New Sugarcane Varieties: देश के करोड़ों गन्ना किसानों के लिए एक बेहद उत्साहजनक और राहत भरी खबर आई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR और लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान यानी IISR की संयुक्त मेहनत और वर्षों के वैज्ञानिक शोध का परिणाम अब किसानों के सामने आ गया है। गन्ने की 7 नई उन्नत किस्मों को सेंट्रल वैरायटी रिलीज कमेटी यानी CVRC की आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। इसी महीने जारी सरकारी आदेश के तहत इन किस्मों को बड़े पैमाने पर खेती के लिए पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद घोषित किया गया है। इन नई किस्मों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये गन्ने की सबसे विनाशकारी बीमारी रेड रॉट यानी लाल सड़न के प्रति अत्यधिक सहनशील हैं जिसने पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
New Sugarcane Varieties: क्या है लाल सड़न और क्यों है यह इतनी खतरनाक
लाल सड़न यानी रेड रॉट गन्ने की सबसे घातक और विनाशकारी बीमारियों में से एक है। कृषि विशेषज्ञ इसे गन्ने का कैंसर कहते हैं। यह बीमारी एक विशेष फफूंद के कारण होती है जो गन्ने की फसल को अंदर से खोखला कर देती है और धीरे-धीरे पूरी उपज को बर्बाद कर देती है। किसान जब तक इसे समझ पाते हैं तब तक फसल की बर्बादी हो चुकी होती है। इस बीमारी की वजह से किसानों को न केवल उत्पादन में भारी कमी का सामना करना पड़ता है बल्कि दवाइयों और कीटनाशकों पर भी बड़ा खर्च करना पड़ता है। नई रेड रॉट रोधी किस्मों के आने से यह समस्या काफी हद तक हल होने की उम्मीद है।
New Sugarcane Varieties: अगेती और मध्यम किस्मों का बेहतर विकल्प
किसानों की विविध जरूरतों और अलग-अलग मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन 7 नई किस्मों को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहली श्रेणी है अगेती यानी जल्दी पकने वाली किस्में जिनमें CoS 17231 जिसे बिस्मिल नाम दिया गया है और CoP 16437 जिसे राजेंद्र गन्ना-1 कहा जाता है शामिल हैं। ये किस्में जल्दी तैयार होती हैं जिससे किसान समय पर चीनी मिलों को गन्ने की आपूर्ति कर सकेंगे। इसके अलावा खेत जल्दी खाली होने पर किसान गेहूं या अन्य रबी फसलों की बुवाई भी समय पर कर सकेंगे जिससे उनकी वार्षिक आमदनी में और वृद्धि होगी।
दूसरी श्रेणी में मध्यम और देर से पकने वाली किस्में हैं जिनमें Co 17018 जिसे करण-17 नाम दिया गया है, CoS 16233 जिसे रोशन कहते हैं और CoPb 18213 जैसी किस्में शामिल हैं। ये किस्में अपनी मोटाई और वजन के लिए जानी जाती हैं। खेत में अधिक समय तक खड़ी रहकर ये मजबूत होती हैं और अंत में भारी उत्पादन देती हैं।
New Sugarcane Varieties: बेहतर चीनी रिकवरी और रिकॉर्ड उत्पादन की संभावना
नई किस्मों की सबसे आकर्षक विशेषता उनकी बेहतर चीनी रिकवरी है। कुछ किस्मों में उच्च शर्करा प्रतिशत दर्ज किया गया है जिससे चीनी मिलों को अधिक उत्पादन मिलेगा। इसका सीधा फायदा किसानों को भी होगा क्योंकि अच्छी रिकवरी पर उन्हें बेहतर भुगतान मिलता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसान इन नई किस्मों की बुवाई आधुनिक ट्रेंच विधि से करें और संतुलित सिंचाई तथा उर्वरक प्रबंधन अपनाएं तो प्रति एकड़ 500 से 600 क्विंटल तक उत्पादन हासिल किया जा सकता है जो पारंपरिक किस्मों की तुलना में काफी अधिक है।
New Sugarcane Varieties: क्षेत्र के अनुसार बीज चयन है जरूरी
उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की मिट्टी और जलवायु परिस्थितियां एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। पश्चिमी और मध्य यूपी के लिए कुछ किस्में अधिक उपयुक्त बताई गई हैं जबकि पूर्वी यूपी के लिए अलग सिफारिश की गई है। ऐसे में कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसान अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र या IISR के वैज्ञानिकों से परामर्श लेकर ही बीज का चयन करें ताकि अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित हो सके और किसी प्रकार के नुकसान से बचा जा सके।
New Sugarcane Varieties: लागत घटेगी आमदनी बढ़ेगी
नई किस्मों से किसानों की दो सबसे बड़ी समस्याओं का एक साथ समाधान हो सकता है। पहला रेड रॉट जैसी बीमारियों से सुरक्षा मिलेगी जिससे दवाइयों और कीटनाशकों पर होने वाला अतिरिक्त खर्च काफी कम होगा। दूसरा अधिक उत्पादन और बेहतर चीनी रिकवरी से आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। राज्य स्तर पर इन नई किस्मों के बीज जल्द ही सरकारी केंद्रों और अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
ICAR और IISR की यह पहल गन्ना किसानों के लिए नई उम्मीद की किरण लेकर आई है। यदि किसान वैज्ञानिक सलाह और आधुनिक तकनीकों के साथ इन किस्मों को अपनाते हैं तो आने वाले गन्ना सीजन में उत्पादन और आमदनी दोनों में सकारात्मक और उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल सकता है।
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