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Sugarcane Farming: गन्ने की खेती में क्रांति, TNAU की सिंगल बड सेट कटर मशीन को मिला 20 साल का पेटेंट, किसानों की लागत घटेगी 84%

Sugarcane Farming
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तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय ने गन्ना रोपाई के लिए एक ऐसी मशीन विकसित की है जो न केवल समय बचाएगी, बल्कि प्रति हेक्टेयर खर्च को 6,250 रुपये से घटाकर मात्र 1,000 रुपये तक ले आएगी। भारत सरकार के पेटेंट ऑफिस ने इस तकनीक को 20 साल का संरक्षण दिया है।

Sugarcane Farming: भारत में गन्ने की खेती करोड़ों किसानों की आजीविका का आधार है। देशभर में लगभग 47 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की फसल उगाई जाती है, लेकिन इस फसल की रोपाई प्रक्रिया आज भी बेहद श्रम-साध्य और महंगी बनी हुई है। इसी समस्या का स्थायी समाधान निकालते हुए तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) ने एक अत्याधुनिक सिंगल बड सेट कटर मशीन विकसित की है, जिसे अब भारत सरकार के पेटेंट ऑफिस से 20 साल का आधिकारिक पेटेंट मिल चुका है।

यह मशीन सतत गन्ना पहल यानी Sustainable Sugarcane Initiative (SSI) के तहत तैयार की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मशीन गन्ना उत्पादन के क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत कर सकती है। 34,000 रुपये की किफायती कीमत पर उपलब्ध यह मशीन उन किसानों के लिए वरदान साबित होगी जो परंपरागत तरीकों पर निर्भर हैं और हर सीजन भारी लागत झेलते हैं।

Sugarcane Farming: पारंपरिक तरीके की क्या थी सीमाएं

अब तक गन्ने की रोपाई के लिए बड यानी कलिका काटने का काम या तो मजदूरों के हाथ से होता था या फिर पुराने बड चिपर मशीन से। दोनों ही तरीके न केवल समय लेने वाले थे, बल्कि इनमें काफी अधिक श्रम और पैसा भी खर्च होता था। एक हेक्टेयर खेत के लिए बड कटाई पर लगभग 6,250 रुपये का खर्च आता था। इसके अलावा काटे गए बड की गुणवत्ता भी एकसमान नहीं रहती थी, जिससे अंकुरण दर प्रभावित होती थी और उत्पादन घटता था।

मजदूरों की बढ़ती मांग और घटती उपलब्धता के कारण यह समस्या और गहरी होती जा रही थी। ऐसे में TNAU के वैज्ञानिकों ने इस चुनौती को तकनीक से हल करने का बीड़ा उठाया।

Sugarcane Farming: मशीन की संरचना और खासियतें

TNAU द्वारा विकसित सिंगल बड सेट कटर मशीन माइल्ड स्टील के मजबूत फ्रेम पर निर्मित है। यह 4 हॉर्स पावर के डीजल इंजन से संचालित होती है और गन्ने के डंठल से एकसमान सिंगल बड सेट काटने में सक्षम है। मशीन की संरचना इस प्रकार तैयार की गई है कि इसे खेत के वातावरण में आसानी से उपयोग किया जा सके।

मशीन में कई अहम घटक लगाए गए हैं जो इसे प्रभावी और सुरक्षित बनाते हैं। इनमें पावर ट्रांसमिशन सिस्टम, दांतेदार कटिंग डिस्क, सुरक्षा कवर, केन होल्डर जो गन्ने को पकड़े रखता है, डिलीवरी श्यूट जो तैयार सेट बाहर निकालता है, आउटपुट काउंटर, कंपन कम करने वाले माउंट और आवाजाही के लिए पहिए शामिल हैं। मशीन का डिजाइन किसानों की सुविधा को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

Sugarcane Farming: मशीन की तकनीकी विशेषताओं पर एक नजर

तकनीकी पहलूविवरण
इंजन क्षमता4 हॉर्स पावर (डीजल)
ब्लेड की गति2,200 आरपीएम
कटिंग डिस्क का व्यास200 मिलीमीटर
सेट आकार के विकल्प30 मिमी, 35 मिमी, 40 मिमी
प्रति घंटे उत्पादन क्षमतालगभग 1,700 बड
मशीन की कीमत34,000 रुपये
पेटेंट की अवधि20 वर्ष
फ्रेम सामग्रीमाइल्ड स्टील

Sugarcane Farming: ट्रायल में मिले चौंकाने वाले परिणाम

परीक्षण के दौरान इस मशीन को 2,200 आरपीएम की ब्लेड गति पर संचालित किया गया। 200 मिलीमीटर व्यास वाली कटिंग डिस्क का उपयोग करते हुए प्रति घंटे करीब 1,700 बड काटने की क्षमता दर्ज की गई। डिस्क के बीच स्पेसर बदलने की सुविधा से 30, 35 और 40 मिलीमीटर के अलग-अलग आकार के सेट तैयार किए जा सकते हैं, जो विभिन्न किस्मों और खेती की जरूरतों के अनुसार उपयुक्त हैं।

अंकुरण दर के मामले में भी यह मशीन बेहद प्रभावशाली रही। प्रोट्रे नर्सरी में 95 प्रतिशत और खेत की परिस्थितियों में 90 प्रतिशत अंकुरण दर दर्ज की गई, जो पारंपरिक तरीकों की तुलना में काफी बेहतर है। बेहतर अंकुरण का सीधा असर फसल की उत्पादकता पर पड़ता है।

Sugarcane Farming: लागत तुलना, पहले और अब

रोपाई की विधिप्रति हेक्टेयर लागतसमय की खपतअंकुरण दर
हाथ से कटाई6,500 रुपये से अधिकअधिक75-80%
पारंपरिक बड चिपरलगभग 6,250 रुपयेमध्यम80-85%
TNAU सिंगल बड सेट कटरलगभग 1,000 रुपयेबहुत कम90-95%

इस तालिका से स्पष्ट है कि नई मशीन से लागत में लगभग 84 प्रतिशत की कमी आती है। डेवलपर्स का दावा है कि समय और लागत दोनों में 50 प्रतिशत से अधिक की बचत होती है, लेकिन व्यावहारिक परीक्षणों में यह आंकड़ा और भी बेहतर निकला है।

Sugarcane Farming: भारत में गन्ना उत्पादन का परिदृश्य

भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक देश है। देश में करीब 47 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है और औसत उत्पादकता लगभग 72 टन प्रति हेक्टेयर है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य हैं।

तमिलनाडु इस मामले में सबसे आगे है जहां औसत उत्पादकता 100 टन प्रति हेक्टेयर से भी अधिक है। यह राष्ट्रीय औसत से करीब 40 प्रतिशत अधिक है। इसकी एक बड़ी वजह राज्य में कृषि अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग है। TNAU की यह नई मशीन इसी परंपरा को आगे बढ़ाती है।

Sugarcane Farming: SSI पद्धति के साथ मशीन का तालमेल

सतत गन्ना पहल यानी SSI एक उन्नत कृषि पद्धति है जिसमें कम बीज, कम पानी और कम रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से अधिक उत्पादन प्राप्त किया जाता है। इस विधि में सिंगल बड सेट की रोपाई एक मूलभूत आवश्यकता है क्योंकि इससे पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखी जाती है और प्रत्येक पौधे को पर्याप्त पोषण, धूप और हवा मिलती है।

TNAU की यह मशीन SSI पद्धति को अपनाने वाले किसानों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। पहले इस पद्धति में सिंगल बड काटने की कठिनाई एक बड़ी रुकावट थी, लेकिन अब इस मशीन के आने से SSI खेती को बड़े पैमाने पर अपनाना आसान होगा।

Sugarcane Farming: किसानों के लिए व्यावहारिक फायदे

इस मशीन को अपनाने से छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों को सबसे अधिक लाभ होगा। एक ओर जहां मशीन की कीमत 34,000 रुपये है, वहीं प्रति हेक्टेयर बचत लगभग 5,250 रुपये होती है। इसका मतलब यह है कि सात हेक्टेयर खेती करने वाला किसान एक ही सीजन में मशीन की पूरी लागत वसूल कर सकता है।

इसके अलावा मशीन की बड कटाई में सटीकता से अंकुरण दर बेहतर होती है, जिससे फसल की पैदावार भी बढ़ती है। समय की बचत होने से किसान रोपाई के लिए उपयुक्त मौसम का पूरा फायदा उठा सकते हैं। मजदूरों पर निर्भरता कम होने से अप्रत्याशित श्रम संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।

Sugarcane Farming: पेटेंट का महत्व और भविष्य की राह

भारत सरकार के पेटेंट ऑफिस द्वारा 20 साल के पेटेंट की मंजूरी इस तकनीक की मौलिकता और उपयोगिता की आधिकारिक स्वीकृति है। यह पेटेंट TNAU को इस तकनीक के व्यावसायीकरण और लाइसेंसिंग का अधिकार देता है। इससे विश्वविद्यालय अन्य कंपनियों या निर्माताओं को इस मशीन के उत्पादन की अनुमति दे सकता है, जिससे यह तकनीक देश के कोने-कोने तक पहुंच सकती है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार इस मशीन को अपनी कृषि यंत्रीकरण योजनाओं में शामिल करे और सब्सिडी का लाभ दे, तो देश के गन्ना उत्पादक राज्यों में इसकी पहुंच तेजी से बढ़ सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: TNAU की सिंगल बड सेट कटर मशीन की कीमत क्या है? यह मशीन 34,000 रुपये की कीमत पर उपलब्ध है। यह उन किसानों के लिए किफायती विकल्प है जो SSI पद्धति से गन्ने की खेती करते हैं।

प्रश्न 2: इस मशीन से प्रति हेक्टेयर कितनी लागत बचती है? पारंपरिक बड चिपर से जहां एक हेक्टेयर में लगभग 6,250 रुपये खर्च होते हैं, वहीं इस मशीन से यह खर्च घटकर लगभग 1,000 रुपये प्रति हेक्टेयर रह जाता है। यानी प्रति हेक्टेयर करीब 5,250 रुपये की बचत होती है।

प्रश्न 3: यह मशीन एक घंटे में कितने बड काट सकती है? ट्रायल के दौरान यह मशीन प्रति घंटे करीब 1,700 बड काटने में सक्षम पाई गई है। यह पारंपरिक तरीकों की तुलना में कई गुना अधिक है।

प्रश्न 4: TNAU को इस मशीन पर कितने साल का पेटेंट मिला है? भारत सरकार के पेटेंट ऑफिस ने इस मशीन पर TNAU को 20 साल का पेटेंट प्रदान किया है, जो इस तकनीक की मौलिकता को प्रमाणित करता है।

प्रश्न 5: क्या यह मशीन छोटे किसानों के लिए भी उपयुक्त है? हां, यह मशीन विशेष रूप से छोटे और मध्यम किसानों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है। इसकी कम कीमत, आसान संचालन और कम रखरखाव लागत इसे हर वर्ग के गन्ना किसान के लिए व्यावहारिक बनाती है।

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