UP News: उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर आई है। प्रदेश के गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने राज्य की तमाम चीनी मिलों को कड़े निर्देश जारी करते हुए साफ कह दिया है कि अब किसान की लिखित सहमति के बिना गन्ना आपूर्ति पर्ची पर दर्ज प्रजाति को किसी भी हालत में डिग्रेड यानी घटिया दर्जे में नहीं बदला जा सकता। यह फैसला उन हजारों गन्ना किसानों के हक में आया है जो लंबे समय से चीनी मिलों की मनमानी का शिकार हो रहे थे। अब जो मिल इस नियम का उल्लंघन करेगी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसानों की शिकायतें सुनने के लिए एक विशेष टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800 121 3203 भी जारी किया गया है।
UP News: क्या है पर्ची डिग्रेडेशन की समस्या?
गन्ना आयुक्त कार्यालय के पास पिछले कुछ दिनों में लगातार शिकायतें आ रही थीं जिनमें किसानों ने बताया कि कई चीनी मिलें उनकी जानकारी और अनुमति के बिना ही गन्ना आपूर्ति पर्ची पर दर्ज प्रजाति को बदल देती हैं। इसका सीधा और बड़ा नुकसान किसान को होता है। मान लीजिए किसी किसान ने उन्नत किस्म जैसे कोशा 13235 का गन्ना बेचा तो मिल उसे कागजों पर किसी सामान्य और घटिया प्रजाति का बताकर कम दाम पर तौल लेती थी। इस प्रक्रिया में किसान को उसकी मेहनत का पूरा मूल्य नहीं मिल पाता था और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। कई मामलों में तो किसानों को यह तक नहीं बताया जाता था कि उनकी पर्ची पर किस प्रजाति का नाम दर्ज किया गया है। गन्ना विभाग की हेल्पलाइन पर भी इस तरह की दर्जनों शिकायतें दर्ज हुईं जिसके बाद आयुक्त ने यह सख्त कदम उठाया।
UP News: गन्ना आयुक्त के नए निर्देश
गन्ना आयुक्त ने प्रदेश की सभी चीनी मिलों को जो निर्देश जारी किए हैं वे किसानों के हित में बेहद महत्वपूर्ण हैं। पहली और सबसे बड़ी बात यह है कि अगर कोई मिल किसी कारण से गन्ने की प्रजाति बदलना चाहती है तो उसे पहले किसान को पूरी बात सरल और स्पष्ट भाषा में समझानी होगी। इसके बाद किसान की लिखित सहमति लेना अनिवार्य होगा। बिना इस प्रक्रिया के गन्ना तौलना पूरी तरह गैरकानूनी माना जाएगा। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि किसान द्वारा आपूर्ति के लिए लाया गया गन्ना किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं किया जाएगा। मिल को गन्ना लेना ही होगा और किसान को उचित जानकारी देने के बाद ही तौल की कार्रवाई करनी होगी।
UP News: जिला और क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश
गन्ना आयुक्त ने केवल मिलों को ही नहीं बल्कि जिला स्तर और परिक्षेत्रीय स्तर पर तैनात विभागीय अधिकारियों को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अब ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में चीनी मिलों की गन्ना खरीद प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखेंगे। किसानों से सीधे संपर्क कर उनकी समस्याएं जानना और पर्ची डिग्रेडेशन के मामलों की जांच करना इन अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी। जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा वहां दोषी मिल के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
UP News: किसानों के लिए जागरूकता अभियान
गन्ना विभाग का इरादा सिर्फ शिकायतों का निपटारा करने तक सीमित नहीं है। विभाग ने यह भी तय किया है कि प्रदेश के गन्ना किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में किसानों को यह बताया जाएगा कि विभिन्न गन्ना प्रजातियों के क्या फायदे और नुकसान हैं और चीनी मिलों के लिए कौन सी प्रजातियां अधिक उपयुक्त हैं। अगर किसान समय रहते उन्नत और मिल अनुकूल किस्मों की खेती करेंगे तो पर्ची डिग्रेडेशन जैसी समस्याएं अपने आप कम होने लगेंगी।
UP News: धांधली हो तो यह करें किसान
अगर किसी गन्ना किसान के साथ पर्ची डिग्रेडेशन की धांधली हुई है या मिल दबाव बना रही है तो सबसे पहले टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800 121 3203 पर कॉल करें। यह नंबर पूरी तरह मुफ्त है। इसके साथ ही जिला गन्ना अधिकारी या परिक्षेत्रीय अधिकारी को लिखित शिकायत भी दी जा सकती है। अपनी गन्ना आपूर्ति पर्ची और सभी जरूरी कागजात संभालकर रखें ताकि जांच में काम आ सकें। अपने आसपास के अन्य किसानों को भी इस नए नियम की जानकारी दें ताकि किसी के साथ भी अन्याय न हो।
| महत्वपूर्ण बिंदु | विवरण |
|---|---|
| नया नियम | किसान की लिखित सहमति अनिवार्य |
| गन्ना वापसी | किसी भी स्थिति में नहीं होगी |
| शिकायत हेल्पलाइन | 1800 121 3203 (निःशुल्क) |
| निगरानी | जिला व परिक्षेत्रीय अधिकारी |
| उल्लंघन पर | दोषी मिलों पर कड़ी कार्रवाई |
यह निर्णय उत्तर प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों के लिए एक बड़ी राहत है। अब चीनी मिलें मनमाने ढंग से किसानों को नुकसान नहीं पहुंचा सकेंगी और हर किसान को उसकी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा।
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