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  • महाराष्ट्र किसानों को बड़ी राहत: 17.29 लाख किसानों के कर्ज में बदलाव, 266 अरब रुपये का लोन रिस्ट्रक्चर

    महाराष्ट्र किसानों को बड़ी राहत: 17.29 लाख किसानों के कर्ज में बदलाव, 266 अरब रुपये का लोन रिस्ट्रक्चर

     महाराष्ट्र के किसानों के लिए केंद्र सरकार की बड़ी राहत: 17.29 लाख लोन खातों में बदलाव को हरी झंडी

    महाराष्ट्र किसानों को बड़ी राहत: 17.29 लाख किसानों के कर्ज में बदलाव, 266 अरब रुपये का लोन रिस्ट्रक्चर


    महाराष्ट्र में बीते महीनों के दौरान हुई भारी बारिश, बाढ़ और बेमौसम वर्षा ने किसानों की कमर तोड़ दी है। फसलें पूरी तरह नष्ट होने से लाखों किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने एक अहम और राहत भरा फैसला लेते हुए महाराष्ट्र के 17.29 लाख किसानों के फसल ऋण खातों में बदलाव (Loan Restructuring) को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के तहत लगभग 266.58 अरब रुपये के कृषि ऋण को पुनर्गठित किया जाएगा, जिससे प्रभावित किसानों को तत्काल और दीर्घकालिक राहत मिलने की उम्मीद है।

    किसानों के लिए क्यों जरूरी था यह फैसला

    महाराष्ट्र के कई जिलों में लगातार प्राकृतिक आपदाओं ने खेती को नुकसान पहुंचाया है। कहीं बाढ़ ने फसलें बहा दीं तो कहीं बेमौसम बारिश ने तैयार खड़ी फसल बर्बाद कर दी। ऐसी स्थिति में किसान न तो समय पर कर्ज चुका पाने की हालत में थे और न ही अगली फसल के लिए पूंजी जुटा पा रहे थे। लोन अकाउंट में बदलाव का यह फैसला किसानों को डिफॉल्ट होने से बचाने और उन्हें दोबारा खेती के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    किसानों के लोन अकाउंट में क्या होगा बदलाव

    सरकारी जानकारी के अनुसार, जिन किसानों की फसलें प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुई हैं और जिनके लोन खातों का सत्यापन पूरा हो चुका है, उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा। सदस्य बैंकों ने ऐसे सभी पात्र किसानों की सूची महाराष्ट्र राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) को सौंप दी है। अब जल्द ही बैंकों द्वारा कर्ज पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसमें लोन चुकाने की अवधि बढ़ाई जा सकती है या किश्तों में राहत दी जा सकती है।

    किन किसानों को मिलेगा इस योजना का लाभ

    इस राहत पैकेज का लाभ केवल उन्हीं किसानों को दिया जाएगा:

    • जिनकी फसलें भारी बारिश, बाढ़ या बेमौसम बारिश से प्रभावित हुई हैं
    • जिनके लोन खाते आपदा प्रभावित के रूप में सत्यापित हो चुके हैं
    • जिनकी जानकारी बैंकों द्वारा SLBC को भेजी जा चुकी है

    सरकार ने साफ किया है कि केवल वास्तविक और पात्र किसानों को ही इस योजना में शामिल किया जाएगा, ताकि राहत सही हाथों तक पहुंचे।

    ब्याज सब्सिडी से मिलेगी शुरुआती राहत

    केंद्र सरकार ने लोन पुनर्गठन के साथ-साथ संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के तहत भी राहत देने का फैसला किया है। इसके अनुसार:

    • लोन में बदलाव कराने वाले किसानों को पहले वर्ष रियायती ब्याज दर का लाभ मिलेगा
    • पहले साल ब्याज का बोझ कम रहने से किसान अपनी आर्थिक स्थिति संभाल सकेंगे
    • दूसरे वर्ष से संबंधित बैंक की सामान्य ब्याज दर लागू होगी

    सरकार का मानना है कि शुरुआती साल की यह राहत किसानों को दोबारा खेती शुरू करने और आय के स्रोत मजबूत करने में मदद करेगी।

    लोन रिकवरी पर अस्थायी रोक

    प्राकृतिक आपदाओं के चलते मानसिक और आर्थिक दबाव झेल रहे किसानों को और राहत देते हुए केंद्र सरकार ने निर्देश दिए हैं कि लोन पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावित किसानों से कर्ज वसूली का दबाव न बनाया जाए
    इस अस्थायी रोक से किसानों को सांस लेने का मौका मिलेगा और वे बिना तनाव के आगे की खेती की योजना बना सकेंगे।

    सांसदों के हस्तक्षेप के बाद आया फैसला

    सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र के कई सांसदों ने किसानों की बदहाल स्थिति को लेकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी। सांसदों ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसान पूरी तरह टूट चुके हैं और उन पर कर्ज का अतिरिक्त बोझ डालना न्यायसंगत नहीं होगा। इसके बाद केंद्र सरकार ने हालात की गंभीरता को समझते हुए यह बड़ा फैसला लिया।

    प्राकृतिक आपदा की घोषणा का सीधा असर

    महाराष्ट्र सरकार ने 26 नवंबर 2025 को राज्य में प्राकृतिक आपदा की आधिकारिक घोषणा की थी। इसी आधार पर राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) ने सभी बैंकों को RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार कदम उठाने के निर्देश दिए।
    इन निर्देशों में शामिल हैं:

    • आपदा प्रभावित किसानों के फसल ऋण में बदलाव
    • लोन रिकवरी को अस्थायी रूप से टालना
    • किसानों को बैंकिंग प्रक्रियाओं में सहयोग देना

    कृषि क्षेत्र को मिलेगा संजीवनी

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सिर्फ किसानों को ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी। कर्ज का दबाव कम होने से किसान:

    • अगली फसल के लिए निवेश कर पाएंगे
    • बीज, खाद और कृषि उपकरण खरीद सकेंगे
    • उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दे सकेंगे

    इसका सकारात्मक असर आने वाले सीजन में राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।

    कुल मिलाकर किसानों के लिए बड़ी सौगात

    केंद्र सरकार का यह कदम लाखों किसानों के लिए राहत की सांस साबित हो सकता है। कर्ज में बदलाव, ब्याज सब्सिडी और लोन रिकवरी पर रोक जैसे फैसले यह दिखाते हैं कि सरकार प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को उबरने का पूरा मौका देना चाहती है।
    यदि यह योजना समय पर और पारदर्शी तरीके से लागू होती है, तो यह न सिर्फ किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारेगी, बल्कि खेती को फिर से पटरी पर लाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

  • भारत के टॉप 3 ट्रैक्टर ब्रांड 2025: महिंद्रा, सोनालिका और TAFE की पूरी जानकारी

    भारत के टॉप 3 ट्रैक्टर ब्रांड 2025: महिंद्रा, सोनालिका और TAFE की पूरी जानकारी

     भारत में ट्रैक्टर बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड: जानें 2025 में टॉप 3 ट्रैक्टर ब्रांड और किसानों की पहली पसंद

    भारत के टॉप 3 ट्रैक्टर ब्रांड 2025: महिंद्रा, सोनालिका और TAFE की पूरी जानकारी

    भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां खेती का आधार मजबूत बनाने में ट्रैक्टरों की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। आज ट्रैक्टर सिर्फ एक मशीन नहीं बल्कि किसानों की उत्पादकता बढ़ाने वाला सबसे भरोसेमंद साथी बन चुका है।
    खेत जोतने से लेकर बुआई, कटाई और ढुलाई तक – हर काम ट्रैक्टर के बिना अधूरा है।

    2025 में ट्रैक्टर बिक्री ने रचा इतिहास

    वित्त वर्ष 2025 के अप्रैल से दिसंबर के बीच भारत में घरेलू ट्रैक्टर बिक्री 8.89 लाख यूनिट तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 29% अधिक है।
    यह आंकड़ा साफ दर्शाता है कि किसान अब आधुनिक कृषि तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं और खेती को व्यवसायिक रूप से अपना रहे हैं।

     क्यों बढ़ रही है ट्रैक्टर की मांग?

    • खेतों का आकार बढ़ना
    • मजदूरों की कमी
    • खेती में समय और लागत की बचत
    • मल्टी-क्रॉप फार्मिंग का बढ़ता चलन
    • सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ

    इन्हीं कारणों से आज Best Tractor in India, Tractor Price in India, और Top Tractor Brands 2025 जैसे कीवर्ड्स इंटरनेट पर तेजी से सर्च किए जा रहे हैं।


    महिंद्रा ट्रैक्टर: भारत का नंबर 1 ब्रांड

    महिंद्रा ट्रैक्टर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्यों वह भारतीय किसानों की पहली पसंद है।

    बिक्री और मार्केट शेयर

    • बिक्री (Apr-Dec 2025): 3.91 लाख यूनिट
    • मार्केट शेयर: 44% से ज्यादा
    • सालाना ग्रोथ: लगभग 30%

     कीमत और पावर रेंज

    महिंद्रा ट्रैक्टर की कीमत ₹3.09 लाख से ₹14.83 लाख तक जाती है।
    इनकी पावर रेंज 15 HP से 74 HP तक है और 2WD व 4WD दोनों विकल्प उपलब्ध हैं।

     महिंद्रा ट्रैक्टर क्यों चुनते हैं किसान?

    • मजबूत और भरोसेमंद इंजन
    • कम ईंधन खपत
    • 6 साल की वारंटी
    • बेहतरीन सर्विस नेटवर्क
    • आधुनिक फीचर्स

    लोकप्रिय महिंद्रा ट्रैक्टर मॉडल

    • Mahindra Yuvo 575 DI – भारी खेती के लिए
    • Mahindra Yuvo 415 DI – मल्टी-पर्पज ट्रैक्टर
    • Mahindra Jivo 225 DI – बागवानी और संकरी जगहों के लिए
    • Mahindra 475 DI – जुताई और ट्रांसपोर्ट के लिए

    सोनालिका ट्रैक्टर: तेजी से उभरता भरोसेमंद नाम

    सोनालिका ने बीते वर्षों में अपनी पकड़ काफी मजबूत की है और आज यह देश के टॉप ब्रांड्स में शामिल है।

    बिक्री प्रदर्शन

    • बिक्री: 1.15 लाख यूनिट
    • मार्केट शेयर: 13%
    • ग्रोथ: करीब 29%

    कीमत और क्षमता

    सोनालिका ट्रैक्टर की कीमत ₹2.59 लाख से ₹16.92 लाख तक जाती है और इसकी पावर रेंज 20 HP से 120 HP तक है।

     सोनालिका ट्रैक्टर की खासियतें

    • मिनी ट्रैक्टर से लेकर हाई HP मॉडल तक
    • 70+ कृषि उपकरणों के साथ अनुकूल
    • आसान ड्राइविंग
    • कम मेंटेनेंस
    • बागवानी से लेकर भारी खेती तक उपयुक्त

     सोनालिका के पॉपुलर मॉडल

    • Sonalika DI 745 III – मल्टी क्रॉप फार्मिंग
    • Sonalika DI 750 III – हैवी ड्यूटी वर्क
    • Sonalika GT 20 – छोटे खेतों के लिए
    • Sonalika Tiger 26 – गार्डन व ऑर्चर्ड फार्मिंग
    • Sonalika Baagban Super – बागवानी के लिए खास

     TAFE ट्रैक्टर: मजबूती और भरोसे का दूसरा नाम

    TAFE ट्रैक्टर अपनी टिकाऊ बनावट और स्मूद परफॉर्मेंस के लिए जाना जाता है।

     बिक्री और ग्रोथ

    • बिक्री: 98,356 यूनिट
    • ग्रोथ: 30.7%
    • मार्केट शेयर: 11%

    TAFE ट्रैक्टर की रेंज

    TAFE ट्रैक्टर 100 HP तक की क्षमता में उपलब्ध हैं और इसकी प्रमुख सीरीज हैं:

    • Compact Series
    • Classic Series
    • Magna Series

    TAFE ट्रैक्टर की विशेषताएं

    • स्मूद इंजन
    • ज्यादा लिफ्टिंग पावर
    • लंबी उम्र
    • हैवी वर्क के लिए उपयुक्त
    • छोटे से बड़े खेतों तक कारगर

    TAFE के लोकप्रिय मॉडल

    • TAFE 6028 – छोटे किसानों के लिए
    • Powertrac 50 – मध्यम खेती के लिए
    • TAFE 45 DI – भारी काम और ट्रांसपोर्ट के लिए

    TAFE अब हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर (जैसे EVX75) पर भी काम कर रही है, जो भविष्य की खेती को और स्मार्ट बनाएंगे।


     ट्रैक्टर बिक्री और किसानों के फैसलों में बदलाव

    आज किसान सिर्फ कीमत देखकर ट्रैक्टर नहीं खरीदते, बल्कि ये भी देखते हैं:

    • ट्रैक्टर कितनी जल्दी काम पूरा करेगा
    • किस फसल के लिए उपयुक्त है
    • सर्विस और स्पेयर पार्ट्स कितनी आसानी से मिलेंगे
    • फ्यूल एफिशिएंसी
    • रीसेल वैल्यू

    यही कारण है कि Mahindra, Sonalika और TAFE जैसे ब्रांड्स किसानों के बीच ज्यादा लोकप्रिय हो रहे हैं।


     निष्कर्ष

    भारत में ट्रैक्टर बाजार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
    महिंद्रा मजबूती और भरोसे का प्रतीक है, सोनालिका विकल्पों की विविधता का नाम है और TAFE टिकाऊ परफॉर्मेंस की पहचान।

    👉 यदि आप ट्रैक्टर खरीदने की सोच रहे हैं, तो जरूर जांचें:

    • ट्रैक्टर की कीमत
    • HP क्षमता
    • 2WD या 4WD
    • खेत और फसल के अनुसार उपयुक्तता
    • नजदीकी सर्विस सेंटर

    एक सही ट्रैक्टर न केवल आपकी मेहनत कम करता है, बल्कि आपकी आमदनी बढ़ाने में भी मदद करता है।

  • बिहार के किसानों को बड़ी राहत: भूमि रिकॉर्ड सुधार के आदेश, 75 लाख को मिलेगी फार्मर आईडी

    बिहार के किसानों को बड़ी राहत: भूमि रिकॉर्ड सुधार के आदेश, 75 लाख को मिलेगी फार्मर आईडी

    बिहार में फार्मर आईडी को लेकर बड़ी पहल: भूमि रिकॉर्ड सुधारने के निर्देश, 75 लाख किसानों को मिलेगा सीधा लाभ


    बिहार के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार द्वारा फार्मर आईडी (Farmer ID) बनाने की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है, ताकि किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि योजना, एग्री स्टैक और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी अड़चन के मिल सके। इसी कड़ी में अब राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भूमि रिकॉर्ड में आ रही गड़बड़ियों को तत्काल सुधारने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।


    क्या है फार्मर आईडी और क्यों है जरूरी?

    फार्मर आईडी एक यूनिक डिजिटल किसान पहचान है, जिसके जरिए किसान की जमीन, नाम, पता और अन्य जरूरी जानकारियां एक ही प्लेटफॉर्म पर दर्ज होती हैं। यह आईडी एग्री स्टैक अभियान का अहम हिस्सा है। सरकार का उद्देश्य है कि भविष्य में किसानों को मिलने वाली सभी योजनाओं और सब्सिडी का भुगतान सीधे फार्मर आईडी से लिंक होकर किया जाए।

    विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में पीएम किसान योजना की ₹6,000 सालाना सहायता, फसल बीमा, कृषि सब्सिडी और अन्य लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेंगे, जिनकी फार्मर आईडी और भूमि रिकॉर्ड पूरी तरह सही होंगे।


    75 लाख किसानों को फार्मर आईडी देने का लक्ष्य

    राज्य सरकार ने अगले एक महीने में 75 लाख किसानों को फार्मर आईडी जारी करने का लक्ष्य तय किया है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक लगभग 20 लाख किसानों को फार्मर आईडी मिल चुकी है, जबकि 4.5 लाख से ज्यादा किसान ई-केवाईसी प्रक्रिया में कवर किए जा चुके हैं।

    हालांकि इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आई है भूमि रिकॉर्ड की गलतियां


    भूमि रिकॉर्ड में क्या-क्या समस्याएं आ रही हैं?

    फार्मर आईडी बनवाते समय हजारों किसानों के आवेदन केवल इस वजह से अटक गए क्योंकि उनके डिजिटाइज्ड जमाबंदी और अन्य दस्तावेजों में विसंगतियां पाई गईं। आमतौर पर सामने आने वाली समस्याएं इस प्रकार हैं:

    • जमीन के रिकॉर्ड में नाम की स्पेलिंग अलग होना
    • पिता के नाम में अंतर
    • रकबे (भूमि क्षेत्रफल) की गलत एंट्री
    • खसरा या प्लॉट नंबर का मिसमैच
    • पुरानी जमाबंदी का सही तरीके से डिजिटल न होना

    इन कारणों से परिमार्जन प्लस ऑनलाइन सिस्टम के जरिए किए गए कई आवेदन रिजेक्ट हो रहे थे।


    राजस्व विभाग का सख्त निर्देश

    इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने सभी जिलाधिकारियों (DM) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि:

    “कृषि विभाग और राजस्व विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। सभी जिलों में सर्कल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि परिमार्जन प्लस के माध्यम से आए भूमि सुधार संबंधी आवेदनों का तत्काल निपटारा किया जाए।”

    सरकार का मानना है कि जब तक जमीन का रिकॉर्ड पूरी तरह सही नहीं होगा, तब तक फार्मर आईडी और एग्री स्टैक के तहत रजिस्ट्रेशन पूरा नहीं हो सकता।


    क्यों जरूरी है भूमि रिकॉर्ड का सही होना?

    फार्मर आईडी को सीधे कृषि विभाग के डेटाबेस और भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जा रहा है। यदि दोनों में जरा भी अंतर हुआ, तो:

    • फार्मर आईडी जनरेट नहीं होगी
    • पीएम किसान का भुगतान रुक सकता है
    • भविष्य की योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा

    इसी वजह से सरकार ने भूमि रिकॉर्ड सुधार को प्राथमिकता सूची में शामिल किया है।


    किसानों के लिए क्या है सरकार की रणनीति?

    कृषि विभाग द्वारा राज्यभर में पंचायत स्तर पर विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं। इन कैंपों में किसानों को:

    • फार्मर आईडी रजिस्ट्रेशन
    • ई-केवाईसी प्रक्रिया
    • भूमि रिकॉर्ड सुधार की जानकारी
    • ऑनलाइन आवेदन में मदद

    जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जिन किसानों को तकनीकी समस्या आ रही है, वे अपने नजदीकी अंचल कार्यालय या कृषि कैंप में संपर्क करें।


    भविष्य में अनिवार्य होगी फार्मर आईडी

    सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में पीएम किसान योजना समेत सभी प्रमुख योजनाओं का भुगतान केवल फार्मर आईडी के जरिए किया जाएगा। ऐसे में जिन किसानों ने अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, उनके लिए यह अंतिम अवसर जैसा है।


    निष्कर्ष

    बिहार सरकार की यह पहल किसानों के लिए डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। भूमि रिकॉर्ड सुधार और फार्मर आईडी के जरिए न केवल योजनाओं का लाभ पारदर्शी होगा, बल्कि किसानों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे। यदि आप भी बिहार के किसान हैं, तो समय रहते फार्मर आईडी रजिस्ट्रेशन और भूमि रिकॉर्ड सुधार जरूर कराएं, ताकि भविष्य में किसी भी योजना का लाभ रुक न जाए।

  • खुशखबरी: लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त आई, महिलाओं के खाते में सीधे ₹1500 ट्रांसफर

    खुशखबरी: लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त आई, महिलाओं के खाते में सीधे ₹1500 ट्रांसफर

    लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त जारी: 1.26 करोड़ महिलाओं के खातों में ₹1500 ट्रांसफर, जानें पूरी जानकारी


    मध्य प्रदेश सरकार ने साल 2026 की शुरुआत महिलाओं के लिए बड़ी सौगात के साथ की है। राज्य की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना के तहत 32वीं किस्त जारी कर दी गई है। इस किस्त के अंतर्गत प्रदेश की 1.26 करोड़ से अधिक पात्र महिलाओं के बैंक खातों में ₹1500 की राशि सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी गई है। यह राशि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार का एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदापुरम जिले के माखन नगर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान सिंगल क्लिक के जरिए यह राशि ट्रांसफर की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश की हर महिला को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।


    32वीं किस्त में कितनी राशि मिली?

    लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त में इस बार प्रत्येक लाभार्थी महिला को
    👉 ₹1500 प्रति माह
    की सहायता राशि दी गई है। यह पैसा सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजा गया है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और किसी प्रकार की बिचौलिया व्यवस्था नहीं होती।


    खाते में पैसा आने में कितना समय लग सकता है?

    सरकार के अनुसार, किस्त जारी होने के बाद 2 से 3 कार्य दिवस के भीतर राशि बैंक खाते में दिखाई दे सकती है।
    हालांकि, बैंक सर्वर या तकनीकी कारणों से कुछ महिलाओं के खातों में पैसा आने में थोड़ा अधिक समय भी लग सकता है। ऐसे में लाभार्थियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।


    कैसे चेक करें लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त का स्टेटस?

    यदि आप यह जानना चाहती हैं कि आपके खाते में 32वीं किस्त का पैसा आया है या नहीं, तो नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करें:

    1. सबसे पहले लाड़ली बहना योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
    2. होम पेज पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” विकल्प पर क्लिक करें
    3. अपना आवेदन नंबर या समग्र आईडी दर्ज करें
    4. कैप्चा कोड भरकर ओटीपी प्राप्त करें
    5. ओटीपी को वेरिफाई करें
    6. सर्च बटन पर क्लिक करें
    7. स्क्रीन पर आपकी भुगतान स्थिति दिखाई दे जाएगी

    यहां से आप आसानी से जांच सकती हैं कि ₹1500 की 32वीं किस्त आपके खाते में ट्रांसफर हुई है या नहीं।


    इन महिलाओं को 32वीं किस्त का लाभ नहीं मिला

    सरकारी जानकारी के अनुसार, सभी लाभार्थियों को इस बार योजना का पैसा नहीं मिल पाया है। इसके पीछे कई कारण सामने आए हैं:

    • आधार और बैंक खाते की ई-केवाईसी पूरी नहीं होना
    • बैंक खाता आधार से लिंक न होना
    • डीबीटी से जुड़ी तकनीकी समस्या
    • बैंक खाता बंद या निष्क्रिय होना
    • योजना की पात्रता शर्तों के अनुसार अपात्र घोषित होना
    • 60 वर्ष से अधिक आयु पूरी होने पर नाम सूची से हटाया जाना

    ऐसी महिलाओं को सलाह दी गई है कि वे जल्द से जल्द अपनी ई-केवाईसी पूरी करें और बैंक से जुड़ी त्रुटियों को ठीक करवाएं, ताकि अगली किस्तों का लाभ मिल सके।


    लाड़ली बहना योजना में नए नाम कब जुड़ेंगे?

    फिलहाल लाड़ली बहना योजना में नए आवेदनों की प्रक्रिया बंद है।
    राज्य सरकार की ओर से यह संकेत दिया गया है कि भविष्य में नए आवेदन शुरू किए जा सकते हैं, लेकिन इसकी कोई निश्चित तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।

    जब भी नया आवेदन चरण शुरू होगा, तब महिलाओं को निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:

    • आधार कार्ड
    • बैंक खाता
    • समग्र आईडी

    आवेदन के बाद सत्यापन प्रक्रिया पूरी की जाएगी और पात्र महिलाओं को आगामी किस्तों का लाभ मिलेगा।


    32वीं किस्त नहीं आई तो कहां करें शिकायत?

    यदि सभी दस्तावेज सही होने के बावजूद आपके खाते में 32वीं किस्त की राशि नहीं आई है, तो आप नीचे दिए गए माध्यमों से शिकायत दर्ज करा सकती हैं:

    📞 लाड़ली बहना योजना हेल्पलाइन नंबर:
    0755-2700800

    📝 सीएम हेल्पलाइन पोर्टल (राज्य सरकार की जनसुनवाई सेवा)

    📧 ई-मेल:

    शिकायत करते समय आवेदन नंबर, समग्र आईडी और बैंक विवरण अपने पास जरूर रखें।


    लाड़ली बहना योजना का उद्देश्य

    लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की महिलाओं को:

    • नियमित मासिक आर्थिक सहायता प्रदान करना
    • घरेलू खर्चों में सहयोग देना
    • महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना
    • समाज में महिलाओं की स्थिति मजबूत करना

    निष्कर्ष

    लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त से एक बार फिर यह साबित होता है कि मध्य प्रदेश सरकार महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। यदि आपने अभी तक अपने खाते की स्थिति नहीं जांची है, तो तुरंत स्टेटस चेक करें और किसी भी समस्या की स्थिति में समय रहते शिकायत दर्ज कराएं।

  • 2025 में भारतीय ट्रैक्टर उद्योग ने रचा इतिहास, घरेलू बिक्री 10 लाख यूनिट के पार

    2025 में भारतीय ट्रैक्टर उद्योग ने रचा इतिहास, घरेलू बिक्री 10 लाख यूनिट के पार

     2025 बना भारतीय ट्रैक्टर उद्योग के लिए मील का पत्थर, घरेलू बिक्री पहली बार 10 लाख यूनिट के पार

    2025 में भारतीय ट्रैक्टर उद्योग ने रचा इतिहास, घरेलू बिक्री 10 लाख यूनिट के पार


    भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए साल 2025 ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा हुआ रहा। इस वर्ष भारतीय ट्रैक्टर उद्योग ने ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया, जो अब तक कभी देखने को नहीं मिला। पहली बार किसी एक कैलेंडर वर्ष में घरेलू ट्रैक्टर बिक्री 10 लाख यूनिट से ज्यादा दर्ज की गई, वहीं ट्रैक्टर एक्सपोर्ट भी 1 लाख यूनिट का आंकड़ा पार करने में सफल रहा।

    यह उपलब्धि न केवल ट्रैक्टर इंडस्ट्री की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि यह भी साफ करती है कि किसानों की क्रय शक्ति, ग्रामीण आय और कृषि गतिविधियों में लगातार सुधार हो रहा है।


    घरेलू ट्रैक्टर बिक्री में जबरदस्त उछाल, 20% सालाना ग्रोथ

    ट्रैक्टर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (TMA) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में घरेलू ट्रैक्टर बिक्री 10.90 लाख यूनिट तक पहुंच गई। इसके मुकाबले 2024 में यह आंकड़ा 9.10 लाख यूनिट रहा था। यानी साल-दर-साल आधार पर करीब 20 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

    यह ग्रोथ दर्शाती है कि भारतीय ट्रैक्टर बाजार अब केवल बड़े किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे और मध्यम किसान भी तेजी से ट्रैक्टर खरीद की ओर बढ़ रहे हैं।


    एक्सपोर्ट फ्रंट पर भी भारत की मजबूत पकड़

    घरेलू बाजार के साथ-साथ ट्रैक्टर निर्यात (Tractor Export) के मोर्चे पर भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया।
    2024 में जहां एक्सपोर्ट आंकड़ा 97,745 यूनिट था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 1,05,006 यूनिट हो गया। यह लगभग 7 प्रतिशत की वार्षिक बढ़ोतरी को दिखाता है।

    खास बात यह है कि अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशियाई देशों में भारतीय ट्रैक्टरों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे भारत की ग्लोबल ट्रैक्टर हब के रूप में पहचान और मजबूत हुई है।


    दिसंबर 2025 में ट्रैक्टर बिक्री ने पकड़ी रफ्तार

    साल के अंतिम महीने दिसंबर 2025 में ट्रैक्टर बाजार में खासा उत्साह देखने को मिला।
    इस दौरान:

    • घरेलू ट्रैक्टर बिक्री में लगभग 35% की बढ़ोतरी दर्ज हुई
    • दिसंबर 2025 में बिक्री 69,890 यूनिट तक पहुंची
    • जबकि दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 50,993 यूनिट था

    वहीं एक्सपोर्ट भी दिसंबर में 22% की सालाना बढ़त के साथ 9,815 यूनिट तक पहुंच गया। यह साफ संकेत देता है कि त्योहारी सीजन, रबी बुवाई और बेहतर नकदी प्रवाह ने ट्रैक्टर डिमांड को मजबूती दी।


    2024 बनाम 2025: ट्रैक्टर इंडस्ट्री का प्रदर्शन

    यदि 2024 और 2025 की तुलना की जाए तो तस्वीर बेहद साफ नजर आती है:

    • घरेलू बिक्री में लगभग 20% की ग्रोथ
    • ट्रैक्टर एक्सपोर्ट में करीब 7% की बढ़ोतरी
    • दिसंबर महीने में घरेलू बिक्री में 35% की छलांग
    • दिसंबर एक्सपोर्ट में 22% की मजबूती

    ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय ट्रैक्टर उद्योग लगातार ग्रोथ ट्रैक पर बना हुआ है।


    ट्रैक्टर बिक्री बढ़ने के प्रमुख कारण

    इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार 2025 में ट्रैक्टर बिक्री में आई इस तेजी के पीछे कई अहम वजहें रहीं:

    ✔ अनुकूल मौसम और अच्छी फसल

    बेहतर मानसून और मजबूत खरीफ उत्पादन से किसानों की आय में सुधार हुआ, जिससे ट्रैक्टर खरीदने की क्षमता बढ़ी।

    ✔ ग्रामीण कैश फ्लो में सुधार

    ग्रामीण इलाकों में नकदी की उपलब्धता बेहतर होने से कृषि मशीनरी की मांग को बल मिला।

    ✔ सरकारी नीतियां और सब्सिडी

    कम GST दर, राज्य सरकारों की सब्सिडी योजनाएं और आसान ट्रैक्टर लोन विकल्पों ने खरीद को आसान बनाया।

    ✔ फाइनेंस और रिटेल सपोर्ट

    बैंकों और NBFCs की ओर से आसान फाइनेंस स्कीम्स ने छोटे किसानों को भी ट्रैक्टर खरीदने का मौका दिया।


    ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला मजबूत सहारा

    ऑटो और कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैक्टर बिक्री में तेजी सीधे-सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है।
    खरीफ सीजन की अच्छी पैदावार, जलाशयों में पर्याप्त जल स्तर और रबी बुवाई में तेजी ने कृषि गतिविधियों को गति दी, जिसका असर ट्रैक्टर मांग पर साफ दिखा।


    GST और नीतिगत फैसलों का सकारात्मक प्रभाव

    रेटिंग एजेंसियों के अनुसार, 2025 में ट्रैक्टर वॉल्यूम ग्रोथ लगभग 20 प्रतिशत रही, जो यह दर्शाती है कि सरकारी नीतियां और टैक्स स्ट्रक्चर उद्योग के लिए सहायक साबित हुए।


    वहीं निर्यात में बढ़ोतरी से यह भी साफ है कि मेड-इन-इंडिया ट्रैक्टर अब वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान बना चुके हैं।


    2026 के लिए भी पॉजिटिव आउटलुक

    कुल मिलाकर, 2025 भारतीय ट्रैक्टर उद्योग के लिए रिकॉर्ड-ब्रेकिंग साल रहा। मजबूत डिमांड, बेहतर ग्रामीण आय और ग्लोबल एक्सपोर्ट ग्रोथ को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि 2026 में भी ट्रैक्टर बिक्री में तेजी बनी रहेगी

    यह ट्रेंड न सिर्फ ट्रैक्टर मैन्युफैक्चरर्स के लिए अच्छा संकेत है, बल्कि भारतीय कृषि और ग्रामीण विकास के लिए भी बेहद सकारात्मक माना जा रहा है।

  • 52 हजार किसानों को मिलेगा सोलर पंप, 90% सब्सिडी के साथ बिजली बिल से छुटकारा | कुसुम योजना 2026

    52 हजार किसानों को मिलेगा सोलर पंप, 90% सब्सिडी के साथ बिजली बिल से छुटकारा | कुसुम योजना 2026

     52 हजार किसानों को मिलेगा सोलर पंप का तोहफा, 90% तक सब्सिडी से बदलेगी खेती की तस्वीर


    मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा से होगी सिंचाई, बिजली बिल से मिलेगी स्थायी राहतमध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। राज्य में 52 हजार किसानों के खेतों में सोलर पंप लगाए जाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत किसानों को 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी, जिससे सिंचाई की लागत बेहद कम हो जाएगी और बिजली पर निर्भरता लगभग खत्म हो जाएगी।

    यह योजना प्रधानमंत्री कुसुम-बी योजना के तहत लागू की जा रही है, जिसे मध्यप्रदेश में “प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना” नाम दिया गया है। सरकार का उद्देश्य किसानों को सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि ऊर्जादाता बनाना है।


    क्या है सोलर पंप योजना और क्यों है यह खास?

    सोलर पंप योजना के तहत किसानों को 1 HP से लेकर 7.5 HP तक के सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे। ये पंप पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित होंगे, जिससे:

    • बिजली कटौती का झंझट खत्म होगा
    • डीजल और बिजली बिल पर खर्च शून्य होगा
    • सिंचाई 24×7 संभव हो सकेगी

    सबसे बड़ी बात यह है कि किसान अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर अतिरिक्त आय भी कमा सकेंगे।


    योजना की वर्तमान प्रगति: तेजी से आगे बढ़ रहा काम

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में यह योजना तेज़ी से ज़मीन पर उतर रही है। अब तक:

    • 34,600 से अधिक लेटर ऑफ अवार्ड (LOA) जारी किए जा चुके हैं
    • लगभग 33,000 किसानों को कार्यादेश दिए जा चुके हैं
    • हजारों खेतों में इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है

    सरकार का लक्ष्य है कि तय समयसीमा में सभी चयनित किसानों के खेतों में सोलर पंप स्थापित कर दिए जाएं।


    सोलर पंप पर खर्च कितना और सब्सिडी कैसे मिलेगी?

    इस योजना की सबसे बड़ी खासियत है इसकी सब्सिडी संरचना, जो किसानों के लिए बेहद फायदेमंद है।

    सब्सिडी का पूरा गणित

    • 10% राशि किसान द्वारा वहन की जाएगी
    • 60% राशि कृषक ऋण के रूप में ली जाएगी, जिसका ब्याज राज्य सरकार भरेगी
    • 30% अनुदान केंद्र सरकार द्वारा दिया जाएगा

    👉 यानी किसान को कुल लागत का बहुत ही छोटा हिस्सा देना होगा।


    अलग-अलग HP के सोलर पंप पर किसान अंशदान (लगभग)

    • 1 HP सोलर पंप: ₹12,000 से ₹14,000
    • 3 HP सोलर पंप: ₹20,000 से ₹43,000
    • 5 HP सोलर पंप: ₹30,000 से ₹57,000
    • 7.5 HP सोलर पंप: ₹41,000 से ₹78,000

    (राशि पंप के प्रकार और कंट्रोलर के अनुसार अलग-अलग हो सकती है)


    कौन-कौन किसान ले सकता है योजना का लाभ? (पात्रता)

    इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी:

    • किसान मध्यप्रदेश का स्थायी निवासी हो
    • न्यूनतम 3 हेक्टेयर कृषि भूमि हो
    • पंप क्षमता 3, 5 या 7.5 HP हो
    • किसान के पास अस्थायी बिजली कनेक्शन हो
    • खेत में पहले से कोई चालू विद्युत पंप न हो

    गलत जानकारी देने पर किसान को योजना से बाहर किया जा सकता है।


    आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

    सोलर पंप योजना में आवेदन करते समय निम्न दस्तावेज अनिवार्य हैं:

    • अस्थायी विद्युत कनेक्शन की रसीद
    • आधार कार्ड
    • जमीन के स्वामित्व से जुड़े कागजात
    • बैंक पासबुक
    • मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो

    सोलर पंप के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

    जो किसान इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, वे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    आवेदन प्रक्रिया

    1. आधिकारिक वेबसाइट cmsolarpump.mp.gov.in पर जाएं
    2. किसान विवरण और दस्तावेज अपलोड करें
    3. आवेदन जमा करने के बाद विभाग द्वारा खेत का निरीक्षण किया जाएगा
    4. स्वीकृति मिलने पर सोलर पंप लगाया जाएगा
    5. सब्सिडी की राशि DBT के माध्यम से सीधे खाते में भेजी जाएगी

    सोलर पंप योजना के बड़े फायदे

    ✔ बिजली बिल पूरी तरह खत्म
    ✔ डीजल खर्च से मुक्ति
    ✔ सिंचाई में आत्मनिर्भरता
    ✔ अतिरिक्त बिजली से कमाई का मौका
    5 साल तक मुफ्त रखरखाव
    ✔ पर्यावरण के अनुकूल खेती

    यह योजना न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा मिशन को भी मजबूती देगी।


    अधिक जानकारी कहां से लें?

    किसान योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए:

    • मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड की वेबसाइट देखें
    • या अपने नजदीकी बिजली विभाग / कृषि कार्यालय से संपर्क करें

    निष्कर्ष

    प्रधानमंत्री कुसुम-बी योजना के तहत लागू की गई यह सोलर पंप योजना मध्यप्रदेश के किसानों के लिए खेती में क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकती है। कम लागत, स्थायी ऊर्जा और अतिरिक्त आय का यह मॉडल आने वाले वर्षों में किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगा।

  • Sonalika Tractors की 30 साल की सफलता: होशियारपुर से 150 देशों तक किसान-प्रथम भारतीय ब्रांड की कहानी

    Sonalika Tractors की 30 साल की सफलता: होशियारपुर से 150 देशों तक किसान-प्रथम भारतीय ब्रांड की कहानी

    होशियारपुर से वैश्विक मंच तक: सोनालीका ट्रैक्टर्स की 30 साल की प्रेरक यात्रा


    भारतीय कृषि यंत्रीकरण की कहानी में Sonalika Tractors आज एक ऐसा नाम बन चुका है, जिसने किसान-प्रथम सोच, स्वदेशी इंजीनियरिंग और वैश्विक नेतृत्व के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। पंजाब के छोटे से शहर होशियारपुर से शुरू हुआ यह ब्रांड आज 1.1 अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाली अंतरराष्ट्रीय ट्रैक्टर कंपनी बन चुका है। साल 2026 में सोनालीका किसानों के साथ साझेदारी के 30 वर्ष पूरे कर रही है, जो न सिर्फ एक व्यावसायिक उपलब्धि है बल्कि भारतीय कृषि की ताकत का भी प्रतीक है।


    एक छोटे शहर से बड़े सपनों तक का सफर

    सोनालीका की नींव किसी मल्टीनेशनल बोर्डरूम में नहीं, बल्कि भारतीय किसानों की असली जरूरतों को समझते हुए रखी गई थी। इसके संस्थापक श्री एल. डी. मित्तल ने एलआईसी से सेवानिवृत्ति के बाद आराम करने के बजाय भारतीय कृषि को मजबूत बनाने का सपना देखा। उनके साथ उनके दोनों बेटे डॉ. ए. एस. मित्तल और डॉ. दीपक मित्तल जुड़े, जिन्होंने आधुनिक सोच और तकनीकी दृष्टि से सोनालीका को एक नई ऊंचाई दी।

    जहां उस समय ज्यादातर कंपनियां केवल शहरी और बड़े खेतों पर ध्यान दे रही थीं, वहीं सोनालीका ने छोटे और मध्यम किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता दी। यही वजह रही कि कंपनी की पहचान धीरे-धीरे किसानों की अपनी ब्रांड के रूप में बनने लगी।


    किसान-प्रथम सोच से बना मजबूत ब्रांड

    सोनालीका का मूल मंत्र हमेशा एक ही रहा – “किसान को ताकत, भरोसा और सही तकनीक मिलनी चाहिए।” शुरुआत में कंपनी ने कृषि उपकरणों का निर्माण किया, जहां उसके थ्रेशर और अन्य इम्प्लीमेंट्स ने किसानों का विश्वास जीता। इसके बाद जब किसानों ने अधिक शक्तिशाली और टिकाऊ ट्रैक्टरों की मांग की, तब सोनालीका ने ट्रैक्टर सेगमेंट में कदम रखा।

    साल 1996 में लॉन्च हुए पहले सोनालीका ट्रैक्टर से ही कंपनी ने एक अलग पहचान बना ली। उस दौर में जब बाजार में एक जैसे डिजाइन और फीचर वाले ट्रैक्टर उपलब्ध थे, सोनालीका ने भारत की अलग-अलग मिट्टी, फसल और जलवायु के अनुसार ट्रैक्टर डिजाइन करना शुरू किया। आज भी यह बात गर्व से कही जाती है कि 30 साल पुराना पहला सोनालीका ट्रैक्टर आज भी पहले क्रैंक में स्टार्ट हो जाता है, जो ब्रांड की मजबूती और गुणवत्ता का प्रमाण है।


    स्वदेशी इंजीनियरिंग और वर्टिकल इंटीग्रेशन की ताकत

    भारतीय किसानों की बदलती जरूरतों को देखते हुए सोनालीका ने 2011 से वर्टिकल इंटीग्रेशन की रणनीति अपनाई। इसका मतलब था कि अब कंपनी अपने ट्रैक्टरों के प्रमुख पार्ट्स – इंजन, गियरबॉक्स, ट्रांसमिशन और अन्य कंपोनेंट्स – खुद बनाने लगी। इससे गुणवत्ता पर बेहतर नियंत्रण मिला और लागत भी कम हुई।

    इस रणनीति की बदौलत सोनालीका ने हाई हॉर्स पावर ट्रैक्टर, बेहतर ईंधन दक्षता और ज्यादा टिकाऊ मशीनें बाजार में उतारीं। यहां तक कि एंट्री-लेवल मॉडल्स में भी पावर स्टीयरिंग, ऑयल-इमर्स्ड ब्रेक और मल्टी-स्पीड ट्रांसमिशन जैसे प्रीमियम फीचर शामिल किए गए।

    कंपनी ने क्षेत्र-विशेष ट्रैक्टर भी विकसित किए, जैसे दक्षिण भारत के लिए महाबली, महाराष्ट्र के लिए छत्रपति और राजस्थान के लिए महाराजा सीरीज। इसके साथ-साथ 70 से ज्यादा कृषि उपकरण और इम्प्लीमेंट्स ने किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई।


    भारत से दुनिया तक: निर्यात में नंबर 1

    सोनालीका ने सिर्फ घरेलू बाजार में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का नाम रोशन किया है। 2004 में पहला ट्रैक्टर निर्यात करने के बाद, कंपनी ने लगातार वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत की। 2011 में सोनालीका यूरोप को ट्रैक्टर निर्यात करने वाली पहली भारतीय ब्रांड बनी, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी।

    आज सोनालीका के ट्रैक्टर एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और यूरोप सहित 150 से अधिक देशों में इस्तेमाल हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2019 से भारत से ट्रैक्टर निर्यात में सोनालीका नंबर 1 ब्रांड बनी हुई है। मौजूदा समय में भारत से निर्यात होने वाले हर तीसरे ट्रैक्टर का निर्माण सोनालीका के होशियारपुर प्लांट में होता है। कंपनी का वैश्विक निर्यात बाजार में करीब 30% शेयर है, जो इसकी मजबूत अंतरराष्ट्रीय स्थिति को दिखाता है।


    पारदर्शिता, डिजिटल पहल और भविष्य की तैयारी

    सोनालीका ने सिर्फ उत्पादों में ही नहीं, बल्कि पारदर्शिता और ग्राहक अनुभव में भी नई मिसाल कायम की है। 2022 में ट्रैक्टर की कीमतें और 2025 में सर्विस कॉस्ट अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक कर, कंपनी ने किसानों को खुली और ईमानदार जानकारी देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया।

    भविष्य की बात करें तो सोनालीका अपनी उत्पादन क्षमता को 3 लाख ट्रैक्टर प्रति वर्ष तक बढ़ाने की तैयारी में है। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म, कनेक्टेड डायग्नोस्टिक्स और पर्सनलाइज्ड रिटेल एक्सपीरियंस के जरिए कंपनी किसानों के साथ अपने रिश्ते को और मजबूत कर रही है।


    अगले 30 सालों का विजन

    तीन दशकों की इस सफल यात्रा के बाद भी सोनालीका का फोकस वही है – किसान की आय बढ़ाना, लागत कम करना और तकनीक से खेती को आसान बनाना। मजबूत नेतृत्व, स्वदेशी तकनीक और वैश्विक सोच के साथ सोनालीका आने वाले वर्षों में भी भारतीय कृषि को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प रखती है।

    होशियारपुर से शुरू हुई यह कहानी आज पूरी दुनिया में भारतीय इंजीनियरिंग और किसान-प्रथम दृष्टिकोण की पहचान बन चुकी है। सोनालीका का यह सफर न सिर्फ एक ब्रांड की सफलता है, बल्कि भारत के किसानों की मेहनत और भरोसे की जीत भी है।

  • मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना 2026: अब 5 लाख का मुआवजा सीधे खाते में, ऑनलाइन आवेदन शुरू

    मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना 2026: अब 5 लाख का मुआवजा सीधे खाते में, ऑनलाइन आवेदन शुरू

    मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना हुई पूरी तरह डिजिटल, अब किसानों को मिलेगा तेज और पारदर्शी मुआवजा


    उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में एक और बड़ा डिजिटल कदम उठाया है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना को अब पूरी तरह ऑनलाइन किया जा रहा है, जिससे दुर्घटना में प्रभावित किसान परिवारों को मुआवजा सीधे बैंक खाते में मिलेगा। इस योजना के डिजिटलीकरण की अंतिम समय-सीमा फरवरी 2026 तय की गई है। इसके बाद किसानों को सहायता पाने के लिए तहसील, कलेक्ट्रेट या किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

    राज्य सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को त्वरित, पारदर्शी और भरोसेमंद वित्तीय सहायता मिले, ताकि किसी भी अप्रत्याशित दुर्घटना के बाद परिवार को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।


    डिजिटल पोर्टल से होगा आवेदन से लेकर भुगतान तक का पूरा प्रोसेस

    राजस्व परिषद और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) मिलकर इस योजना के लिए एक आधुनिक वेब पोर्टल विकसित कर रहे हैं। इस पोर्टल के जरिए किसान या उनके परिवारजन ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज अपलोड, सत्यापन, स्वीकृति और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से राशि प्राप्त कर सकेंगे।

    पहले जहां कई प्रक्रियाएं ऑफलाइन होती थीं और फाइलें अलग-अलग दफ्तरों में घूमती थीं, वहीं अब पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी। इससे भ्रष्टाचार, देरी और फर्जीवाड़े की गुंजाइश भी काफी कम हो जाएगी। किसान अपने आवेदन की स्थिति को रीयल टाइम ट्रैक कर सकेंगे, जिससे अनिश्चितता खत्म होगी।


    अब तक 29,394 किसानों को मिल चुका है योजना का लाभ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 2019 में शुरू की गई इस योजना के तहत दिसंबर 2025 तक 29,394 किसानों के आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं। मंडलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो:

    • लखनऊ मंडल – 3,569 स्वीकृत आवेदन
    • गोरखपुर मंडल – 3,143
    • अयोध्या मंडल – 2,491
    • कानपुर मंडल – 2,436

    इन आंकड़ों से साफ है कि योजना प्रदेश भर में किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है और जरूरतमंद परिवारों तक मदद पहुंच रही है।


    दुर्घटना पर 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता

    इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसी भी प्रकार की दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में किसान या उसके परिवार को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है, जिससे बीच में कोई कटौती या देरी नहीं होती।

    डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद यह मदद और भी तेजी से मिलेगी, जिससे संकट के समय परिवार को तुरंत आर्थिक संबल मिल सकेगा।


    किसानों के लिए क्यों जरूरी है यह डिजिटल बदलाव?

    ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसान अक्सर दस्तावेजी प्रक्रियाओं और सरकारी दफ्तरों की वजह से योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते। नई डिजिटल प्रणाली से:

    • घर बैठे आवेदन संभव होगा
    • दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड किए जा सकेंगे
    • आवेदन की स्थिति मोबाइल या कंप्यूटर पर देखी जा सकेगी
    • मुआवजा सीधे खाते में पहुंचेगा

    यह सब मिलकर किसान कल्याण योजना को ज्यादा प्रभावी और भरोसेमंद बनाएगा।


    डिजिटल इंडिया के लक्ष्य की ओर एक मजबूत कदम

    राजस्व परिषद की यह पहल सरकार के डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस विजन को और मजबूती देती है। इससे न केवल प्रशासनिक खर्च कम होगा, बल्कि योजना का लाभ समय पर सही व्यक्ति तक पहुंचेगा

    प्रदेश सरकार का साफ संदेश है कि कोई भी पात्र किसान इस सुरक्षा कवच से वंचित न रहे। दुर्घटना के समय मिलने वाली यह सहायता किसानों के परिवारों के लिए नई उम्मीद और भरोसा बनकर सामने आएगी।


    निष्कर्ष

    मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का डिजिटलीकरण उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव साबित होगा। फरवरी 2026 के बाद यह योजना पूरी तरह ऑनलाइन होकर तेज, पारदर्शी और किसान-हितैषी बन जाएगी। 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता, डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर और ऑनलाइन ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं इसे देश की सबसे प्रभावी किसान बीमा व सहायता योजनाओं में शामिल करती हैं।

    यह कदम न सिर्फ किसानों को आर्थिक सुरक्षा देगा, बल्कि सरकारी योजनाओं पर उनका विश्वास भी मजबूत करेगा।

  • कृषि यंत्रीकरण योजना 2026: 154 गन्ना किसानों को 60% सब्सिडी पर आधुनिक कृषि यंत्र, जानें पूरी प्रक्रिया

    कृषि यंत्रीकरण योजना 2026: 154 गन्ना किसानों को 60% सब्सिडी पर आधुनिक कृषि यंत्र, जानें पूरी प्रक्रिया

    कृषि यंत्रीकरण योजना 2026: बिहार के 154 गन्ना किसानों को मिलेगी 60% तक सब्सिडी, खेती बनेगी हाई-टेक


    बिहार सरकार ने गन्ना किसानों को बड़ी राहत देते हुए कृषि यंत्रीकरण योजना 2025-26 के तहत आधुनिक कृषि यंत्रों पर 50 से 60 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य किसानों की खेती की लागत घटाना, उत्पादकता बढ़ाना और आधुनिक तकनीक को गांवों तक पहुंचाना है। इस बार सरकार ने 154 किसानों का चयन किया है, जिन्हें अत्याधुनिक मशीनों पर सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

    यह योजना खास तौर पर उन किसानों के लिए फायदेमंद है जो गन्ना जैसी लंबी अवधि वाली फसल उगाते हैं और जहां मजदूरों की कमी व खेती की लागत बड़ी चुनौती बन चुकी है।


    154 किसानों का चयन, मिलेगा सीधा लाभ

    वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तीसरी रैंडमाइजेशन प्रक्रिया के तहत राज्य भर से 154 किसानों को चुना गया है। इन किसानों को कुल 9 तरह के आधुनिक कृषि यंत्रों पर सरकारी अनुदान दिया जाएगा।

    सरकार का मानना है कि इन मशीनों की मदद से किसान खेतों की तैयारी से लेकर फसल प्रबंधन तक सभी काम कम समय और कम खर्च में कर पाएंगे, जिससे उनकी आय में सीधा इजाफा होगा।


    क्यों जरूरी है कृषि यंत्रीकरण?

    आज की खेती सिर्फ बैल और हल तक सीमित नहीं रह गई है।

    • मजदूरों की कमी
    • बढ़ती मजदूरी
    • समय की कमी
    • फसल लागत में लगातार वृद्धि

    इन सभी कारणों से कृषि यंत्रीकरण (Agricultural Mechanization) अब एक जरूरत बन चुका है। खासकर गन्ना खेती में जुताई, समतलीकरण, खरपतवार नियंत्रण और रैटून मैनेजमेंट जैसे काम मशीनों से करने पर लागत कम होती है और उत्पादन बेहतर मिलता है।

    इसी जरूरत को देखते हुए बिहार सरकार ने गन्ना कृषि यंत्रीकरण योजना को और प्रभावी बनाया है।


    इन आधुनिक कृषि यंत्रों पर मिलेगी सब्सिडी

    इस योजना के तहत चयनित किसानों को निम्नलिखित कृषि मशीनों पर 50 से 60 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी:

    • डिस्क हैरो
    • पावर वीडर
    • पावर टीलर
    • लैंड लेवलर
    • लेजर लेवलर
    • रैटून मैनेजमेंट डिवाइस
    • रोटावेटर
    • मिनी ट्रैक्टर (4WD)
    • ट्रैक्टर माउंटेड हाइड्रॉलिक स्प्रेयर
    इन मशीनों से

    जुताई, समतलीकरण, खरपतवार नियंत्रण, कीटनाशक छिड़काव और गन्ने की फसल का प्रबंधन कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा। इससे किसानों को बेहतर पैदावार और कम खर्च में खेती करने का मौका मिलेगा।


    सब्सिडी कैसे मिलेगी? जानिए पूरी प्रक्रिया

    सरकार ने इस योजना को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है ताकि सही किसान को सही समय पर लाभ मिल सके।

    स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया:

    1. चयनित किसानों को स्वीकृति पत्र पहले ही जारी कर दिए गए हैं।
    2. किसान केवल SuMech पोर्टल पर सूचीबद्ध अधिकृत विक्रेताओं से ही मशीन खरीद सकते हैं।
    3. सबसे पहले किसान को पूरी मशीन की कीमत खुद चुकानी होगी
    4. मशीन खरीदने के बाद विभाग द्वारा भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाएगा।
    5. सत्यापन पूरा होने के बाद सरकार द्वारा तय सब्सिडी राशि सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से किसान के बैंक खाते में भेज दी जाएगी।
    इस व्यवस्था से

    भ्रष्टाचार रुकेगा,

    भुगतान में देरी नहीं होगी,
    और किसान को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।


    स्वीकृति पत्र की अंतिम तारीख

    गन्ना उद्योग विभाग ने स्पष्ट किया है कि जारी किए गए स्वीकृति पत्र केवल 18 जनवरी 2026 तक ही मान्य रहेंगे।

    यदि कोई किसान इस तारीख तक मशीन की खरीद और जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं करता है, तो वह योजना के लाभ से वंचित हो सकता है। इसलिए चयनित किसानों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते सभी औपचारिकताएं पूरी करें।


    किसानों के लिए हेल्पलाइन सुविधा

    अगर किसी किसान को योजना, मशीन, पोर्टल या भुगतान से जुड़ी कोई समस्या है तो वह सीधे हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकता है:

    📞 0612-2215788
    समय: सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक (कार्यदिवसों में)

    यह सुविधा किसानों को तकनीकी सहायता और सही मार्गदर्शन देने के लिए शुरू की गई है।


    गन्ना किसानों के लिए क्यों खास है यह योजना?

    बिहार में हजारों किसान गन्ना उत्पादन पर निर्भर हैं। लेकिन गन्ने की खेती में

    • ज्यादा मेहनत
    • ज्यादा मजदूरी
    • लंबा समय
      लगता है।
    कृषि यंत्रीकरण योजना के जरिए किसान अब

    मशीनों से खेती,

    कम लागत,

    बेहतर उत्पादन

    और ज्यादा मुनाफा कमा सकेंगे।

    कृषि यंत्रीकरण योजना 2026 बिहार के गन्ना किसानों के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। 60% तक सब्सिडी, आधुनिक कृषि यंत्र, डीबीटी के जरिए सीधा भुगतान और सरकारी निगरानी इस योजना को भरोसेमंद और प्रभावी बनाते हैं।

    अगर किसान समय रहते इसका लाभ उठाते हैं, तो यह योजना उनकी खेती को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बना सकती है। 

  • धान किसानों को बड़ी राहत: अब 24 घंटे में मिलेगा भुगतान | MSP धान खरीद 2026 अपडेट

    धान किसानों को बड़ी राहत: अब 24 घंटे में मिलेगा भुगतान | MSP धान खरीद 2026 अपडेट

    कृषि खुशखबरी: धान किसानों को अब 24 घंटे में मिलेगा भुगतान, सरकार ने दिए सख्त निर्देश


    धान किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। बिहार सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, तेज और किसान-हितैषी बनाने का बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में धान बेचने वाले किसानों को अपनी फसल का पैसा 24 घंटे के भीतर सीधे बैंक खाते में मिलने की व्यवस्था की जा रही है। इस निर्णय से किसानों को लंबे समय से चली आ रही भुगतान देरी की समस्या से निजात मिलेगी।

    धान भुगतान व्यवस्था में बड़ा बदलाव

    राज्य सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि धान खरीद के बाद भुगतान में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन किसानों का भुगतान किसी कारणवश अब तक लंबित है, उनका भी शीघ्र निपटारा किया जाएगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों की मेहनत की कमाई समय पर उन्हें मिले और उन्हें आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

    खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सख्ती

    खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए हैं कि धान खरीद और भुगतान प्रक्रिया में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भुगतान में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
    सरकार का मानना है कि समय पर भुगतान से किसानों का भरोसा बढ़ेगा और सरकारी खरीद प्रणाली और मजबूत होगी।

    FIFO प्रणाली से होगा लंबित भुगतानों का निपटारा

    धान किसानों के लंबित भुगतानों को निपटाने के लिए FIFO (First In, First Out) प्रणाली अपनाई जाएगी। इसका मतलब यह है कि जिन किसानों ने पहले धान बेचा है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर भुगतान किया जाएगा। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा।

    बीएसएफसी मुख्यालय में हुई अहम समीक्षा बैठक

    हाल ही में बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड (BSFC) के मुख्यालय में धान खरीद और भुगतान व्यवस्था को लेकर एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में धान खरीद केंद्रों की स्थिति, भुगतान प्रक्रिया, मिलों की भूमिका और परिवहन व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
    सचिव ने स्पष्ट किया कि किसानों का पैसा समय पर उनके खातों में पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पहले दे चुके हैं निर्देश

    धान खरीद को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही अधिकारियों को सख्त निर्देश दे चुके हैं। उन्होंने कहा है कि धान खरीद प्रक्रिया पूरी तरह सुचारू और निर्बाध होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि धान खरीद में लगे कर्मचारियों को सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कितना है?

    सरकार द्वारा तय किए गए MSP के अनुसार:

    • सामान्य ग्रेड धान: ₹2,369 प्रति क्विंटल
    • ग्रेड A धान: ₹2,389 प्रति क्विंटल

    धान खरीद की अवधि 1 नवंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक निर्धारित की गई है। राज्य में धान खरीद कार्य को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है, ताकि सभी जिलों के किसान आसानी से इसका लाभ उठा सकें।

    बिहार में धान खरीद का लक्ष्य

    वर्ष 2025-26 के लिए बिहार सरकार ने धान खरीद का कुल लक्ष्य 36.85 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया है। राज्य के सभी 38 जिलों में धान खरीद प्रक्रिया जारी है।
    इसके साथ ही उसना (पारबॉयल्ड) चावल मिलों की संख्या बढ़कर 396 हो चुकी है, जिससे धान प्रसंस्करण क्षमता में भी इजाफा हुआ है।

    अन्य योजनाओं की भी हुई समीक्षा

    समीक्षा बैठक के दौरान सरकार की कई अहम योजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा की गई। इनमें शामिल हैं:

    • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना
    • प्रधानमंत्री पोषण योजना
    • गेहूं आधारित पोषण योजना
    • किशोरियों के लिए पोषण योजना
    • कल्याणकारी संस्थान एवं छात्रावास योजना

    इसके अलावा फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई और सैंपल जांच समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए।

    बीएसएफसी की भूमिका होगी और मजबूत

    सरकार ने साफ किया है कि इन सभी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में BSFC की भूमिका बेहद अहम है। निगम को निर्देश दिए गए हैं कि एफसीआई से खाद्यान्न उठाव से लेकर डिस्पैच तक की सभी गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। जिन जिलों में परिवहन व्यवस्था को लेकर समस्या आ रही है, वहां तुरंत समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

    24 घंटे में भुगतान से बढ़ेगा किसानों का भरोसा

    बिहार सरकार के इस फैसले से यह साफ है कि अब धान किसानों को अपने पैसे के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। 24 घंटे में भुगतान की व्यवस्था से किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और वे अगली फसल की तैयारी समय पर कर सकेंगे।
    यह कदम न सिर्फ किसानों के भरोसे को बढ़ाएगा, बल्कि राज्य की धान खरीद प्रणाली को भी और अधिक मजबूत व प्रभावी बनाएगा।