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लखपति दीदी बनेंगी बीसी सखी: महिलाओं को हर महीने 15–30 हजार कमाने का सुनहरा मौका

लखपति दीदी अब बनेंगी बीसी सखी: ग्रामीण महिलाओं को हर महीने 15 से 30 हजार रुपये की नई कमाई का अवसर


केंद्र सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में नई दिल्ली में हुए दो अहम समझौता ज्ञापनों (MoU) के जरिए सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब लखपति दीदी योजना को केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे स्थायी रोजगार और वित्तीय सेवाओं से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाया जाएगा।

इन समझौतों का सीधा लाभ ग्रामीण महिलाओं, किसानों और स्वयं सहायता समूहों (SHG) को मिलेगा। खास बात यह है कि अब लखपति दीदियां बीसी सखी (Banking Correspondent Sakhi) बनकर हर महीने 15,000 से 30,000 रुपये तक की आय अर्जित कर सकेंगी।


ग्रामीण भारत के लिए सरकार की दोहरी रणनीति

सरकार की इस नई पहल के पीछे दो मुख्य उद्देश्य हैं—

  1. किसानों को नकली और घटिया कृषि इनपुट से बचाना
  2. ग्रामीण महिलाओं को स्थायी आय के साधन उपलब्ध कराना

इसी रणनीति के तहत कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, डाक विभाग और ग्रामीण विकास मंत्रालय के बीच दो महत्वपूर्ण समझौते किए गए हैं।


पहला MoU: नकली बीज, खाद और कीटनाशकों पर लगेगी लगाम

पहला समझौता कृषि मंत्रालय और डाक विभाग के बीच हुआ है, जिसका उद्देश्य है—
👉 बीज, उर्वरक और कीटनाशकों के सैंपलों की सुरक्षित जांच और पारदर्शी ढुलाई

अब कृषि इनपुट के सैंपल टैंपर-प्रूफ पैकिंग, बारकोड और QR कोड के साथ प्रयोगशालाओं तक भेजे जाएंगे। इससे:

यह कदम सीधे तौर पर किसानों की फसल और आय की सुरक्षा से जुड़ा है, क्योंकि घटिया बीज और नकली कीटनाशक किसानों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं।


किसानों को मिलेगा भरोसा, मिलावटखोरों पर होगी सख्ती

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सीड एक्ट और पेस्टिसाइड एक्ट के तहत दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डाक विभाग के मजबूत लॉजिस्टिक नेटवर्क के कारण अब:

इससे कृषि उत्पादन, फसल की गुणवत्ता और किसानों की आय—तीनों में सुधार की उम्मीद है।


दूसरा MoU: लखपति दीदी से बीसी सखी तक का सफर

दूसरा समझौता ग्रामीण विकास मंत्रालय, डाक विभाग और DAY-NRLM के बीच हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य है—

👉 ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ना

इस पहल के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लखपति दीदियों को बीसी सखी के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। बीसी सखी बनने के बाद महिलाएं गांव-गांव जाकर:


हर महीने 15 से 30 हजार रुपये की संभावित आय

सरकारी अनुमान के अनुसार, इस मॉडल से जुड़ने वाली महिलाओं की आय में 15,000 से 30,000 रुपये प्रति माह तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
यह आय पूरी तरह से:

इससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी और उनके परिवार की स्थिति भी मजबूत होगी।


इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की अहम भूमिका

इस योजना को जमीन पर उतारने में इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
बीसी सखियों को:

प्रदान किया जाएगा, ताकि वे भरोसेमंद तरीके से सेवाएं दे सकें। साथ ही:

अब और तेजी से ग्रामीण इलाकों तक पहुंच सकेंगे।


ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया संबल

इन दोनों समझौतों को सरकार ने “Whole of Government Approach” का उदाहरण बताया है।
इसका मतलब है कि अलग-अलग मंत्रालय मिलकर:

कुल मिलाकर, यह पहल कृषि सुधार, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास—तीनों को एक साथ आगे बढ़ाने वाली है।
जहां एक ओर किसानों को नकली कृषि उत्पादों से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर लखपति दीदियां बीसी सखी बनकर सम्मानजनक आय अर्जित कर सकेंगी।

यह योजना न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि गरीबी-मुक्त और मजबूत ग्रामीण भारत की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगी।

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