Sugarcane Control Order 2026: केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए गन्ना (नियंत्रण) आदेश 2026 के ड्राफ्ट ने गन्ना उत्पादक किसानों में तीव्र असंतोष पैदा कर दिया है। जब खुले बाजार में अन्य फसलों को एमएसपी से ज्यादा दाम मिलने की छूट है, तो गन्ने पर ही क्यों बेड़ियां? प्रस्तावित नियम खांडसारी यूनिटों को एफआरपी या एसएपी (Sugarcane Control Order 2026) से अधिक कीमत चुकाने से रोकने का प्रावधान ला रहे हैं। किसान नेता इसे चीनी मिलों को सस्ता गन्ना सुनिश्चित करने की साठगांठ (Sugarcane Control Order 2026) मान रहे हैं। यह ड्राफ्ट न केवल किसानों की आय के अवसरों को सीमित कर रहा है बल्कि पारंपरिक खांडसारी उद्योग को भी कठिनाई (Sugarcane Control Order 2026) में डाल सकता है।
भारत में गन्ना खेती लाखों परिवारों की रीढ़ है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार जैसे राज्यों में करोड़ों किसान इस फसल पर निर्भर (Sugarcane Control Order 2026) हैं। लेकिन नए नियमों से उनका भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है।
Sugarcane Control Order 2026: गन्ना उद्योग की वर्तमान स्थिति और चुनौतियां
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक (Sugarcane Control Order 2026) देश है। हर साल लाखों टन गन्ना चीनी मिलों, खांडसारी यूनिटों और गुड़ बनाने वालों तक पहुंचता है। पिछले कुछ वर्षों में खांडसारी और गुड़ की मांग बढ़ी है क्योंकि लोग प्रोसेस्ड सफेद चीनी के स्वास्थ्य जोखिमों से बचना चाहते हैं। देसी खांड (खांडसारी) गन्ने के रस से खुले पैन में बनाई जाती है, जो अधिक पौष्टिक मानी जाती है।
2025-26 सीजन में खांडसारी यूनिटों ने गन्ने की अच्छी खपत की। उत्तर प्रदेश में कई यूनिटें किसानों को 425 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव दे रही थीं, जबकि चीनी मिलें एफआरपी के आसपास ही भुगतान (Sugarcane Control Order 2026) करती हैं। इससे चीनी मिलों को कड़ी टक्कर मिली और गन्ने की सप्लाई प्रभावित हुई। अब सरकार का नया ड्राफ्ट इन्हीं यूनिटों पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रहा है।
किसान कहते हैं कि जब बाजार में मांग है तो ज्यादा दाम क्यों नहीं मिलना चाहिए? अन्य फसलों जैसे गेहूं, धान या मक्का में किसान खुले बाजार में बेहतर भाव पा लेते हैं, लेकिन गन्ने पर नियंत्रण की जकड़न (Sugarcane Control Order 2026) बनी हुई है।
ड्राफ्ट में विवादास्पद प्रावधान: क्या है खांडसारी पर पाबंदी? (Sugarcane Control Order 2026)
ड्राफ्ट के मुताबिक, केंद्र या राज्य सरकार (केंद्र की सहमति से) खांडसारी यूनिटों द्वारा गन्ना खरीद के लिए एफआरपी या एसएपी तय (Sugarcane Control Order 2026) कर सकती है। लेकिन महत्वपूर्ण शर्त यह है कि यह कीमत उस क्षेत्र की चीनी मिलों द्वारा तय की गई कीमत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। यानी खांडसारी यूनिटें चाहे कितना भी अच्छा भाव देना चाहें, उन्हें एफआरपी/एसएपी की सीमा में रहना होगा।
धर्मेंद्र मलिक, भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता, ने इसे किसानों के हितों पर घातक हमला बताया। उन्होंने कहा, “बाजार में मांग होने पर सभी कृषि उत्पाद एमएसपी या एफआरपी से ऊपर बिकते हैं। फिर गन्ने पर ही यह रोक क्यों? यह खांडसारी यूनिटों के हाथ बांधने की साजिश है जो किसानों को अच्छा भाव दे रही हैं।”
यह प्रावधान 20 अप्रैल 2026 को जारी ड्राफ्ट में शामिल (Sugarcane Control Order 2026) किया गया है। सरकार 20 मई तक हितधारकों की राय मांग रही है। लेकिन किसान संगठन पहले ही विरोध में उतर चुके हैं।
Sugarcane Control Order 2026: चीनी मिलों पर बढ़ता दबाव और खांडसारी का उदय
चीनी मिलें लंबे समय से गन्ने की सप्लाई (Sugarcane Control Order 2026) को लेकर चिंतित हैं। खांडसारी यूनिटों के विस्तार ने गन्ने का बड़ा हिस्सा डायवर्ट कर लिया है। देश में करीब 373 खांडसारी यूनिटें हैं, जिनकी रोजाना पेराई क्षमता 95,000 टन के आसपास है। इनमें से कई 500 टन तक रोजाना गन्ना पीस रही हैं।
लोगों की बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता ने खांडसारी की मांग बढ़ाई है। सफेद चीनी के बजाय प्राकृतिक और कम प्रोसेस्ड उत्पाद पसंद किए जा रहे हैं। इससे चीनी मिलों को कच्चा माल कम मिल रहा है। नए ड्राफ्ट को कई लोग मिलों के दबाव में तैयार किया गया मान रहे हैं।
ड्राफ्ट में मिलों के बीच न्यूनतम दूरी 25 किलोमीटर करने, लाइसेंसिंग और निरीक्षण जैसे प्रावधान भी हैं। एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर है, जो मिलों के लिए नया राजस्व स्रोत है। लेकिन किसानों को सीधा फायदा मिले, इसके बजाय नियंत्रण (Sugarcane Control Order 2026) पर फोकस नजर आ रहा है।
Sugarcane Control Order 2026: किसानों की आय पर क्या असर पड़ेगा?
गन्ना किसान साल भर की मेहनत के बाद एक ही फसल से आय (Sugarcane Control Order 2026) कमाते हैं। अगर खांडसारी यूनिटें ज्यादा भाव नहीं दे पाएंगी तो किसानों के पास विकल्प सीमित हो जाएंगे। कई किसान पहले ही चीनी मिलों के बकाया भुगतान से परेशान हैं। नए नियम देरी पर 15 प्रतिशत ब्याज का प्रावधान रखते हैं, जो सकारात्मक है, लेकिन मूल समस्या – बेहतर भाव की – को हल नहीं करता।
उत्तर प्रदेश, जहां सबसे ज्यादा गन्ना होता है, में किसान पहले से ही एसएपी (Sugarcane Control Order 2026) की मांग करते रहे हैं। अगर ड्राफ्ट लागू हुआ तो राज्य सरकारों की भी छूट कम हो सकती है। किसान यूनियनों का कहना है कि यह किसानों को मिलों का ‘बंधक’ बनाने जैसा है।
Sugarcane Control Order 2026: खांडसारी उद्योग का महत्व और संभावित नुकसान
खांडसारी सिर्फ चीनी नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Sugarcane Control Order 2026) का हिस्सा है। छोटे स्तर पर संचालित ये यूनिटें स्थानीय रोजगार पैदा करती हैं और गन्ने के छोटे किसानों को तुरंत भुगतान करती हैं। अगर इन पर पाबंदी लगी तो छोटे उद्यमी प्रभावित होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि खांडसारी को रेगुलेट करने की जरूरत है, लेकिन इसे चीनी मिलों के बराबर लाकर किसानों को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं। गुणवत्ता मानकों, लाइसेंसिंग और रिपोर्टिंग को बेहतर बनाया जा सकता है, लेकिन भाव तय करने की छूट छीनना गलत है।
अन्य प्रावधान: क्या कुछ सकारात्मक भी है? (Sugarcane Control Order 2026)
ड्राफ्ट में कुछ सकारात्मक पक्ष भी हैं। एफआरपी तय करने में उत्पादन लागत (Sugarcane Control Order 2026), बाजार रुझान, चीनी रिकवरी और उप-उत्पादों (बगास, मोलासेस) के मूल्य को ध्यान में रखा जाएगा। किसानों को 14 दिन में भुगतान अनिवार्य है, देरी पर ब्याज लगेगा। एथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने से मिलों की आय बढ़ेगी, जो अप्रत्यक्ष रूप से किसानों को फायदा पहुंचा सकती है।
डिजिटल रिपोर्टिंग और एपीआई इंटीग्रेशन से पारदर्शिता बढ़ेगी। लेकिन किसान इन फायदों को पर्याप्त नहीं मान रहे। उनका सवाल है, जब दूसरे क्षेत्रों में बाजार खुला है तो गन्ने पर क्यों बंधन?
Sugarcane Control Order 2026: किसान संगठनों की प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति
अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) समेत कई संगठनों ने ड्राफ्ट को ‘किसान विरोधी’ और ‘कॉरपोरेट समर्थक’ (Sugarcane Control Order 2026) बताया है। वे 20 मई तक सुझाव देने के अलावा बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। मेरठ, लखनऊ और अन्य गन्ना बेल्ट में बैठकें हो रही हैं।
किसान नेता पूछ रहे हैं कि जब आयात ड्यूटी घटाकर या निर्यात प्रतिबंध लगाकर दाम नियंत्रित किए जाते हैं, तो गन्ने पर अतिरिक्त पाबंदी क्यों? क्या सरकार सिर्फ मिल मालिकों की चिंता कर रही है?
विशेषज्ञों की राय: संतुलित नीति की जरूरत (Sugarcane Control Order 2026)
कृषि अर्थशास्त्री मानते हैं कि गन्ना क्षेत्र (Sugarcane Control Order 2026) में सुधार जरूरी है। पुराना 1966 का ऑर्डर अब पुराना पड़ चुका है। लेकिन सुधार किसानों को केंद्र में रखकर होना चाहिए। एफआरपी को लागत से 50-100 प्रतिशत ज्यादा रखना अच्छा है, लेकिन बाजार की स्वतंत्रता भी देनी चाहिए।
खांडसारी को मुख्यधारा में लाने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण, पर्यावरण मानक और डेटा रिपोर्टिंग बेहतर हो सकती है, लेकिन भाव पर कैप लगाना उल्टा पड़ सकता है। इससे गन्ना उत्पादन प्रभावित हो सकता है और किसान अन्य फसलों की ओर मुड़ सकते हैं।
Sugarcane Control Order 2026: क्या होगा भविष्य? किसानों की उम्मीदें
गन्ना किसान उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उनकी आवाज सुनेगी। ड्राफ्ट में संशोधन कर खांडसारी यूनिटों को ज्यादा भाव देने की छूट दी जाए। साथ ही बकाया भुगतान की समस्या सुलझाई जाए।
सरकार को चाहिए कि व्यापक consultation के बाद ही अंतिम रूप दे। अगर किसानों की उपेक्षा हुई तो गन्ना बेल्ट में आंदोलन की आशंका बढ़ जाएगी।
यह ड्राफ्ट न सिर्फ एक कानूनी दस्तावेज है, बल्कि लाखों अन्नदाताओं के भविष्य से जुड़ा है। क्या सरकार ‘कड़वे’ प्रावधानों को मीठा बना पाएगी या विवाद और गहराएगा? समय बताएगा, लेकिन फिलहाल किसानों में चिंता और गुस्सा साफ दिख रहा है।
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