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  • Mahindra Tractor ने मारी बाजी! November 2025 Tractor Market Share में जोरदार उछाल

    Mahindra Tractor ने मारी बाजी! November 2025 Tractor Market Share में जोरदार उछाल

    Tractor OEM Nov’25 Market Share: नवंबर में ट्रैक्टर इंडस्ट्री में मजबूत उछाल, महिंद्रा फिर नंबर 1

    भारत के ट्रैक्टर बाजार में नवंबर 2025 काफी सक्रिय रहा। इस दौरान लगभग सभी कंपनियों ने पिछले साल की तुलना में बेहतर बिक्री दर्ज की। रबी सीजन की अच्छी शुरुआत, मिट्टी में नमी और MSP संकेत बेहतर रहने से किसानों की खरीदी में इजाफा हुआ है। यही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय स्थिति सुधारने से ट्रैक्टर की मांग बढ़ती दिखी।

    सबसे ज्यादा बिक्री Mahindra & Mahindra (ट्रैक्टर डिविजन) ने की। नवंबर 2025 में कंपनी ने 31,938 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की और 25.34% मार्केट शेयर के साथ टॉप पर रही। पिछले साल यह आंकड़ा 19,521 यूनिट था। महिंद्रा की ग्रामीण पकड़, हाई-HP ट्रैक्टर और मजबूत डीलर नेटवर्क ने इसे फिर से शीर्ष पर बनाए रखा।

    महिंद्रा का Swaraj Division भी बाजार में दमदार प्रदर्शन कर रहा है। नवंबर में 23,220 यूनिट बिक्री के साथ स्वराज का मार्केट शेयर 18.42% रहा, जो पिछले साल 14,703 यूनिट था। किसानों के बीच स्वराज की विश्वसनीयता और बेहतर परफॉर्मेंस इसे लगातार आगे रख रही है।

    International Tractors Limited (Sonalika) ने नवंबर में 15,742 यूनिट की बिक्री की और 12.49% मार्केट शेयर हासिल किया। हालांकि मार्केट शेयर पिछले साल 13.48% था, लेकिन बिक्री संख्या मजबूत है। सोनालिका की इंटरनेशनल मौजूदगी और नई तकनीक इसकी मजबूती दर्शाती है।

    Escorts Kubota ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए नवंबर में 14,521 यूनिट बेचे, जबकि पिछले साल यह संख्या मात्र 7,399 यूनिट थी। कंपनी का मार्केट शेयर 11.52% रहा। Escorts की नई फाइनेंस स्कीम, मॉडल अपडेट और फोकस्ड मार्केटिंग स्ट्रेटेजी ग्रामीण बाजार में अच्छी पकड़ बना रही है।

    TAFE Limited ने नवंबर में 13,559 यूनिट बेचे और 10.76% मार्केट शेयर हासिल किया। पिछले साल यह आंकड़ा 9,387 यूनिट था। मैसी फर्ग्यूसन ब्रांड की लोकप्रियता और मजबूत वितरण नेटवर्क इसका सबसे बड़ा आधार है।

    John Deere India की बिक्री 9,584 यूनिट रही और मार्केट शेयर 7.60% दर्ज हुआ। पिछले साल कंपनी ने 5,959 यूनिट बेचे थे। जॉन डियर के हाई-HP मॉडल खेती के अलावा औद्योगिक कार्यों में भी तेजी से उपयोग हो रहे हैं, जिससे कंपनी को लगातार बढ़त मिल रही है।

    Eicher Tractors ने इस महीने 7,027 यूनिट बेचे और मार्केट शेयर 5.58% रहा। पिछले साल बिक्री 5,560 यूनिट थी। बिक्री में वृद्धि होने के बावजूद मार्केट शेयर में थोड़ी कमी है, जो प्रतिस्पर्धा के बढ़ने का संकेत देता है।

    CNH Industrial ने नवंबर 2025 में 5,784 यूनिट बेचे और 4.59% मार्केट शेयर दर्ज किया। पिछले साल कंपनी की बिक्री 3,104 यूनिट थी। नए मॉडल और तकनीकी सुधार ने कंपनी की स्थिति को काफी मजबूत किया है।

    अन्य कंपनियों ने कुल 4,658 यूनिट बेचे, जबकि पिछले साल बिक्री 4,018 यूनिट थी।

    नवंबर 2025 में कुल ट्रैक्टर उद्योग का वॉल्यूम 1,26,033 यूनिट रहा, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 80,507 यूनिट था। इससे पता चलता है कि ग्रामीण बाज़ार लगातार रिकवर कर रहा है और किसान मशीनरी पर निवेश बढ़ा रहे हैं।

    इस शानदार बिक्री वृद्धि के पीछे कई वजहें हैं—रबी सीजन में 39.3 मिलियन हेक्टेयर से अधिक बोवाई, मिट्टी में बेहतर नमी, बीज उपलब्धता और MSP संकेत। गेहूं, दलहन और तेलबीज की खेती में बढ़त किसानों के लिए अच्छा संकेत है। मौसम विभाग की ठंडी सर्दी की भविष्यवाणी भी लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट सेगमेंट की मांग बढ़ा सकती है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में FMCG, ट्रैक्टर और दोपहिया बिक्री में वृद्धि दिख रही है। साथ ही GST 2.0, OEM–डीलर स्कीम और वर्षांत ऑफर्स ने भी मांग को बढ़ावा दिया है। डीलर्स का कहना है कि दिसंबर में भी बिक्री बनी रह सकती है क्योंकि पूछताछ पाइपलाइन मजबूत है, स्टॉक उपलब्ध है और विवाह सीजन चल रहा है।

    मार्केट में अभी उत्साह और सावधानी दोनों मौजूद हैं, जिसे उद्योग में cautious optimism कहा जा रहा है। कंपनियों की नई योजनाएँ, वित्तीय ऑफर और प्राइस अपडेट का प्रभाव भी मांग पर पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर, नवंबर 2025 को ट्रैक्टर उद्योग के लिए एक रिकवरी मोमेंट कहा जा सकता है। आने वाले महीनों में भी रबी सीजन और MSP सपोर्ट की वजह से बाजार में स्थिरता और वृद्धि की उम्मीद है।

  • गन्ने का नया रेट 2025: राज्य सरकार ने बढ़ाया ₹30 प्रति क्विंटल भाव

    गन्ने का नया रेट 2025: राज्य सरकार ने बढ़ाया ₹30 प्रति क्विंटल भाव

     राज्य सरकार ने गन्ना किसानों को दी बड़ी राहत, अब मिलेगा 30 रुपये अधिक मूल्य – पढ़ें पूरी जानकारी


    उत्तराखंड सरकार ने गन्ना किसानों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिया है। लंबे समय से गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की मांग की जा रही थी और अंततः सरकार ने 30 रुपये प्रति क्विंटल कीमत बढ़ाने का बड़ा फैसला किया है। इस निर्णय से राज्य के लाखों किसानों को आर्थिक राहत मिलने वाली है, साथ ही आगामी पेराई सत्र में गन्ना उत्पादन को और बढ़ावा मिलेगा। शासन ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा गन्ना मूल्य बढ़ोतरी प्रस्ताव को स्वीकृति देने के बाद संबंधित विभागों ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। ताज़ा आदेश के अनुसार, पेराई सत्र 2025–26 में राज्य की सभी चीनी मिलें मिल गेट पर गन्ने की खरीद निम्न दरों पर करेंगी— अगैती प्रजाति 405 रुपये प्रति क्विंटल, जबकि सामान्य प्रजाति 395 रुपये प्रति क्विंटल खरीदी जाएगी। यानी दोनों श्रेणियों में सीधे 30 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

    पिछले वर्ष पेराई सत्र 2024–25 में गन्ने की अगैती किस्म का मूल्य 375 रुपये प्रति क्विंटल था और सामान्य प्रजाति का मूल्य 365 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित था। इस हिसाब से किसानों को अब प्रति क्विंटल 30 रुपये अधिक मिलेंगे, जो उत्पादन लागत बढ़ने की स्थिति में बहुत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। किसान संगठनों ने भी इस फैसले को स्वागत योग्य बताया है।

    सरकार का कहना है कि गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना उसकी प्रमुख प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट कहा है कि किसानों की आय बढ़ाना, उन्हें उपज का न्यायपूर्ण मूल्य देना और भुगतान को पारदर्शी व सरल बनाना सरकार की ज़िम्मेदारी है। इसलिए गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी के साथ-साथ समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

    किसानों की एक बड़ी चिंता यह रहती है कि चीनी मिलें भुगतान में देरी करती हैं। ऐसे में सरकार ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी क्रय केंद्र पर किसानों को असुविधा न हो और भुगतान समय पर किया जाए। किसानों को बकाया राशि रोकने पर भी सख्ती की बात कही गई है। यह कदम कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम माना जा रहा है।

    इस फैसले का सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ेगा, क्योंकि गन्ना उत्तराखंड के कई क्षेत्रों की प्रमुख नकदी फसल है। खासकर हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर जैसे जिलों में हजारों किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं। मूल्य बढ़ने से किसान नई तकनीक अपनाने, बेहतर सिंचाई व्यवस्था करने और फसल उत्पादन बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

    गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने यह भी साफ किया है कि बाहरी क्रय केंद्रों से गन्ने का परिवहन मिल तक करने में होने वाली कटौती 11 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है। यानी मिलें परिवहन के नाम पर अधिक कटौती नहीं कर पाएंगी। यह भी किसानों के हित में बड़ा प्रावधान है।

    गौरतलब है कि देश के कई राज्यों में लगातार बढ़ रही महंगाई और खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए किसानों पर ज्यादा दबाव बढ़ गया था। खाद, डीज़ल, बिजली, श्रम व सिंचाई लागत में भारी वृद्धि हुई है। ऐसे में गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी न सिर्फ किसानों के लिए राहत है, बल्कि पूरे कृषि चक्र को सहारा देने वाला निर्णय है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे गन्ना उत्पादन और चीनी उद्योग दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

    गन्ना मूल्य सूची 2025–26 के अनुसार

    • अगैती प्रजाति – ₹405 प्रति क्विंटल
    • सामान्य प्रजाति – ₹395 प्रति क्विंटल

    इस मूल्य पर राज्य की सभी चीनी मिलों को किसानों से गन्ना खरीदना होगा और भुगतान की स्थिति तथा मात्रा की जानकारी हर माह शासन को उपलब्ध करानी होगी। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और गन्ना क्रय प्रक्रिया पर निगरानी भी मजबूत होगी।

    कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड में गन्ना मूल्य बढ़ाने का यह निर्णय भविष्य में उत्पादन बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। किसान फसल की पैदावार बढ़ाने, नई किस्में अपनाने और खेती में आधुनिक तकनीक का उपयोग करने के लिए प्रेरित होंगे। इसके साथ ही चीनी उद्योग को कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और चीनी उत्पादन में सुधार होगा।

    इस निर्णय से किसानों को मानसिक और आर्थिक दोनो स्तर पर मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार का यह फैसला किसानों की मेहनत का सम्मान दर्शाता है और यह संदेश भी देता है कि सरकार कृषि को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है। कृषि अर्थव्यवस्था, ग्रामीण रोजगार, चीनी मिलों की गतिविधियाँ और गांवों की आमदनी—सभी पर इस बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ेगा।

    स्पष्ट है कि 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी से किसानों की आय में महत्वपूर्ण इजाफा होगा और आने वाले समय में यह राहत फसल उत्पादन को नए स्तर पर ले जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि हर किसान को समय पर भुगतान मिले और किसी भी तरह की शोषण प्रक्रिया पर सख्ती की जाए।

    कुल मिलाकर, यह फैसला गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार द्वारा जारी शासनादेश ने किसानों की उम्मीदों को नई दिशा दी है और कृषि क्षेत्र की मजबूती की तरफ एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। आने वाले पेराई सत्र में किसान न सिर्फ बेहतर मूल्य पाएंगे, बल्कि उनका उत्साह भी बढ़ेगा, जिसका सकारात्मक असर पूरे कृषि तंत्र पर दिखाई देगा।

  • तेल मिल लगाने पर मिल रहा है ₹3.50 लाख सब्सिडी, मौका बस 15 दिसंबर तक

    तेल मिल लगाने पर मिल रहा है ₹3.50 लाख सब्सिडी, मौका बस 15 दिसंबर तक

    तेल मिल लगाने का सुनहरा मौका! बिहार सरकार दे रही ₹3.5 लाख सब्सिडी, 15 दिसंबर तक करें ऑनलाइन आवेदन, किसानों को मिलेगा सीधा अनुदान


    बिहार के किसानों के लिए तेल मिल लगाने का यह समय किसी सुनहरे अवसर से कम नहीं है। राज्य सरकार ने तिलहन उत्पादों के प्रसंस्करण और तेल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए Oil Mill Subsidy योजना की शुरुआत की है। कृषि विभाग ने इस योजना के तहत सरकारी, निजी उद्योगों से लेकर किसान उत्पादक समूहों यानी FPO, स्टार्टअप और सहकारी समितियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस योजना का उद्देश्य यह है कि राज्य में स्थानीय स्तर पर तेल मिल (Oil Mill) लगाने को बढ़ावा मिल सके और किसानों को उनके तिलहन उत्पादों जैसे सरसों आदि का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।

    यह योजना इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अभी भी राज्य में एक बड़ी संख्या में किसान सरसों की खेती करते हैं, लेकिन प्रसंस्करण सुविधाओं के अभाव में उन्हें बाज़ार में उचित कीमत नहीं मिल पाती। कई किसान कच्चे तिलहन को ही बेचने के लिए मजबूर होते हैं, जिसकी वजह से उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। कृषि विभाग मानता है कि अगर स्थानीय स्तर पर ही तेल पेराई मिल उपलब्ध होंगी, तो किसान अपने उत्पाद को खुद प्रोसेस करके अधिक दाम प्राप्त कर सकेंगे और बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का मुख्य फोकस तिलहन प्रसंस्करण को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है। यही वजह है कि तेल मिल लगाने पर भारी सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है। सरकारी जानकारी के अनुसार 10 टन क्षमता वाली तेल पेराई मिल लगाने पर 9,90,000 रुपये की कुल लागत में से 33% की सब्सिडी दी जाएगी। यानी किसान को करीब 3.50 लाख रुपये सीधे अनुदान के रूप में मिलेंगे। यह राशि सीधे उस इकाई की स्थापना पर खर्च होगी, जिससे तेल पेराई की क्षमता बढ़ सके।

    हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि इस योजना में जमीन खरीदने या भवन निर्माण पर कोई सब्सिडी नहीं मिलेगी। इसका साफ मतलब है कि यदि किसान या संस्था के पास पहले से जमीन है तो वे इस योजना का अधिक फायदा उठा पाएंगे। कृषि विभाग का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक किसान, FPO और सहकारी समितियां इस योजना के तहत पंजीकरण कराकर Oil Processing Units स्थापित करें, जिससे राज्य के अंदर ही तिलहन प्रोसेसिंग बढ़ सके।

    तेल मिल लगाने की इच्छा रखने वाले किसानों या संस्थाओं को ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा। इसके लिए तेल मिल की क्षमता, मशीनरी, उत्पादन क्षमता और संबंधित दस्तावेजों को पोर्टल पर अपलोड करना होगा। विभाग का कहना है कि आवेदन प्रक्रिया को सरल रखा गया है ताकि अधिक से अधिक लोग आवेदन कर सकें। इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन 3 दिसंबर से शुरू हो चुके हैं और 15 दिसंबर 2025 अंतिम तिथि तय की गई है। इसलिए किसान जल्द आवेदन कर सकते हैं क्योंकि बाद में आवेदन विंडो दोबारा कब खुलेगी, इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

    कौन इस योजना का लाभ ले सकता है, इस पर भी विभाग ने स्पष्ट किया है। इसके लाभार्थियों में किसान, कृषि आधारित सरकारी या निजी उद्योग, FPO-VCP, रजिस्टर्ड स्टार्टअप और सहकारी समितियां शामिल होंगे। इसके लिए जरूरी है कि आवेदक तिलहन प्रसंस्करण में रुचि रखते हों और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा सकें। Oil Mill Subsidy Bihar, तेल मिल लगाने की प्रक्रिया, तेल मिल ऑनलाइन आवेदन, ये शब्द आजकल किसानों के बीच तेजी से चर्चा में हैं क्योंकि योजना सीधी सब्सिडी प्रदान करती है।

    इस योजना के जरिए बिहार सरकार का लक्ष्य न केवल किसानों की आय बढ़ाना है बल्कि तिलहन प्रसंस्करण को उद्योग के रूप में विकसित करना है, ताकि रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न हों। ग्रामीण क्षेत्रों में तेल मिल शुरू होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सकता है और कृषि आधारित उद्योगों को गति मिल सकती है। इससे राज्य में तेल उत्पादन की क्षमता बढ़ेगी और बाहर से तेल आयात पर निर्भरता भी कम होगी।

    कृषि विभाग ने यह भी कहा है कि जो किसान इस योजना के बारे में जानकारी चाहते हैं, वे अपने जिले के कृषि और बागवानी विभाग से संपर्क कर सकते हैं। वहीं कई किसान ऑनलाइन आवेदन के जरिए सीधे रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। चूंकि यह योजना सीमित समय के लिए ही खुली है, इसलिए किसानों में उत्साह देखा जा रहा है।

    राज्य सरकार तिलहन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ वर्षों से लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन इस बार सब्सिडी की राशि और प्रक्रिया को देखकर माना जा रहा है कि इस योजना से बड़े पैमाने पर किसान जुड़ेंगे और तिलहन प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को नई दिशा मिलेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती, किसान आय में बढ़ोतरी और कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने वाली यह योजना आने वाले समय में किसानों के लिए आर्थिक रूप से बेहद लाभकारी साबित हो सकती है।

  • Sonalika Tractors ने तोड़ा रिकॉर्ड: 2025 में 1,26,162 YTD बिक्री पूरी

    Sonalika Tractors ने तोड़ा रिकॉर्ड: 2025 में 1,26,162 YTD बिक्री पूरी

    Sonalika Tractors ने रचा नया इतिहास: अप्रैल–नवंबर 2025 में दर्ज की अब तक की सबसे बड़ी YTD बिक्री, 1,26,162 ट्रैक्टर हुए सेल


    भारत में खेती का चेहरा तेजी से बदल रहा है, और इसी बदलाव का सबसे बड़ा प्रमाण है Sonalika Tractors की अभूतपूर्व सफलता। कंपनी ने अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच 1,26,162 ट्रैक्टरों की Year-To-Date (YTD) बिक्री दर्ज करते हुए ट्रैक्टर उद्योग में एक नया इतिहास रच दिया है। यह न सिर्फ Sonalika के लिए बल्कि पूरे भारतीय कृषि तंत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बढ़ती मांग बताती है कि किसान अब अधिक शक्तिशाली, टिकाऊ और उन्नत तकनीक से लैस ट्रैक्टरों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।

    Sonalika की इस रिकॉर्ड-ब्रेकिंग उपलब्धि पर International Tractors Limited (Sonalika & Solis) के Joint Managing Director रमन मित्तल ने गर्व जताते हुए कहा कि यह केवल बिक्री का आंकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीय किसानों का भरोसा है जो कंपनी को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि किसान अब आधुनिक मशीनों और तकनीक का महत्व समझ रहे हैं, जिससे खेती तेजी, दक्षता और उत्पादकता के साथ आगे बढ़ रही है।

    भारत में कृषि मशीनीकरण का दायरा पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए किए गए कई कदमों—जैसे MSP में बढ़ोतरी, GST राहत, किफायती कृषि ऋण, और ग्रामीण बुनियादी ढांचे में निवेश—ने किसानों को मशीनरी में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसके चलते आधुनिक ट्रैक्टरों, 4WD मॉडल्स, हाई-परफॉर्मेंस इंजन और स्मार्ट फीचर्स की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

    किसान अब सिर्फ पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं हैं। वे Precision Farming जैसी उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने लगे हैं, जिसमें मशीनें कम समय, कम लागत और अधिक उत्पादकता के साथ खेती में मदद करती हैं। चाहे वह आधुनिक रोटावेटर हो, सीड ड्रिल, प्लाऊ या उन्नत ट्रैक्टर—हर उपकरण खेती को आसान और अधिक लाभदायक बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इसी तकनीक-आधारित सोच ने Sonalika की बिक्री में बड़ा योगदान दिया है।

    Sonalika Tractors अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता, मजबूत परफॉर्मेंस और किसानों के अनुकूल डिजाइनों के लिए जाना जाता है। कंपनी 20 HP से लेकर 120 HP तक के ट्रैक्टर बनाती है, जो विभिन्न फसलों, इलाकों और जरूरतों के हिसाब से बिल्कुल उपयुक्त हैं। भारत की 3rd largest ट्रैक्टर कंपनी और #1 ट्रैक्टर एक्सपोर्ट ब्रांड होने के नाते Sonalika की पकड़ केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके ट्रैक्टर 150+ देशों में उपयोग किए जाते हैं। पंजाब के होशियारपुर में मौजूद उनका प्लांट दुनिया का सबसे बड़ा ट्रैक्टर निर्माण प्लांट माना जाता है, जहां उच्च तकनीक से लैस ट्रैक्टर और 70 से अधिक कृषि उपकरण तैयार किए जाते हैं।

    कंपनी की 2025 की YTD बिक्री यह साबित करती है कि भारतीय किसान तकनीकी रूप से तेजी से विकसित हो रहे हैं और आधुनिक कृषि उपकरणों को अपना रहे हैं। यह रिकॉर्ड न केवल Sonalika की क्षमता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत अब कृषि शक्ति बनने की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

    कुल मिलाकर, Sonalika Tractors की यह उपलब्धि किसानों के बढ़ते विश्वास, सरकारी नीतियों और तकनीकी नवाचार का संयुक्त परिणाम है, जो भारतीय कृषि के उज्ज्वल भविष्य की ओर संकेत करता है।

  • यूरिया संकट खत्म? राजस्थान में 34,000 MT यूरिया जल्द पहुंचेगा, जिलों की लिस्ट देखें

    यूरिया संकट खत्म? राजस्थान में 34,000 MT यूरिया जल्द पहुंचेगा, जिलों की लिस्ट देखें

     राजस्थान के किसानों को बड़ी राहत: रबी सीजन में समय पर पहुंचेगी यूरिया की नई खेप, कई जिलों में तेज सप्लाई से खाद की कमी नहीं होगी

    यूरिया संकट खत्म? राजस्थान में 34,000 MT यूरिया जल्द पहुंचेगा, जिलों की लिस्ट देखें


    राजस्थान में रबी सीजन की बुवाई चरम पर है, ऐसे में किसानों को समय पर यूरिया खाद उपलब्ध कराना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता बन चुका है। राज्य सरकार ने केंद्र से लगातार समन्वय करते हुए दिसंबर के पहले सप्ताह के लिए 40 रैक यूरिया की मांग भेजी थी। इसी क्रम में 1 और 2 दिसंबर को 30 हजार मीट्रिक टन यूरिया राज्य में पहुंच चुका है। साथ ही 13 रैक अभी परिवहन में हैं, जिनसे जल्द ही करीब 34 हजार मीट्रिक टन यूरिया अतिरिक्त उपलब्ध करवाया जाएगा। इससे राज्यभर में खाद की कोई कमी नहीं रहने वाली है।

    राजस्थान कृषि विभाग के अनुसार नई प्राप्त खेप को प्रदेश के कई जिलों तक पहुंचाया जा रहा है। जिनमें प्रमुख रूप से कोटा, बूंदी, झालावाड़, बारां, सलूंबर, उदयपुर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक, जयपुर, भरतपुर, धौलपुर, अलवर, कोटपुतली, खैरथल–तिजारा, सीकर, चुरू, झुंझुनूं, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, राजसमंद और सिरोही शामिल हैं। विभाग के मुताबिक ब्लॉक स्तर पर उन इलाकों की पहचान कर ली गई है, जहां स्टॉक की कमी है और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है।

    दिसंबर के पहले सप्ताह में प्रदेश में 1 लाख 8 हजार मीट्रिक टन यूरिया की सप्लाई का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार प्रतिदिन औसतन 6 रैक यूरिया की आपूर्ति की जा रही है। इसके अतिरिक्त 2,500 मीट्रिक टन यूरिया प्रतिदिन सड़क मार्ग से भी भेजा जा रहा है, ताकि अधिक मांग वाले क्षेत्रों में किसान बिना रुकावट खाद प्राप्त कर सकें। कृषि विभाग का दावा है कि इस त्वरित सप्लाई प्रणाली से फसल वृद्धि प्रभावित नहीं होगी।

    कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में खाद की उपलब्धता पर कड़ी निगरानी रखी जाए। उन्होंने साफ कहा कि कम उपलब्धता वाले जिलों को विशेष प्राथमिकता के साथ सप्लाई दी जा रही है। इसके साथ ही कालाबाजारी, जमाखोरी और यूरिया डाइवर्जन रोकने के लिए जिले स्तर पर टीमें गठित की गई हैं, जो किसी भी अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई करेंगी। मंत्री ने बताया कि वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर जिले में सख्त मॉनिटरिंग की जा रही है।

    राज्य में वर्तमान उर्वरक स्टॉक भी संतोषजनक स्थिति में है। रबी 2025 के लिए केंद्र से आवंटित 7.55 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले अब तक 8.99 लाख मीट्रिक टन यूरिया राज्य में पहुंच चुका है। साथ ही 35 हजार मीट्रिक टन यूरिया रास्ते में है, जो जल्द जिलों में उपलब्ध होगा। वर्तमान स्टॉक में यूरिया 1.84 लाख एमटी, डीएपी 65 हजार एमटी, एनपीके 64 हजार एमटी और एसएसपी 1.53 लाख एमटी शामिल है। विभाग का कहना है कि इस वर्ष फॉस्फेटिक उर्वरक पिछले वर्ष की तुलना में 69 हजार एमटी अधिक उपलब्ध है, जिससे किसानों को किसी भी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    बारां, बूंदी, झालावाड़, सवाईमाधोपुर, अलवर और भीलवाड़ा जैसे जिलों में अक्टूबर–नवंबर के दौरान उनकी कुल मांग से अधिक यूरिया भेजा गया है। वहीं प्रतापगढ़ जिले के धरियावद क्षेत्र में 2,000 मीट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया भेजने की प्रक्रिया जारी है। इससे उन क्षेत्रों के किसानों को राहत मिलेगी, जहां पिछले दिनों मांग अधिक दर्ज हुई थी।

    मुख्य शासन सचिव (कृषि) मंजू राजपाल ने भी जिलाधिकारियों को उर्वरक वितरण की सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर खाद के वैज्ञानिक उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। राज्यभर में प्रत्येक उर्वरक विक्रेता पर विभागीय कार्मिक तैनात किए गए हैं, ताकि सही वितरण प्रणाली का पालन हो सके। इसके अलावा सीमावर्ती जिलों में 61 चेक पोस्ट स्थापित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य उर्वरकों की अवैध निकासी को रोकना है।

    राज्य सरकार का दावा है कि विशेष अभियान चलाकर जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई की गई है और आगामी दिनों में भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी, ताकि हर किसान को समय पर यूरिया खाद उपलब्ध हो सके और रबी फसलों की पैदावार प्रभावित न हो।

  • Solis JP 975 Tractor Price, Features & Mileage: 48–50 HP में नया धमाका

    Solis JP 975 Tractor Price, Features & Mileage: 48–50 HP में नया धमाका

    Solis JP 975: उन्नत तकनीक से बना किसानों का नया भरोसा, 48–50 HP सेगमेंट में मचाई हलचल 

    Solis JP 975 Tractor Price, Features & Mileage: 48–50 HP में नया धमाका


    किसानों की बदलती जरूरतों और भविष्य की खेती को ध्यान में रखते हुए Solis ने अपना नया और अत्याधुनिक ट्रैक्टर JP 975 लॉन्च कर दिया है। पूरी तरह नए टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म और एप्लिकेशन-फोकस्ड इंजीनियरिंग पर तैयार यह ट्रैक्टर कंपनी की टैगलाइन “Viksit Kisan Ki Pehli Pasand” को बखूबी साबित करता है। खेती में तेजी, भरोसा और ताकत—तीनों को एक साथ जोड़ने वाला यह मॉडल भारतीय किसानों के लिए किसी बड़े अपग्रेड जैसा है।

    Solis का यह नया JP 975 विशेष रूप से प्रोग्रेसिव फार्मिंग को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। बढ़ती लागत, बढ़ते काम और समय की कमी—इन तीनों का समाधान इसे एक ही मशीन में देने की कोशिश की गई है। यही वजह है कि ट्रैक्टर की लॉन्चिंग के साथ ही यह चर्चा में आ गया है।


    भारत के 48–50 HP ट्रैक्टर सेगमेंट में पहले से ही काफी प्रतिस्पर्धा मौजूद है, लेकिन JP 975 इस रेस में अपनी दमदार कार्यक्षमता और नई पीढ़ी की टेक्नोलॉजी के कारण आगे निकलता दिख रहा है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका JP Tech 4-सिलेंडर डायरेक्ट इंजेक्शन इंजन है, जो बिना टर्बोचार्जर के भी शानदार परफॉर्मेंस देता है। इंजन 205 Nm तक का टॉर्क निकालता है, जो लगभग 10% ज्यादा है। यह अतिरिक्त टॉर्क खेतों में कठिन संचालन, भारी मिट्टी और गहरे जुते खेतों में शानदार प्रदर्शन कराने में बेहद उपयोगी है।


    Solis JP 975 की इंजीनियरिंग इस तरह डिजाइन की गई है कि यह केवल ताकत नहीं, बल्कि सूझ-बूझ के साथ काम करे। 15F+5R एपिसाइक्लिक ट्रांसमिशन भारत में पहली बार किसी ट्रैक्टर में दिया गया है। एपिसाइक्लिक तकनीक का फायदा यह है कि यह गियर शिफ्टिंग को न केवल आसान बनाता है बल्कि मशीन की ताकत को अधिक सटीक तरीके से उपयोग में लाता है। इसके साथ दिया गया Smart Shuttle सिस्टम गियर बदलने के दौरान किसी प्रकार की झटका, रुकावट या पावर लॉस को लगभग खत्म कर देता है। किसान आराम से, बिना थकान के लंबे समय तक खेत में काम कर सकते हैं।

    ट्रैक्टर की मजबूती और स्थिरता को बढ़ाने के लिए लैडर-टाइप चेसिस दिया गया है, जो कम वाइब्रेशन और कम शोर के साथ स्मूद ड्राइविंग सुनिश्चित करता है। खेतों में लंबे समय तक काम करते समय वाइब्रेशन कम होने का सीधा असर किसान की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य पर पड़ता है, और इस ट्रैक्टर में इसे काफी हद तक सुधारा गया है।


    JP 975 को प्रैक्टिकल फार्मिंग जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यही कारण है कि इसे बाजार में आने से पहले अलग-अलग मुख्य कृषि उपकरणों के साथ टेस्ट किया गया है। इनमें शामिल हैं:
    • 2 RMB प्लाउ
    • 6–7 फीट रोटावेटर
    • डिस्क हैरो
    • 11 टाइन कल्टीवेटर
    • 7 फीट सुपर सीडर
    • स्ट्रॉ रीपर

    इन सभी उपकरणों के साथ ट्रैक्टर ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इसका मतलब यह है कि चाहे जुताई हो, मिट्टी की तैयारी, बुवाई या पराली प्रबंधन—हर स्थिति में JP 975 किसानों को बढ़िया एफिशिएंसी प्रदान करता है।

    इसके 2WD और 4WD दोनों विकल्प किसानों की अलग-अलग ज़रूरतों को ध्यान में रखकर पेश किए गए हैं। 2WD मॉडल सामान्य खेतों और हल्के से मध्यम कार्यों के लिए उपयुक्त है, वहीं 4WD वर्ज़न कठिन जमीन, ढलानों, भारी रोटावेशन और पराली प्रबंधन जैसे कार्यों के लिए बेहतरीन परफॉर्म करता है।


    कीमत की बात करें तो Solis ने इसे प्रतिस्पर्धी रेंज में रखा है।
    2WD मॉडल की कीमत: ₹7.00 लाख – ₹7.50 लाख
    4WD मॉडल की कीमत: ₹8.10 लाख – ₹8.60 लाख

    (राज्य के RTO और ऑन-रोड चार्जेस अलग हो सकते हैं)

    इस प्राइस रेंज में JP 975 किसानों को एक टेक्नोलॉजी-रिच, फ्यूल-एफिशिएंट और हाई-परफॉर्मेंस पैकेज देता है, जिस कारण यह अपने सेगमेंट में तेजी से लोकप्रिय हो सकता है।


    कुल मिलाकर, Solis JP 975 न सिर्फ एक नया ट्रैक्टर है, बल्कि किसानों के लिए खेती के अगले स्तर तक पहुंचने का माध्यम भी है। बढ़िया टॉर्क, नई पीढ़ी का ट्रांसमिशन, बेहतर स्थिरता, कम वाइब्रेशन, स्मार्ट गियर शिफ्टिंग और किफायती कीमत—ये सभी फीचर इसे भविष्य की खेती के लिए तैयार एक मजबूत विकल्प बनाते हैं।

    जो किसान विश्वसनीयता, पावर, कम लागत, बेहतर संचालन और प्रोडक्टिविटी को प्राथमिकता देते हैं, उनके लिए JP 975 आने वाले समय में एक प्रमुख पसंद बन सकता है। यह ट्रैक्टर खेती को तेज़, स्मार्ट और अधिक लाभदायक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

    Solis का दावा है कि JP 975 किसानों को ऐसी मशीन देता है जो बदलते कृषि परिदृश्य के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ सके—और यही कारण है कि यह ट्रैक्टर विकसित किसान की पहली पसंद बनने का दम रखता है। 

  • VST Sales November 2025: पावर टिलर बिक्री में 145% की धमाकेदार बढ़त

    VST Sales November 2025: पावर टिलर बिक्री में 145% की धमाकेदार बढ़त

    नवंबर 2025 में VST की बिक्री में ऐतिहासिक उछाल, पावर टिलर की मांग ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

    VST Sales November 2025: पावर टिलर बिक्री में 145% की धमाकेदार बढ़त


    नवंबर 2025 वीएसटी टिलर्स एंड ट्रैक्टर्स (VST Tillers & Tractors Ltd) के लिए किसी तेजी से धड़कते इंजन की तरह साबित हुआ। कंपनी ने अपनी मासिक बिक्री रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि कुल 5,166 यूनिट की बिक्री दर्ज की गई। यह पिछले साल नवंबर 2024 में बेची गई 2,251 यूनिट की तुलना में 129.5% की धमाकेदार वृद्धि को दर्शाता है। कृषि मशीनरी बाजार में इस समय जिस ब्रांड की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है, वह है VST, और इस रिपोर्ट ने इसे और मजबूत कर दिया है।

    इस महीने की सबसे चमकदार उपलब्धि रही पावर टिलर सेगमेंट में दर्ज की गई ऐतिहासिक बढ़त। नवंबर 2025 में वीएसटी ने 4,676 पावर टिलर बेचे, जबकि एक साल पहले नवंबर 2024 में यह आंकड़ा सिर्फ 1,904 यूनिट था। इसका मतलब है कि पावर टिलर सेगमेंट में VST ने 145.6% की रिकॉर्डतोड़ ग्रोथ हासिल की—एक ऐसा आंकड़ा जो स्पष्ट तौर पर किसानों की बढ़ती जरूरतों और ब्रांड में भरोसे को दर्शाता है। ग्रामीण बाजारों में पावर टिलर की बढ़ती मांग, छोटे किसानों की बढ़ती मैकेनाइजेशन जरूरतों और फसल प्रबंधन के आधुनिक तरीकों की ओर कदम बढ़ाने का संकेत भी देती है।

    पावर टिलर के मुकाबले ट्रैक्टर सेगमेंट में थोड़ी धीमी लेकिन स्थिर प्रगति देखने को मिली। नवंबर 2025 में VST ने 490 ट्रैक्टर बेचे, जबकि पिछले वर्ष नवंबर में यह संख्या 347 यूनिट थी। यानी 41.2% की वृद्धि—यह संकेत देता है कि कंपनी के मिनी और कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। ट्रैक्टर बाजार में बड़ी कंपनियों के मुकाबले VST के उत्पाद छोटे किसानों और विशेष खेती प्रथाओं में एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहे हैं।

    कुल मिलाकर नवंबर 2025 कंपनी के लिए बेहद सफल महीना रहा, जहां दोनों प्रमुख सेगमेंट—पावर टिलर और ट्रैक्टर—ने कंपनी की विकास यात्रा को नई ऊर्जा दी।


    YTD अवधि (अप्रैल–नवंबर 2025) ने भी दिखाई मजबूत पकड़

    केवल नवंबर माह ही नहीं, बल्कि पूरे साल की अब तक की अवधि भी वीएसटी के लिए उम्मीदों से कहीं अधिक बेहतर रही है। अप्रैल से नवंबर 2025 तक कंपनी की कुल YTD (Year-to-Date) बिक्री 37,235 यूनिट रही। यह पिछले वर्ष इसी अवधि में बेची गई 24,638 यूनिट की तुलना में 51.1% की मजबूत वृद्धि दर्ज करता है। यह साफ दिखाता है कि 2025 का वर्ष VST के लिए लगातार सकारात्मक मोड़ लेकर आया है।

    इस YTD वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान फिर से पावर टिलर सेगमेंट का रहा है। अप्रैल–नवंबर 2025 में 33,582 पावर टिलर बेचे गए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा था 21,012 यूनिट। यानी 59.8% की बेहतरीन वृद्धि—यह बताता है कि किसान पावर टिलर को खेती का “स्मार्ट साथी” मानते हुए इसे अपनाने में और तेजी दिखा रहे हैं।

    वहीं दूसरी ओर, ट्रैक्टर सेगमेंट में भले ही आक्रामक वृद्धि नहीं दिखी, लेकिन बाजार में कंपनी की मौजूदगी स्थिर बनी रही। अप्रैल–नवंबर 2025 के दौरान 3,653 ट्रैक्टर बेचे गए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 3,626 यूनिट थी। इस आधार पर 0.7% की मामूली लेकिन सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। यह संकेत है कि छोटे ट्रैक्टर सेगमेंट में भी मांग धीरे-धीरे मजबूत हो रही है।


    क्यों बढ़ रही है VST की बाजार पकड़?

    कृषि मशीनरी की दुनिया में इस साल जिस नाम ने खूब सुर्खियां बटोरी हैं, वह है VST Tillers & Tractors। इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं:

    • विश्वसनीय और किफायती मशीनें: VST की मशीनें छोटे और मध्यम किसानों के लिए बजट-अनुकूल विकल्प बनती जा रही हैं।
    • उच्च दक्षता वाले पावर टिलर: इस सेगमेंट में VST पहले से ही भारतीय बाजार में अग्रणी रहा है और 2025 में इसकी पकड़ और मजबूत हुई है।
    • बदलता ग्रामीण बाजार: खेती में आधुनिक उपकरणों की मांग बढ़ रही है, जिससे पावर टिलर जैसी मशीनों की बिक्री में तेज उछाल आया है।
    • ब्रांड पर भरोसा: कंपनी की लंबी विरासत और सर्विस नेटवर्क भी बिक्री बढ़ने का प्रमुख कारण है।

    2025 VST के लिए साबित हुआ शानदार साल

    नवंबर के प्रदर्शन और YTD आंकड़ों को मिलाकर देखा जाए तो यह साफ है कि 2025 VST के लिए सुनहरा अध्याय लिख रहा है। 145.6% की पावर टिलर ग्रोथ, 41.2% की ट्रैक्टर ग्रोथ, और 51.1% की YTD वृद्धि यह दर्शाती है कि कंपनी भविष्य के लिए मजबूत तैयारी कर चुकी है।
    किसानों में बढ़ रहा विश्वास और कृषि क्षेत्र में तेजी से बढ़ती मैकेनाइजेशन की लहर आने वाले महीनों में भी VST की बिक्री को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है।

    यह रिपोर्ट न केवल कंपनी की सफलता की कहानी बताती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि भारतीय कृषि आज तकनीक को तेजी से अपना रही है—और VST इस बदलाव के केंद्र में खड़ा है। 

  • एस्कॉर्ट्स कुबोटा की ट्रैक्टर बिक्री में उछाल, नवंबर 2025 में 17.9% ग्रोथ

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा की ट्रैक्टर बिक्री में उछाल, नवंबर 2025 में 17.9% ग्रोथ

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा की ट्रैक्टर बिक्री में जबरदस्त उछाल, नवंबर 2025 में 17.9% की ग्रोथ

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा की ट्रैक्टर बिक्री में उछाल, नवंबर 2025 में 17.9% ग्रोथ



    एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड ने नवंबर 2025 में ट्रैक्टर बिक्री के क्षेत्र में ऐसा शानदार प्रदर्शन किया है जिसने पूरे कृषि मशीनरी उद्योग में उत्साह भर दिया है। कंपनी के एग्री मशीनरी बिजनेस ने इस महीने कुल 10,580 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज कर अपनी बाजार पकड़ को और मजबूत किया है। पिछले वर्ष नवंबर 2024 में 8,974 यूनिट्स की तुलना में यह 17.9% की प्रभावशाली बढ़त है। यह उपलब्धि बताती है कि भारतीय ट्रैक्टर बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों का भरोसा आधुनिक कृषि तकनीकों की ओर तेजी से झुक रहा है।

    इस महीने घरेलू बिक्री का प्रदर्शन भी उतना ही मजबूत रहा। कंपनी ने भारतीय बाजार में 10,122 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जो नवंबर 2024 के 8,730 यूनिट्स से बढ़कर 15.9% हो गई। किसानों के बीच कृषि मशीनीकरण को लेकर बढ़ती जागरूकता और सरकार द्वारा मशीनरी पर GST में कटौती, सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहनों ने ट्रैक्टर खरीद को और भी सुलभ बनाया है। इससे रिटेल बिक्री में उल्लेखनीय तेजी आई है, जो कंपनी के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत है।

    नवंबर 2025 का महीना एस्कॉर्ट्स कुबोटा के लिए रिटेल स्तर पर भी बेहद सफल रहा। खरीफ सीजन की कटाई के समाप्त होते ही रबी फसल की बुवाई की शुरुआत ने कृषि गतिविधियों में तेजी लाई। खेतों में बढ़ती जरूरतों ने ट्रैक्टर मांग को मजबूत बनाए रखा। इसके अलावा, पिछले वर्ष के बेहतर जलाशय स्तरों ने ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित की, जिससे किसान फसल चक्र को आसानी से आगे बढ़ा सके और इस सुचारू स्थिति ने बिक्री को अतिरिक्त बल दिया। कंपनी का मानना है कि वित्त वर्ष के आगामी महीनों में भी यह रुझान कायम रहने की पूरी संभावना है।

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा का निर्यात प्रदर्शन इस वर्ष विशेष ध्यान आकर्षित करता है। कंपनी ने नवंबर 2025 में 458 ट्रैक्टरों का निर्यात किया, जबकि नवंबर 2024 में यह संख्या 244 थी। यानी 87.7% की ऐतिहासिक छलांग। यह न सिर्फ कंपनी की वैश्विक उपस्थिति को मजबूत करता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारतीय ट्रैक्टर टेक्नोलॉजी दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। उच्च गुणवत्ता, टिकाऊपन और तकनीकी नवाचारों की वजह से कंपनी के उत्पाद कई देशों में महत्वपूर्ण पसंद बनते जा रहे हैं।

    अप्रैल से नवंबर 2025 (FY26) तक की कुल बिक्री रिपोर्ट पर नजर डालें तो कंपनी का प्रदर्शन और अधिक मजबूती से उभरकर आता है। इन आठ महीनों के दौरान एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने मिलाकर 93,836 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जो पिछले वर्ष FY25 की इसी अवधि के 83,449 ट्रैक्टरों की तुलना में 12.4% अधिक है। घरेलू बिक्री में कंपनी ने 89,722 यूनिट्स बेचे, जबकि पिछला आंकड़ा 80,746 था, यानी 11.1% की वृद्धि। वहीं निर्यात क्षेत्र में कंपनी ने 4,114 ट्रैक्टर भेजे, जो 2,703 की तुलना में 52.2% ज्यादा है। ये आँकड़े इस बात के प्रमाण हैं कि कंपनी घरेलू और वैश्विक दोनों ही मोर्चों पर मजबूत पकड़ बनाए हुए है।

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड को इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षेत्र में आठ दशकों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। कंपनी कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट तकनीक वाली मशीनों के माध्यम से किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में लगातार योगदान दे रही है। उसके दो प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र—एग्री मशीनरी बिजनेस और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट बिजनेस—तेजी से विकसित हो रहे भारतीय कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों को नई दिशा दे रहे हैं। कंपनी की प्रतिबद्धता उच्च गुणवत्ता, लागत-प्रभावशीलता, नवाचार और बाजार की जरूरतों के अनुरूप तकनीक विकसित करने पर केंद्रित है।

    आज के प्रतिस्पर्धी कृषि बाजार में किसानों की जरूरतें और प्राथमिकताएँ लगातार बदल रही हैं। ईंधन-कुशल, तकनीकी रूप से उन्नत और टिकाऊ ट्रैक्टरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। एस्कॉर्ट्स कुबोटा अपने विस्तृत उत्पाद पोर्टफोलियो के माध्यम से किसानों को ऐसे ट्रैक्टर उपलब्ध करा रही है, जो न केवल उनकी कृषि उत्पादकता बढ़ाते हैं, बल्कि कम लागत में बेहतर संचालन का भी भरोसा देते हैं। यही कारण है कि कंपनी की ब्रांड वैल्यू ग्रामीण बाजारों में दिन-ब-दिन बढ़ रही है।

    नवंबर 2025 की बिक्री रिपोर्ट कंपनी के लिए न सिर्फ उपलब्धि है, बल्कि आने वाले समय की संभावनाओं का संकेत भी है। भारतीय ट्रैक्टर उद्योग, आधुनिक कृषि तकनीकों के बढ़ते उपयोग, ग्रामीण आय में वृद्धि, सरकारी प्रोत्साहन और उभरते निर्यात बाजारों की वजह से लगातार विस्तार कर रहा है। एस्कॉर्ट्स कुबोटा इस वृद्धि लहर का लाभ उठाते हुए उद्योग में अपनी नेतृत्वकारी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी यह उम्मीद जता रही है कि आने वाले महीनों में भी मांग स्थिर बनी रहेगी और बिक्री में निरंतर वृद्धि दर्ज की जाएगी।

  • Mahindra Tractor Sales Record: नवंबर 2025 में 42,273 यूनिट्स की 33% Growth

    Mahindra Tractor Sales Record: नवंबर 2025 में 42,273 यूनिट्स की 33% Growth

    महिंद्रा ने तोड़ दिए ट्रैक्टर बिक्री के सारे रिकॉर्ड! नवंबर 2025 में 42,273 यूनिट्स की घरेलू बिक्री, 33% की जबरदस्त ग्रोथ 

    Mahindra Tractor Sales Record: नवंबर 2025 में 42,273 यूनिट्स की 33% Growth


    भारत के ट्रैक्टर बाजार में नवंबर 2025 का महीना महिंद्रा एंड महिंद्रा फार्म इक्विपमेंट बिज़नेस (FEB) के लिए किसी फसल उत्सव से कम नहीं रहा। कंपनी ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि नवंबर 2025 में महिंद्रा ने घरेलू बाजार में 42,273 ट्रैक्टर बेचे, जो पिछले साल नवंबर 2024 की 31,746 यूनिट्स की तुलना में 33% की तेज़तर्रार वृद्धि दर्ज करता है। यह प्रदर्शन न सिर्फ बिक्री के नए मानक तय करता है, बल्कि भारत के ट्रैक्टर उद्योग में महिंद्रा की मजबूत पकड़ को भी फिर से स्थापित करता है।

    कंपनी की कुल बिक्री (Domestic + Exports) नतीजे भी उतने ही दमदार रहे। नवंबर 2025 में महिंद्रा की कुल ट्रैक्टर बिक्री 44,048 यूनिट्स तक पहुंच गई, जो पिछले साल की 33,378 यूनिट्स की तुलना में 32% की शानदार ग्रोथ है। वहीं एक्सपोर्ट्स ने भी धीमी रफ्तार को पीछे छोड़ते हुए नई ऊर्जा के साथ 1,775 यूनिट्स छू लीं, जो पिछले साल की तुलना में 9% की बढ़त है।
    यह प्रदर्शन साबित करता है कि महिंद्रा भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक कृषि मशीनरी बाजार में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।


    किसानों का भरोसा ही महिंद्रा की असली ताकत

    महिंद्रा FEB के प्रेसिडेंट वीजय नाकरा ने बिक्री के इन शानदार आंकड़ों पर खुशी जताते हुए कहा कि कंपनी ने नवंबर 2025 में घरेलू बाजार में 42,273 ट्रैक्टर बेचे, जो कि बीते वर्ष की तुलना में 33% अधिक है। उन्होंने बताया कि यह सफलता सितंबर–अक्टूबर 2025 के त्योहारों के सीजन में 27% की मजबूत ग्रोथ के बाद दर्ज हुई है, जो बाजार की सकारात्मक भावना का ही नतीजा है।

    उन्होंने आगे कहा कि इस साल किसानों का मनोबल बेहद ऊँचा है, क्योंकि

    • कहरिफ सीजन में रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है,
    • रबी की बुवाई में भी तेजी देखने को मिल रही है,
    • सरकार द्वारा GST दरों में कटौती और
    • MSP में बढ़ोतरी ने किसानों की आमदनी और नकदी प्रवाह को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

    इन सभी कारकों की वजह से देशभर में ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। महिंद्रा का कहना है कि आने वाले महीनों में भी बाजार में इसी तरह की मजबूत मांग बने रहने की उम्मीद है।


    वैश्विक बाजार में भी दम दिखा रहा है महिंद्रा

    महिंद्रा ने सिर्फ घरेलू बाजार में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी उपस्थिति को और मजबूत किया है। नवंबर 2025 में कंपनी ने कुल 1,775 ट्रैक्टर निर्यात किए, जो पिछले साल की तुलना में 9% की ग्रोथ है। यह वृद्धि बताती है कि भारतीय ट्रैक्टर तकनीक और महिंद्रा की विश्वसनीयता को दुनिया भर के किसान और डीलर तेजी से अपना रहे हैं।

    कंपनी का कहना है कि वैश्विक मांग में बढ़ोतरी और भारत में बने मजबूत, टिकाऊ और ईंधन-किफायती ट्रैक्टरों की पहचान बढ़ने से आने वाले महीनों में एक्सपोर्ट सेगमेंट में और तेजी देखने को मिलेगी।


    सालभर का प्रदर्शन भी शानदार – YTD आंकड़े बताते हैं बड़ी कहानी

    महिंद्रा के वित्तीय वर्ष 2025-26 (YTD November) के आंकड़े भी उतने ही प्रभावशाली हैं।

    • घरेलू बिक्री: 3,61,680 यूनिट्स (20% की बढ़त)
    • एक्सपोर्ट्स: 13,053 यूनिट्स (15% की वृद्धि)
    • कुल बिक्री: 3,74,733 यूनिट्स (19% की ग्रोथ)

    ये आंकड़े बताते हैं कि महिंद्रा लगातार देश के सबसे भरोसेमंद कृषि ब्रांड की अपनी पहचान को और मजबूत कर रहा है। भारत के हर राज्य में किसानों के बीच महिंद्रा ट्रैक्टरों के प्रति भरोसा तेजी से बढ़ रहा है।


    किसानों की जरूरतें समझना ही महिंद्रा की सबसे बड़ी सफलता

    आज भारत में खेती आधुनिक और तकनीक-आधारित हो रही है। ऐसे में किसानों को

    • ज्यादा पावर वाले,
    • कम ईंधन खर्च वाले,
    • और टिकाऊ ट्रैक्टरों की जरूरत होती है।
    महिंद्रा ने लगातार यही कोशिश की है कि वह किसानों की बदलती जरूरतों को समझे और उन्हें ऐसे उपकरण दे जो खेती को आसान, तेज और अधिक फायदेमंद बनाएं।
    कंपनी की यही रणनीति उसे भारत का नंबर 1 ट्रैक्टर निर्माता बनाए हुए है।


    कुल मिलाकर…

    नवंबर 2025 महिंद्रा ट्रैक्टरों के लिए उपलब्धियों से भरा महीना साबित हुआ है। घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों में दो अंकों की ग्रोथ, मजबूत किसान भावना, सरकारी नीतियों की सकारात्मकता और महिंद्रा की भरोसेमंद तकनीक—इन सभी ने मिलकर एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय कृषि मशीनरी उद्योग में महिंद्रा की बराबरी करना आसान नहीं।

    कृषि क्षेत्र में बढ़ते अवसरों और आधुनिक खेती की ओर किसानों के बढ़ते रुझान के साथ, आने वाले समय में महिंद्रा अपने प्रदर्शन को और ऊँचा ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    इस शानदार ग्रोथ के साथ महिंद्रा ने साफ संकेत दे दिया है—

    भारत के खेतों में ट्रैक्टरों की आवाज़ गूंजेगी, और उस आवाज़ में महिंद्रा का दम और भी तेज़ सुनाई देगा। 🚜🌾

  • Case IH ने शुरू किए Ethanol Tractor के फील्ड टेस्ट, किसानों को बड़ा फायदा

    Case IH ने शुरू किए Ethanol Tractor के फील्ड टेस्ट, किसानों को बड़ा फायदा

    Case IH ने शुरू किया Ethanol-Powered Tractor का लाइव फील्ड टेस्ट, São Martinho के साथ मिलकर बना कृषि डिकार्बोनाइजेशन का नया मॉडल 

    Case IH ने शुरू किए Ethanol Tractor के फील्ड टेस्ट, किसानों को बड़ा फायदा


    वैश्विक कृषि तकनीक तेजी से बदल रही है, और इसी बदलाव को नई गति देने के लिए Case IH ने अपने Puma 230 Ethanol-Powered Tractor का फील्ड ट्रायल शुरू कर दिया है। यह परीक्षण ब्राज़ील की जानी-मानी एग्रोटेक कंपनी São Martinho के साथ साझेदारी में किया जा रहा है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े चीनी, इथेनॉल और बायोएनर्जी उत्पादकों में गिना जाता है। यह पूरा परीक्षण प्रडोपोलिस के खेतों में चल रहा है, जहां यह विशेष ट्रैक्टर Austoft 9000 Ethanol Harvester के साथ मिलकर काम कर रहा है—यानी पूरी मशीनरी एक ही स्वच्छ ईंधन पर आधारित है।

    यह प्रयोग सिर्फ एक तकनीकी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि कृषि के भविष्य की दिशा तय करने वाली एक निर्णायक कोशिश है। CNH ब्रांड का फोकस कृषि डिकार्बोनाइजेशन, कार्बन उत्सर्जन में कमी और low-carbon economy को बढ़ावा देने पर है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ रही है, कृषि क्षेत्र में Ethanol एक व्यवहारिक, सस्ता और तुरंत अपनाई जाने वाली तकनीक के रूप में उभर रहा है।

    Case IH का यह ट्रायल खास है क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाला N67 Otto cycle engine (FPT Industrial द्वारा निर्मित) 234 hp की दमदार पावर देता है और इसकी तकनीक काफी हद तक ऑटोमोबाइल इंजनों जैसी है। इस वजह से यह न केवल प्रदूषण को कम करता है बल्कि मशीन ऑपरेशन के दौरान शोर भी कम पैदा करता है, जो किसानों और मशीन ऑपरेटर्स के लिए बड़ा लाभ है। लंबे समय तक मशीन चलाने वाले ऑपरेटर्स के लिए शांत और स्मूद ऑपरेशन एक तरह की राहत जैसा होता है।

    इस Ethanol-powered ट्रैक्टर को फील्ड में उतारने से पहले Case IH ने इसे 100 घंटे से अधिक Bench Testing पर चलाया। कंपनी के Latin America Director लेआंड्रो कोंडे के अनुसार, सभी शुरुआती परिणाम बेहद सकारात्मक रहे हैं। उन्होंने कहा कि São Martinho की विशेषज्ञता और बड़ी कृषि भूमि वास्तविक परिस्थितियों में इस मशीन की क्षमता को परखने के लिए बिल्कुल आदर्श हैं।

    यह साझेदारी Clean Fuel Revolution की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो आने वाले समय में कृषि के ऊर्जा ढांचे को बदल सकती है।

    São Martinho के CEO फाबियो वेंचुरेली ने भी इसे कृषि स्थिरता की दिशा में क्रांतिकारी पहल बताया। उन्होंने कहा कि ethanol सिर्फ एक वैकल्पिक ईंधन नहीं, बल्कि एक ऐसी तकनीक है जो कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल बना सकती है। Ethanol की उपलब्धता, लागत और स्वच्छता इसे किसानों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनाती है।
    उनके अनुसार, यह नवाचार कृषि क्षेत्र के पर्यावरणीय लक्ष्यों में भी सीधा योगदान देगा और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा।

    फिलहाल यह ट्रैक्टर गन्ना कटाई के दौरान अपनी क्षमता दिखा रहा है, लेकिन यह यहीं तक सीमित नहीं रहेगा। कटाई के बाद इसे भूमि तैयार करने, रोपाई, और मक्का आधारित इथेनॉल उत्पादन जैसे अन्य कामों में भी आज़माया जाएगा। इससे कंपनी को यह समझने में मदद मिलेगी कि विभिन्न मौसमों और परिस्थितियों में ethanol-powered तकनीक कितनी कारगर साबित होती है

    Case IH का प्लान आगे चलकर इस तकनीक को और विस्तार देने का है। यदि परिणाम उम्मीद के अनुसार रहे, तो यही ethanol तकनीक भविष्य में—

    • ग्रेन हार्वेस्टर,
    • स्प्रेयर,
    • और अन्य भारी कृषि मशीनरी**
    में भी लागू की जाएगी।
    यह बड़ा कदम कृषि जगत में ग्रीन एनर्जी मशीनरी के युग की शुरुआत कर सकता है।

    यह पूरा प्रोजेक्ट उन किसानों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण संदेश देता है जो सस्टेनेबल खेती, कम प्रदूषण, कम ईंधन लागत और अधिक दक्षता वाली मशीनरी** की तलाश में हैं। Ethanol एक ऐसा ईंधन है जिसे कई देशों में आसानी से उपलब्ध कराया जा सकता है, और इससे किसान ऊर्जा लागत कम करते हुए पर्यावरण की रक्षा भी कर सकते हैं।

    यह कहा जा सकता है कि Case IH और São Martinho की यह पहल सिर्फ एक मशीनरी ट्रायल नहीं, बल्कि कृषि के भविष्य की बुनियाद रखने वाली हरित यात्रा की शुरुआत है—जहां ट्रैक्टर और हार्वेस्टर साफ ऊर्जा से चलकर खेतों में नई उम्मीद और नई ऊर्जा लेकर आएँगे।