New Sugarcane Varieties: उत्तर प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसानों के लिए एक अत्यंत सकारात्मक समाचार सामने आया है। केंद्रीय किस्म विमोचन समिति (CVRC) ने गन्ने की सात अत्याधुनिक किस्मों को कृषि हेतु स्वीकृति प्रदान की है। ये किस्में विगत कई वर्षों के सघन वैज्ञानिक परीक्षण एवं कठोर जांच के पश्चात विकसित की गई हैं तथा रेड रॉट (लाल सड़न) जैसे घातक रोगों के विरुद्ध प्रभावी प्रतिरोधक क्षमता रखती हैं। 9 फरवरी 2026 को जारी सरकारी आदेश के अनुसार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) तथा लखनऊ स्थित गन्ना संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से विकसित इन किस्मों से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।
विगत कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश के गन्ना कृषक समुदाय को परंपरागत किस्मों में रोग संक्रमण की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा है। विशेष रूप से लाल सड़न, जिसे गन्ने का कर्करोग भी कहा जाता है, ने खड़ी फसलों को व्यापक क्षति पहुंचाई है। इस रोग के कारण जहां एक दशक तक निरंतर बढ़ रही उत्पादकता में गिरावट आने लगी थी। इन नवीन किस्मों का विमोचन इस संकटकाल में किसानों के लिए राहत का संदेश लेकर आया है।
New Sugarcane Varieties: अगेती एवं मध्यम अवधि की किस्मों का वर्गीकरण
कृषि वैज्ञानिकों ने कृषकों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए इन किस्मों को दो प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया है। प्रथम श्रेणी में अगेती परिपक्व होने वाली किस्में सम्मिलित हैं, जिनमें CoS 17231 (बिस्मिल) तथा CoP 16437 (राजेंद्र गन्ना-1) प्रमुख हैं। अगेती किस्मों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इनकी फसल शीघ्र परिपक्व होती है, जिससे चीनी मिलों को समयबद्ध गन्ना आपूर्ति सुनिश्चित होती है तथा कृषक को कृषि भूमि शीघ्र उपलब्ध हो जाती है। इससे गेहूं अथवा अन्य रबी फसलों की समयोचित बुवाई संभव हो पाती है।
द्वितीय श्रेणी में मध्यम एवं विलंब से परिपक्व होने वाली किस्में सम्मिलित हैं, जिनमें Co 17018 (करण-17), CoS 16233 (रोशन) तथा CoPb 18213 उल्लेखनीय हैं। ये किस्में उन कृषकों के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं जो गन्ने की मोटाई एवं भार पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हैं। ये किस्में कृषि भूमि में दीर्घावधि तक स्थापित रहकर अपनी शक्ति संचित करती हैं तथा अंततः अधिकतम भार प्रदान कर किसान की आर्थिक समृद्धि में योगदान देती हैं।
New Sugarcane Varieties: कृषि लागत में कमी का माध्यम
गन्ना कृषि में सर्वाधिक व्यय कीटनाशकों एवं रोगनाशकों पर होता है, विशेषकर जब फसल में रोग अथवा कीट संक्रमण हो जाए। उत्तर प्रदेश के कृषक लाल सड़न से अत्यधिक पीड़ित रहे हैं, जिसके कारण लहलहाती फसलें विनष्ट हो जाती थीं। परंतु नवीन किस्में, विशेष रूप से CoPb 17215 तथा Co 18022 (करण-18), इस रोग के विरुद्ध सशक्त रक्षा कवच प्रदान करती हैं। इन बीजों को इस प्रकार विकसित किया गया है कि इन पर लाल सड़न एवं चोटी भेदक जैसे कीटों का प्रभाव न्यूनतम होता है।
जब फसल में रोग संक्रमण की संभावना कम होगी तो कृषक का कीटनाशकों पर होने वाला हजारों रुपयों का व्यय बच जाएगा। इससे न केवल कृषि लागत में कमी आएगी, अपितु कृषक को तनावमुक्त होकर उत्तम गुणवत्ता की फसल प्राप्त होगी। न्यूनतम लागत में अधिकतम एवं सुरक्षित उत्पादन प्राप्त करने के लिए ये किस्मां अत्यंत उपयुक्त हैं। कृषकों को वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों से परामर्श लेकर अपनी जलवायु एवं परिस्थितियों के अनुरूप बुवाई करनी चाहिए।
New Sugarcane Varieties: क्षेत्र-विशिष्ट किस्मों का चयन
उत्तर प्रदेश भारत का एक विशाल राज्य है तथा यहां के प्रत्येक जनपद की मृदा एवं जल की विशेषताएं भिन्न हैं। इसलिए कृषि वैज्ञानिकों ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए विशिष्ट किस्मों की अनुशंसा की है। पश्चिमी एवं मध्य उत्तर प्रदेश के कृषक, जहां उच्च तापमान प्रबल रहता है, उनके लिए करण-17, रोशन तथा बिस्मिल जैसी किस्में सर्वोत्तम पाई गई हैं। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश के कृषकों के लिए, जहां आर्द्रता एवं जल उपलब्धता की परिस्थितियां भिन्न होती हैं, वहां राजेंद्र गन्ना-1 (CoP 16437) की अनुशंसा की गई है।
यह क्षेत्र-आधारित चयन इसलिए अनिवार्य है ताकि कृषक को अपनी भूमि की उर्वरता का संपूर्ण लाभ प्राप्त हो सके। जब कृषक अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुरूप बीज का चयन करेगा तो फसल का गिरना न्यून होगा तथा उसका विकास उत्कृष्ट रीति से होगा। स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल किस्म का चयन सफल कृषि का प्रथम चरण है।
New Sugarcane Varieties: उच्च शर्करा सामग्री एवं भारी उत्पादन
इन नवीन किस्मों का वास्तविक उद्देश्य केवल गन्ने की लंबाई में वृद्धि नहीं है, अपितु उसमें शर्करा की मात्रा को भी बढ़ाना है। CoPb 100 तथा करण-18 जैसी किस्मों में शर्करा का प्रचुर भंडार है। जब गन्ने में शर्करा की मात्रा अधिक होगी तो चीनी मिलों को अधिक लाभ प्राप्त होगा तथा वे कृषकों का भुगतान त्वरित गति से कर सकेंगी। यह व्यवस्था कृषक एवं उद्योग दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।
यदि कृषक इन नवीन गन्ना बीज किस्मों को आधुनिक ट्रेंच विधि से बुवाई करें तथा समुचित सिंचाई व्यवस्था अपनाएं तो वे प्रति एकड़ 500 से 600 क्विंटल तक की उत्पादकता सुगमता से प्राप्त कर सकते हैं। यह उत्पादन परंपरागत किस्मों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से उच्च है। उत्तर प्रदेश के गन्ना आयुक्त ने इन बीजों को शीघ्रातिशीघ्र सरकारी केंद्रों पर उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं।
New Sugarcane Varieties: भविष्य की संभावनाएं एवं तकनीकी प्रगति
आगामी समय तकनीकी प्रगति एवं सुसूचित ज्ञान का है। वैज्ञानिक अनुसंधान द्वारा विकसित इन उन्नत किस्मों से उत्तर प्रदेश का प्रत्येक गन्ना कृषक पुनः अपनी कृषि में उत्कृष्ट उत्पादकता प्राप्त कर सकता है। इन किस्मों के व्यापक प्रसार से राज्य की गन्ना उत्पादन क्षमता में आमूलचूल परिवर्तन आने की संभावना है। सरकारी प्रयासों के साथ-साथ कृषकों को भी आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है।
रोग प्रतिरोधी किस्मों का विकास कृषि विज्ञान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे न केवल कृषक की आय में वृद्धि होगी, अपितु पर्यावरण पर रासायनिक कीटनाशकों के प्रतिकूल प्रभाव में भी कमी आएगी। यह सतत कृषि की दिशा में एक सार्थक कदम है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: केंद्रीय किस्म विमोचन समिति ने गन्ने की कितनी नई किस्मों को स्वीकृति प्रदान की है?
उत्तर: केंद्रीय किस्म विमोचन समिति (CVRC) ने गन्ने की सात नवीन किस्मों को कृषि हेतु स्वीकृति प्रदान की है। ये किस्में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा लखनऊ स्थित गन्ना संस्थान द्वारा विकसित की गई हैं। 9 फरवरी 2026 को इनकी स्वीकृति का सरकारी आदेश जारी किया गया।
प्रश्न 2: इन नई किस्मों की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?
उत्तर: इन किस्मों की प्रमुख विशेषताएं हैं – रेड रॉट (लाल सड़न) जैसे घातक रोगों के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता, उच्च शर्करा सामग्री, 500-600 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन क्षमता तथा विभिन्न जलवायु परिस्थितियों के लिए उपयुक्तता। इनमें अगेती एवं मध्यम अवधि दोनों प्रकार की किस्में सम्मिलित हैं।
प्रश्न 3: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए कौन सी किस्में उपयुक्त हैं?
उत्तर: पश्चिमी एवं मध्य उत्तर प्रदेश के कृषकों के लिए करण-17 (Co 17018), रोशन (CoS 16233) तथा बिस्मिल (CoS 17231) किस्में सर्वाधिक उपयुक्त हैं। ये किस्में उच्च तापमान परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं तथा अच्छी उत्पादकता प्रदान करती हैं।
प्रश्न 4: लाल सड़न रोग से सुरक्षा प्रदान करने वाली किस्में कौन सी हैं?
उत्तर: CoPb 17215 तथा Co 18022 (करण-18) किस्में लाल सड़न रोग के विरुद्ध विशेष प्रतिरोधक क्षमता रखती हैं। इन किस्मों को इस प्रकार विकसित किया गया है कि इन पर लाल सड़न तथा चोटी भेदक जैसे कीटों का प्रभाव न्यूनतम होता है। इससे कीटनाशकों पर होने वाला व्यय भी कम होता है।
प्रश्न 5: इन नई किस्मों से अधिकतम उत्पादन कैसे प्राप्त किया जा सकता है?
उत्तर: अधिकतम उत्पादन के लिए कृषकों को आधुनिक ट्रेंच विधि से बुवाई करनी चाहिए तथा समुचित सिंचाई व्यवस्था अपनानी चाहिए। अपने क्षेत्र की जलवायु एवं मृदा के अनुरूप किस्म का चयन करना चाहिए। कृषि विशेषज्ञों से परामर्श लेकर वैज्ञानिक विधि से कृषि करने पर प्रति एकड़ 500-600 क्विंटल उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
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