NABARD-NCDEX: राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) तथा राष्ट्रीय कमोडिटी एवं डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) द्वारा संयुक्त रूप से प्रारंभ की गई मूल्य सुरक्षा योजना मसाला उत्पादक किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है। यह योजना विशेष रूप से हल्दी, जीरा एवं धनिया जैसी फसलों की खेती करने वाले कृषकों के लिए प्रारूपित की गई है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य कृषकों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य सुनिश्चित करना तथा बाजार में मूल्य पतन से संरक्षण प्रदान करना है।
इस अभिनव योजना के माध्यम से किसान उत्पादक संगठन (FPO) विकल्प व्यापार में सहभागिता करते हैं, जो एक प्रकार का मूल्य बीमा तंत्र है। बाजार में मूल्यों में गिरावट की स्थिति में भी कृषकों को आर्थिक नुकसान से बचाव मिलता है। NABARD इस योजना में पुट ऑप्शन प्रीमियम का एक भाग अनुदान के रूप में प्रदान करता है, जिससे कृषक न्यूनतम व्यय में अपने उत्पाद को सुरक्षित कर सकते हैं। यह योजना वर्तमान में आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना तथा कर्नाटक में कार्यान्वित की जा रही है।
NABARD-NCDEX: प्रारंभिक चरण में अभूतपूर्व सफलता
योजना के प्रथम चरण में 80 किसान उत्पादक संगठनों तथा 1.34 लाख कृषकों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हुआ। कुल 6,544 मीट्रिक टन फसल को मूल्य सुरक्षा कवच के अंतर्गत लाया गया। महाराष्ट्र के वाशिम जिले में स्थित राष्ट्रोन्नति फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी ने प्रारंभिक नौ मासों में ही एक करोड़ रुपये का व्यापारिक कारोबार संपन्न किया, जो इस योजना की व्यावहारिक सफलता का प्रमाण है।
जनवरी से मार्च 2025 की अवधि में किसान उत्पादक संगठनों को कुल 6.31 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ। इस उपलब्धि का तात्पर्य है कि कृषकों को उनके उत्पाद का न्यूनतम मूल्य (floor price) सुनिश्चित हुआ तथा उन्होंने बाजार में समुचित एवं सूचित निर्णय लिए। यह आंकड़े योजना की प्रभावशीलता को रेखांकित करते हैं।
NABARD-NCDEX: हल्दी मूल्यों में अभूतपूर्व उछाल
इस योजना के प्रभाव से हल्दी की बाजार कीमतों में विगत पांच वर्षों में सर्वाधिक वृद्धि परिलक्षित हुई है। वर्तमान में हल्दी का बाजार मूल्य लगभग 14,355 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि एक वर्ष पूर्व यह मात्र 10,689 रुपये प्रति क्विंटल था। NCDEX पर अप्रैल संविदा का मूल्य 15,090 रुपये प्रति क्विंटल अंकित किया गया है। दिसंबर 2025 में यह मूल्य 17,000 रुपये प्रति क्विंटल के शिखर तक पहुंच गया था।
मूल्य वृद्धि के प्रमुख कारकों में न्यून उत्पादन, बढ़ती निर्यात मांग तथा औषधीय उद्योग की सतत आवश्यकता सम्मिलित हैं। हल्दी के औषधीय गुणों की वैश्विक स्वीकार्यता तथा आयुर्वेदिक उद्योग के विस्तार ने भी मांग में वृद्धि की है। इन परिस्थितियों ने हल्दी उत्पादकों के लिए अनुकूल बाजार परिवेश निर्मित किया है।
NABARD-NCDEX: किसान उत्पादक संगठनों का सशक्तिकरण
राष्ट्रोन्नति FPO ने 30 मीट्रिक टन हल्दी को मूल्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत सुरक्षित किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने 150 मीट्रिक टन हल्दी को प्रत्यक्ष बाजार में विक्रय कर उल्लेखनीय लाभ अर्जित किया। इस संगठन में 900 सदस्य सम्मिलित हैं, जिनमें 180 महिला कृषक हैं। ये सदस्य सामूहिक रूप से लगभग 500 एकड़ भूमि पर हल्दी की कृषि संपन्न करते हैं।
इस योजना से कृषकों को न्यूनतम मूल्य की निश्चितता प्राप्त होती है। इसका अर्थ है कि मूल्य पतन की परिस्थिति में भी उन्हें आर्थिक हानि नहीं होगी। यह सुनिश्चितता कृषकों को विक्रय एवं विपणन संबंधी निर्णय निश्चिंतता से लेने में सहायक होती है। भावी बाजार की अनिश्चितता के भय से मुक्ति मिलने पर कृषक अपनी ऊर्जा उत्पादन गुणवत्ता पर केंद्रित कर सकते हैं।
NABARD-NCDEX: बाजार बोध में परिवर्तन
NCDEX के अनुसार, इस योजना के परिणामस्वरूप कृषक अब भावी बाजार (futures market) तथा तत्काल बाजार (spot market) की मूल्य गतिविधियों पर सचेत दृष्टि रखते हैं। जब मूल्य अनुकूल स्तर पर होते हैं, किसान उत्पादक संगठन अपने उत्पाद का विक्रय कर लाभ अर्जित करते हैं। यदि मूल्य स्ट्राइक प्राइस (पूर्व निर्धारित मूल्य) से अधिक हो जाएं तो कृषक मुक्त बाजार में विक्रय कर अतिरिक्त लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
इस योजना के अंतर्गत अब तक 150 से अधिक जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इन कार्यक्रमों में विकल्प मूल्य निर्धारण (option pricing), विपणन रणनीति तथा वितरण योजना जैसे तकनीकी विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। यह क्षमता निर्माण कार्यक्रम कृषकों को वित्तीय साक्षरता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
NABARD-NCDEX: दीर्घकालीन प्रभाव एवं संभावनाएं
इस योजना से कृषक अब केवल बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर नहीं हैं। वे अब अपने उत्पाद का उचित मूल्यांकन कर सकते हैं तथा सूचित निर्णय ले सकते हैं। इससे किसान उत्पादक संगठनों का विश्वास सुदृढ़ हुआ है तथा वे भविष्य में अधिक सुरक्षित पद्धति से व्यापार संचालन कर सकते हैं। 28 किसान उत्पादक संगठनों ने स्वतंत्र रूप से भावी संविदाओं हेतु मार्जिन राशि जमा की है, जो योजना में उनके बढ़ते विश्वास का द्योतक है।
यद्यपि कुछ चुनौतियां विद्यमान हैं, जैसे पर्याप्त जागरूकता का अभाव तथा प्रारंभिक लागत संबंधी प्रश्न, तथापि योजना का सकारात्मक प्रभाव इन बाधाओं को पार करने की दिशा में प्रेरक है। जैसे-जैसे अधिक कृषक इस योजना से लाभान्वित होंगे, इसकी स्वीकार्यता में भी वृद्धि होगी। सरकार एवं संबद्ध संस्थाओं को जागरूकता अभियानों को और सघन करने की आवश्यकता है।
NABARD-NCDEX: कृषि अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव
NABARD-NCDEX की यह मूल्य सुरक्षा योजना कृषकों के लिए आमूलचूल परिवर्तन लेकर आई है तथा उन्हें बाजार में सुदृढ़ एवं सुरक्षित स्थिति प्रदान करती है। यह योजना न केवल व्यक्तिगत कृषकों के लिए लाभकारी है, अपितु संपूर्ण कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। जब कृषक आर्थिक रूप से सुरक्षित होंगे तो वे बेहतर गुणवत्ता के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
मसाला फसलों के संदर्भ में यह योजना विशेष रूप से प्रासंगिक है क्योंकि इन फसलों की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव होता है। मूल्य स्थिरता प्राप्त होने से कृषक दीर्घकालिक योजना बना सकते हैं तथा अपनी कृषि पद्धतियों में सुधार ला सकते हैं। यह खाद्य सुरक्षा एवं पोषण सुरक्षा के लक्ष्यों की प्राप्ति में भी सहायक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: NABARD-NCDEX की मूल्य सुरक्षा योजना क्या है?
उत्तर: यह एक अभिनव योजना है जो हल्दी, जीरा और धनिया उगाने वाले किसानों को बाजार मूल्य पतन से सुरक्षा प्रदान करती है। इस योजना के अंतर्गत किसान उत्पादक संगठन (FPO) विकल्प व्यापार (options trading) में भागीदारी करते हैं। NABARD पुट ऑप्शन प्रीमियम का एक भाग अनुदान के रूप में देता है, जिससे किसानों को न्यूनतम मूल्य की गारंटी मिलती है।
प्रश्न 2: योजना के प्रथम चरण में कितने किसानों को लाभ मिला?
उत्तर: प्रथम चरण में 80 किसान उत्पादक संगठनों तथा 1.34 लाख किसानों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हुआ। कुल 6,544 मीट्रिक टन फसल को मूल्य सुरक्षा के अंतर्गत लाया गया। जनवरी से मार्च 2025 के दौरान किसान उत्पादक संगठनों को 6.31 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ।
प्रश्न 3: हल्दी के मूल्यों में क्या परिवर्तन हुआ है?
उत्तर: इस योजना के प्रभाव से हल्दी की कीमतें पिछले पांच वर्षों में सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गई हैं। वर्तमान में हल्दी का मूल्य लगभग 14,355 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि एक वर्ष पूर्व यह 10,689 रुपये था। दिसंबर 2025 में यह 17,000 रुपये तक पहुंच गया था। यह वृद्धि न्यून उत्पादन, बढ़ती निर्यात मांग तथा औषधीय उद्योग की आवश्यकता के कारण है।
प्रश्न 4: यह योजना किन राज्यों में लागू है?
उत्तर: यह योजना वर्तमान में सात राज्यों में कार्यान्वित की जा रही है – आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना और कर्नाटक। इन राज्यों में मसाला फसलों की व्यापक खेती होती है तथा यहां के किसान इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं।
प्रश्न 5: किसानों को इस योजना से क्या मुख्य लाभ मिलता है?
उत्तर: इस योजना से किसानों को न्यूनतम मूल्य की निश्चितता प्राप्त होती, जिससे बाजार में मूल्य गिरने पर भी उन्हें हानि नहीं होती। यदि बाजार मूल्य अधिक हैं तो वे खुले बाजार में बेचकर अतिरिक्त लाभ कमा सकते हैं। योजना से किसानों का बाजार ज्ञान बढ़ता है, विपणन निर्णय आसान होते हैं तथा आर्थिक सुरक्षा मिलती है। इससे किसान उत्पादक संगठनों का विश्वास भी सुदृढ़ होता है।
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