India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से कृषि क्षेत्र में उथल-पुथल की आशंका, जानें क्या होगा आयात-निर्यात
India-US Trade Deal: वाशिंगटन और नई दिल्ली के मध्य संपन्न हुए द्विपक्षीय व्यापारिक समझौते ने देश की राजनीतिक गलियारों में तीव्र बहस को जन्म दिया है। प्रस्तावित व्यापार संधि को लेकर सत्तापक्ष एवं विपक्ष के मध्य विमर्श का दौर जारी है, जबकि कृषि जगत में इसके दूरगामी प्रभावों को लेकर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी प्रशासन द्वारा प्रस्तुत इस व्यापारिक प्रस्ताव पर भारतीय कृषक समुदाय की दृष्टि केंद्रित है।
विपक्षी दलों के प्रमुख राहुल गांधी ने इस समझौते को कृषक समुदाय के हितों के विरुद्ध करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका आरोप है कि यह संधि भारतीय कृषि उत्पादकों, विशेषकर कपास, मक्का, ज्वार तथा सोयाबीन की खेती से जुड़े किसानों के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न करेगी। इसके विपरीत, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित सरकारी प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि समझौते में भारतीय कृषक वर्ग के संरक्षण हेतु पर्याप्त सुरक्षात्मक उपाय सम्मिलित किए गए हैं।
India-US Trade Deal: अमेरिकी उत्पादों पर लगेगा प्रतिबंध: सरकारी दावों की पड़ताल
केंद्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक विवरणी के अनुसार, अनेक अमेरिकी कृषि उत्पादों का भारतीय बाजार में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इस सूची में छिलके रहित अनाज, आटा, गेहूं, मक्का, चावल, बाजरा जैसे मोटे अनाज, आलू, प्याज, मटर, बीन्स, खीरा, मशरूम, विभिन्न दालें तथा शीतित सब्जियां सम्मिलित हैं। साथ ही संतरा, अंगूर, नींबू, स्ट्रॉबेरी एवं मिश्रित डिब्बाबंद सब्जियों पर भी आयात निषेध लागू रहेगा।
डेयरी क्षेत्र के संदर्भ में सरकार का दावा है कि द्रव दूध, दुग्ध चूर्ण, क्रीम, दही, छाछ, मक्खन, घी, मक्खन तेल, पनीर तथा चीज़ जैसे समस्त उत्पादों का अमेरिकी आयात वर्जित रहेगा। मसाला उत्पादकों के लिए भी राहत की खबर है क्योंकि काली मिर्च, लौंग, शुष्क हरी मिर्च, दालचीनी, धनिया, जीरा, हींग, अदरक, हल्दी, अजवायन, मेथी, तेजपात एवं सरसों का आयात नहीं होगा।
India-US Trade Deal: शुल्क छूट से वंचित रहेंगे प्रमुख कृषि उत्पाद
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अनेक महत्वपूर्ण अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रवेश के लिए शुल्क रियायत प्राप्त नहीं होगी। इस श्रेणी में सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज, मुर्गीपालन उत्पाद, डेयरी वस्तुएं, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, छोले, मूंग, तिलहन, इथेनॉल तथा तंबाकू सम्मिलित हैं। यह प्रावधान भारतीय कृषक समुदाय के हितों की रक्षा हेतु महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि जिस देश का कृषि निर्यात बाजार 445 करोड़ अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है, वहां यह समझौता निर्यात में और गति प्रदान करेगा। भारतीय मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, नारियल तेल, सुपारी, काजू, वनस्पति मोम, एवोकाडो, केला, अमरूद, आम, कीवी, पपीता, अनानास तथा मशरूम को अमेरिकी बाजार में शून्य शुल्क पर विक्रय की सुविधा प्राप्त होगी।
India-US Trade Deal: विपक्षी आरोपों पर सरकार का प्रत्युत्तर
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि बांग्लादेश को वस्त्र उत्पादों के निर्यात में शून्य शुल्क की सुविधा प्राप्त होगी जबकि भारतीय निःशुल्क शुल्क वाले उत्पादों पर भी 18 प्रतिशत शुल्क आरोपित होगा। हालांकि सरकार ने इस आरोप को निराधार बताते हुए स्पष्ट किया है कि भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त होगा।
समझौते के अंतिम दस्तावेज़ तैयार होने में अभी एक माह का समय लग सकता है, किंतु विपक्षी दलों द्वारा संसद में उठाए गए हंगामे तथा कृषक समुदाय में व्याप्त आशंकाओं ने विवाद को और विस्तार दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा सहित विभिन्न कृषक संगठनों ने इस समझौते के विरुद्ध आंदोलन की घोषणा कर दी है।
India-US Trade Deal: अमेरिकी उत्पादों का भारतीय प्रवेश की वास्तविकता क्या है?
अमेरिकी प्रशासन के दावों के अनुसार, कतिपय उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रवेश की अनुमति प्रदान की जाएगी। इनमें शुष्क डिस्टिलर अनाज जो मादक पेय निर्माण में उपयोग होते हैं, पशु चारे हेतु लाल ज्वार, शुष्क मेवे, ताज़े फल, प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन, स्पिरिट्स तथा अन्य उत्पाद सम्मिलित हैं। यह सूची संभावित आयात की दिशा में संकेत देती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि 7 फरवरी को अमेरिकी प्रशासन द्वारा किए गए दावों में से अनेक प्रावधानों में परिवर्तन किया गया है। अमेरिकी दालों तथा डिजिटल सेवाओं पर भारतीय शुल्क हटाने के प्रस्ताव को संशोधित कर दिया गया है, अर्थात भारत इन पर शुल्क वसूली जारी रखेगा। इसके अतिरिक्त 500 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य को बाध्यकारी खंड से हटा दिया गया है।
India-US Trade Deal: कृषक संगठनों की प्रतिक्रिया एवं भविष्य की संभावनाएं
विभिन्न कृषक संगठनों ने India-US Trade Deal को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की है। जहां कुछ संगठन निर्यात अवसरों में वृद्धि को सकारात्मक मानते हैं, वहीं अन्य आयात से घरेलू बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यदि समझौता कृषक हितों के विरुद्ध पाया गया तो वे राष्ट्रव्यापी आंदोलन प्रारंभ करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए वक्तव्य तथा प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया से स्पष्ट होता है कि समझौते की सूक्ष्म बारीकियां अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं। अंतिम दस्तावेज़ के प्रकाशन के पश्चात ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। तब तक कृषक समुदाय एवं राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर जारी रहने की संभावना है।
एग्रीकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) के अध्यक्ष ने संकेत दिया है कि भारतीय कृषि निर्यात में उछाल की प्रबल संभावना है। उनका कहना है कि अमेरिकी बाजार में शून्य शुल्क पर भारतीय उत्पादों की विक्रय क्षमता से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। यह समझौता दीर्घकालिक आर्थिक संबंधों की आधारशिला साबित हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इस समझौते का प्राथमिक लक्ष्य दोनों देशों के मध्य द्विपक्षीय व्यापार को सुगम बनाना तथा शुल्क बाधाओं को न्यूनतम करना है। India-US Trade Deal के अंतर्गत भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच प्रदान करने एवं व्यापारिक संबंधों को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया है।
प्रश्न 2: कौन-कौन से अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत में आयात नहीं होंगे?
उत्तर: गेहूं, चावल, मक्का, दालें, आलू, प्याज, दूध, दही, घी, पनीर, चीज़, मक्खन तथा समस्त प्रमुख मसालों का अमेरिका से आयात प्रतिबंधित रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन उत्पादों के घरेलू उत्पादकों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
प्रश्न 3: किन भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में शून्य शुल्क लाभ मिलेगा?
उत्तर: भारतीय मसाले, चाय, कॉफी, काजू, नारियल तेल, सुपारी, आम, अमरूद, केला, कीवी, पपीता, अनानास तथा मशरूम को अमेरिकी बाजार में निःशुल्क प्रवेश की सुविधा प्राप्त होगी, जिससे भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।
प्रश्न 4: विपक्ष इस India-US Trade Deal का विरोध क्यों कर रहा है?
उत्तर: विपक्षी दलों का आरोप है कि यह India-US Trade Deal भारतीय किसानों, विशेषकर कपास, मक्का, ज्वार एवं सोयाबीन उत्पादकों के लिए हानिकारक सिद्ध होगा। उनकी चिंता है कि अमेरिकी आयात से घरेलू कृषि बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है तथा कृषक आय में कमी आ सकती है।
प्रश्न 5: India-US Trade Deal का अंतिम दस्तावेज कब तक उपलब्ध होगा?
उत्तर: सूत्रों के अनुसार, व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) का संपूर्ण एवं अंतिम दस्तावेज तैयार होने में लगभग एक माह का समय लग सकता है। तब तक समझौते की समस्त बारीकियां सार्वजनिक नहीं होंगी। दस्तावेज़ के प्रकाशन के पश्चात ही वास्तविक प्रभावों का सटीक आकलन संभव हो सकेगा।
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