Seafood Export: भारतीय सीफूड निर्यात में लगातार मजबूत वृद्धि देखी जा रही है। हाल ही में जारी आंकड़ों के मुताबिक, सीफूड एक्सपोर्ट पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 6 हजार करोड़ रुपये बढ़कर 68 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों में टैरिफ चुनौतियों के बावजूद हासिल की गई है। केंद्र सरकार अब इस आंकड़े को एक लाख करोड़ रुपये तक ले जाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है।
केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने नई दिल्ली में समुद्री खाद्य निर्यातकों (Seafood Export) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि सरकार रेडी-टू-ईट, रेडी-टू-कुक और वैल्यू एडिशन वाले समुद्री उत्पादों पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, EEZ (Exclusive Economic Zone) और खुले समुद्र से टूना जैसी हाई वैल्यू वाली प्रजातियों के निर्यात की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
Seafood Export: सीफूड एक्सपोर्ट का बढ़ता ग्राफ
भारत दुनिया के प्रमुख सीफूड (Seafood Export) निर्यातक देशों में शामिल है। पिछले कुछ वर्षों में निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साल 2013-14 में सीफूड एक्सपोर्ट मात्र 30,213 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 62,408 करोड़ रुपये हो गया। अब 2025-26 में यह आंकड़ा लगभग 68,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
झींगा अभी भी निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा है, लेकिन सरकार अब टूना, स्क्विड, कटलफिश और अन्य वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स (Seafood Export) पर फोकस बढ़ा रही है। वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स का हिस्सा (Seafood Export) पहले 2.5 प्रतिशत था, जो अब 11 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह बदलाव निर्यात मूल्य को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
Seafood Export: सरकार की रणनीति और प्रयास
केंद्र सरकार सीफूड एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है। हाल ही में लगभग 40 देशों के राजदूतों से सकारात्मक फीडबैक मिला है। सरकार का फोकस बाजार विविधीकरण पर है ताकि अमेरिका जैसे एक-दो बाजारों पर निर्भरता कम हो।
मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बैठक में कहा कि बेहतर ऑनबोर्ड हैंडलिंग, मजबूत कोल्ड चेन, बेहतर पैकेजिंग और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने पर जोर दिया जाएगा। निर्यातकों को EIC, NCDC, NABARD और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का पूरा सहयोग मिलेगा।
Seafood Export: टूना मछली पर विशेष फोकस
सरकार की योजना हाई न्यूट्रिशन वैल्यू (Seafood Export) वाली महंगी टूना मछली को विदेशी बाजार में बढ़ावा देने की भी है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा EEZ क्षेत्र से टूना की क्षमता का पूरा उपयोग किया जाएगा। टूना जैसे प्रोडक्ट्स की निर्यात क्षमता बहुत अधिक है और इससे निर्यात मूल्य में बड़ा इजाफा हो सकता है।
Seafood Export: निर्यातकों को दी गई गारंटी
बैठक में निर्यातकों को आश्वासन दिया गया कि सरकार बाजार (Seafood Export) विविधीकरण, क्षमता निर्माण और अनुपालन में उनकी मदद करेगी। MPEDA (Marine Products Export Development Authority) निर्यातकों के समर्थन के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को और मजबूत करेगी।
Seafood Export: सीफूड एक्सपोर्ट में चुनौतियां
अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ चुनौतियों के बावजूद निर्यात (Seafood Export) में वृद्धि हुई है। सरकार अब वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर रही है। यूरोप, मध्य पूर्व और एशियाई देशों में निर्यात बढ़ाने की रणनीति बनाई जा रही है।
Seafood Export: भविष्य का लक्ष्य
सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि सीफूड एक्सपोर्ट (Seafood Export) को एक लाख करोड़ रुपये तक ले जाना। इसके लिए वैल्यू एडिशन, बेहतर पैकेजिंग, कोल्ड चेन सुधार और नए बाजारों की खोज पर जोर दिया जा रहा है।
Seafood Export: किसानों और मत्स्य पालकों के लिए फायदा
यह बढ़ोतरी न सिर्फ निर्यातकों बल्कि लाखों मत्स्य पालकों और किसानों के लिए (Seafood Export) भी फायदेमंद है। बेहतर निर्यात से उनकी आय बढ़ेगी और मत्स्य पालन क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा। सरकार समुद्री केज कल्चर, मोती की खेती और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों में निवेश को बढ़ावा दे रही है।
Seafood Export: निष्कर्ष
सीफूड एक्सपोर्ट (Seafood Export) में 6 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। सरकार की सक्रिय रणनीति, वैल्यू एडिशन पर फोकस और नए बाजारों की खोज से यह आंकड़ा जल्द ही एक लाख करोड़ रुपये को छू सकता है।
मत्स्य पालक और निर्यातक दोनों को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए। बेहतर प्रबंधन, गुणवत्ता और अनुपालन से भारत विश्व का प्रमुख सीफूड निर्यातक (Seafood Export) बन सकता है।
सीफूड एक्सपोर्ट से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Seafood Export)
1. सीफूड एक्सपोर्ट (Seafood Export) कितना बढ़ा है?
पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 6 हजार करोड़ रुपये बढ़कर 68 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
2. सरकार का लक्ष्य क्या है?
सरकार का लक्ष्य सीफूड एक्सपोर्ट (Seafood Export) को एक लाख करोड़ रुपये तक ले जाना है।
3. कौन-सी फिश सबसे ज्यादा निर्यात होती है?
झींगा (Shrimp) अभी भी सबसे बड़ा हिस्सा है, लेकिन टूना और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स पर फोकस बढ़ाया जा रहा है।
4. सरकार क्या कर रही है?
वैल्यू एडिशन, कोल्ड चेन सुधार, नए बाजारों की खोज और निर्यातकों को सहयोग प्रदान करना।
5. मत्स्य पालकों को क्या फायदा होगा?
बेहतर निर्यात से आय बढ़ेगी, निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
नोट: आंकड़े सरकारी रिपोर्ट और MPEDA के आधार पर हैं। नवीनतम अपडेट के लिए MPEDA या वाणिज्य मंत्रालय की वेबसाइट चेक करें।
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