भारत की सोलर क्रांति: 129 GW क्षमता के साथ बना दुनिया का नया ग्रीन एनर्जी सुपरपावर


भारत अब दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती सोलर पावर इकॉनमी बन चुका है। साल 2014 में जहां देश की सौर क्षमता केवल 3 GW थी, वहीं 2025 में यह रिकॉर्ड 129 GW को पार कर चुकी है। इससे सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50% हिस्सा अब नॉन-फॉसिल सोर्स से आने लगा है। यही नहीं, भारत ने क्लीन एनर्जी के कई ग्लोबल मानक भी पीछे छोड़ दिए हैं, जिससे भारत अब ग्लोबल क्लीन एनर्जी लीडर के तौर पर पहचाना जा रहा है।

सरकार के अनुसार अक्टूबर 2025 तक देश की नॉन-फॉसिल पावर क्षमता 259 GW पहुंच गई है, जो भारत की कुल स्थापित क्षमता के 50 फीसदी से ज़्यादा है। यह उपलब्धि भारत को न सिर्फ नेट ज़ीरो की दिशा में आगे बढ़ाती है बल्कि यह दिखाती है कि देश अब ऊर्जा क्षेत्र में परंपरागत कोयला आधारित ढांचे से बाहर निकलकर एक स्वच्छ भविष्य का निर्माण कर रहा है। भारत ने इस दशक में सौर सेक्टर में जो तेजी दिखाई है, वह न सिर्फ घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रही है बल्कि वैश्विक जलवायु नेतृत्व में भी भारत की भूमिका मजबूत कर रही है। भारत अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायंस (International Solar Alliance) का संस्थापक देश है और इसका मुख्यालय गुरुग्राम में मौजूद है, जो अपने आप में भारत की लीडरशिप का बड़ा उदाहरण है। अक्टूबर 2025 में भारत ने नई दिल्ली में ISA की 8वीं असेंबली की मेजबानी भी की।

भारत आज दुनिया के 125 से ज़्यादा देशों के साथ सोलर फाइनेंसिंग, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल सप्लाई चेन पर मिलकर काम कर रहा है और यही रणनीति आने वाले दशक में भारत की सौर अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत करेगी। भारत की यह प्रगति किसी एक दिन का चमत्कार नहीं बल्कि रणनीतिक प्लानिंग, सरकारी नीतियों, आधुनिक तकनीक और निजी निवेश का संयुक्त परिणाम है।

भारत के सौर विस्तार में सबसे अधिक योगदान मिशन स्तर पर चले सरकारी कार्यक्रमों का रहा है। साल 2010 में लॉन्च किया गया नेशनल सोलर मिशन (NSM) आज भारत की ग्रीन एनर्जी क्रांति की रीढ़ साबित हो रहा है। इस मिशन के जरिए ग्राउंड-माउंटेड प्लांट, रूफटॉप सोलर, हाइब्रिड प्रोजेक्ट, और ऑफ-ग्रिड सिस्टम में तेजी से विस्तार हुआ है। इस समय भारत के सोलर पोर्टफोलियो की संरचना इस प्रकार है– ग्राउंड-माउंटेड– 98.72 GW, रूफटॉप– 22.42 GW, हाइब्रिड– 3.32 GW, ऑफ-ग्रिड– 5.45 GW यानी भारत अब सोलर टेक्नोलॉजी के हर सेगमेंट में कवर हो चुका है और यही स्ट्रक्चर भारत को ग्रीन एनर्जी सुपरपावर बनाने की दिशा में आगे ले जा रहा है।

घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा अपनाने के लिए चल रही महत्वपूर्ण योजना PM Surya Ghar के तहत दिसंबर 2025 तक 24 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर लगाए जा चुके हैं। इनके जरिए 7 GW क्लीन एनर्जी उत्पन्न हो रही है और सरकार अब तक करीब ₹13,464 करोड़ की सब्सिडी जारी कर चुकी है। यह अभियान देश में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और बिजली बिल कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

कृषि क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए PM-KUSUM सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो रही है। अक्टूबर 2025 तक देशभर में 9 लाख से अधिक स्टैंडअलोन सोलर पंप लगाए जा चुके हैं। कंपोनेंट C के तहत 10,535 ग्रिड पंप सोलराइज किए गए हैं और 9,74,458 Feeder-Level Solarization (FLS) पंप पूरे हो चुके हैं। इस स्कीम को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है, जिससे किसानों को सोलर पंप (15 HP तक) पर 30% से 50% तक की सहायता मिलती रहेगी।

सोलर मॉड्यूल निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ₹24,000 करोड़ का PLI स्कीम पैकेज लागू किया है, जिसके तहत उच्च दक्षता वाले मॉड्यूल के 48,337 MW मैन्युफैक्चरिंग की मंजूरी दी जा चुकी है। सितंबर 2025 तक इस स्कीम से ₹52,900 करोड़ का निवेश और लगभग 44,400 नौकरियां पैदा हो चुकी हैं। यानी भारत अब इंपोर्ट पर निर्भर नहीं, बल्कि सोलर एक्सपोर्ट की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।

देश में बड़े पैमाने पर सौर उत्पादन के लिए MNRE की योजना के तहत अक्टूबर 2025 तक 13 राज्यों में 55 मेगा सोलर पार्क को मंजूरी दी गई है जिनकी क्षमताएं 40 GW के करीब हैं। इनमें से 14,922 MW क्षमता पहले ही स्थापित की जा चुकी है जबकि बाकी कार्य तेजी से पूरे हो रहे हैं। इन पार्कों में एक ही स्थान पर भूमि, ट्रांसमिशन लिंक, सड़क और पानी की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, जिससे कंपनियों को प्रोजेक्ट लगाने में आसानी होती है।

भारत ISA, Mission Innovation और Clean Energy Ministerial में प्रमुख भूमिका निभा रहा है। 8वीं ISA Assembly में 125 से अधिक देशों के मंत्री और 550+ प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान One Sun One World One Grid (OSOWOG) को फिर से प्रमुखता दी गई, जिसका लक्ष्य पूरी दुनिया की ग्रीन ग्रिड को आपस में जोड़ना है। G20 ने भारत के “LiFE” मिशन की सराहना की, जबकि IEA ने कहा—“Global energy future cannot be planned without India”.

भारत का लक्ष्य 500 GW नॉन-फॉसिल क्षमता का 2030 तक, कार्बन उत्सर्जन में 1 बिलियन टन की कमी, और 2070 तक नेट ज़ीरो का है। अब जब देश नॉन-फॉसिल क्षमता का 50% लक्ष्य पहले ही हासिल कर चुका है, तो साफ है कि भारत अब सिर्फ लक्ष्य नहीं बना रहा बल्कि उन्हें समय से पहले पूरा भी कर रहा है।

भारत की सौर यात्रा अब दुनिया के लिए मॉडल बन चुकी है। ग्रीन एनर्जी, रोजगार, ग्रामीण परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, क्लाइमेट एक्शन और टेक्नोलॉजी विकास—इन सभी क्षेत्रों में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में सौर ऊर्जा भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा व्यवस्था और जलवायु नेतृत्व—तीनों को नए स्तर पर ले जाएगी। भारत अब सिर्फ “सोलर पावर नेशन” नहीं, बल्कि ग्लोबल सोलर सुपरपावर की ओर बढ़ चुका है।

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