FMD Disease: पशुपालन में सबसे बड़ी चुनौती होती है पशुओं को बीमारियों से बचाना। गाय, भैंस, भेड़ और बकरी पालने वाले किसानों के लिए खुरपका-मुंहपका यानी फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) एक बेहद गंभीर और चिंताजनक बीमारी है। यह एक संक्रामक बीमारी है जो न केवल पशुओं की उत्पादन क्षमता को प्रभावित करती है बल्कि गंभीर मामलों में पशु की मौत भी हो सकती है। एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि पहले यह बीमारी मुख्यतः बरसात के मौसम में होती थी, लेकिन अब किसी भी मौसम में पशु एफएमडी की चपेट में आ सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि जब तक भारत को एफएमडी फ्री जोन का प्रमाण पत्र नहीं मिलता तब तक मीट, डेयरी प्रोडक्ट और दूध के निर्यात में भी बड़ी रुकावट बनी रहेगी।
FMD Disease: कौन से पशुओं को होती है यह बीमारी
जिस भी पशु के खुर खुले हुए हों या खुर के बीच में गैप हो उसे एफएमडी बीमारी होने का खतरा रहता है। गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर सभी इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। यह बीमारी दुनिया के लगभग सभी देशों में पाई जाती है और पशुपालकों के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती बनी हुई है। अच्छी बात यह है कि अब वैक्सीनेशन के जरिए इस बीमारी पर काफी हद तक काबू पाया जा रहा है।
FMD Disease: पशुओं में एफएमडी के प्रमुख लक्षण
एनिमल एक्सपर्ट के अनुसार एफएमडी से पीड़ित पशु में 104 से 106 डिग्री फारेनहाइट तक तेज बुखार आता है। पशु की भूख कम हो जाती है और वह सुस्त रहने लगता है। मुंह से बहुत अधिक लार टपकने लगती है और मुंह में फफोले हो जाते हैं, खासतौर पर जीभ और मसूड़ों पर। पशु के पैर में खुर के बीच घाव और अल्सर हो जाते हैं। गाभिन पशु का गर्भपात हो सकता है। थन में सूजन आ जाती है और बांझपन की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। अगर बीमारी ज्यादा बढ़ जाए तो पशु की मौत भी हो सकती है।
FMD Disease: एफएमडी के पशुओं पर दूरगामी प्रभाव
यह बीमारी पशुओं को कई तरह से नुकसान पहुंचाती है। दूध उत्पादन में भारी कमी आती है जिससे किसान को सीधे आर्थिक नुकसान होता है। पशुओं की शारीरिक वृद्धि रुक जाती है। बैलों और अन्य कामकाजी पशुओं की काम करने की क्षमता घट जाती है। इन सभी कारणों से पशुपालक किसानों की आमदनी पर बुरा असर पड़ता है।
FMD Disease: पांच मुख्य कारण जिनसे फैलती है एफएमडी
एनिमल एक्सपर्ट के अनुसार दूषित चारा और दूषित पानी पीने से पशुओं में यह बीमारी सबसे तेजी से फैलती है। बरसात के दौरान जब पशु खुले मैदान में चरते हैं तो वे दूषित चारा-पानी ग्रहण कर लेते हैं। खुले में पड़ी सड़ी-गली चीजें खाने से भी बीमारी फैल सकती है। फार्म पर नए आने वाले पशु से संक्रमण का खतरा रहता है इसलिए नए पशु को कुछ दिन अलग रखना जरूरी होता है। पहले से एफएमडी से पीड़ित पशु के साथ रहने से भी स्वस्थ पशु बीमार पड़ सकते हैं।
FMD Disease: बिना पैसे खर्च किए करें एफएमडी की रोकथाम
एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि एफएमडी की रोकथाम बेहद आसान है और इसमें ज्यादा पैसा भी नहीं लगता। सबसे पहले अपने पशु का सरकारी रजिस्ट्रेशन कराएं और कान में ईयर टैग लगवाएं। किसी भी पशु स्वास्थ्य केंद्र पर साल में दो बार मुफ्त में एफएमडी का टीका लगवाएं। यह सरकार द्वारा निशुल्क दिया जाता है इसलिए इसका पूरा लाभ उठाएं। टीका लगने के बाद 10 से 15 दिन में पशु में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है, इस दौरान पशु का विशेष ध्यान रखें। बरसात के मौसम में पशु के बैठने और खड़े होने की जगह को साफ और सूखा बनाए रखें।
FMD Disease: अगर पशु को एफएमडी हो जाए तो क्या करें
यदि किसी पशु में एफएमडी के लक्षण दिखें तो सबसे पहले उसे बाकी सभी स्वस्थ पशुओं से तुरंत अलग कर दें। पीड़ित पशु के मुंह के घावों को पोटेशियम परमैंगनेट के घोल से धोएं। बोरिक एसिड और ग्लिसरीन का पेस्ट बनाकर मुंह की सफाई करें। खुर के घावों को पोटेशियम परमैंगनेट के घोल या बेकिंग सोडा से धोएं और कोई एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं। इसके अलावा नजदीकी पशु चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें ताकि सही और समय पर उपचार मिल सके।
समय पर टीकाकरण और थोड़ी-सी सतर्कता से पशुपालक अपने पशुओं को इस गंभीर बीमारी से बचा सकते हैं और अपनी आमदनी को सुरक्षित रख सकते हैं।
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