Animal Vaccination: गाय-भैंस पालने वाले किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि उनके पशु बीमार न पड़ें। लेकिन सच यह है कि पशु किसी भी मौसम में बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं और कई बार ये बीमारियां महामारी का रूप ले लेती हैं। दुनिया के हर देश में यही हाल है। सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि आज भी पशुओं की बहुत सारी खतरनाक बीमारियों का कोई स्थायी इलाज मौजूद नहीं है। ऐसी बीमारियों को केवल समय पर टीकाकरण (Animal Vaccination) यानी वैक्सीनेशन के जरिए ही काबू किया जा सकता है। पशु विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सही समय पर और सही तरीके से टीकाकरण (Animal Vaccination) कराया जाए तो पशुपालक न सिर्फ अपने जानवरों को बचा सकते हैं बल्कि अपनी कमाई भी बढ़ा सकते हैं।
Animal Vaccination: टीकाकरण से एंटीबायोटिक का झंझट भी खत्म
टीकाकरण (Animal Vaccination) का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब पशु बीमार ही नहीं पड़ेगा तो उसे एंटीबायोटिक दवाइयां देने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। यह बात इसलिए अहम है क्योंकि आजकल पशु उत्पादों के निर्यात में सबसे बड़ी समस्या एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी AMR की है। बीमार पशुओं को दी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाइयों के कारण दूध, मांस और अन्य पशु उत्पाद दूषित हो जाते हैं जिसका असर उन्हें इस्तेमाल करने वाले इंसानों पर भी पड़ता है। टीकाकरण से यह पूरी समस्या जड़ से खत्म हो सकती है।
Animal Vaccination: टीकाकरण से क्या-क्या फायदे मिलते हैं
पशु विशेषज्ञों के अनुसार नियमित टीकाकरण (Animal Vaccination) से पशुपालकों को कई तरह के फायदे मिलते हैं। पशुओं में फैलने वाली सामान्य और जानलेवा बीमारियों से बचाव होता है। महामारी की स्थिति में पूरा झुंड सुरक्षित रहता है। पशुओं से इंसानों में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों का खतरा भी कम होता है। बीमारी के इलाज पर होने वाला भारी खर्च बचता है। दूध और अन्य पशु उत्पाद दूषित नहीं होते। और सबसे जरूरी बात यह कि पशुपालन में लागत कम होती है और मुनाफा बढ़ता है।
Animal Vaccination: टीकाकरण कराते वक्त इन 12 बातों का जरूर रखें ध्यान
पशु विशेषज्ञों ने टीकाकरण (Animal Vaccination) को लेकर कुछ जरूरी नियम बताए हैं जिनका पालन करना हर पशुपालक के लिए जरूरी है।
पहली बात यह कि टीकाकरण (Animal Vaccination) हमेशा स्वस्थ पशुओं में ही कराना चाहिए। बीमार या कमजोर पशु को टीका लगाने से फायदा नहीं बल्कि नुकसान हो सकता है। दूसरी बात यह कि टीका लगवाने से कम से कम दो सप्ताह पहले पशु को कृमिनाशक दवाई देनी चाहिए ताकि पेट के कीड़े मर जाएं और पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो। तीसरी जरूरी बात यह है कि किसी बीमारी के फैलने की आशंका वाले मौसम से 20 से 30 दिन पहले टीकाकरण करा लेना चाहिए क्योंकि टीके को असर दिखाने में समय लगता है।
चौथी बात यह कि टीके को हमेशा मानकों के अनुसार कोल्ड बॉक्स में रखा होना चाहिए। गर्मी में टीके की गुणवत्ता नष्ट हो जाती है और फिर वह बेअसर हो जाता है। पांचवीं बात यह कि जहां एक साथ बहुत अधिक पशु हों वहां झुंड में सामूहिक टीकाकरण कराना जरूरी है ताकि कोई भी पशु छूटे नहीं। छठी बहुत महत्वपूर्ण बात यह है कि गर्भवती पशु को टीका बिल्कुल नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात का खतरा रहता है।
सातवीं बात यह कि हर पशु का एक स्वास्थ्य कार्ड बनाएं जिसमें कब कौन सा टीका लगाया गया इसका पूरा रिकॉर्ड हो। आठवीं बात यह कि हर पशु के लिए अलग-अलग सुई का इस्तेमाल करना अनिवार्य है। एक ही सुई से कई पशुओं को टीका लगाने से संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। नौवीं बात यह कि टीके में इस्तेमाल की गई सुई और सिरिंज को नियमों के अनुसार नष्ट करें, इधर-उधर न फेंकें।
Animal Vaccination: पशुपालकों से विशेषज्ञों की अपील
पशु विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अभी भी बड़ी संख्या में पशुपालक टीकाकरण को लेकर लापरवाह रहते हैं। या तो वे समय पर टीका नहीं लगवाते या फिर गलत तरीके से लगवाते हैं। इस लापरवाही का नतीजा यह होता है कि एक पशु बीमार पड़ता है और देखते-देखते पूरा झुंड संक्रमित हो जाता है। इसलिए हर पशुपालक को अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करके अपने पशुओं का टीकाकरण कार्यक्रम तैयार करवाना चाहिए और उसका कड़ाई से पालन करना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी और समय पर किया गया टीकाकरण आपके पशु को साल भर स्वस्थ रख सकता है और आपकी कमाई को भी सुरक्षित कर सकता है।
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