सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और ACE लिमिटेड की बड़ी पहल, ट्रैक्टर व कृषि मशीनरी के लिए आसान लोन से किसानों को मिलेगी नई ताकत
नई दिल्ली से किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक खबर सामने आई है। देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और अग्रणी कृषि व निर्माण उपकरण निर्माता एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (ACE) लिमिटेड के बीच एक अहम समझौता हुआ है। इस मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का उद्देश्य किसानों, कृषि उद्यमियों और ग्रामीण ग्राहकों को ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी के लिए संगठित, सस्ता और आसान वित्त उपलब्ध कराना है।
यह साझेदारी ऐसे समय पर हुई है जब देश में कृषि यंत्रीकरण (Farm Mechanisation) की जरूरत तेजी से बढ़ रही है और छोटे व सीमांत किसान आधुनिक उपकरणों की कमी के कारण पीछे रह जाते हैं। इस करार के जरिए दोनों संस्थान मिलकर ग्रामीण भारत में क्रेडिट पहुंच, उत्पादकता और आय में बढ़ोतरी को नई दिशा देने का प्रयास करेंगे।
इस MoU पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ओर से डी. एस. राठौर, जनरल मैनेजर (ASBD) और ACE लिमिटेड की ओर से रविंद्र सिंह खनेजा, चीफ जनरल मैनेजर – एग्री डिवीजन ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर बैंक के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें एम. वी. मुरलीकृष्ण, कार्यकारी निदेशक, ई. रतन कुमार, कार्यकारी निदेशक, मुकुल डांडीगे, चीफ जनरल मैनेजर, वस्ती वेंकटेश, चीफ जनरल मैनेजर और पॉपी शर्मा, चीफ जनरल मैनेजर शामिल थे। वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति से यह स्पष्ट है कि यह करार बैंक और कृषि क्षेत्र दोनों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
इस समझौते का मूल फोकस किसानों को ट्रैक्टर लोन, फार्म इक्विपमेंट लोन, और अन्य आधुनिक कृषि मशीनों के लिए आसान शर्तों पर फाइनेंस उपलब्ध कराना है। अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण इलाकों में किसानों को असंगठित स्रोतों से महंगे ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो जाती है। इस नई साझेदारी के तहत संगठित बैंकिंग प्रणाली के जरिए किसानों को भरोसेमंद और पारदर्शी वित्त मिलेगा, जिससे वे आधुनिक उपकरणों में निवेश कर सकेंगे।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी न केवल खेती की लागत को नियंत्रित करती है बल्कि समय की भी बचत करती है। इससे बुआई, कटाई और सिंचाई जैसे कार्य अधिक कुशलता से पूरे होते हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और ACE लिमिटेड का यह कदम खेती की उत्पादकता बढ़ाने, उपज में सुधार और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में भी मददगार साबित हो सकता है।
इस साझेदारी से छोटे और सीमांत किसानों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जो अब तक पूंजी की कमी के कारण आधुनिक मशीनें नहीं खरीद पाते थे। इसके अलावा एग्री-एंटरप्रेन्योर, कस्टम हायरिंग सेंटर चलाने वाले किसान और ग्रामीण युवा भी इस योजना से लाभ उठा सकते हैं। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और कृषि से जुड़े सहायक व्यवसायों को भी मजबूती मिलेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव दूरगामी माना जा रहा है। जब किसानों को सही समय पर सस्ता कृषि ऋण मिलेगा, तो वे उत्पादन बढ़ा पाएंगे, जिससे बाजार में आपूर्ति सुधरेगी और आय में स्थिरता आएगी। इससे सस्टेनेबल फार्मिंग, बेहतर फसल प्रबंधन और पर्यावरण के अनुकूल खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बात करें तो इसकी स्थापना वर्ष 1911 में हुई थी और यह देश के सबसे पुराने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक है। बैंक की शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मजबूत मौजूदगी है। खास तौर पर कृषि और ग्रामीण वित्त में बैंक की भूमिका हमेशा अहम रही है। यह बैंक किसानों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को कई प्रकार की वित्तीय सेवाएं प्रदान करता है, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिलता है।
वहीं ACE लिमिटेड भारत की जानी-मानी कंपनी है, जो ट्रैक्टर, कृषि उपकरण और निर्माण मशीनरी के क्षेत्र में मजबूत पहचान रखती है। कंपनी के उत्पाद देश के विभिन्न राज्यों में किसानों और ठेकेदारों द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं। बैंक और ACE का यह गठजोड़ वित्त और तकनीक को एक मंच पर लाकर किसानों को सीधा लाभ पहुंचाने की कोशिश है।
इस पहल के साथ-साथ देश में डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म भी तेजी से उभर रहे हैं, जो किसानों को तेज और सरल प्रक्रिया के जरिए ट्रैक्टर और फार्म इक्विपमेंट लोन उपलब्ध करा रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में कृषि ऋण प्रणाली और अधिक पारदर्शी, तेज और किसान हितैषी बनने वाली है।
कुल मिलाकर, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और ACE लिमिटेड के बीच हुआ यह MoU भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है। इससे न केवल किसानों को आधुनिक साधनों तक पहुंच मिलेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और कृषि विकास को भी नई गति मिलेगी। यह साझेदारी आने वाले वर्षों में खेती को अधिक आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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