महाराष्ट्र ने एक महीने में 45,000 से ज्यादा सोलर कृषि पंप लगाए, बना विश्व रिकॉर्ड
महाराष्ट्र सरकार ने सोलर कृषि क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। राज्य में दिसंबर 2025 में सिर्फ एक महीने के भीतर 45,911 ऑफ-ग्रिड सोलर कृषि पंप लगाए गए, जिसे लेकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में महाराष्ट्र का नाम दर्ज हो गया है। यह उपलब्धि प्रधानमंत्री कुसुम योजना (PM-KUSUM Component B) और माझे त्याला सौर कृषी पंप योजना के अंतर्गत हासिल की गई है।
चत्रपति संभाजीनगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को यह प्रमाणपत्र दिया गया। फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र आज भारत का नंबर-1 सोलर एग्रीकल्चर स्टेट बन चुका है और यह उपलब्धि राज्य के किसानों को सिंचाई सुरक्षा, खेती में स्थिरता और कम लागत वाली ऊर्जा प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि किसान सशक्तिकरण की दिशा में भविष्य को सुरक्षित करने वाली पहल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आने वाले वर्षों में इस कार्यक्रम को और तेज गति देने वाली है ताकि किसान उत्पादन, आय और सिंचाई क्षमता में आत्मनिर्भर बन सकें।
सरकारी जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र में अब तक कुल 7.47 लाख सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि लक्ष्य 10.45 लाख सोलर पंप का रखा गया है। यानी आने वाले समय में लाखों किसान पूरी तरह सौर ऊर्जा पर आधारित सिंचाई से लाभान्वित होंगे।
सरकार के मुताबिक, सोलर पंप लगाने के दौरान राज्य के सूखा प्रभावित इलाके प्रमुख फोकस रहे। इसके अलावा पंप की क्षमता किसान की भूमि धारिता के अनुसार तय की गई। उदाहरण के तौर पर 2.5 एकड़ तक किसानों को 3 HP पंप, 5 एकड़ तक 5 HP और इससे बड़ी भूमि में 7 HP सोलर पंप लगाए गए। इससे हर किसान को उसकी जरूरत और खेत के हिसाब से सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी।
राज्य सरकार ने यह भी बताया कि सोलर पंप लगाने से किसानों की बिजली पर निर्भरता कम होगी, कृषि कार्य समय पर हो सकेंगे और डीजल पंप का खर्च खत्म होने से आय में सीधा फायदा देखने को मिलेगा। खास बात यह है कि यह सारी व्यवस्था ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम पर आधारित है, जिससे बिजली कटौती वाले इलाकों में भी सिंचाई बाधित नहीं होगी।
महाराष्ट्र बना दुनिया का सबसे तेज सोलर पंप इंस्टॉल करने वाला क्षेत्र
सरकारी प्रेस नोट के अनुसार, एक महीने में इतने बड़े पैमाने पर सोलर पंप लगाने का रिकॉर्ड इससे पहले किसी राज्य सरकार के नाम नहीं था। बयान में कहा गया कि सोलर पंप स्थापित करने की स्पीड और संख्या के लिहाज से महाराष्ट्र दुनिया में दूसरे स्थान पर है और चीन के बाद किसी प्रशासनिक इकाई द्वारा इतनी तेजी से सोलर पंप स्थापना का यह अनोखा मॉडल है।
राज्य की योजना किसानों को सिंचाई के लिए 24 घंटे उपलब्ध नवीकरणीय ऊर्जा से जोड़ने की है। यह कदम पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी बड़ी भूमिका निभाएगा। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में महाराष्ट्र खेती में सोलर क्रांति का राष्ट्रीय मॉडल बनकर सामने आएगा।
फडणवीस ने स्पष्ट कहा कि किसानों को सिर्फ ऊर्जा ही नहीं, बल्कि कृषि उत्पादन, फसल की गुणवत्ता और आय को बढ़ाने के लिए भी सौर ऊर्जा का विस्तार तेज किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे सोलर पंप लगने से सिंचाई का खर्च घटा है और खेतों में हर मौसम में पानी उपलब्ध हो पाता है।
सरकार ने बताया कि सोलर पंप योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया, सब्सिडी और इंस्टॉलेशन के लिए गांव-स्तर पर अभियान चलाया गया। इससे किसानों की भागीदारी बढ़ी और कुछ ही महीनों में हजारों पंप खेतों में चालू हो गए।
किसानों के लिए बड़े फायदे
राज्य सरकार के अनुसार सोलर पंप लगाने से किसानों को कई सीधी सुविधाएं मिली हैं—
- किसानों का बिजली बिल लगभग शून्य
- डीजल पंप का खर्च बचा
- कोई लोड शेडिंग की दिक्कत नहीं
- सिंचाई समय पर और लगातार
- खेती की पैदावार में बढ़ोतरी
- पर्यावरण सुरक्षित
इसके अलावा, कई इलाकों में किसानों ने कहा कि पहले बारिश पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब हर मौसम में पानी उपलब्ध है, जिससे खेती के लिए जोखिम कम हो गया है।
कृषि ऊर्जा में भारत के लिए नया मॉडल
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र पूरी तरह कृषि ऊर्जा के क्षेत्र में ग्रीन स्टेट मॉडल बनकर सामने आए। PM-KUSUM योजना, कृषि के लिए स्वच्छ ऊर्जा और किसान आय वृद्धि जैसे लक्ष्यों को संरक्षित करती है।
राज्य सरकार ने यह भी कहा कि इस काम में MSEDCL और अन्य विभागों का लगातार प्रयास रहा।
समग्र रूप से देखें तो यह उपलब्धि न केवल महाराष्ट्र बल्कि समूचे भारत के लिए सौर कृषि क्षेत्र में एक प्रेरणा है। इस रिकॉर्ड ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि भारत तेज गति से कृषि ऊर्जा को हरित ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।
आने वाले दिनों में, इस प्रकार के सोलर निवेश और योजनाएं ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी नई दिशा प्रदान करेंगी।

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