Expert Advice: उत्तर प्रदेश, बिहार समेत पूरे उत्तर भारत में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने आम के बागानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के पौध सुरक्षा विभाग के प्रमुख डॉ. एस. के. सिंह ने चेतावनी (Expert Advice) दी है कि सही प्रबंधन न होने पर 80 प्रतिशत तक पैदावार नष्ट हो सकती है। उन्होंने 30 दिनों का वैज्ञानिक इमरजेंसी स्प्रे शेड्यूल तैयार किया है जिसे अपनाकर बागवान 30 से 60 प्रतिशत तक फसल बचा सकते हैं।
मार्च का महीना आम के बागवानों के लिए वैसे तो उम्मीदों का मौसम होता है लेकिन इस बार बेमौसम बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि ने उनकी मुस्कान छीन ली है। उत्तर प्रदेश और बिहार के आम उत्पादक जिलों से लेकर उत्तर भारत के अन्य क्षेत्रों तक बागानों में भारी तबाही की खबरें आ रही हैं।
इस संकट की घड़ी में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा बिहार के पौध सुरक्षा विभाग के प्रमुख डॉ. एस. के. सिंह ने बागवानों को निराश न होने की सलाह (Expert Advice) दी है। उनका कहना है कि अगर सही समय पर सही वैज्ञानिक कदम उठाए जाएं तो इस आपदा के बावजूद फसल को काफी हद तक बचाया जा सकता है।
Expert Advice: आम की फसल इस समय किस नाजुक दौर से गुजर रही है
डॉ. एस. के. सिंह के अनुसार (Expert Advice) इस समय आम मंजर और टिकोले की अत्यंत नाजुक अवस्था में है। मंजर यानी बौर जिसमें फूल खिलते हैं और टिकोले यानी वे छोटे फल जो बौर के बाद बनते हैं, दोनों ही बेहद संवेदनशील होते हैं।
ओलों की मार से पेड़ों और मंजर पर बारीक जख्म हो जाते हैं जो फफूंदजनित बीमारियों के प्रवेश का रास्ता खोल देते हैं। बारिश के बाद बढ़ी नमी से परागण की प्रक्रिया भी बाधित होती है और मधुमक्खियों की गतिविधि कम हो जाने से फूल झड़ने लगते हैं। इन सब कारणों से एन्थ्रेक्नोज और पाउडरी मिल्ड्यू जैसी गंभीर बीमारियां पूरी फसल तबाह करने की स्थिति में आ जाती हैं।
Expert Advice: 30 दिन का इमरजेंसी स्प्रे शेड्यूल एक नजर में
डॉ. एस. के. सिंह द्वारा सुझाया गया (Expert Advice) यह शेड्यूल चरणबद्ध तरीके से काम करता है। हर चरण का अपना उद्देश्य और समय है।
| समय | उपाय | उद्देश्य |
|---|---|---|
| बारिश थमते ही 0 से 2 दिन | कार्बेंडाजिम और मैनकोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर या हेक्साकोनाजोल 1 मिली प्रति लीटर | ओलों के जख्मों पर सुरक्षा कवच |
| 4 से 5 दिन | पोटेशियम नाइट्रेट 13:0:45 का 0.5% और बोरॉन 0.1% घोल | परागण सुधार और फल सेट बेहतर करना |
| 10 से 12 दिन | एजोक्सिस्ट्रोबिन या ट्राइफ्लोक्सिस्ट्रोबिन और टेबुकोनाजोल | दूसरे संक्रमण से छोटे फलों की सुरक्षा |
| 15 से 18 दिन | प्लानोफिक्स या सीवीड एक्सट्रैक्ट | टिकोलों का झड़ना रोकना |
| 25वां दिन | प्रोपीकोनाजोल या टेबुकोनाजोल | अंतिम चरण के रोगों का सफाया |
Expert Advice: बारिश थमते ही पहले दो दिन में क्या करें
डॉ. सिंह के अनुसार (Expert Advice) बारिश रुकने के बाद पहले 48 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान बाग में नमी का स्तर इतना अधिक होता है कि फफूंदजनित रोग बिजली की रफ्तार से फैल सकते हैं।
जैसे ही बारिश थमे, कार्बेंडाजिम और मैनकोजेब का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर तुरंत छिड़काव करें। वैकल्पिक रूप से हेक्साकोनाजोल 1 मिली प्रति लीटर का उपयोग भी किया जा सकता है। डॉ. सिंह जोर देकर कहते हैं कि दवा में स्टिकर मिलाना जरूरी है ताकि घोल पत्तियों और फूलों पर अच्छी तरह चिपके और अधिक समय तक असरदार रहे।
Expert Advice: चौथे और पांचवें दिन पोषण स्प्रे क्यों जरूरी है
बारिश के बाद मधुमक्खियां कम उड़ती हैं जिससे परागण की प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है। इस कमजोरी को दूर करने के लिए चौथे से पांचवें दिन पोटेशियम नाइट्रेट और बोरॉन का छिड़काव करना चाहिए।
पोटेशियम नाइट्रेट 13:0:45 का 0.5 प्रतिशत घोल और बोरॉन का 0.1 प्रतिशत घोल मिलाकर स्प्रे करने से फूलों को मजबूती मिलती है। इससे पोलन ट्यूब यानी परागकण नलिका की वृद्धि तेज होती है और फल सेट होने की प्रक्रिया में सुधार आता है जो अंततः अधिक फल बनने में सहायक होता है।
टिकोलों को झड़ने से बचाने की सबसे असरदार तकनीक
बारिश के 15 से 18 दिन बाद एक बड़ी समस्या सामने आती है जब आम के छोटे टिकोले पेड़ से झड़ने लगते हैं। डॉ. सिंह के अनुसार इस अवस्था में प्लानोफिक्स या सीवीड एक्सट्रैक्ट का छिड़काव संजीवनी का काम करता है।
यह उपाय पौधों की तनाव सहने की क्षमता को बढ़ाता है और फलों के विकास को गति देता है। डॉ. सिंह यह भी सुझाव देते हैं कि इस अवधि में बाग में हल्की नमी बनाए रखें ताकि पेड़ों को लगातार पोषण मिलता रहे और फल पकड़ मजबूत बनी रहे।
Expert Advice: 25वें दिन का अंतिम सुरक्षा स्प्रे क्यों न चूकें
डॉ. सिंह के 30 दिन के शेड्यूल (Expert Advice) का अंतिम और बेहद जरूरी पड़ाव 25वें दिन आता है जब आम मार्बल स्टेज यानी कंचे के बराबर आकार में पहुंच जाते हैं। इस चरण में प्रोपीकोनाजोल या टेबुकोनाजोल का एक सुरक्षात्मक छिड़काव अंतिम चरण के रोगों को पूरी तरह खत्म कर देता है।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि दवाओं के साथ-साथ बाग की साफ-सफाई और जल निकासी पर विशेष ध्यान दें। जहां पानी रुका हो वहां नाली बनाकर निकासी की व्यवस्था करें। कीटों पर नियंत्रण के लिए हमेशा शाम के समय छिड़काव करें ताकि दिन में काम करने वाली मधुमक्खियां और अन्य मित्र कीट सुरक्षित रहें।
Expert Advice: आम की फसल बचाने से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बारिश के बाद सबसे पहले कौन सी दवा डालें? बारिश थमते ही दो दिन के भीतर कार्बेंडाजिम और मैनकोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर या हेक्साकोनाजोल 1 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
परागण प्रभावित होने पर क्या करें? बारिश के चौथे से पांचवें दिन पोटेशियम नाइट्रेट 13:0:45 का 0.5 प्रतिशत और बोरॉन 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें।
टिकोले झड़ने से कैसे रोकें? बारिश के 15 से 18 दिन बाद प्लानोफिक्स या सीवीड एक्सट्रैक्ट का छिड़काव करें और बाग में हल्की नमी बनाए रखें।
क्या इन उपायों से पूरी फसल बच सकती है? डॉ. सिंह के अनुसार समय पर और सही तरीके से उपाय करने पर 30 से 60 प्रतिशत तक फसल बचाई जा सकती है।
मधुमक्खियों को नुकसान पहुंचाए बिना कीट नियंत्रण कैसे करें? कीटनाशक का छिड़काव हमेशा शाम के समय करें जब मधुमक्खियां सक्रिय न हों।
Expert Advice: निष्कर्ष
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि निश्चित रूप से आम के बागवानों के लिए एक बड़ा झटका है लेकिन यह अंत नहीं है। डॉ. एस. के. सिंह का 30 दिन का वैज्ञानिक इमरजेंसी शेड्यूल एक स्पष्ट और व्यावहारिक रोडमैप देता है।
सही समय पर सही दवा का छिड़काव, संतुलित पोषण, बाग की साफ-सफाई और जल निकासी इन चार सूत्रों को अपनाकर बागवान इस आपदा के बावजूद अच्छी फसल ले सकते हैं। मायूस न हों, बल्कि अभी से कार्रवाई शुरू करें क्योंकि हर दिन की देरी नुकसान को बढ़ाती है।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर आधारित है। अपने क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु और फसल की स्थिति के अनुसार स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या कृषि विभाग से भी परामर्श अवश्य लें।
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