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Pyaj Mandi Bhav 22 Feb 2026: तमिलनाडु-कर्नाटक से अत्यधिक आपूर्ति के कारण मंडी में 10 से 25 रुपये किलो बिक रही प्याज, किसानों की आय हुई चौपट

Pyaj Mandi Bhav 22 Feb 2026
Pyaj Mandi Bhav 22 Feb 2026

Pyaj Mandi Bhav 22 Feb 2026: तमिलनाडु तथा कर्नाटक से अत्यधिक आवक के कारण तिरुचि मंडी में छोटे प्याज (शैलट/Shallot) की कीमतें भयावह रूप से गिर गई हैं। गांधी मार्केट में थोक व्यापारियों ने शुक्रवार को एक किलोग्राम उत्कृष्ट गुणवत्ता (निर्यात श्रेणी) का शैलट 25 रुपये प्रति किलोग्राम पर विक्रय किया। मध्यम गुणवत्ता के शैलट की कीमत लगभग 15 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जबकि निम्न गुणवत्ता का शैलट 10 रुपये प्रति किलोग्राम पर उपलब्ध था।

यह मूल्य पतन अक्टूबर-नवंबर 2025 में 80 रुपये प्रति किलोग्राम के शिखर से 87.5% की गिरावट को दर्शाता है, जो कृषकों के लिए विनाशकारी आर्थिक संकट है। खुदरा बाजार तथा किराना दुकानों में, उत्कृष्ट गुणवत्ता का शैलट 30 से 35 रुपये प्रति किलोग्राम के मध्य विक्रय हुआ। उझावर संधई में यह 35 रुपये प्रति किलोग्राम पर बिका। निम्न गुणवत्ता का शैलट खुदरा बाजार में 15 रुपये प्रति किलोग्राम पर विक्रय हुआ।

Pyaj Mandi Bhav 22 Feb 2026: प्याज के रेट में गिरावट की तुलनात्मक सारणी

अवधिउत्कृष्ट गुणवत्ता (रु/किग्रा)मध्यम गुणवत्ता (रु/किग्रा)निम्न गुणवत्ता (रु/किग्रा)औसत मूल्य (रु/किग्रा)
अक्टूबर-नवंबर 202580-8570-7560-6575
जनवरी 2026 प्रारंभ50-5540-4530-3542
फरवरी मध्य 202625151017
मूल्य गिरावट %70.6%78.7%84.6%77.3%

Pyaj Mandi Bhav 22 Feb 2026: थोक बनाम खुदरा मूल्य तुलना (फरवरी 2026)

बाजार प्रकारउत्कृष्ट गुणवत्तामध्यम गुणवत्तानिम्न गुणवत्ता
गांधी मार्केट (थोक)₹25/किग्रा₹15/किग्रा₹10/किग्रा
खुदरा बाजार/किराना₹30-35/किग्रा₹20-25/किग्रा₹15/किग्रा
उझावर संधई (कृषक बाजार)₹35/किग्रा₹25/किग्रा₹15/किग्रा
थोक-खुदरा अंतर₹5-10₹5-10₹5

Pyaj Mandi Bhav 22 Feb 2026: जनवरी से गिरावट जारी

अक्टूबर तथा नवंबर में 80 रुपये प्रति किलोग्राम के समीप रहने वाले शैलट की कीमत जनवरी से निरंतर गिर रही है। विगत कुछ सप्ताहों में कीमत तीव्रता से गिरी है। व्यापारी मूल्य में गिरावट का कारण तमिलनाडु तथा कर्नाटक के विभिन्न केंद्रों से अत्यधिक आपूर्ति को मानते हैं। पेरंबलुर जिला तथा तिरुचि एवं अरियालुर जिले के कुछ भाग तिरुचि मंडी के प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहे हैं।

विगत 10 दिवसों से पेरंबलुर तथा उसके समीपवर्ती क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 2,000 बोरे मंडी में आ रहे थे। इसी प्रकार, कर्नाटक के मैसूर, गुंडलपेट, चामराजनगर, कोल्लेगल, तिरुचि के उडुमलाईपेट्टई, पल्लादम तथा पोलाची से भी अत्यधिक आपूर्ति हो रही थी। 200 टन की आवश्यकता के विपरीत, तिरुचि मंडी में 300 टन प्याज प्रतिदिन आ रहा है – 50% अधिक आपूर्ति।

Pyaj Mandi Bhav 22 Feb 2026: प्रमुख आपूर्ति केंद्र तथा मात्रा

आपूर्ति क्षेत्रराज्यदैनिक आवक (अनुमानित)दूरी (तिरुचि से)
पेरंबलुर जिलातमिलनाडु2,000 बोरे (~100 टन)80 किमी
मैसूर-गुंडलपेटकर्नाटक~80 टन300 किमी
चामराजनगर-कोल्लेगलकर्नाटक~60 टन250 किमी
उडुमलाईपेट्टई-पल्लादमतमिलनाडु~40 टन100 किमी
पोलाची क्षेत्रतमिलनाडु~20 टन120 किमी
कुल आपूर्ति~300 टन/दिवस
वास्तविक मांग~200 टन/दिवस
अतिरिक्त आपूर्ति+100 टन (50%)

Pyaj Mandi Bhav 22 Feb 2026: मंडी में अतिरिक्त आपूर्ति का संकट

तिरुचि के थोक प्याज व्यापारी श्री कलैवानी ट्रेडर्स के पी. सुधाकर ने ‘दि हिंदू’ से कहा, “हमें विगत दो अथवा तीन सप्ताहों में अत्यधिक आपूर्ति प्राप्त हुई है। हम दो अथवा तीन दिवस तक स्टॉक संचित नहीं रख सकते। इससे प्याज की कीमतें न्यून हो गई हैं।”

यह व्यापारियों की मजबूरी को दर्शाता है। शीघ्र नष्ट होने वाली सब्जी होने के कारण, शैलट को शीघ्र विक्रय करना आवश्यक है। अत्यधिक आपूर्ति की स्थिति में व्यापारी मूल्य कम कर शीघ्र विक्रय को प्राथमिकता देते हैं। यह मूल्य पतन का मुख्य कारण है।

पेरुवलप्पुर के कृषक एन. सरोजा, जो अन्ना नगर में उझावर संधाई में प्याज विक्रय करते हैं, ने कहा कि कीमतें दो अथवा तीन सप्ताहों से अधिक समय से गिर रही थीं क्योंकि मांग न्यून थी। कृषकों के लिए यह दोहरी मार है – एक ओर उत्पादन लागत बढ़ रही है, दूसरी ओर मूल्य गिर रहे हैं।

Pyaj Mandi Bhav 22 Feb 2026: कृषकों की आर्थिक चुनौतियां

शैलट उत्पादन में कृषक को बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई, श्रम तथा परिवहन में निवेश करना पड़ता है। सामान्यतः शैलट उत्पादन की औसत लागत 30-40 रुपये प्रति किलोग्राम आंकी जाती है। जब बाजार मूल्य 10-25 रुपये प्रति किलोग्राम पर हों तो कृषक को प्रत्यक्ष हानि होती है।

अनेक कृषकों ने बंपर उत्पादन की आशा में ऋण लेकर निवेश किया था। निम्न मूल्य के कारण न केवल उनकी आय प्रभावित हो रही है, अपितु ऋण चुकाने में भी कठिनाई उत्पन्न हो रही है। यदि यह स्थिति दीर्घकालिक रही तो अगले सीजन में शैलट की बुवाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

Pyaj Mandi Bhav 22 Feb 2026: क्रेताओं के लिए सुनहरा समय, कृषकों के लिए विपत्ति

सुधाकर ने कहा कि क्रेता के लिए यह सर्वोत्तम समय है क्योंकि वे 25 रुपये प्रति किलोग्राम पर उत्कृष्ट गुणवत्ता का प्याज क्रय कर सकते हैं। परंतु यह कृषकों के लिए विपत्तिकाल है क्योंकि कीमतें बाजारों में प्राप्त होने वाले मूल्य तथा उनके कठिन परिश्रम से मेल नहीं खा रही हैं।

उपभोक्ताओं के लिए यह राहत है – वे बहुत कम मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण शैलट प्राप्त कर रहे हैं। परंतु यह अर्थव्यवस्था का असंतुलन दर्शाता है जहां उत्पादक को उचित मूल्य नहीं मिलता। दीर्घकाल में यह खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है क्योंकि कृषक हतोत्साहित होकर उत्पादन कम कर सकते हैं।

Pyaj Mandi Bhav 22 Feb 2026: शीघ्र राहत की संभावना कम

रिपोर्टों के अनुसार, सुधाकर ने कहा कि वर्तमान मूल्यों का प्रवृत्ति कम से कम दो माह तक जारी रहेगा। अर्थात कृषकों को मूल्य के मोर्चे पर शीघ्र अच्छी सूचना प्राप्त होने की आशा नहीं है। यह पूर्वानुमान इस तथ्य पर आधारित है कि वर्तमान फसल का संग्रहण अभी जारी है तथा आगामी दो माह तक आपूर्ति निरंतर बनी रहेगी।

केवल जब वर्तमान फसल का संग्रहण पूर्ण हो जाएगा तथा आपूर्ति कम होगी, तभी मूल्य में सुधार की संभावना है। परंतु तब तक अनेक कृषकों को भारी आर्थिक हानि का सामना करना पड़ेगा। कुछ छोटे कृषक अपनी फसल को खेत में ही छोड़ रहे हैं क्योंकि संग्रहण तथा परिवहन की लागत विक्रय मूल्य से अधिक हो रही है।

Pyaj Mandi Bhav 22 Feb 2026: संभावित समाधान एवं सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता

इस संकट से निपटने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर शैलट क्रय करने पर विचार करना चाहिए। कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए ताकि कृषक अपनी उपज को सुरक्षित रख सकें। प्याज प्रसंस्करण उद्योगों को प्रोत्साहन देना चाहिए जो अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग कर सकें।

बाजार सूचना प्रणाली को सुदृढ़ करना चाहिए ताकि कृषक बुवाई से पूर्व मांग-आपूर्ति की स्थिति जान सकें। कृषक उत्पादक संगठनों (FPO) को बल देना चाहिए जो सामूहिक रूप से बेहतर मूल्य प्राप्त करने में सहायता कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: छोटे प्याज (शैलट) की कीमतें इतनी तेजी से क्यों गिरीं?

उत्तर: शैलट की कीमतों में तीव्र गिरावट का मुख्य कारण तमिलनाडु तथा कर्नाटक से अत्यधिक आपूर्ति है। तिरुचि मंडी में 200 टन की आवश्यकता के विपरीत प्रतिदिन 300 टन आपूर्ति हो रही है – 50% अधिक। पेरंबलुर, मैसूर, गुंडलपेट, चामराजनगर, कोल्लेगल, उडुमलाईपेट्टई, पल्लादम तथा पोलाची से भारी आवक आ रही है। अत्यधिक आपूर्ति तथा न्यून मांग के कारण मूल्य अक्टूबर-नवंबर के 80 रुपये/किग्रा से गिरकर फरवरी में 10-25 रुपये/किग्रा पर आ गए हैं।

प्रश्न 2: वर्तमान में थोक तथा खुदरा बाजार में शैलट की कीमतें क्या हैं?

उत्तर: फरवरी 2026 में गांधी मार्केट (थोक) में उत्कृष्ट गुणवत्ता का शैलट 25 रुपये/किग्रा, मध्यम गुणवत्ता 15 रुपये/किग्रा तथा निम्न गुणवत्ता 10 रुपये/किग्रा पर उपलब्ध है। खुदरा बाजार तथा किराना दुकानों में उत्कृष्ट गुणवत्ता 30-35 रुपये/किग्रा, मध्यम 20-25 रुपये/किग्रा तथा निम्न 15 रुपये/किग्रा पर बिक रही है। उझावर संधई (कृषक बाजार) में उत्कृष्ट गुणवत्ता 35 रुपये/किग्रा पर उपलब्ध है।

प्रश्न 3: किन क्षेत्रों से सर्वाधिक आपूर्ति हो रही है?

उत्तर: सर्वाधिक आपूर्ति निम्नलिखित क्षेत्रों से हो रही है: (1) तमिलनाडु: पेरंबलुर जिला (~100 टन/दिवस), उडुमलाईपेट्टई-पल्लादम (~40 टन), पोलाची (~20 टन)। (2) कर्नाटक: मैसूर-गुंडलपेट (~80 टन), चामराजनगर-कोल्लेगल (~60 टन)। कुल मिलाकर ये क्षेत्र प्रतिदिन लगभग 300 टन शैलट की आपूर्ति कर रहे हैं, जबकि तिरुचि मंडी की मांग केवल 200 टन है। पेरंबलुर अकेले प्रतिदिन 2,000 बोरे (लगभग 100 टन) भेज रहा है।

प्रश्न 4: कृषकों पर इस मूल्य पतन का क्या प्रभाव पड़ रहा है?

उत्तर: कृषक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। शैलट उत्पादन की औसत लागत 30-40 रुपये/किग्रा है, परंतु वर्तमान बाजार मूल्य केवल 10-25 रुपये/किग्रा है। इससे प्रत्यक्ष हानि हो रही है। जिन कृषकों ने ऋण लेकर निवेश किया था, वे ऋण चुकाने में असमर्थ हो रहे हैं। कुछ छोटे कृषक फसल को खेत में ही छोड़ रहे हैं क्योंकि संग्रहण-परिवहन लागत विक्रय मूल्य से अधिक है। यदि स्थिति जारी रही तो अगले सीजन में शैलट बुवाई प्रभावित होगी।

प्रश्न 5: कब तक यह मूल्य पतन जारी रह सकता है तथा समाधान क्या हैं?

उत्तर: व्यापारियों के अनुसार, वर्तमान निम्न मूल्य प्रवृत्ति कम से कम दो माह तक जारी रह सकती है, क्योंकि वर्तमान फसल का संग्रहण अभी जारी है। समाधान के लिए: (1) सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्रय करनी चाहिए, (2) कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है, (3) प्याज प्रसंस्करण उद्योगों को प्रोत्साहन देना चाहिए, (4) बाजार सूचना प्रणाली सुदृढ़ करनी चाहिए, (5) कृषक उत्पादक संगठनों (FPO) को बल देना चाहिए। केवल जब वर्तमान फसल संग्रहण पूर्ण होगा तथा आपूर्ति कम होगी, तभी मूल्य में सुधार संभव है।

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