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Egg Expiry: अंडे की एक्सपायरी प्रिंट करने पर NECC ने कही ये बड़ी बात, जानें क्यू जरूरी है एग की एक्सपायरी डेट

Egg Expiry
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Egg Expiry: अंडे पर एक्सपायरी डेट प्रिंट करने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। 1 अप्रैल 2026 से इस नियम को सख्ती से लागू करने की बात कही गई थी, खासकर उत्तर प्रदेश में बाहर से आने वाले अंडों की चेकिंग शुरू होनी थी। लेकिन बिना किसी आधिकारिक बयान के चेकिंग अभी शुरू नहीं हुई है।

इससे पोल्ट्री फार्मर, अंडा व्यापारी और उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमिटी (NECC) के सीईओ अजीत सिंह ने किसान तक को दिए इंटरव्यू में इस मुद्दे पर विस्तार से अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि NECC पोल्ट्री फार्मर के हितों की रक्षा करता है, लेकिन सरकार को भी फार्मर, रिटेलर और उपभोक्ता तीनों के हितों को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए।

Egg Expiry: एक्सपायरी प्रिंटिंग का आदेश और उसकी पृष्ठभूमि

साल 2022 में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और उत्तर प्रदेश सरकार ने अंडों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था।

इस आदेश में अंडे बेचने वाले पोल्ट्री फार्मर और व्यापारियों को अंडे पर उसकी एक्सपायरी डेट, उत्पादन तिथि और अन्य जरूरी जानकारी प्रिंट करने का निर्देश दिया गया था।

उत्तर प्रदेश सरकार ने अंडों के स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और बिक्री से जुड़े नियम भी जारी किए थे। लेकिन चार साल बाद भी इस नियम का पूर्ण रूप से पालन नहीं हो पाया है।

1 अप्रैल 2026 से इसे सख्ती से लागू करने की तैयारी थी, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और चेकिंग भी शुरू नहीं हुई है।

Egg Expiry: NECC CEO अजीत सिंह का क्या कहना है

NECC के सीईओ अजीत सिंह ने स्पष्ट कहा कि अंडे पर एक्सपायरी (Egg Expiry) प्रिंट करने का आदेश पूरे देश में एक साथ लागू होना चाहिए।

अगर केवल एक-दो राज्यों में यह नियम लागू होता है तो सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने उदाहरण दिया कि अगर किसी राज्य में रोजाना 50 लाख अंडों का उत्पादन होता है लेकिन खपत 1.5 करोड़ अंडों की है, तो बाहर से अंडे लाने वाले व्यापारी क्यों जोखिम उठाएंगे।

ऐसे में अंडों की सप्लाई प्रभावित होगी और दाम बढ़ सकते हैं। अजीत सिंह ने जोर दिया कि सरकार को पोल्ट्री फार्मर के हितों का भी ख्याल रखना चाहिए।

Egg Expiry: प्रिंटिंग की लागत और फार्मर पर बोझ

अंडे पर एक्सपायरी (Egg Expiry) और अन्य जानकारी प्रिंट करने के लिए विशेष मशीनें लगानी होंगी।

इसके लिए पोल्ट्री फार्मर को काफी निवेश करना पड़ेगा। मशीन खरीदने के अलावा कर्मचारियों की जरूरत भी पड़ेगी।

सीईओ अजीत सिंह ने कहा कि बढ़ी हुई लागत को कौन वहन करेगा? अगर यह खर्च फार्मर पर डाला गया तो अंडे की कीमत बढ़ेगी, जिसका असर अंत में उपभोक्ता पर पड़ेगा।

NECC की मांग है कि सरकार इस नियम को लागू करने से पहले फार्मर, व्यापारी और उपभोक्ता तीनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखे।

Egg Expiry: डिमांड-सप्लाई के अंतर से बढ़ सकते हैं दाम

वर्तमान में कई राज्यों में अंडों की डिमांड उत्पादन (Egg Expiry) से ज्यादा है।

अगर केवल कुछ राज्यों में एक्सपायरी प्रिंटिंग अनिवार्य कर दी गई तो दूसरे राज्यों से अंडे लाने वाले व्यापारी प्रभावित होंगे।

इससे सप्लाई प्रभावित होगी और बाजार में अंडों के दाम बढ़ सकते हैं। अजीत सिंह ने कहा कि नियम पूरे देश में एक साथ लागू होने चाहिए ताकि कोई भी राज्य या फार्मर अलग-थलग न पड़े।

Egg Expiry: पोल्ट्री फार्मर के हित में NECC की भूमिका

NECC पोल्ट्री फार्मर के हितों की रक्षा के लिए लगातार काम कर रही है।

सीईओ अजीत सिंह ने कहा कि हम फार्मर के पक्ष में हैं लेकिन सरकार को भी फार्मर के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

अगर नियम लागू होते हैं तो फार्मर को अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ेगा। इसलिए सरकार को सब्सिडी या कोई सहायता प्रदान करनी चाहिए ताकि छोटे फार्मर पर बोझ न पड़े।

Egg Expiry: उपभोक्ताओं के लिए क्या मतलब

अंडे पर एक्सपायरी डेट प्रिंट (Egg Expiry) होने से उपभोक्ताओं को फायदा होगा क्योंकि उन्हें ताजा अंडे मिल सकेंगे।

लेकिन अगर दाम बढ़ते हैं तो आम उपभोक्ता प्रभावित होंगे। इसलिए सरकार को संतुलित नीति बनानी होगी जो फार्मर, व्यापारी और उपभोक्ता तीनों के हितों की रक्षा करे।

Egg Expiry: भविष्य में क्या हो सकता है?

NECC का मानना है कि अगर यह नियम पूरे देश में एक साथ लागू होता है तो पोल्ट्री उद्योग को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।

लेकिन अचानक लागू करने से सप्लाई चेन बिगड़ सकती है। इसलिए सरकार को फार्मरों के साथ चर्चा करके एक व्यावहारिक समयसीमा तय करनी चाहिए।

अजीत सिंह ने आशा जताई कि सरकार जल्द ही सभी पक्षों को साथ लेकर कोई ठोस फैसला लेगी।

Egg Expiry: निष्कर्ष

अंडे पर एक्सपायरी प्रिंट (Egg Expiry) करने का मुद्दा पोल्ट्री फार्मर और उपभोक्ताओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। NECC के सीईओ अजीत सिंह ने स्पष्ट किया कि नियम पूरे देश में एक साथ लागू होना चाहिए ताकि किसी भी पक्ष को नुकसान न हो।

प्रिंटिंग की लागत, सप्लाई चेन और दाम बढ़ने की आशंका को ध्यान में रखते हुए सरकार को संतुलित नीति बनानी चाहिए।

पोल्ट्री उद्योग देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए फार्मर के हितों की रक्षा करते हुए उपभोक्ताओं को भी ताजा और सस्ता अंडा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

अभी चेकिंग शुरू न होने से भ्रम की स्थिति है, लेकिन जल्द ही स्पष्टता आने की उम्मीद है।

डिस्क्लेमर: यह लेख NECC CEO के इंटरव्यू और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। नियम और नीतियां समय के साथ बदल सकती हैं। नवीनतम अपडेट के लिए FSSAI, NECC या संबंधित सरकारी विभाग से संपर्क करें। यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है।

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