रुपये प्रति किलो तक था। निर्यात की मांग के कारण व्यापारी सीधे खेत से माल उठाते थे और किसानों को परेशान नहीं होना पड़ता था। लेकिन जैसे ही खाड़ी देशों में युद्ध भड़का और हालात बिगड़े निर्यात अचानक रुक गया। इसका असर तुरंत कीमतों पर पड़ा। अब किसानों को 8 से 9 रुपये प्रति किलो के भाव पर माल बेचना पड़ रहा है। यह गिरावट 65 फीसदी से भी ज्यादा है। केले की खेती में लागत ही इतनी आती है कि इस भाव पर बेचने पर किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
Banana Price: रमजान की उम्मीद भी टूटी
केला किसानों को इस बार रमजान से बड़ी उम्मीद थी। खाड़ी देशों में रमजान के महीने में फलों की खपत काफी बढ़ जाती है और इस दौरान केले की मांग (Banana Price) आमतौर पर तेज होती है। किसानों ने इसी उम्मीद में अपनी फसल तैयार रखी थी। लेकिन इस बार युद्ध के कारण खाड़ी देशों के साथ व्यापार लगभग बंद हो गया जिससे रमजान की मांग का कोई फायदा नहीं मिला। फसल खेत में तैयार खड़ी है लेकिन खरीदार नहीं हैं। इससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है।
Banana Price: बड़े शहरों में भी नहीं मिल रहा सही दाम
जब निर्यात बंद हुआ तो व्यापारियों ने बड़वानी का केला दिल्ली, ग्वालियर और अन्य बड़े घरेलू बाजारों की तरफ मोड़ने की कोशिश की। लेकिन यह रास्ता भी कोई खास राहत नहीं दे पाया। इन बाजारों में पहले से ही देश के अन्य हिस्सों से केले की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है। अचानक बड़वानी से अतिरिक्त माल आने पर बाजार में केले की भरमार हो गई। आपूर्ति बढ़ने और मांग उतनी ही रहने पर कीमतें और नीचे चली गईं। यही कारण है कि घरेलू बाजारों में भी किसानों को उचित दाम (Banana Price) नहीं मिल पा रहे हैं।
Banana Price: निर्यात बाजार की व्यापक तस्वीर
बड़वानी सिर्फ एक उदाहरण है। ईरान-इजरायल युद्ध का असर पूरे भारत के कृषि निर्यात पर पड़ रहा है। काबुली चने का निर्यात भी खाड़ी देशों को लगभग बंद हो गया है। पिस्ता, अंजीर और किशमिश जैसे ड्राई फ्रूट्स की कीमतें आसमान पर हैं। सोलापुर में प्याज किसान कम दामों पर सड़क पर उतर आए हैं। गेहूं के दाम भी मार्च में गिरे हैं। कुल मिलाकर भारतीय कृषि निर्यात पर युद्ध का साया गहरा होता जा रहा है।
Banana Price: किसानों की मांग – सरकार करे हस्तक्षेप
बड़वानी के किसान अब सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। उनकी मांग है कि सरकार तत्काल राहत के रूप में केले पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (Banana Price) घोषित करे और वैकल्पिक बाजार ढूंढने में मदद करे। इसके अलावा किसान उम्मीद कर रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य हों और खाड़ी देशों के साथ निर्यात दोबारा शुरू हो। जब तक ऐसा नहीं होता तब तक बड़वानी के हजारों केला किसान आर्थिक तंगी में जीने को मजबूर रहेंगे।
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