Sugar Production: भारत के चीनी उद्योग से एक उत्साहजनक खबर आई है। चीनी मिलों की शीर्ष संस्था इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी ISMA ने बताया है कि चालू मार्केटिंग सीजन अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच देश का कुल चीनी उत्पादन 24.75 मिलियन टन यानी 247 लाख टन तक पहुंच गया है। यह पिछले साल की समान अवधि में हुए 220 लाख टन उत्पादन की तुलना में 12.43 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि की मुख्य वजह महाराष्ट्र और कर्नाटक में उत्पादन क्षमता में आया जोरदार उछाल है। हालांकि उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ गन्ना भुगतान का बकाया भी बढ़ रहा है और ISMA ने सरकार से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य यानी MSP में जल्द बढ़ोतरी करने की मांग तेज कर दी है।
Sugar Production: राज्यवार उत्पादन की तस्वीर
देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक (Sugar Production) राज्य महाराष्ट्र ने इस बार जबरदस्त प्रदर्शन किया है। फरवरी 2026 तक महाराष्ट्र में उत्पादन बढ़कर 95 लाख टन हो गया जबकि पिछले साल यह 75 लाख टन था। यानी अकेले महाराष्ट्र में 20 लाख टन की जोरदार बढ़ोतरी हुई। दूसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में उत्पादन 73 लाख टन से बढ़कर 75 लाख टन हो गया। तीसरे स्थान पर रहे कर्नाटक में भी अच्छी वृद्धि देखने को मिली जहां उत्पादन 38 लाख टन से बढ़कर 44 लाख टन पहुंच गया। हालांकि इस बार चालू मिलों की संख्या पिछले साल के 330 की तुलना में घटकर 305 रह गई है।
Sugar Production: MSP बढ़ाने की मांग क्यों
उत्पादन (Sugar Production) बढ़ने के बावजूद चीनी उद्योग की परेशानियां कम नहीं हुई हैं। चीनी बनाने की लागत लगातार बढ़ रही है लेकिन मिलों को मिलने वाला एक्स-मिल रिअलाइजेशन उस अनुपात में नहीं बढ़ा। इस असंतुलन से मिलों पर नकद प्रवाह का दबाव बना हुआ है जिसका सीधा असर किसानों को गन्ने के भुगतान पर पड़ रहा है। महाराष्ट्र में 15 फरवरी तक गन्ना भुगतान का बकाया 4,601 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था जो पिछले साल इसी तारीख को 2,744 करोड़ रुपये था। ISMA का कहना है कि मौजूदा लागत के अनुरूप MSP में समय पर बदलाव जरूरी है ताकि मिलें सुचारू रूप से चल सकें, किसानों को जल्दी भुगतान हो सके और सरकार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी न पड़े।
Sugar Production: कच्चे तेल की तेजी से चीनी बाजार पर असर
मध्य पूर्व में ईरान संकट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और इसका असर चीनी बाजार (Sugar Production) पर भी पड़ रहा है। WTI कच्चा तेल 6 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 8 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इससे इथेनॉल की कीमतें भी आकर्षक हो गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे चीनी उत्पादक गन्ने को चीनी की जगह इथेनॉल उत्पादन की तरफ मोड़ सकते हैं जिससे बाजार में चीनी की आपूर्ति कम हो सकती है और कीमतें ऊपर जा सकती हैं। इस महीने की शुरुआत में वैश्विक अधिशेष की चिंताओं के बीच चीनी की कीमतें पांच साल के निचले स्तर पर आ गई थीं लेकिन अब कच्चे तेल की तेजी ने परिदृश्य बदल दिया है।
Sugar Production: आगे क्या होगा
ISMA के अनुसार जून-जुलाई से सितंबर 2026 के विशेष सीजन में दक्षिण कर्नाटक में कुछ मिलें फिर से चालू होने की उम्मीद है। जैसे-जैसे सीजन आगे बढ़ेगा और स्टॉक बढ़ेगा उद्योग की नजर सरकार के MSP फैसले पर टिकी रहेगी। अगर सरकार ने जल्द MSP नहीं बढ़ाया तो किसानों का गन्ना बकाया और बढ़ सकता है जो पूरे चीनी उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
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