आज की 3 बड़ी बातें
खेत में पानी जमा होते ही उचित जल निकासी की व्यवस्था करें।
खेत की सही ढलान, मेड़ और नालियां जलभराव की समस्या कम करने में मदद करती हैं।
पानी निकलने के बाद फसल की जड़ों मिट्टी और रोगों की नियमित निगरानी जरूरी है।
बारिश के मौसम में फसलों को जलभराव से कैसे बचाएं?
मानसून किसान के लिए राहत भी लेकर आता है और चुनौती भी। समय पर बारिश हो तो फसल की सिंचाई का खर्च कम हो जाता है, लेकिन लगातार तेज बारिश खेत में पानी जमा कर दे तो यही पानी फसल के लिए परेशानी बन सकता है।
खासकर धान के अलावा मक्का, अरहर, सब्जियों, दलहनी फसलों और कई बागवानी फसलों में लंबे समय तक पानी खड़ा रहने से जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। खेत की मिट्टी में हवा की कमी होने लगती है और पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।
ऐसे में किसान के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि faslon ko waterlogging se kaise bachaye और बारिश का अतिरिक्त पानी खेत से जल्दी कैसे निकाला जाए?
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR की हालिया किसान जागरूकता गतिविधियों में भी प्रभावी जल निकासी, भूमि समतलीकरण, खेत की मेड़ मजबूत करने और जल प्रबंधन पर जोर दिया गया है।
तो चलिए आसान भाषा में समझते हैं कि बारिश के दिनों में खेत में पानी जमा होने से फसल को कैसे बचाया जा सकता है।
जलभराव से फसल को नुकसान क्यों होता है?
जब खेत में लगातार पानी जमा रहता है तो मिट्टी के अंदर हवा की जगह पानी भरने लगता है। इससे पौधों की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। परिणामस्वरूप जड़ों की सक्रियता कम हो सकती है और पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।
लंबे समय तक जलभराव रहने पर जड़ सड़न, फफूंदजनित रोग, पत्तियों का पीला पड़ना और पौधों के कमजोर होने जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं।
ICAR के अनुसार बिहार जैसे क्षेत्रों में अधिक बारिश और खराब जल निकासी कृषि उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती हो सकती है।
इसलिए बारिश शुरू होने से पहले ही किसान को खेत में पानी की निकासी का रास्ता तैयार रखना चाहिए।
Faslon ko waterlogging se kaise bachaye? सबसे पहले करें जल निकासी
अगर खेत में पानी लगातार जमा हो रहा है तो सबसे पहले जल निकासी की व्यवस्था पर ध्यान दें।
खेत की स्थिति के अनुसार छोटी-छोटी नालियां बनाकर अतिरिक्त पानी को खेत के बाहर सुरक्षित स्थान या जल संग्रहण संरचना की ओर ले जाया जा सकता है। ध्यान रखें कि पानी निकालते समय मिट्टी का कटाव न हो।
ICAR के कृषि अनुसंधान में भी जलभराव की स्थिति में विभिन्न फसलों के लिए ड्रेनेज मैनेजमेंट यानी जल निकासी प्रबंधन को महत्वपूर्ण उपाय बताया गया है।
सीधी बात है किसान भाइयों पानी खेत में जितनी देर खड़ा रहेगा, जोखिम उतना ही बढ़ेगा।
खेत की ढलान और लेवलिंग पर दे ध्यान
खेत में अगर कहीं ऊंचा और कहीं बहुत नीचा हिस्सा है तो बारिश का पानी एक ही जगह इकट्ठा हो सकता है। इसलिए खेत को आवश्यकता के अनुसार उचित तरीके से समतल और ढलानदार रखना जल प्रबंधन में मददगार हो सकता है।
ICAR-MGIFRI, मोतिहारी की किसान प्रशिक्षण गतिविधियों में भूमि समतलीकरण और प्रभावी जल निकासी को जलभराव और बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए उपयोगी बताया गया है।
हालांकि हर खेत की मिट्टी, फसल और भौगोलिक स्थिति अलग होती है। इसलिए बड़े स्तर पर भूमि सुधार कराने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
खेत के चारों तरफ नाली और मेड़ की व्यवस्था रखें
बारिश के दिनों में खेत की मेड़ और नालियां बहुत काम आती हैं। मजबूत मेड़ बाहर से आने वाले पानी को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है, जबकि उचित नाली अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में सहायता करती है।
लेकिन ध्यान रखें कि हर खेत में एक जैसी व्यवस्था सही नहीं होती। कुछ क्षेत्रों में पानी को रोकना जरूरी हो सकता है और कुछ क्षेत्रों में जल्दी निकासी जरूरी होती है।
इसलिए किसान को अपने खेत की फसल, मिट्टी और पानी के बहाव को देखकर व्यवस्था करनी चाहिए।
कम ऊंचाई वाले खेतों में क्या करें?
जिन खेतों में पानी प्राकृतिक रूप से जमा होता है, वहां सामान्य नाली से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती। ऐसे खेतों में उठी हुई क्यारियां या उपयुक्त भूमि विन्यास उपयोगी हो सकता है, खासकर कुछ सब्जी और बागवानी फसलों के लिए।
ICAR के शोध में जलभराव वाली भूमि के लिए Raised and Sunken Bed Technology को पानी के बेहतर प्रबंधन, जल निकासी और खेती के उपयोग को बढ़ाने वाली तकनीक के रूप में बताया गया है।
यानी जहां पानी नीचे जमा होता है, वहां कुछ फसलों को ऊंचे हिस्से पर उगाने और अतिरिक्त पानी को निचले हिस्से में नियंत्रित करने की योजना बनाई जा सकती है।
जलभराव वाले जमीन में फसलों का चुनाव सोच समझकर करे
हर फसल पानी को एक समान तरीके से सहन नहीं करती। इसलिए अगर आपका खेत हर साल बारिश में जलभराव से प्रभावित होता है तो फसल का चुनाव भी महत्वपूर्ण है।
धान जैसी फसलें कुछ परिस्थितियों में पानी की उपलब्धता के साथ बेहतर अनुकूल हो सकती हैं, जबकि कई सब्जियां और दलहनी फसलें लंबे समय तक पानी जमा रहने से प्रभावित हो सकती हैं।
ICAR की बिहार संबंधी आकस्मिक कृषि योजनाओं में लगातार अधिक बारिश और जलभराव की स्थिति के लिए फसल के अनुसार जल निकासी, दोबारा बुवाई, गैप फिलिंग और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक फसल जैसे उपाय सुझाए गए हैं।
इसलिए बारिश प्रभावित क्षेत्र में फसल लगाने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से उपयुक्त किस्म और फसल प्रणाली की जानकारी लेना समझदारी है।
बारिश के बाद तुरंत ज्यादा खाद न डालें
कई किसान बारिश के बाद पौधे कमजोर दिखाई देने पर तुरंत अधिक यूरिया या दूसरी खाद डालने लगते हैं। ऐसा करना हमेशा सही नहीं होता।
जलभराव के बाद सबसे पहले पानी की निकासी और पौधों की स्थिति को देखें। इसके बाद मिट्टी की स्थिति और फसल की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का प्रबंधन करें।
ICAR-MGIFRI ने किसानों को मृदा परीक्षण आधारित और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है तथा जरूरत के अनुसार जैविक खाद, हरी खाद और जैव उर्वरकों को भी कृषि प्रणाली में शामिल करने पर जोर दिया है।
जलभराव के बाद खेत में रोगों की निगरानी करें
बारिश और अधिक नमी के बाद खेत में कई प्रकार के रोग और कीट बढ़ सकते हैं। इसलिए किसान को रोजाना या नियमित अंतराल पर खेत का निरीक्षण करना चाहिए।
इन लक्षणों पर विशेष ध्यान दें:
- पत्तियों का अचानक पिला पढ़ना
- पौधों का मुरझाना
- तने या जड़ के पास सड़न
- पत्तियों पर असामान्य धब्बे
- पौधों की बढ़वार रुकना
- खेत के किसी हिस्से में लगातार पौधों का कमजोर होना
रोग या कीट की पहचान किए बिना किसी रसायन का अंधाधुंध इस्तेमाल न करें। सही रोग की पहचान के बाद ही कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उपचार करें।
ICAR की हालिया किसान गतिविधियों में भी नियमित निगरानी, समय पर कीट की पहचान और एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) पर जोर दिया गया है।
सब्जियों की फसल में जलभराव से कैसे बचाएं?
सब्जियों में जलभराव की समस्या और भी गंभीर हो सकती है, क्योंकि कई सब्जियों की जड़ें लंबे समय तक पानी में रहने को सहन नहीं कर पातीं।
सब्जी वाले खेत में उठी हुई क्यारियां, उचित दूरी पर नालियां और खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी पर ध्यान दें।
अगर लगातार बारिश के कारण फसल पूरी तरह खराब हो जाए तो उसी फसल में बार-बार निवेश करने के बजाय स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उपयुक्त वैकल्पिक फसल पर विचार किया जा सकता है।
ICAR की फसल आकस्मिकता योजनाओं में सब्जियों के लिए भी जल निकासी, जरूरत पड़ने पर दोबारा बुवाई और वैकल्पिक फसल जैसे उपायों का उल्लेख मिलता है।
बागवानी फसलों में जलभराव से बचाव
आम, लीची, पपीता और अन्य बागवानी फसलों में भी जलभराव चिंता का विषय हो सकता है। खासकर युवा पौधों के आसपास लंबे समय तक पानी जमा रहना नुकसानदायक हो सकता है।
पेड़ों के आसपास पानी जमा न रहने दें और उचित जल निकासी व्यवस्था बनाए रखें।
उत्तर बिहार जैसे बाढ़ और जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में ICAR-MGIFRI ने पपीते के बागों के लिए भी अच्छी जल निकासी बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया है।
खेत में पानी जमा हो जाए तो किसान क्या करें?
अगर अचानक तेज बारिश हो गई और खेत में पानी भर गया है तो घबराने के बजाय चरणबद्ध तरीके से काम करें।
पहला काम: खेत में पानी के आने और बाहर निकलने के रास्ते को देखें।
दूसरा काम: जहां संभव हो, सुरक्षित तरीके से अतिरिक्त पानी की निकासी करें।
तीसरा काम: देखें कि कौन-से हिस्से में पानी सबसे ज्यादा जमा है।
चौथा काम: पौधों की जड़ों, तने और पत्तियों की स्थिति देखें।
पांचवां काम: बारिश रुकने के बाद रोग और कीट की निगरानी शुरू करें।
छठा काम: खाद या दवा का प्रयोग बिना जरूरत और बिना पहचान के न करें।
सातवां काम: यदि फसल को गंभीर नुकसान हुआ है तो कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।
जलभराव बाली जमीन में किसान कौन-सी रणनीति अपनाएं?
अगर आपके खेत में हर साल पानी भरता है तो हर साल नुकसान होने का इंतजार करने के बजाय दीर्घकालीन जल प्रबंधन योजना बनाना बेहतर है।
इसके लिए खेत की ढलान, जल निकासी मार्ग, मिट्टी की प्रकृति और फसल प्रणाली का अध्ययन करें। जरूरत के अनुसार खेत की मेड़, नाली, भूमि समतलीकरण और उपयुक्त फसल प्रणाली अपनाई जा सकती है।
ICAR-MGIFRI, मोतिहारी ने जलभराव और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए फसल विविधीकरण, जल प्रबंधन, संसाधन संरक्षण तकनीक और एकीकृत कृषि प्रणाली जैसे उपायों पर भी जोर दिया है।
यानी केवल पानी निकालना ही समाधान नहीं है; पूरी खेती की योजना को पानी के हिसाब से तैयार करना ज्यादा टिकाऊ तरीका हो सकता है।
किसानों के लिए जरूरी सावधानियां
बारिश के मौसम में इन बातों को जरूर ध्यान में रखें:
- खेत में पानी जमा होने पर जल निकासी का रास्ता बंद न होने दें।
- खेत की नालियों में खरपतवार और मिट्टी जमा हो तो समय पर साफ करें।
- बिना मिट्टी और फसल की जरूरत समझे अधिक खाद का इस्तेमाल न करें।
- रोग या कीट दिखाई देने पर पहले उसकी सही पहचान करें।
- हर साल जलभराव वाले खेत में उपयुक्त फसल और किस्म का चयन करें।
- खेत की मेड़ को बारिश से पहले मजबूत रखें।
- बागवानी फसलों के आसपास पानी को लंबे समय तक जमा न रहने दें।
- गंभीर नुकसान होने पर स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।
पानी को दुश्मन नहीं, सही तरीके से प्रबंधित करें
बारिश खेती के लिए वरदान है, लेकिन अत्यधिक और लगातार बारिश के कारण खेत में पानी जमा हो जाए तो फसल की सेहत और किसान की कमाई दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए जलभराव की समस्या आने के बाद ही उपाय करने के बजाय बारिश से पहले जल निकासी की तैयारी करना ज्यादा बेहतर है।
अगर आप सोच रहे हैं कि faslon ko waterlogging se kaise bachaye, तो इसका सबसे महत्वपूर्ण जवाब है – सही जल निकासी, उचित भूमि प्रबंधन, उपयुक्त फसल का चयन और समय पर खेत की निगरानी।
ICAR के हालिया किसान कार्यक्रमों में भी जल निकासी, भूमि समतलीकरण, मजबूत मेड़, संतुलित पोषण और जल प्रबंधन को जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कृषि उपायों के रूप में रेखांकित किया गया है।
और हां किसान भाइयों, एक बात गांठ बांध ले – खेत में पानी का सही प्रबंधन होगा तो फसल भी मजबूत रहेगी और मेहनत का फल भी बेहतर मिलने की उम्मीद रहेगी।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. बारिश में फसलों को जलभराव से कैसे बचाएं?
बारिश में फसलों को जलभराव से बचाने के लिए उचित जल निकासी, खेत की सही ढलान, साफ नालियां और मजबूत मेड़ बनाए रखना जरूरी है। जलभराव वाले क्षेत्रों में उपयुक्त फसल का चुनाव भी महत्वपूर्ण है।
2. खेत में पानी जमा हो जाए तो सबसे पहले क्या करें?
सबसे पहले खेत से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें। इसके बाद फसल की जड़ों और पौधों की स्थिति देखें तथा रोग या कीट के लक्षणों की निगरानी करें।
3. क्या जलभराव से पौधे की जड़े खराब हो सकती है?
हां, लंबे समय तक पानी जमा रहने से मिट्टी में हवा की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है और जड़ों की सक्रियता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए लंबे समय तक पानी जमा रहने से बचाना जरूरी है।
4. क्या खेत में नाली बनाना जलभराव रोकने में मदद करता है?
हां, उचित स्थान पर बनाई गई नालियां अतिरिक्त पानी की निकासी में मदद कर सकती हैं। हालांकि नाली का आकार और दिशा खेत की स्थिति और पानी के प्राकृतिक बहाव के अनुसार तय करना चाहिए।
5. क्या बारिश के बाद तुरंत यूरिया डालना चाहिए?
जरूरी नहीं। बारिश और जलभराव के बाद पहले खेत की स्थिति और फसल की जरूरत का आकलन करें। संतुलित और आवश्यकता आधारित उर्वरक प्रबंधन अपनाना बेहतर है।
6. कौन-सी फसल जलभराव वाले खेत के लिए बेहतर है?
यह खेत की मिट्टी, जलभराव की अवधि, क्षेत्र और मौसम पर निर्भर करता है। इसलिए अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ से स्थानीय सलाह लेना सबसे उचित रहेगा।
7. सब्जियों को जलभराव से कैसे बचाएं?
सब्जियों के लिए उठी हुई क्यारियां, उचित जल निकासी और साफ नालियां उपयोगी हो सकती हैं। लबे समय तक पानी जमा होने से जड़ों को नुकसान का जोखिम बढ़ सकता है।
8. क्या जलभराव बाली जमीन में खेती बंद कर देना चाहिए?
नहीं। जलभराव वाली जमीन में खेती की योजना अलग तरीके से बनाई जा सकती है। उचित भूमि प्रबंधन, जल निकासी, फसल विविधीकरण और उपयुक्त फसल प्रणाली अपनाकर जोखिम कम किया जा सकता है।
9. बारिश के फसल में रोग क्यों बढ़ जाते हैं?
लगातार बारिश और अधिक नमी के कारण खेत का वातावरण कई रोगों के लिए अनुकूल हो सकता है। इसलिए बारिश के बाद नियमित खेत निरीक्षण और समय पर रोग की पहचान जरूरी है।
10. जलभराव से फसल पूरी तरह खराब हो जाए तो क्या करें?
अगर फसल गंभीर रूप से खराब हो गई है तो स्थिति के अनुसार दोबारा बुवाई या वैकल्पिक फसल पर विचार किया जा सकता है। इसके लिए स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। ICAR की आकस्मिक कृषि योजनाओं में भी गंभीर क्षति की स्थिति में वैकल्पिक फसल और पुनर्बुवाई जैसे उपाय बताए गए हैं।

